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Review the contribution of the public distribution system in poverty alleviation. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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गरीबी उन्मूलन हेतु सार्वजनिक वितरण प्रणाली के योगदान की समीक्षा कीजिए।

Ans: परिचय:

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) भारत में गरीबों को सस्ते दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की एक प्रमुख योजना है। यह खाद्य सुरक्षा और सामाजिक न्याय दोनों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य भूखमरी को समाप्त करना और जीवन स्तर में सुधार लाना है।

मुख्य बिंदु:

  • PDS के माध्यम से गेहूँ, चावल, चीनी व केरोसिन जैसी आवश्यक वस्तुएँ रियायती दरों पर दी जाती हैं।
  • यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत कानूनी अधिकार के रूप में लागू है।
  • गरीबों की क्रय शक्ति बढ़ाकर आर्थिक असमानता को घटाती है।
  • ग्रामीण व शहरी गरीबों को न्यूनतम जीवन आवश्यकताएँ सुनिश्चित करती है।
  • Targeted PDS (TPDS) द्वारा कमजोर वर्गों को विशेष प्राथमिकता दी गई।
  • मध्याह्न भोजन योजना और अन्त्योदय अन्न योजना जैसी योजनाएँ PDS से जुड़ी हैं।
  • वितरण प्रणाली में ई-राशन कार्ड और डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ी है।

निष्कर्ष:

सार्वजनिक वितरण प्रणाली ने भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर गरीबी उन्मूलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यदि इसे और पारदर्शी व कुशल बनाया जाए, तो यह सामाजिक न्याय का सशक्त उपकरण बन सकती है।

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How does the Indian Constitution ensure the independence of the judiciary? Discuss the importance of the basic structure doctrine. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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भारतीय संविधान न्यायपालिका की स्वतन्त्रता को कैसे सुनिश्चित करता है ? मूल संरचना सिद्धान्त के महत्त्व पर चर्चा कीजिए।

Ans: परिचय:

भारतीय संविधान में न्यायपालिका को लोकतंत्र का संरक्षक माना गया है। इसकी स्वतंत्रता नागरिक अधिकारों की रक्षा और सत्ता के दुरुपयोग पर नियंत्रण के लिए अनिवार्य है। मूल संरचना सिद्धांत ने इस स्वतंत्रता को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की है।

मुख्य बिंदु:

  • न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं कार्यकाल संविधान के अनुच्छेद 124–147 (सुप्रीम कोर्ट) और 214–231 (हाई कोर्ट) में निर्धारित हैं।
  • न्यायाधीशों को विधायिका या कार्यपालिका के दबाव से मुक्त रखा गया है।
  • वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें संसद के नियंत्रण से बाहर रखी गई हैं।
  • न्यायाधीशों को केवल महाभियोग प्रक्रिया द्वारा ही हटाया जा सकता है।
  • न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्विलोकन (Judicial Review) का अधिकार प्राप्त है।
  • केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने “मूल संरचना सिद्धांत” प्रतिपादित किया।
  • इस सिद्धांत के अनुसार, संविधान का संशोधन उसकी मूल आत्मा — जैसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता, विधि का शासन, और मौलिक अधिकार — को नष्ट नहीं कर सकता।

निष्कर्ष:

न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है। मूल संरचना सिद्धांत ने इसे स्थायी संरक्षण देकर संविधान की सर्वोच्चता और नागरिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित किया है।

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What are the special legislative powers of the Council of States (Rajya Sabha)? Discuss. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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राज्य सभा की विशिष्ट विधायी शक्तियाँ क्या हैं ? विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय:

राज्यसभा भारतीय संसद का उच्च सदन है, जो संघ की स्थायित्व और संतुलन का प्रतीक है। यह न केवल विधायी प्रक्रिया में भाग लेती है, बल्कि विशेष परिस्थितियों में लोकसभा से भिन्न शक्तियाँ भी रखती है। इसका उद्देश्य राज्यों के हितों की रक्षा करना है।

मुख्य बिंदु:

  • राज्यसभा किसी विषय को राज्य सूची से समवर्ती सूची में लाने के लिए अनुच्छेद 249 के अंतर्गत प्रस्ताव पारित कर सकती है।
  • अनुच्छेद 312 के तहत नवीन अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन की अनुशंसा कर सकती है।
  • यह राष्ट्रपति द्वारा जारी आपातकालीन घोषणाओं को अनुमोदित कर सकती है।
  • लोकसभा के विघटन की स्थिति में भी कार्य करती रहती है।
  • किसी विधेयक पर पुनर्विचार का सुझाव देकर कानून निर्माण को संतुलित बनाती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय संधियों और नीतिगत मुद्दों पर राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
  • राज्यों के हितों की रक्षा हेतु संघीय संतुलन बनाए रखती है।

निष्कर्ष:

राज्यसभा भारतीय संघ की एकता और स्थिरता की संवैधानिक गारंटी है। इसकी विशिष्ट शक्तियाँ संसद को अधिक संतुलित, विचारशील और संघीय चरित्र प्रदान करती हैं।

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Write the role of NITI Aayog in the development of India. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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भारत के विकास में नीति आयोग की भूमिका लिखिए।

Ans: परिचय:

नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर की गई। इसका उद्देश्य सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना और राज्यों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करना है। यह देश के समग्र और संतुलित विकास के लिए नीति निर्माण की दिशा तय करता है।

मुख्य बिंदु:

  • नीति आयोग थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है, जो सरकार को नीतिगत सलाह देता है।
  • यह राज्यों की आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएँ बनाने में सहयोग करता है।
  • सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद को प्रोत्साहित करता है।
  • दीर्घकालिक विकास हेतु सतत विकास लक्ष्य (SDGs) को अपनाया गया है।
  • आयोग नीति निर्माण में डेटा विश्लेषण और नवाचार को प्राथमिकता देता है।
  • आयुष्मान भारत, अटल इनोवेशन मिशन जैसी योजनाओं की निगरानी करता है।
  • आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन आधारित विकास को दिशा देता है।

निष्कर्ष:

नीति आयोग ने योजना आधारित अर्थव्यवस्था को नीति-आधारित विकास मॉडल में परिवर्तित किया। यह भारत को नवोन्मेषी, समावेशी और आत्मनिर्भर विकास की ओर अग्रसर कर रहा है।

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Write a short note on the composition of the Constituent Assembly. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-2

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संविधान सभा की संरचना पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Ans:  परिचय:

भारत की संविधान सभा का गठन ब्रिटिश सरकार के कैबिनेट मिशन योजना (1946) के अनुसार किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य स्वतंत्र भारत के लिए संविधान बनाना था। यह सभा देश की विविध सामाजिक, राजनीतिक एवं भौगोलिक इकाइयों का प्रतिनिधित्व करती थी।

मुख्य बिंदु:

  • संविधान सभा का गठन 1946 में हुआ।
  • इसमें प्रारंभ में 389 सदस्य थे (292 प्रांतीय, 93 रियासतों से, 4 चीफ कमिशनर क्षेत्रों से)।
  • सदस्य प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से चुने गए।
  • सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई।
  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद अध्यक्ष तथा बी.एन. राव संवैधानिक सलाहकार थे।
  • विभाजन के बाद सदस्य संख्या घटकर 299 रह गई।
  • यह सभा संविधान निर्माण के साथ-साथ संविधान लागू होने तक विधायिका के रूप में भी कार्य करती रही।

निष्कर्ष:

संविधान सभा भारतीय लोकतंत्र की नींव थी जिसने विविध विचारों को समाहित कर एक सशक्त संविधान बनाया। इसकी संरचना भारत की एकता और प्रतिनिधिक भावना का प्रतीक थी।

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