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Discuss India’s mineral development policy. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-1

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भारत की खनिज विकास नीति की व्याख्या कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction) –

खनिज संसाधन किसी भी देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास की आधारशिला होते हैं। भारत में खनिज क्षेत्र को संतुलित और सतत विकास की दिशा देने के लिए राष्ट्रीय खनिज नीति (National Mineral Policy) लागू की गई है। इस नीति का उद्देश्य खनिजों के कुशल दोहन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक हितों का समन्वय स्थापित करना है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • नीति का उद्देश्य: खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक, पारदर्शी और सतत उपयोग सुनिश्चित करना।
  • पहली नीति: भारत की पहली राष्ट्रीय खनिज नीति वर्ष 1993 में लागू की गई।
  • संशोधन: बदलते वैश्विक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए 2008 और 2019 में इसमें संशोधन किए गए।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: खनन में निजी निवेश और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को प्रोत्साहित किया गया।
  • सतत विकास: खनन के दौरान पर्यावरणीय संतुलन और पुनर्वास पर बल दिया गया।
  • पारदर्शिता: खनन पट्टों के आवंटन में ई-नीलामी जैसी पारदर्शी प्रक्रियाएँ लागू की गईं।
  • प्रौद्योगिकी नवाचार: खनन में आधुनिक तकनीक और स्वचालन (automation) के उपयोग को बढ़ावा दिया गया।
  • राजस्व साझा करना: स्थानीय समुदायों को खनिज लाभ का हिस्सा देने हेतु DMF (District Mineral Foundation) की स्थापना की गई।
  • पर्यावरणीय संरक्षण: खनन क्षेत्रों में वृक्षारोपण और भूमि पुनर्वास को अनिवार्य किया गया।
  • सामाजिक दायित्व: खनन कंपनियों को स्थानीय लोगों के पुनर्वास, शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान हेतु बाध्य किया गया।
  • खनिज सुरक्षा: दुर्लभ और सामरिक खनिजों की सुरक्षा व संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया।
  • आत्मनिर्भर भारत’ लक्ष्य: नीति का उद्देश्य भारत को खनिज उत्पादन और प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बनाना है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

भारत की खनिज विकास नीति आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय दायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है। यह नीति न केवल संसाधनों के कुशल दोहन को प्रोत्साहित करती है, बल्कि स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी बनती है।

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Write a short note on temperate cyclones. How it impacts India ? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-1

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शीतोष्ण चक्रवात पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए । यह भारत को कैसे प्रभावित करता है ?

Ans: प्रस्तावना (Introduction) –

शीतोष्ण चक्रवात (Temperate Cyclone) वे वायुमंडलीय तंत्र हैं जो 30° से 60° अक्षांशों के बीच शीतोष्ण क्षेत्रों में बनते हैं। इनका निर्माण ठंडी और गर्म वायु द्रव्यों के मिलन से होता है, जिससे वायुमंडल में अस्थिरता उत्पन्न होती है। इन्हें मध्य अक्षांशीय चक्रवात (Mid-latitude Cyclones) भी कहा जाता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • शीतोष्ण चक्रवात का निर्माण वायुमंडलीय मोर्चों (Fronts) पर होता है — जहाँ गर्म और ठंडी हवाएँ टकराती हैं।
  • इनका आकार विशाल होता है, जो हजारों किलोमीटर क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
  • इनकी गति उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तुलना में धीमी होती है।
  • यह पश्चिम से पूर्व दिशा में गतिमान रहते हैं।
  • इनमें वर्षा, हिमपात, और तीव्र हवाएँ होती हैं, जो तापमान में अचानक परिवर्तन लाती हैं।
  • इनका जीवनकाल सामान्यतः 3 से 10 दिन तक होता है।
  • भारत में ये मुख्यतः शीत ऋतु (Winter Season) में सक्रिय होते हैं।
  • भारत में इन्हें पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) कहा जाता है।
  • ये भूमध्यसागर से उत्पन्न होकर ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत तक पहुँचते हैं।
  • उत्तर-पश्चिमी भारत, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर प्रभावित होते हैं।
  • इनसे गेहूं, जौ जैसी रबी फसलों को लाभदायक वर्षा मिलती है।
  • परंतु कभी-कभी ये अत्यधिक वर्षा या ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान भी पहुँचाते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion) –

शीतोष्ण चक्रवात भारत के जलवायु तंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक हैं। ये जहाँ एक ओर रबी कृषि के लिए उपयोगी वर्षा लाते हैं, वहीं असमय वर्षा और ओलावृष्टि से कृषि को नुकसान भी पहुँचा सकते हैं।

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Discuss the relationship between El Nino and south-east monsoon in India and its impact on agriculture. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-1

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भारत में एल नीनो और दक्षिण-पश्चिम मानसून के बीच संबंधों की व्याख्या कीजिए और उसके कृषि पर प्रभाव बताइए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction) –

एल-नीनो (El Niño) प्रशांत महासागर में उत्पन्न होने वाली एक जलवायु घटना है, जिसमें समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका सीधा प्रभाव विश्व के विभिन्न भागों, विशेषकर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) पर पड़ता है। भारत में मानसून की स्थिति कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित करती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • एल-नीनो का अर्थ: स्पेनिश शब्द “El Niño” का अर्थ है “बालक यीशु”, जो प्रशांत महासागर के पूर्वी भाग में गर्म जलधारा की उपस्थिति को दर्शाता है।
  • प्रभाव का क्षेत्र: एल-नीनो के कारण वैश्विक स्तर पर तापमान और वर्षा के पैटर्न बदल जाते हैं।
  • भारत पर प्रभाव: यह घटना भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून की कमजोरी और वर्षा की कमी से जुड़ी होती है।
  • दक्षिण-पश्चिम मानसून का महत्व: भारत में कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 75% हिस्सा इसी मानसून से प्राप्त होता है।
  • एल-नीनो और मानसून संबंध: एल-नीनो के वर्षों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाएँ कमजोर पड़ती हैं, जिससे वर्षा कम होती है।
  • ला-नीना विपरीत प्रभाव: ला-नीना स्थिति में समुद्र का तापमान सामान्य से कम होता है, जिससे मानसून प्रबल होता है।
  • सूखा की संभावना: एल-नीनो के कारण भारत में सूखा या अल्पवृष्टि की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  • कृषि उत्पादन पर असर: वर्षा की कमी से धान, कपास, गन्ना जैसी वर्षा-निर्भर फसलें प्रभावित होती हैं।
  • भोजन सुरक्षा पर प्रभाव: कृषि उत्पादन घटने से खाद्य संकट और मूल्यवृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।
  • सिंचाई पर निर्भरता: किसान वर्षा की कमी की भरपाई के लिए सिंचाई स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं।
  • सरकारी नीतियाँ: सरकार को राहत पैकेज, बीमा योजनाएँ और जल प्रबंधन रणनीतियाँ अपनानी पड़ती हैं।
  • दीर्घकालिक प्रभाव: बार-बार होने वाली एल-नीनो घटनाएँ जलवायु परिवर्तन और कृषि अस्थिरता को बढ़ाती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion) –

एल-नीनो और दक्षिण-पश्चिम मानसून के बीच गहरा नकारात्मक संबंध है। यह भारत की वर्षा आधारित कृषि व्यवस्था को प्रभावित कर न केवल किसानों की आजीविका, बल्कि संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर भी असर डालता है।

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Discuss the causes and consequences of internal human migration in India. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-1

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भारत में आन्तरिक मानव प्रवास के कारणों एवं परिणामों की व्याख्या कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction) –

आंतरिक मानव प्रवास (Internal Migration) का अर्थ है — लोगों का एक ही देश के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण। भारत में यह प्रवास सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक और पर्यावरणीय कारणों से प्रेरित है। यह प्रक्रिया विकास की आवश्यकता को दर्शाती है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम भी गहरे हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • रोज़गार के अवसर: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कमी लोगों को शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों की ओर आकर्षित करती है।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य: बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पाने की इच्छा प्रवास का प्रमुख कारण है।
  • कृषि संकट: कृषि में घटती आय, सूखा और भूमि की कमी ग्रामीणों को अन्यत्र जाने को विवश करती है।
  • औद्योगिकीकरण और नगरीकरण: उद्योगों और महानगरों का विकास रोजगार की नई संभावनाएँ पैदा करता है।
  • परिवारिक और सामाजिक कारण: विवाह, परिवार पुनर्मिलन या रिश्तेदारों के साथ रहने की चाह भी प्रवास को बढ़ाती है।
  • प्राकृतिक आपदाएँ: बाढ़, सूखा, भूकंप आदि लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर करते हैं।
  • राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा: असुरक्षा या जातीय हिंसा भी प्रवास का एक कारक बनती है।
  • आर्थिक परिणाम: प्रवासी मजदूर देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देते हैं, परंतु असंगठित श्रम का शोषण भी बढ़ता है।
  • सामाजिक परिणाम: ग्रामीण परिवारों में बुजुर्गों और महिलाओं पर कार्यभार बढ़ता है।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: प्रवास से विभिन्न संस्कृतियों का मेल होता है, जिससे सांस्कृतिक विविधता बढ़ती है।
  • शहरी समस्याएँ: आवास संकट, भीड़भाड़, बेरोजगारी और झुग्गी-बस्तियों की समस्या बढ़ती है।
  • ग्रामीण विकास पर प्रभाव: प्रवास के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी होती है, जिससे कृषि प्रभावित होती है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

भारत में आंतरिक प्रवास विकास का एक स्वाभाविक परिणाम है, जो अवसर और चुनौती दोनों प्रदान करता है। यदि सरकार इसे योजनाबद्ध ढंग से प्रबंधित करे, तो यह राष्ट्रीय एकता और आर्थिक संतुलन का माध्यम बन सकता है।

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The process of urbanization leads to development or devastation in the society. Write your views. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-1

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शहरीकरण की प्रक्रिया समाज के लिए विकास या विनाश है । अपना मत लिखिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction) –

शहरीकरण (Urbanization) वह प्रक्रिया है जिसमें जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों की ओर स्थानांतरित होती है। यह आधुनिकता, उद्योग, और तकनीकी विकास का प्रतीक माना जाता है। किन्तु तीव्र एवं अनियोजित शहरीकरण के कारण इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव समाज पर देखे जाते हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • विकास का प्रतीक: शहरीकरण ने उद्योग, व्यापार, रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ाए।
  • आधुनिक सुविधाएँ: परिवहन, स्वास्थ्य, संचार और तकनीकी सुविधाओं का विस्तार हुआ।
  • सांस्कृतिक विविधता: शहरों में विभिन्न संस्कृतियों के मेल से सामाजिक समरसता बढ़ी।
  • नवाचार और तकनीकी प्रगति: शहरी वातावरण ने नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया।
  • जीवन स्तर में सुधार: बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनशैली ने सामाजिक प्रगति को बल दिया।
  • पर्यावरणीय क्षरण: अनियंत्रित शहरीकरण से प्रदूषण, जल संकट और हरियाली में कमी आई।
  • झुग्गी-बस्तियों की समस्या: ग्रामीण पलायन से आवासीय संकट और असमानता बढ़ी।
  • सामाजिक असमानता: गरीब और अमीर के बीच आर्थिक दूरी बढ़ी।
  • अपराध और तनाव: बेरोज़गारी, प्रतिस्पर्धा और भीड़ के कारण मानसिक तनाव व अपराध बढ़े।
  • ग्रामीण संस्कृति का क्षय: पारंपरिक मूल्यों और सामुदायिक भावना में कमी आई।
  • अवसंरचना पर दबाव: यातायात, स्वच्छता और सार्वजनिक सेवाओं पर अत्यधिक भार पड़ा।
  • संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता: योजनाबद्ध शहरीकरण से विकास को टिकाऊ बनाया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

शहरीकरण न तो पूर्णतः विकास है, न ही विनाश—यह दोनों का मिश्रण है। यदि इसे संतुलित और योजनाबद्ध रूप से अपनाया जाए, तो यह समाज के सर्वांगीण विकास का माध्यम बन सकता है।

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Evaluate the role of woman organisations in woman empowerment. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-1

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महिला सशक्तीकरण में महिला संगठनों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction) –

महिला सशक्तिकरण किसी भी समाज की प्रगति का आधार है। भारत में महिलाओं की स्थिति सुधारने में महिला संगठनों (Women Organizations) ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन संगठनों ने महिलाओं को शिक्षा, अधिकार, आत्मनिर्भरता और राजनीतिक भागीदारी के प्रति जागरूक किया।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • जागरूकता फैलाना: महिला संगठनों ने समाज में महिलाओं के अधिकारों, समानता और स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता फैलाई।
  • शिक्षा का प्रसार: उन्होंने महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता का मार्ग खोला।
  • राजनीतिक भागीदारी: संगठनों ने महिलाओं को राजनीति में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया।
  • कानूनी सहायता: महिला आयोगों व एनजीओ ने घरेलू हिंसा, दहेज, बाल विवाह आदि के खिलाफ कानूनी मदद प्रदान की।
  • आर्थिक सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) ने महिलाओं को रोजगार और वित्तीय स्वतंत्रता दिलाई।
  • सामाजिक सुधार: संगठनों ने लैंगिक भेदभाव, अशिक्षा और रूढ़िवाद के विरुद्ध संघर्ष किया।
  • स्वास्थ्य और पोषण: ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियानों का संचालन किया गया।
  • नेतृत्व क्षमता: महिला संगठनों ने महिलाओं में निर्णय लेने और नेतृत्व की भावना विकसित की।
  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज़: इन संगठनों ने महिलाओं की समस्याओं को नीति-निर्माण स्तर तक पहुँचाया।
  • महिला आयोगों की स्थापना: राष्ट्रीय महिला आयोग (1992) जैसे संस्थान महिला हितों की रक्षा में सक्रिय हैं।
  • समान अवसर की मांग: वेतन, शिक्षा, और कार्यस्थलों पर समान अवसर के लिए आंदोलनों का नेतृत्व किया।
  • डिजिटल सशक्तिकरण: आधुनिक समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिला अधिकारों के लिए अभियान चलाए गए।

निष्कर्ष (Conclusion) –

महिला संगठन समाज में लैंगिक समानता और न्याय के सशक्त वाहक बने हैं। इनके प्रयासों से महिलाओं ने अपनी पहचान, सम्मान और अधिकारों के प्रति नई चेतना प्राप्त की है, जो सशक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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How did Indian culture affect the world during Corona pandemic period ? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-1

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कोरोना महामारी काल में भारतीय संस्कृति ने विश्व को किस प्रकार से प्रभावित किया ?

Ans: प्रस्तावना (Introduction) –

कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को सामाजिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से प्रभावित किया। इस कठिन समय में भारतीय संस्कृति के मूल तत्व—संयम, योग, आयुर्वेद और मानवता के भाव—ने विश्व को नई दिशा दी। भारत ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सिद्धांत से वैश्विक एकता और सहयोग का संदेश दिया।

मुख्य बिंदु (Main Points):

योग और ध्यान (Yoga & Meditation): भारत से उत्पन्न योग ने तनाव और चिंता से जूझ रही मानवता को मानसिक शांति का साधन दिया।

आयुर्वेद और घरेलू नुस्खे: हल्दी, काढ़ा, तुलसी, गिलोय जैसे उपायों ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में विश्व का ध्यान खींचा।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण: भारतीय दर्शन ने जीवन को आशा और सकारात्मकता से देखने की प्रेरणा दी।

सामूहिक प्रार्थना व ध्यान: विश्वभर में भारतीय शैली की सामूहिक प्रार्थनाएँ और ध्यान शिविर आयोजित हुए।

अहिंसा और करुणा की भावना: भारत की मानवीय संवेदनशीलता ने दूसरों की सहायता के भाव को प्रोत्साहित किया।

 ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश: भारत ने टीकाकरण और औषधि सहायता द्वारा विश्व परिवार की भावना को साकार किया।

आत्मनिर्भरता का विचार:‘आत्मनिर्भर भारत’ का संदेश कई देशों में स्वावलंबन की प्रेरणा बना।

भारतीय परंपराएँ: ‘नमस्ते’ जैसी अभिवादन पद्धति ने स्पर्शरहित सम्मान का उदाहरण दिया।

भारतीय साहित्य और संगीत: महामारी काल में लोगों ने भारतीय शांति-संदेशों और भजनों से मानसिक राहत पाई।

सामाजिक सहयोग: भारतीय संस्कृति ने सेवा, दान और परस्पर सहायता को बढ़ावा दिया।

संतुलित जीवनशैली: सादा जीवन और संयम के भारतीय सिद्धांत ने स्वास्थ्य संरक्षण का मार्ग दिखाया।

वैश्विक नेतृत्व: भारत ने वैक्सीन मैत्री पहल द्वारा वैश्विक सहयोग में अग्रणी भूमिका निभाई।

निष्कर्ष (Conclusion) –

कोरोना काल में भारतीय संस्कृति ने विश्व को मानवता, आशा और स्वास्थ्य संतुलन का पाठ सिखाया। इसने सिद्ध किया कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा केवल प्राचीन नहीं, बल्कि आज भी विश्वकल्याण की दिशा दिखाने में सक्षम है।

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Evaluate the role of Bismarck in the unification of Germany. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-1

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जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction) –

उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोप में जर्मनी का एकीकरण एक ऐतिहासिक घटना थी। इस एकीकरण के केंद्र में प्रशा के प्रधानमंत्री ओट्टो वॉन बिस्मार्क थे, जिन्हें “Iron Chancellor” कहा जाता है। उन्होंने कूटनीति, युद्ध और राष्ट्रवाद को साधन बनाकर जर्मनी को एक शक्तिशाली साम्राज्य में परिवर्तित किया।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • बिस्मार्क ने “रक्त और लौह (Blood and Iron)” की नीति अपनाकर एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया।
  • उनका उद्देश्य था — प्रशा के नेतृत्व में छोटे जर्मन राज्यों का एकीकरण।
  • उन्होंने उदारवादी और लोकतांत्रिक विचारों की बजाय सैन्य शक्ति और व्यवहारिक राजनीति (Realpolitik) को प्राथमिकता दी।
  • डेनमार्क, ऑस्ट्रिया और फ्रांस के विरुद्ध तीन युद्धों की रणनीति बनाई।
  • 1864 में डेनमार्क युद्ध द्वारा श्लेस्विक-होल्स्टीन क्षेत्र पर नियंत्रण पाया।
  • 1866 के ऑस्ट्रो-प्रशियन युद्ध में प्रशा की विजय से उत्तरी जर्मन संघ का निर्माण हुआ।
  • 1870–71 के फ्रांको-प्रशियन युद्ध ने जर्मन राज्यों को एकता के सूत्र में बाँध दिया।
  • युद्धों के साथ-साथ बिस्मार्क ने कुशल कूटनीति और गठबंधन नीति अपनाई।
  • उन्होंने सम्राट विलियम प्रथम को एकीकृत जर्मनी का सम्राट घोषित कराया।
  • बिस्मार्क ने राष्ट्रवाद को राजनैतिक साधन के रूप में उपयोग किया, न कि जनभावना के रूप में।
  • उन्होंने जर्मनी को सैन्य, औद्योगिक और राजनैतिक शक्ति के रूप में उभारा।
  • उनका नेतृत्व जर्मनी को यूरोप की प्रमुख शक्ति बनाने में निर्णायक सिद्ध हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion) –

बिस्मार्क का योगदान जर्मनी के एकीकरण में केंद्रीय और निर्णायक था। उनकी व्यावहारिक सोच, सैन्य रणनीति और कूटनीति ने आधुनिक जर्मनी की नींव रखी और यूरोपीय राजनीति की दिशा बदल दी।

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Underline ideological dimensions of the uprising of 1857. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-1

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1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वैचारिक आयामों को रेखांकित कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction) –

1857 का स्वतंत्रता संग्राम केवल एक सैनिक विद्रोह नहीं था, बल्कि भारत के स्वतंत्र अस्तित्व की चेतना का प्रथम संगठित प्रदर्शन था। इसमें धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक असंतोष का समावेश था। यह विद्रोह भारतीय एकता, सम्मान और स्वतंत्रता की भावना से प्रेरित था।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • इसे “भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम” कहा जाता है क्योंकि इसमें स्वतंत्रता की वैचारिक चेतना निहित थी।
  • भारतीय सैनिकों और जनता में विदेशी शासन के विरुद्ध राष्ट्रीय अस्मिता (National Identity) की भावना जागृत हुई।
  • विद्रोह में धर्म की रक्षा का विचार प्रमुख था — अंग्रेजों की धार्मिक हस्तक्षेप नीति के विरुद्ध।
  • सामाजिक रूप से यह भारतीय परंपराओं और संस्कृति के पुनर्जागरण की प्रेरणा था।
  • राजनीतिक स्तर पर यह विदेशी शासन को समाप्त करने और देशी राजसत्ता की पुनर्स्थापना का प्रयास था।
  • आर्थिक दृष्टि से यह औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध प्रतिक्रिया थी।
  • विद्रोहियों ने “देश की आज़ादी” के लिए राजनीतिक एकता की भावना को जन्म दिया।
  • नेतृत्व में हिन्दू-मुस्लिम एकता की झलक दिखाई दी – जैसे बहादुरशाह ज़फर का प्रतीकात्मक नेतृत्व।
  • प्रचार में देशभक्ति और स्वाधीनता के लोकप्रिय नारे व गीत शामिल थे।
  • यह विद्रोह औपनिवेशिक अन्याय और अपमान के विरुद्ध सामूहिक विद्रोह का स्वर था।
  • विद्रोह ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन की वैचारिक नींव रखी।
  • आगे चलकर इसने भारतीयों में राजनीतिक चेतना और संगठन की भावना को जन्म दिया।

निष्कर्ष (Conclusion) – 1857 का संग्राम स्वतंत्रता के वैचारिक बीज बोने वाला ऐतिहासिक मोड़ था। इसने भारत में राष्ट्रीय चेतना की नींव रखकर स्वतंत्रता आंदोलन के नए युग की शुरुआत की।

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Describe the architectural features of the temples of Nagar style. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-1

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नागर शैली के मंदिरों की वास्तुकला विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction) –

नागर शैली भारत की प्रमुख मंदिर स्थापत्य शैलियों में से एक है, जो उत्तर भारत में विकसित हुई। यह शैली अपनी ऊँची शिखरों, गर्भगृह की प्रमुखता और कलात्मक अलंकरण के लिए प्रसिद्ध है। गुप्त काल से प्रारंभ होकर यह शैली मध्यकालीन मंदिर निर्माण की पहचान बन गई।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • इसका विकास मुख्यतः उत्तर भारत में हुआ, विशेषकर मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में।
  • मंदिर का मुख्य भाग गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) होता है, जहाँ देवी-देवता की मूर्ति स्थापित रहती है।
  • गर्भगृह के ऊपर ऊँचा शिखर (Tower) होता है जो सीधा एवं वक्राकार होता है।
  • शिखर का शीर्ष भाग आमलक (Amla) और कलश (Finial) से अलंकृत होता है।
  • प्रवेश द्वार पर अत्यंत सजावटी तोरणद्वार (Gateway) निर्मित होते हैं।
  • मंदिर का बाह्य भाग अत्यधिक मूर्तिकला और उत्कीर्णन से सुसज्जित रहता है।
  • मंडप (सभागृह) में स्तंभों का सुंदर उपयोग किया जाता है।
  • दीवारें ऊर्ध्वाधर रूप में बनी होती हैं, जिससे ऊँचाई का आभास होता है।
  • यह शैली पत्थर पर आधारित होती है और गुम्बदों का प्रयोग नहीं होता।
  • मंदिर सामान्यतः ऊँचे जगती (Platform) पर बनाए जाते हैं।
  • मंदिर की योजना प्रायः पंचरथ या सप्त रथ रूप में होती है।
  • प्रमुख उदाहरण: कैलाशनाथ मंदिर (कांचीपुरम), लिंगराज मंदिर (भुवनेश्वर), खजुराहो के मंदिर आदि।

निष्कर्ष (Conclusion) –

नागर शैली भारतीय स्थापत्य कला की उत्कृष्ट परंपरा को दर्शाती है। यह न केवल धार्मिक भावना का प्रतीक है, बल्कि भारत की कलात्मक एवं सांस्कृतिक गौरव की धरोहर भी है।

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