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What is ‘Blood moon’? When does it happen? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-3

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‘ब्लड मून’ (Blood moon) किसे कहते हैं? यह कब होता है?

Ans: परिचय (Introduction):

‘ब्लड मून’ (Blood Moon) एक खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा का रंग लालिमा लिए हुए दिखाई देता है। यह दृश्य अत्यंत सुंदर और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • ब्लड मून पूर्ण चंद्रग्रहण (Total Lunar Eclipse) के समय होता है।
  • जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
  • पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को छानता है, और लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुँचती हैं।
  • इसी कारण चंद्रमा लाल या ताम्रवर्णी दिखाई देता है।
  • यह घटना साल में 1–2 बार घटित हो सकती है।
  • यह घटना पूर्णिमा की रात को ही संभव है।
  • वैज्ञानिक दृष्टि से यह पृथ्वी के वायुमंडलीय संघटन का भी संकेत देता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः ब्लड मून एक प्राकृतिक और सुंदर घटना है, जो चंद्रग्रहण के समय सूर्य के प्रकाश के अपवर्तन और प्रकीर्णन से उत्पन्न होती है।

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What are the major objectives and target group in Innovation Promotion Programmes of the Council of Science and Technology in Uttar Pradesh? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

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उत्तर प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रमों के प्रमुख उद्देश्य एवं लक्ष्य समूह क्या हैं ?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (Council of Science and Technology, Uttar Pradesh – CSTUP) राज्य में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था है। यह परिषद विभिन्न नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रमों के माध्यम से वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी उद्यमिता और शोध भावना को प्रोत्साहित करती है। इसका उद्देश्य विज्ञान को समाजोपयोगी बनाकर राज्य के सतत विकास में योगदान देना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • मुख्य उद्देश्य: राज्य में नवाचार की संस्कृति स्थापित करना और विज्ञान को स्थानीय जरूरतों से जोड़ना।
  • नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रम (Innovation Promotion Programme) के तहत युवाओं को नए विचार विकसित करने हेतु प्रेरित किया जाता है।
  • स्कूल और कॉलेज स्तर पर वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतियोगिताएँ और मेले आयोजित किए जाते हैं।
  • युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम (Young Scientist Scheme) के तहत शोध आधारित नवाचारों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
  • उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से स्टार्टअप्स और तकनीकी नवाचारों को प्रोत्साहन मिलता है।
  • महिला नवाचारकर्ता और शोधार्थी को विशेष प्राथमिकता देकर समान अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • ग्रामीण नवाचार मिशन के माध्यम से स्थानीय समस्याओं के लिए सस्ती तकनीकी समाधान खोजे जाते हैं।
  • प्रदर्शनी, कार्यशालाएँ और विज्ञान मेले आयोजित कर छात्रों में प्रयोगात्मक कौशल बढ़ाया जाता है।
  • संस्थान-उद्योग साझेदारी से अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग की दिशा में ले जाया जाता है।
  • नवाचार निधि (Innovation Fund) के माध्यम से उपयोगी शोध परियोजनाओं को अनुदान दिया जाता है।
  • मुख्य लक्ष्य समूह: छात्र, युवा वैज्ञानिक, शोधार्थी, नवाचारकर्ता, स्टार्टअप संस्थापक और ग्रामीण तकनीकी उद्यमी।
  • अंतिम लक्ष्य: विज्ञान एवं तकनीक को विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का साधन बनाना।

निष्कर्ष (Conclusion):

CSTUP के नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रम विज्ञान और तकनीक को समाज के निकट लाने का प्रभावी प्रयास हैं। इनसे राज्य में शोध, उद्यमिता और नवाचार की नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।

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What is smart city? Describe its main characteristics. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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स्मार्ट सिटी क्या है ? इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

स्मार्ट सिटी (Smart City) वह आधुनिक शहरी क्षेत्र है जहाँ सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) और नवाचार के माध्यम से नागरिकों को बेहतर जीवन-स्तर, सुशासन और सतत विकास के अवसर प्रदान किए जाते हैं। भारत में स्मार्ट सिटी मिशन 2015 में प्रारंभ किया गया था।

मुख्य विशेषताएँ:

  • स्मार्ट अवसंरचना: बेहतर सड़कों, जल आपूर्ति, बिजली और परिवहन की सुविधाएँ।
  • डिजिटल गवर्नेंस: ई-गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शी और तेज प्रशासन।
  • सतत विकास: नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान।
  • स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम: सेंसर और कैमरों से यातायात नियंत्रण व सुरक्षा।
  • कचरा प्रबंधन: स्वच्छता और अपशिष्ट पुनर्चक्रण की आधुनिक तकनीकें।
  • सार्वजनिक सुरक्षा: सीसीटीवी, स्मार्ट लाइटिंग और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली।
  • नागरिक सहभागिता: योजनाओं में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और फीडबैक प्रणाली।

उपसंहार:

स्मार्ट सिटी का उद्देश्य शहरों को तकनीकी रूप से सशक्त, पर्यावरणीय रूप से संतुलित और नागरिकों के लिए अधिक रहने योग्य बनाना है। यह भारत के शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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What are ‘Social Networking Sites’ and how does their uncontrolled use increase the possibilities of cyber attacks? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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‘सामाजिक संजाल स्थल’ क्या होते हैं ? और इनका अनियंत्रित उपयोग साइबर हमलों की संभावनाओं में किस प्रकार वृद्धि करता है ?

Ans: भूमिका (Introduction) –

‘सामाजिक संजाल स्थल’ (Social Networking Sites) वे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म हैं जहाँ उपयोगकर्ता आपसी संवाद, विचार, सूचना और सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं। जैसे – फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (X), यूट्यूब, लिंक्डइन आदि। ये आज सामाजिक सहभागिता और सूचना प्रसार का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सामाजिक संजाल स्थल लोगों को जोड़ने, अभिव्यक्ति और सूचना साझा करने का अवसर देते हैं।
  • ये व्यवसाय, शिक्षा, राजनीति और जन-जागरूकता के प्रभावी साधन बन चुके हैं।
  • परंतु इनका अनियंत्रित और असावधान उपयोग साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
  • उपयोगकर्ता अपनी व्यक्तिगत जानकारी, फोटो, लोकेशन और बैंक विवरण साझा करते हैं, जिन्हें साइबर अपराधी दुरुपयोग कर सकते हैं।
  • फिशिंग (Phishing) और मैलवेयर (Malware) जैसे हमले अक्सर सोशल मीडिया लिंक के माध्यम से फैलते हैं।
  • नकली प्रोफाइल और फेक न्यूज़ से न केवल भ्रम फैलता है, बल्कि डेटा चोरी और पहचान की जालसाजी भी बढ़ती है।
  • सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) तकनीक द्वारा हैकर्स लोगों को भावनात्मक रूप से भ्रमित कर पासवर्ड या निजी जानकारी प्राप्त करते हैं।
  • अनियंत्रित उपयोग से डेटा लीकेज, गोपनीयता भंग और राष्ट्रीय सुरक्षा तक को खतरा हो सकता है।
  • साइबर हमले अक्सर सोशल मीडिया पर साझा लापरवाह जानकारी के कारण संभव होते हैं।
  • भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट, 2000 तथा CERT-In जैसी संस्थाएँ साइबर सुरक्षा की निगरानी करती हैं।
  • सरकार “डिजिटल साक्षरता अभियान” के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है।
  • उपयोगकर्ताओं को मजबूत पासवर्ड, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण और सावधानीपूर्ण साझा करने की आदत अपनानी चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion) –

इस प्रकार, सामाजिक संजाल स्थल जहाँ संवाद का सशक्त माध्यम हैं, वहीं अनियंत्रित उपयोग साइबर हमलों की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देता है। इनका सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक उपयोग ही डिजिटल युग में सुरक्षा और विश्वास का आधार बन सकता है।

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Compare Indian Knowledge Tradition based aeronautics with modern aeronautics. Mention the policies of the Department of Science and Technology for the research in this field. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारतीय ज्ञान परम्परा आधारित वैमानिकी शास्त्र की तुलना आधुनिक वैमानिकी शास्त्र से कीजिये । इस क्षेत्र में अनुसंधान हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की नीतियों का उल्लेख कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारतीय ज्ञान परम्परा में वैमानिकी शास्त्र (Aeronautics) का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों जैसे विमानिका शास्त्र और संहिताओं में मिलता है, जिनमें उड़ने वाले यंत्रों, उनकी संरचना और संचालन सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। आधुनिक वैमानिकी शास्त्र (Modern Aeronautics) वैज्ञानिक परीक्षणों, भौतिकी के सिद्धांतों और प्रौद्योगिकी के प्रयोग पर आधारित है। दोनों की तुलना परंपरा और विज्ञान के विकासक्रम को दर्शाती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्राचीन वैमानिकी शास्त्र में वायुयान के प्रकार, ईंधन, दिशा नियंत्रण एवं गति का वर्णन मिलता है।
  • यह ज्यामिति, यांत्रिकी और धातु विज्ञान के प्रारंभिक स्वरूपों से जुड़ा था।
  • आधुनिक वैमानिकी वायुगतिकी (Aerodynamics), प्रणोदन (Propulsion), सामग्री विज्ञान (Material Science) और इलेक्ट्रॉनिक्स पर आधारित है।
  • भारतीय परम्परा में यह अवधारणा वैचारिक और सैद्धांतिक थी; आधुनिक विज्ञान ने इसे प्रयोगात्मक रूप दिया।
  • आज वैमानिकी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और नैनो प्रौद्योगकी का प्रयोग बढ़ रहा है।
  • प्राचीन ग्रंथों का पुनःअध्ययन भारतीय वैज्ञानिक सोच की ऐतिहासिक गहराई को उजागर करता है।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) इस क्षेत्र में Indigenous Knowledge Systems (IKS) पर अनुसंधान को प्रोत्साहित कर रहा है।
  • DST ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र” (IKS Division) की स्थापना कर पारंपरिक विज्ञान के वैज्ञानिक विश्लेषण को बढ़ावा दिया है।
  • एयरोस्पेस अनुसंधान हेतु DST-AR&DB (Aeronautics Research and Development Board) विभिन्न संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • यह नीतियाँ प्राचीन सिद्धांतों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
  • ISRO और DRDO भी वैमानिकी के क्षेत्र में स्वदेशी नवाचारों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
  • नीति का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर वैमानिकी प्रौद्योगिकी (Aatmanirbhar Aeronautics) के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः कहा जा सकता है कि भारतीय वैमानिकी परम्परा ने वैचारिक आधार प्रदान किया, जबकि आधुनिक वैमानिकी ने उसे वैज्ञानिक रूप दिया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की नीतियाँ इन दोनों के समन्वय से भारत को प्राचीन ज्ञान और आधुनिक अनुसंधान के संगम पर अग्रसर कर रही हैं।

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Mention the role of Indian Defence Research and Development Organisation in India’s security set-up. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत की सुरक्षा व्यवस्था में भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की भूमिका का उल्लेख कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation – DRDO) की स्थापना 1958 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाना और सशस्त्र सेनाओं को अत्याधुनिक उपकरण प्रदान करना है।

मुख्य भूमिकाएँ (Key Roles):

  • स्वदेशी रक्षा तकनीक का विकास – मिसाइल, रडार, टैंक, पनडुब्बी व युद्धक विमान जैसी तकनीकों का निर्माण।
  • मिसाइल कार्यक्रम की सफलता – ‘अग्नि’, ‘पृथ्वी’, ‘आकाश’, ‘नाग’ और ‘ब्रहमोस’ जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों का विकास।
  • रक्षा उपकरणों का आधुनिकीकरण – सैनिकों के लिए हल्के हथियार, बुलेटप्रूफ जैकेट व संचार प्रणाली में सुधार।
  • अंतरिक्ष व साइबर सुरक्षा में योगदान – उपग्रह-आधारित निगरानी और साइबर रक्षा प्रणालियों का विकास।
  • नवाचार व अनुसंधान प्रोत्साहन – ‘डेयर टू ड्रीम’ जैसी योजनाओं से निजी व अकादमिक क्षेत्र को जोड़ना।
  • स्वावलंबन में योगदान – ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अंतर्गत विदेशी निर्भरता में कमी।
  • सैन्य-नागरिक तकनीक का उपयोग – रक्षा तकनीकों का नागरिक क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, परिवहन व पर्यावरण में प्रयोग।

निष्कर्ष (Conclusion):

DRDO ने भारत की रक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया है। इसके नवाचारों ने न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी स्थान दिलाया है।

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Describe the role of Artificial Intelligence in the safety and security during disaster management. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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आपदा प्रबन्धन के दौरान सुरक्षा एवं संरक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका का वर्णन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आज आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी उपकरण बन चुकी है। यह प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदाओं के पूर्वानुमान, राहत कार्यों और पुनर्वास में सटीक व त्वरित निर्णय लेने में मदद करती है।

मुख्य भूमिकाएँ (Key Roles):

  • पूर्वानुमान (Prediction): सैटेलाइट डेटा और मशीन लर्निंग मॉडल के माध्यम से भूकम्प, चक्रवात, बाढ़ आदि की समयपूर्व चेतावनी।
  • जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment): AI आधारित डेटा विश्लेषण से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारण।
  • आपात प्रतिक्रिया (Emergency Response): ड्रोन और रोबोट द्वारा खोज एवं राहत कार्यों में त्वरित सहायता।
  • संचार और समन्वय (Coordination): चैटबॉट्स और रीयल-टाइम ट्रैकिंग से राहत टीमों के बीच बेहतर तालमेल।
  • संसाधन प्रबंधन (Resource Allocation): AI से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं का कुशल वितरण।
  • सोशल मीडिया विश्लेषण: संकट के दौरान जनसंदेशों से वास्तविक स्थिति का त्वरित आकलन।
  • पुनर्वास योजना (Rehabilitation Planning): क्षति मूल्यांकन के आधार पर दीर्घकालिक पुनर्निर्माण रणनीति बनाना।

निष्कर्ष (Conclusion):

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आपदा प्रबंधन में मानवीय क्षमता को कई गुना बढ़ाकर सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करती है। इसका प्रभावी उपयोग न केवल जनहानि घटाता है बल्कि आपदा-उत्तर पुनर्वास को भी अधिक संगठित बनाता है।

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What are the policies of the Government of Uttar Pradesh to promote innovations in science and technology? [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-6

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचारों को बढ़ावा देने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार की क्या नीतियाँ हैं ?

Ans: परिचय:

उत्तर प्रदेश सरकार ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science & Technology) में नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतियाँ और कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनका उद्देश्य राज्य को नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना और युवाओं को स्टार्टअप व अनुसंधान के लिए प्रेरित करना है।

मुख्य बिंदु:

  • उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2020 के तहत नवाचार आधारित उद्यमों को वित्तीय और तकनीकी सहायता।
  • आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2021 से टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों का विकास।
  • राज्य नवाचार कोष (Innovation Fund) की स्थापना शोध और प्रोटोटाइप विकास के लिए।
  • इन्क्यूबेशन सेंटर और टेक्नोलॉजी पार्क विश्वविद्यालयों में स्थापित किए जा रहे हैं।
  • डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस परियोजनाओं से नवाचार को बढ़ावा।
  • AI, रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्रों में अनुसंधान को प्रोत्साहन।
  • नवाचार पुरस्कार योजनाओं से युवा वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जा रहा है।

निष्कर्ष: इन नीतियों से उत्तर प्रदेश में नवाचार और तकनीकी उद्यमिता को नई दिशा मिली है। यह राज्य को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर कर रहा है।

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