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Discuss the characteristics, causes and effects of Tsunami with example. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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सुनामी की विशेषताओं, कारणों एवं प्रभावों का सोदाहरण विवेचन प्रस्तुत कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

सुनामी समुद्र की गहराइयों में उत्पन्न होने वाली तीव्र ऊर्जा का परिणाम होती है, जो विशाल तरंगों के रूप में तटों की ओर बढ़ती है। यह प्राकृतिक आपदा अचानक और व्यापक विनाश करने की क्षमता रखती है। इसके कारण और प्रभाव भौगोलिक, भूवैज्ञानिक तथा मानवीय पहलुओं से गहराई से जुड़े होते हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points) :

  • समुद्र तल में अचानक ऊर्जा विस्फोट—जैसे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, भू-स्खलन आदि—सुनामी का प्रमुख कारण होता है।
  • अधिकांश सुनामी समुद्र के नीचे आने वाले टेक्टॉनिक भूकंपों से उत्पन्न होती हैं।
  • समुद्र में उठने वाली तरंगों की गति 700–800 किमी/घंटा तक पहुँच सकती है।
  • गहरे समुद्र में तरंगों की ऊँचाई कम होती है, जिससे वे दिखाई नहीं देतीं।
  • तटीय क्षेत्रों के पास पहुँचने पर जल की गहराई कम होने से तरंगों की ऊँचाई अचानक कई मीटर तक बढ़ जाती है।
  • सुनामी की तरंगें एकल नहीं होतीं; वे कई तरंगों की श्रृंखला के रूप में आती हैं।
  • सुनामी तट पर पहुंचकर बड़े पैमाने पर जन-हानि और संपत्ति क्षति का कारण बनती है।
  • तटीय पारिस्थितिकी तंत्र—जैसे मैंग्रोव, कोरल रीफ और समुद्री जैव विविधता—पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।
  • पेयजल स्रोतों में खारे पानी के मिल जाने से जल-उपलब्धता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
  • सड़क, बंदरगाह, पुल, विद्युत और संचार जैसी आधारभूत संरचनाएँ व्यापक रूप से नष्ट हो जाती हैं।
  • सुनामी के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ—जैसे पानी से फैलने वाली बीमारियाँ—बढ़ने का खतरा रहता है।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, तटीय सुरक्षा संरचनाएँ और सामुदायिक जागरूकता से इसके प्रभावों को कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष : सुनामी एक जटिल प्राकृतिक घटना है जिसका प्रभाव मानव जीवन, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ता है। समुचित तैयारी, वैज्ञानिक समझ और चेतावनी तंत्र ही इसके विनाशकारी प्रभावों को न्यूनतम कर सकते हैं।

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Biodiversity conservation of forest and water bodies in India is essential to maintain ecological balance. Elucidate in detail. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारत में वनों एवं जल स्रोतों के जैविक विविधता का संरक्षण पारिस्थितिक सन्तुलन बनाये रखने के लिए आवश्यक है । विस्तार से स्पष्ट कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

भारत अपनी भौगोलिक स्थिति और जलवायु विविधता के कारण विश्व के जैव विविधता (Biodiversity) हॉटस्पॉट्स में से एक है। यहाँ के वन और जल स्रोत अनेक प्रकार के जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का घर हैं। इनका संरक्षण न केवल प्रकृति के लिए, बल्कि पारिस्थितिक सन्तुलन (Ecological Balance) बनाये रखने के लिए भी अत्यावश्यक है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • वनों की जैविक विविधता का महत्व:
  • ऑक्सीन उत्पादन और कार्बन अवशोषण: वन वातावरण में ऑक्सीजन बढ़ाते औरकार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करते हैं।
  • मृदा संरक्षण: वृक्षों की जड़ें मिट्टी के कटाव को रोककर भूमि की उर्वरता बनाए रखती हैं।
  • जल चक्र का संतुलन: वन वर्षा को आकर्षित करते और भूजल स्तर को बनाए रखते हैं।
  • वन्यजीवों का आवास: जैविक विविधता से युक्त वन अनेक जीव प्रजातियों के अस्तित्व को सुरक्षित रखते हैं।
  • औषधीय पौधों का स्रोत: अनेक औषधियाँ वनों से प्राप्त वनस्पतियों पर आधारित होती हैं।
  • जलवायु नियंत्रण: वन तापमान और नमी को नियंत्रित कर जलवायु को संतुलित रखते हैं।
  • जल स्रोतों की जैव विविधता का महत्व:
  • जलचर जीवन का संरक्षण: नदियाँ, झीलें और समुद्र अनेक मछलियों, शैवालों और सूक्ष्म जीवों का घर हैं।
  • प्राकृतिक शुद्धिकरण प्रणाली: जल स्रोत प्रदूषकों को फ़िल्टर कर जल की गुणवत्ता बनाए रखते हैं।
  • खाद्य सुरक्षा: मत्स्य पालन से पोषण और आजीविका दोनों को बल मिलता है।
  • पर्यावरणीय स्थिरता: जल निकाय सूखे और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में सहायक होते हैं।
  • पारिस्थितिक अन्तर्सम्बन्ध: वन और जल स्रोत मिलकर सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं।
  • मानव जीवन पर प्रभाव: जैविक विविधता का ह्रास मानव स्वास्थ्य, कृषि और जलवायु पर प्रतिकूल असर डालता है।

निष्कर्ष (Conclusion) – अनिवार्य है। यदि हम इन प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करें, तो सतत विकास और मानव अस्तित्व दोनों सुरक्षित रहेंगे।

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Throw light on the concept of smart village in India and describe the main features of smart village. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारत में स्मार्ट ग्राम की अवधारणा पर प्रकाश डालिए तथा स्मार्ट ग्राम की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

भारत में स्मार्ट सिटी (Smart City) की अवधारणा आधुनिक तकनीक, सुशासन और सतत विकास पर आधारित है। इसका उद्देश्य शहरी जीवन को अधिक सुविधाजनक, स्वच्छ, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। इसी सोच का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्मार्ट ग्राम (Smart Village) के रूप में किया गया है, ताकि विकास का लाभ गाँवों तक पहुँचे।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • स्मार्ट सिटी की अवधारणा:
  • आरम्भ: 2015 में भारत सरकार ने Smart Cities Mission की शुरुआत की।
  • उद्देश्य: आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
  • ई-गवर्नेंस: डिजिटल तकनीक से पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन।
  • स्मार्ट ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट: सेंसर आधारित ट्रैफिक प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन का डिजिटलीकरण।
  • सतत ऊर्जा उपयोग: सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और हरित भवनों का प्रोत्साहन।
  • कचरा प्रबंधन और स्वच्छता: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था।
  • स्मार्ट ग्राम की प्रमुख विशेषताएँ:
  • डिजिटल कनेक्टिविटी: इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं से जुड़ा सशक्त ग्रामीण नेटवर्क।
  • ई-शिक्षा और ई-स्वास्थ्य: ऑनलाइन शिक्षा और टेलीमेडिसिन सेवाओं की सुविधा।
  • सौर ऊर्जा और हरित तकनीक: पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोतों का उपयोग।
  • स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता: सुरक्षित जल और शौचालय की सार्वभौमिक उपलब्धता।
  • सामुदायिक सहभागिता: ग्राम स्तर पर निर्णय-निर्माण में जनता की सक्रिय भागीदारी।
  • आर्थिक सशक्तिकरण: कृषि में तकनीकी सुधार, लघु उद्योगों और डिजिटल मार्केटिंग को बढ़ावा।

निष्कर्ष (Conclusion):

स्मार्ट सिटी और स्मार्ट ग्राम की अवधारणा भारत को समावेशी और तकनीकी रूप से सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में कदम है। जब शहरों और गाँवों दोनों में समान रूप से आधुनिक सुविधाएँ विकसित होंगी, तभी समग्र विकास और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य पूरा होगा।

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‘Population explosion is a serious challenge to India’s holistic development.’ – Examine the statement. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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‘जनसंख्या विस्फोट भारत के सम्यक विकास में एक गम्भीर चुनौती है ।’ – कथन की समीक्षा कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

भारत विश्व की सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में से एक है। तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या ने देश के संसाधनों, रोजगार और विकास नीतियों पर भारी दबाव डाला है। यही कारण है कि जनसंख्या विस्फोट (Population Explosion) भारत के सम्यक एवं सतत विकास के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • जनसंख्या विस्फोट के कारण:
  • जन्म दर अधिक होना: शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण जनसंख्या नियंत्रण प्रभावी नहीं हो पाया।
  • मृत्यु दर में कमी: चिकित्सा सुविधाओं और स्वच्छता में सुधार से मृत्यु दर घटी, पर जन्म दर नहीं घटी।
  • गरीबी और अशिक्षा: गरीब परिवार अधिक बच्चों को आर्थिक सहारा मानते हैं।
  • बाल विवाह और सामाजिक परम्पराएँ: जल्दी विवाह से प्रजनन दर बढ़ जाती है।
  • परिवार नियोजन की असफलता: ग्रामीण और अशिक्षित वर्गों में परिवार नियोजन की स्वीकृति कम है।
  • जनसंख्या विस्फोट के परिणाम:
  • बेरोजगारी में वृद्धि: सीमित रोजगार अवसरों के कारण युवा वर्ग में असंतोष बढ़ता है।
  • संसाधनों पर दबाव: भूमि, जल, ऊर्जा और खाद्य संसाधनों की कमी उत्पन्न होती है।
  • गरीबी और असमानता: जनसंख्या बढ़ने से प्रति व्यक्ति आय घटती है और असमानता बढ़ती है।
  • शहरी भीड़भाड़: महानगरों में झुग्गियाँ, प्रदूषण और यातायात की समस्या बढ़ती है।
  • शिक्षा व स्वास्थ्य पर बोझ: सरकारी संसाधन सभी तक गुणवत्तापूर्ण सेवा नहीं पहुँचा पाते।
  • पर्यावरणीय संकट: वनों की कटाई, भूमि ह्रास और प्रदूषण जैसी समस्याएँ गहरी होती हैं।
  • विकास योजनाओं में बाधा: जनसंख्या की तेज़ वृद्धि से योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाता।

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार जनसंख्या विस्फोट भारत के संतुलित और समावेशी विकास के मार्ग में सबसे बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, और जनसंख्या नियंत्रण नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।

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How is the growing regionalism in India affecting the economy and polity? Explain. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारत में बढ़ता हुआ क्षेत्रवाद किस प्रकार से अर्थव्यवस्था तथा राज्यव्यवस्था को प्रभावित कर रही है ? स्पष्ट कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction ):

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में क्षेत्रवाद (Regionalism) स्वाभाविक रूप से उभरने वाली प्रवृत्ति है। यह क्षेत्रीय पहचान, भाषा, संस्कृति या आर्थिक असमानता के कारण पैदा होता है। परंतु जब यह अति रूप ले लेता है, तो यह देश की अर्थव्यवस्था और राज्यव्यवस्था दोनों को प्रभावित करता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • क्षेत्रवाद के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:
  • विकास में असंतुलन: क्षेत्रीय असंतोष से निवेश और औद्योगिक विकास प्रभावित होता है।
  • निवेश में कमी: अशांति और अस्थिरता के कारण निजी व विदेशी निवेशक पीछे हटते हैं।
  • संसाधनों का अनुचित वितरण: क्षेत्रीय दबाव समूह विकास निधियों के असमान बँटवारे की माँग करते हैं।
  • आर्थिक प्रतिस्पर्धा: राज्य आपसी प्रतिस्पर्धा में सहयोग की भावना खो देते हैं।
  • राजकोषीय दबाव: क्षेत्रीय मांगों को पूरा करने हेतु सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ता है।
  • श्रमिक प्रवास पर असर: क्षेत्रीय भेदभाव से आंतरिक प्रवासन और श्रम बाज़ार में अस्थिरता आती है।
  • क्षेत्रवाद के राज्यव्यवस्था पर प्रभाव:
  • राष्ट्रीय एकता पर खतरा: क्षेत्रीय निष्ठा राष्ट्रीय एकता से बड़ी बन जाती है।
  • संघीय ढाँचे पर दबाव: राज्यों के बीच विवाद (जैसे जल बँटवारा, सीमा विवाद) बढ़ते हैं।
  • राजनीतिक दलों का विखंडन: क्षेत्रीय दलों के उदय से राष्ट्रीय नीतियों में असंतुलन आता है।
  • लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रभाव: क्षेत्रीय भावनाओं पर आधारित राजनीति विकास से ध्यान हटाती है।
  • नीतिगत अस्थिरता: केंद्र व राज्यों के बीच सहयोग की कमी नीति निर्माण को प्रभावित करती है।
  • सामाजिक तनाव: भाषाई, सांस्कृतिक और जातीय आधार पर समाज में विभाजन बढ़ता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत में क्षेत्रवाद को केवल दमन से नहीं, बल्कि समान विकास, संवैधानिक संतुलन और संवाद से नियंत्रित किया जा सकता है। जब सभी क्षेत्र समान अवसर पाएँगे, तभी राष्ट्रीय एकता और स्थिरता सशक्त बनेगी।

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Discuss the causes and consequences of poverty. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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गरीबी के कारणों और परिणामों की चर्चा कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

गरीबी किसी भी देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है। भारत जैसे विकासशील देश में यह समस्या ऐतिहासिक, आर्थिक और संरचनात्मक कारणों से जुड़ी है। गरीबी न केवल आर्थिक अभाव बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में अवसरों की असमानता को भी दर्शाती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • गरीबी के प्रमुख कारण:
  • जनसंख्या वृद्धि: तेजी से बढ़ती जनसंख्या संसाधनों पर दबाव बढ़ाती है।
  • बेरोजगारी: रोजगार के अवसरों की कमी से आय घटती है और गरीबी बढ़ती है।
  • असमान आय वितरण: अमीर और गरीब के बीच आर्थिक खाई लगातार बढ़ रही है।
  • शिक्षा की कमी: अशिक्षा से लोग बेहतर रोजगार और आय के अवसर नहीं पा पाते।
  • कृषि पर निर्भरता: अस्थिर कृषि व्यवस्था और कम उत्पादकता ग्रामीण गरीबी का मुख्य कारण है।
  • औद्योगिक पिछड़ापन: सीमित औद्योगिक विकास से शहरी गरीबों की संख्या बढ़ी है।
  • गरीबी के परिणाम:
  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: कुपोषण, बीमारियाँ और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी बढ़ जाती है।
  • शिक्षा से वंचित रहना: गरीब परिवार अपने बच्चों को उचित शिक्षा नहीं दिला पाते।
  • सामाजिक असमानता: गरीबी सामाजिक वर्गों में दूरी और भेदभाव को जन्म देती है।
  • अपराध और असुरक्षा: आर्थिक अभाव अपराध दर और अस्थिरता को बढ़ाता है।
  • राष्ट्रीय विकास में बाधा: गरीबी उत्पादकता और मानव संसाधन विकास को सीमित करती है।
  • राजनीतिक अस्थिरता: असमानता और असंतोष लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव डालते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

गरीबी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानव विकास की चुनौती है। इसके समाधान हेतु शिक्षा, रोजगार, समान अवसर और सामाजिक न्याय पर आधारित समग्र नीति आवश्यक है।

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Indian society is known for its uniqueness and cultural diversity. Discuss. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारतीय समाज अपनी विशिष्टता और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है । चर्चा कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

भारतीय समाज विश्व के सबसे प्राचीन और विविधतापूर्ण समाजों में से एक है। यहाँ अनेक धर्म, भाषाएँ, जातियाँ और परम्पराएँ एक साथ पनपी हैं। यह विविधता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशिष्टता और शक्ति मानी जाती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • धार्मिक विविधता: भारत में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि अनेक धर्म शान्तिपूर्वक सह-अस्तित्व में हैं।
  • भाषाई विविधता: संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ मान्यता प्राप्त हैं।
  • सांस्कृतिक समन्वय: आर्य, द्रविड़, मुगल और यूरोपीय प्रभावों से भारतीय संस्कृति में अद्भुत मिश्रण हुआ है।
  • भौगोलिक विविधता: हिमालय से लेकर समुद्र तक विभिन्न जलवायु और जीवनशैली ने क्षेत्रीय संस्कृतियों को जन्म दिया।
  • सामाजिक संगठन: जाति, वर्ग और पेशों के आधार पर बना समाज समय के साथ बदलता और विकसित होता रहा।
  • परिवार प्रणाली: संयुक्त परिवार भारतीय समाज की पहचान है, जहाँ सामूहिकता और सहयोग को महत्व दिया जाता है।
  • त्योहारों की बहुलता: दीवाली, ईद, होली, पोंगल, बिहू आदि उत्सव राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हैं।
  • पहनावा और खान-पान की विविधता: प्रत्येक क्षेत्र का वस्त्र, भोजन और रहन-सहन अलग होते हुए भी भारतीयता से जुड़ा है।
  • कला और संगीत: भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी जैसे नृत्य रूप और शास्त्रीय संगीत परंपराएँ विविधता की पहचान हैं।
  • लोक परम्पराएँ: लोकगीत, लोककथाएँ और लोकनृत्य ग्रामीण भारत की आत्मा हैं।
  • सामाजिक सहिष्णुता: विविधताओं के बावजूद आपसी सम्मान और सहअस्तित्व भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता है।
  • एकता में विविधता: यही भारतीय संस्कृति की मूल भावना है, जिसने देश को सदियों से एक सूत्र में बाँधे रखा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार भारतीय समाज अपनी विविधता, सहिष्णुता और समन्वय के कारण अद्वितीय है। यही विशेषताएँ भारत को “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना का जीवंत उदाहरण बनाती हैं।

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What are the main features of Sangam Period Culture? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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संगमकालीन संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ क्या है ?

Ans: भूमिका (Introduction):

संगमकाल (लगभग 300 ई.पू. से 300 ई.) दक्षिण भारत के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण काल था। इस समय तमिल भाषा, साहित्य, समाज और संस्कृति का अद्भुत विकास हुआ। संगमकालीन संस्कृति जीवन के विविध पक्षों – धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक – का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • साहित्यिक उत्कर्ष: ‘संगम साहित्य’ में प्रेम, युद्ध, नीति, और समाज के वास्तविक चित्रण मिलते हैं।
  • भाषा का विकास: तमिल भाषा का शुद्ध और परिष्कृत रूप इसी काल में उभरा।
  • राजनीतिक जीवन: छोटे-छोटे चेर, चोल और पांड्य राज्यों का शासन प्रमुख था।
  • समाज व्यवस्था: समाज जातिगत न होकर व्यवसाय और गुणों पर आधारित था।
  • महिलाओं की स्थिति: महिलाओं को शिक्षा और सम्मान प्राप्त था; अव्वैयार जैसी कवयित्रियाँ प्रसिद्ध थीं।
  • आर्थिक जीवन: कृषि, व्यापार और समुद्री वाणिज्य अत्यंत उन्नत था; रोम तक व्यापारिक सम्बन्ध थे।
  • धार्मिक जीवन: लोग शैव, वैष्णव, मुरुगन और मातृदेवी की उपासना करते थे।
  • नैतिक मूल्य: वीरता, प्रेम और दानशीलता को सर्वोच्च गुण माना गया।
  • कला और स्थापत्य: संगीत, नृत्य और चित्रकला का उल्लेख संगम ग्रंथों में मिलता है।
  • शहरीकरण: नगरों में सुव्यवस्थित बाजार, सड़कें और सामाजिक संस्थाएँ विकसित थीं।
  • लोक संस्कृति: उत्सव, नृत्य और लोकगीत सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग थे।
  • राजनयिक सम्बन्ध: विदेशी व्यापार और सांस्कृतिक सम्पर्क से समाज उदार व प्रगतिशील बना।

निष्कर्ष (Conclusion): संगमकालीन संस्कृति ने दक्षिण भारत को साहित्य, कला और सामाजिक चेतना का केन्द्र बनाया। यह काल भारतीय संस्कृति के स्थानीय और सार्वभौमिक मूल्यों के संगम का प्रतीक माना जाता है।

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Outline the development of revolutionary movement in Bengal. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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बंगाल में क्रान्तिकारी आन्दोलन के विकास को रेखांकित कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

बंगाल भारत में क्रान्तिकारी आन्दोलन का सबसे सशक्त केन्द्र रहा। प्रारम्भ में यह आन्दोलन राजनीतिक असंतोष से प्रेरित था, परंतु शीघ्र ही यह सशस्त्र स्वतंत्रता संग्राम में बदल गया। बंगाल के युवाओं ने संगठन, बलिदान और साहस से आज़ादी के संघर्ष को नई दिशा दी।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • 1905 में बंग-भंग (Partition of Bengal) के विरोध ने क्रान्तिकारी गतिविधियों की भूमि तैयार की।
  • अनुशीलन समिति (1906) की स्थापना ने संगठित क्रान्तिकारी आन्दोलन की शुरुआत की।
  • अरविन्द घोष और बारिन्द्र घोष ने युवाओं को देशभक्ति और सशस्त्र क्रान्ति के लिए प्रेरित किया।
  • युगान्तर और संध्या जैसे पत्रों ने जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1908 का अलीपुर बम काण्डबंगाल के आन्दोलन का निर्णायक मोड़ बना।
  • खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी जैसे युवाओं ने बलिदान से राष्ट्र को झकझोर दिया।
  • 1912 का हार्डिंग बम काण्ड ने आन्दोलन को अखिल भारतीय स्वरूप दिया।
  • प्रथम विश्वयुद्ध के समय जर्मनी के सहयोग से गदर व अनुशीलन समिति ने विद्रोह की योजना बनाई।
  • 1915 के बाद आन्दोलन भूमिगत होकर गुप्त संगठनों में जारी रहा।
  • रासबिहारी बोस और जतिन मुखर्जी (बाघा जतिन) ने राष्ट्रीय क्रान्ति की रूपरेखा तैयार की।
  • 1920 के बाद गाँधीजी के असहयोग आन्दोलन से कई क्रान्तिकारी राष्ट्रीय धारा में जुड़े।
  • बंगाल के इस आन्दोलन ने अगली पीढ़ी के क्रान्तिकारियों (जैसे भगत सिंह, चन्द्रशेखर आज़ाद) को प्रेरित किया।

निष्कर्ष (Conclusion):

बंगाल का क्रान्तिकारी आन्दोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा था। इसने पूरे देश में देशभक्ति, साहस और बलिदान की लौ प्रज्वलित कर स्वतंत्रता की नींव को सुदृढ़ किया।

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The French Revolution was a great result of enlightenment period.” – Comment. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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“फ्रांस की क्रान्ति प्रबोधनकाल का सुपरिणाम थी ।” – टिप्पणी कीजिए । “

Ans: भूमिका (Introduction):

फ्रांस की क्रांति (1789) यूरोप के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक थी। यह केवल एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि विचारों की क्रांति भी थी। इस क्रांति की जड़ें प्रबोधनकाल (Age of Enlightenment) के उन विचारों में थीं जिन्होंने स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व का संदेश दिया।

मुख्य बिंदु ( Important Points):

  • प्रबोधनकाल (Enlightenment) ने मानव बुद्धि, तर्क और विज्ञान को महत्व देने की प्रेरणा दी।
  • दार्शनिकों जैसे रूसो (Rousseau), वोल्टेयर (Voltaire) और मोंतेस्क्यू (Montesquieu) ने निरंकुश राजतंत्र की आलोचना की।
  • रूसो के “Social Contract” सिद्धांत ने जनसत्ता (sovereignty of people) की अवधारणा को जन्म दिया।
  • मोंतेस्क्यू ने शासन में शक्ति-विभाजन (separation of powers) का विचार दिया, जो बाद में लोकतंत्र की नींव बना।
  • वोल्टेयर ने धार्मिक असहिष्णुता और चर्च के प्रभुत्व का विरोध किया।
  • तर्क और विवेक को प्रबोधनकाल ने पारंपरिक मान्यताओं पर श्रेष्ठ ठहराया।
  • फ्रांस की जनता में समानता और न्याय की भावना प्रबोधन विचारों से जागी।
  • इन विचारों ने राजा लुई 16वें की निरंकुश सत्ता को चुनौती देने का साहस दिया।
  • मुद्रण और प्रकाशन के विकास से प्रबोधन के विचार जन-जन तक पहुँचे।
  • क्रांति के घोषणापत्र “मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा” में प्रबोधन विचार झलकते हैं।
  • क्रांति के बाद धर्मनिरपेक्षता और नागरिक अधिकारों की स्थापना प्रबोधन की उपलब्धि थी।
  • इस प्रकार, प्रबोधनकाल की वैचारिक चेतना ही क्रांति का बौद्धिक आधार बनी।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः फ्रांस की क्रांति केवल राजनीतिक विद्रोह नहीं, बल्कि विचारों का विस्फोट थी। यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि फ्रांस की क्रांति प्रबोधनकाल का प्रत्यक्ष सुपरिणाम थी, जिसने आधुनिक लोकतांत्रिक युग की नींव रखी।

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