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How do caste hierarchies and power structure affect access to resources and opportunities in rural Uttar Pradesh? Discuss. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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ग्रामीण उत्तर प्रदेश में जाति पदानुक्रम तथा शक्ति संरचना किस प्रकार संसाधनों तथा अवसरों तक पहुँच को प्रभावित करते हैं? विवेचना कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):
ग्रामीण उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना जाति आधारित पदानुक्रम (Caste Hierarchy) और शक्ति संबंधों (Power Structure) पर आधारित है। यह व्यवस्था सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संसाधनों के वितरण को गहराई से प्रभावित करती है।
फलस्वरूप समाज में असमानता और अवसरों की विषमता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  1. जाति आधारित सामाजिक ढाँचा: गाँवों में ऊँची और नीची जातियों के बीच परंपरागत सामाजिक विभाजन बना हुआ है।
  2. भूमि स्वामित्व पर नियंत्रण: ऊँची जातियों के पास अधिकांश कृषि भूमि और संसाधन केंद्रित हैं।
  3. आर्थिक असमानता: नीची जातियों और दलित समुदायों के पास पूँजी एवं रोजगार के सीमित अवसर हैं।
  4. राजनीतिक प्रभुत्व: ग्राम पंचायतों और स्थानीय सत्ता संस्थानों पर ऊँची जातियों का वर्चस्व रहता है।
  5. सामाजिक बहिष्करण: निम्न जातियों को कई बार सामाजिक निर्णय-प्रक्रियाओं और सामुदायिक संसाधनों से अलग रखा जाता है।
  6. शिक्षा तक सीमित पहुँच: जातिगत भेदभाव के कारण शिक्षा संस्थानों में भी असमान अवसर मिलते हैं।
  7. सरकारी योजनाओं का असमान लाभ: लाभार्थी चयन में अक्सर जातीय पक्षपात देखने को मिलता है।
  8. रोजगार के अवसरों में भेदभाव: परंपरागत पेशे और सामाजिक धारणाएँ रोजगार विकल्पों को सीमित करती हैं।
  9. महिलाओं पर दोहरी वंचना: जाति और लिंग आधारित असमानता महिलाओं की स्थिति को और कमजोर करती है।
  10. दलित आंदोलनों का उदय: असमानता के प्रतिकार में दलित और पिछड़े वर्गों में राजनीतिक चेतना बढ़ी है।
  11. सरकारी हस्तक्षेप: आरक्षण नीति, पंचायत आरक्षण और सामाजिक न्याय योजनाओं से सुधार के प्रयास हुए हैं।
  12. धीरे-धीरे परिवर्तन: शिक्षा, मीडिया और शहरी प्रभाव से जातिगत सीमाएँ कुछ हद तक कमजोर हो रही हैं।

निष्कर्ष (Conclusion ):
ग्रामीण उत्तर प्रदेश में जाति और शक्ति संरचना अब भी संसाधनों और अवसरों तक पहुँच को गहराई से प्रभावित करती है। हालाँकि सामाजिक सुधार और नीतिगत हस्तक्षेपों से यह असमानता धीरे-धीरे कम होती दिख रही है, पर पूर्ण समानता अभी भी एक चुनौती है।

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Throw light on the e.District Project of Uttar Pradesh government. Is it a good initiative in the direction of E.governance in Uttar Pradesh? Examine. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश सरकार की ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना पर प्रकाश डालें। क्या यह उत्तर प्रदेश में ई-गवर्नेन्स की दिशा में एक अच्छी पहल है? परीक्षण कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

ई-डिस्ट्रिक्ट (e-District) परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्त्वपूर्ण ई-गवर्नेन्स पहल है। इसका उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाएँ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से ऑनलाइन उपलब्ध कराना है। यह परियोजना राज्य के डिजिटल प्रशासनिक ढाँचे को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • परियोजना का शुभारंभ: उत्तर प्रदेश में ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना 2010 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेन्स योजना (NeGP) के अंतर्गत प्रारंभ हुई।
  • मुख्य उद्देश्य: नागरिक सेवाओं का डिजिटलीकरण और सेवा वितरण में पारदर्शिता लाना।
  • सेवाओं की संख्या: जन्म, मृत्यु, आय, जाति, निवास, चरित्र प्रमाणपत्र आदि 40 से अधिक सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध।
  • सिंगल पोर्टल व्यवस्था: नागरिकों को सभी प्रमाणपत्रों और सेवाओं के लिए एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
  • CSC एवं जनसेवा केंद्र: ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने हेतु स्थापित।
  • सेवा वितरण समय: निर्धारित समय-सीमा में सेवाएँ उपलब्ध कराकर भ्रष्टाचार एवं देरी को कम किया गया।
  • डिजिटल सत्यापन: आवेदन और दस्तावेजों की ई-प्रमाणीकरण प्रणाली लागू की गई।
  • फीडबैक प्रणाली: नागरिक संतुष्टि हेतु ऑनलाइन ट्रैकिंग और शिकायत निवारण व्यवस्था।
  • डेटा सुरक्षा: नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा हेतु आधुनिक आईटी संरचना।
  • वित्तीय लेन-देन: सेवाओं के शुल्क का ऑनलाइन भुगतान संभव बनाया गया।
  • सरकारी दक्षता में वृद्धि: विभागीय समन्वय और फाइल प्रबंधन में तीव्रता आई।
  • डिजिटल साक्षरता में वृद्धि: ग्रामीण नागरिकों में सूचना प्रौद्योगिकी के प्रति जागरूकता बढ़ी।

परीक्षण (Evaluation):

ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना ने उत्तर प्रदेश में ई-गवर्नेन्स को मजबूत आधार प्रदान किया है। इससे सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता, नागरिक सहभागिता और प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

निष्कर्ष (Conclusion):

ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश की डिजिटल प्रशासनिक क्षमता को बढ़ाती है, बल्कि नागरिक केंद्रित शासन का उत्कृष्ट उदाहरण भी है। यह ई-गवर्नेन्स की दिशा में राज्य की एक सफल और प्रेरणादायक पहल साबित हुई है।

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Examine the role of the Chief Secretary in the administration of Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश के प्रशासन में मुख्य सचिव की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

मुख्य सचिव (Chief Secretary) उत्तर प्रदेश शासन का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है। यह राज्य के मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद का प्रमुख सलाहकार और प्रशासनिक समन्वयक होता है। मुख्य सचिव की भूमिका राज्य के सुचारु शासन संचालन में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मुख्य सचिव की प्रमुख भूमिकाएँ (Main Roles of Chief Secretary ):

  • प्रशासनिक प्रमुख: राज्य के समस्त विभागों का सर्वोच्च नौकरशाह और उनका नियंत्रणकर्ता।
  • मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव: मुख्यमंत्री को नीतिगत निर्णयों में सलाह देना और कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
  • मंत्रिपरिषद सचिवालय प्रमुख: मंत्रिपरिषद की बैठकें आयोजित करना एवं निर्णयों के अभिलेख बनाए रखना।
  • समन्वयक की भूमिका: विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना ताकि प्रशासनिक कार्य सुचारु रहें।
  • कार्मिक प्रबंधन: वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति से संबंधित कार्यों का नियंत्रण।
  • नीति निर्माण: राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं को व्यावहारिक स्वरूप देने में प्रमुख भूमिका।
  • विकास कार्यक्रमों की निगरानी: प्रमुख विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और मूल्यांकन की देखरेख।
  • राज्य और केंद्र के बीच समन्वय: केंद्र सरकार और राज्य के विभागों के बीच संवाद सेतु के रूप में कार्य।
  • आपदा प्रबंधन: राज्य में आपदा या आपात स्थिति में प्रशासनिक नियंत्रण और राहत कार्यों का संचालन।
  • वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना: बजट उपयोग और वित्तीय नीतियों के पालन की देखरेख।
  • लोकसेवा सुधार: प्रशासन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही को बढ़ावा देना।
  • राज्य शासन की निरंतरता: राजनीतिक परिवर्तन के बावजूद प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखना।

निष्कर्ष (Conclusion):

मुख्य सचिव राज्य शासन की रीढ़ होता है, जो प्रशासनिक मशीनरी को सुचारु रूप से संचालित करता है। उनकी कुशल नेतृत्व क्षमता से ही उत्तर प्रदेश में नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो पाता है।

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Discuss the various stages of land reforms in Uttar Pradesh. How landless agricultural labourers were benefited from the land reforms? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश में भूमि सुधारों के विभिन्न चरणों की विवेचना कीजिए । भूमि सुधारों से भूमिहीन कृषि मजदूर कैसे लाभान्वित हुए ?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश में कृषि व्यवस्था में समानता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए भूमि सुधार (Land Reforms) एक महत्वपूर्ण कदम था। इन सुधारों का उद्देश्य भूमिस्वामित्व की असमानता को समाप्त करना और किसानों को भूमि का अधिकार देना था। भूमि सुधारों के माध्यम से भूमिहीन मजदूरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

मुख्य बिंदु (Main Points ):

  • जमींदारी उन्मूलन अधिनियम (1952): मध्यस्थता समाप्त कर किसानों को भूमि का सीधा स्वामित्व दिया गया।
  • भूमि ceiling कानून (1960): एक परिवार द्वारा रखी जाने वाली अधिकतम भूमि सीमा तय की गई।
  • अधिशेष भूमि वितरण: अतिरिक्त भूमि भूमिहीन किसानों और कृषि मजदूरों में बाँटी गई।
  • किरायेदारी सुधार: बटाईदारों को सुरक्षा और स्थायी अधिकार प्रदान किए गए।
  • भूमि अभिलेख सुधार: भूमि रिकॉर्डों का आधुनिकीकरण किया गया ताकि पारदर्शिता बढ़े।
  • कृषि सहकारिता संस्थाएं: छोटे किसानों को सामूहिक खेती और संसाधन उपलब्ध कराने हेतु प्रोत्साहन।
  • भूमि समेकन योजना (Consolidation of Holdings): बिखरी हुई जोतों को एकीकृत कर खेती आसान बनाई गई।
  • समान अवसर नीति: भूमिहीनों को कृषि विकास योजनाओं में भागीदारी का अवसर मिला।
  • कृषि ऋण और सहायता योजनाएं: भूमिहीन किसानों को सस्ते ऋण और तकनीकी सहायता दी गई।
  • महिला भूमिधारिता को प्रोत्साहन: महिलाओं को भी भूमि स्वामित्व अधिकार दिए गए।
  • राज्य सरकार की योजनाएं: ‘भूमि अधिकार योजना’ जैसी योजनाओं से गरीब परिवारों को लाभ मिला।
  • सामाजिक न्याय में योगदान: भूमि सुधारों ने ग्रामीण समाज में वर्गीय असमानता घटाई।
  • भूमिहीन कृषि मजदूरों को लाभ (Benefits to Landless Labourers):
  • उन्हें भूमि के स्वामित्व या पट्टे का अधिकार मिला, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ी।
  • स्थायी रोजगार, आवास और सम्मानजनक सामाजिक स्थिति प्राप्त हुई।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश में भूमि सुधारों ने ग्रामीण समाज की आर्थिक संरचना को अधिक न्यायसंगत बनाया। इन सुधारों से भूमिहीन किसानों को न केवल भूमि बल्कि आत्म-सम्मान और स्थायित्व भी प्राप्त हुआ।

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How much has the ‘Operation Kayakalp’ been significant in the efforts of converting the primary and upper primary schools into model schools? Analyse. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को मॉडल स्कूलों में बदलने के प्रयासों में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ कितना महत्वपूर्ण रहा है? विश्लेषण कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

‘ऑपरेशन कायाकल्प’ उत्तर प्रदेश सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को आदर्श विद्यालयों में परिवर्तित करना है। यह कार्यक्रम विद्यालयों के भौतिक, शैक्षिक और स्वच्छता संबंधी ढाँचे में व्यापक सुधार लाने पर केंद्रित है। इस पहल ने राज्य के बुनियादी शिक्षा ढांचे को नई दिशा प्रदान की है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) बुनियादी सुविधाओं का विकास: स्वच्छ शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विद्युत व्यवस्था और फर्नीचर जैसी आवश्यक सुविधाओं का प्रावधान किया गया।

(2) डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा: स्मार्ट क्लास, ई-कंटेंट और तकनीकी संसाधनों का उपयोग प्रोत्साहित किया गया।

(3) विद्यालय सौंदर्यीकरण: दीवार चित्रण, हरियाली और साफ-सफाई से विद्यालय वातावरण को आकर्षक बनाया गया।

(4) सामुदायिक सहभागिता: स्थानीय समुदाय, ग्राम पंचायत और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से पारदर्शिता और जिम्मेदारी बढ़ी।

(5) छात्र उपस्थिति में सुधार: बेहतर सुविधाओं के कारण विद्यार्थियों की उपस्थिति और नामांकन में वृद्धि हुई।

(6) बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन: सुरक्षित और स्वच्छ माहौल से बालिकाओं की विद्यालय में भागीदारी बढ़ी।

(7) गुणवत्ता सुधार: शिक्षण-सामग्री और विद्यालय प्रबंधन में नवाचार से शिक्षण गुणवत्ता में सुधार हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion):

‘ऑपरेशन कायाकल्प’ ने उत्तर प्रदेश के विद्यालयों को सुविधासंपन्न और आकर्षक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह पहल न केवल भौतिक ढाँचे बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और समानता को भी सशक्त बनाती है।

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What are the key objectives of the Uttar Pradesh Data Centre Policy-2021? Discuss. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं? विवेचना कीजिए ।

Ans:  प्रस्तावना (Introductio):

उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति–2021 राज्य की डिजिटल अवसंरचना को सशक्त बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस नीति का उद्देश्य राज्य को “भारत का डाटा सेंटर हब” बनाना और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देना है। यह नीति निवेश, रोजगार और ई-शासन के विकास को प्रोत्साहित करती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) डिजिटल अवसंरचना का विकास: राज्य में अत्याधुनिक डाटा सेंटर पार्कों की स्थापना को बढ़ावा देना।

(2) निवेश आकर्षण: निजी क्षेत्र और विदेशी निवेशकों को प्रोत्साहन देकर आईटी क्षेत्र में निवेश बढ़ाना।

(3) रोजगार सृजन: डाटा सेंटर और इससे संबंधित सेवाओं में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न करना।

(4) ई-गवर्नेंस को प्रोत्साहन: सरकारी डेटा के सुरक्षित भंडारण और प्रसंस्करण हेतु स्थानीय डाटा सुविधाएँ स्थापित करना।

(5) नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग: डाटा सेंटर संचालन में हरित ऊर्जा और ऊर्जा दक्ष तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना।

(6) सुरक्षा और डेटा गोपनीयता: डेटा सुरक्षा के लिए उन्नत मानकों को लागू करना।

(7) निवेश प्रोत्साहन पैकेज: भूमि, बिजली, करों और बुनियादी ढाँचे में विशेष रियायतें प्रदान करना।

निष्कर्ष (Conclusion ): उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति–2021 राज्य को डिजिटल क्रांति का अग्रदूत बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।यह नीति तकनीकी आत्मनिर्भरता, निवेश वृद्धि और रोजगार सृजन के नए अवसर प्रदान करती है।

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Discuss the role of Uttar Pradesh during the Non-cooperation Movement. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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असहयोग आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश की भूमिका की विवेचना कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक चरण था, जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया। उत्तर प्रदेश ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और इसे जनआंदोलन का रूप प्रदान किया। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विद्यार्थियों, किसानों और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की।

मुख्य बिंदु (Important Points)

(1) राजनीतिक केंद्र: वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ और गोरखपुर आंदोलन के प्रमुख केंद्र रहे

(2) नेताओं की भूमिका: पं. मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत, डॉ. सम्पूर्णानंद और पुरुषोत्तमदास टंडन ने नेतृत्व किया।

(3) शिक्षा का बहिष्कार: विद्यार्थियों ने सरकारी विद्यालयों और कॉलेजों का बहिष्कार कर राष्ट्रीय शिक्षण संस्थाएँ स्थापित कीं।

(4) विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार: राज्यभर में विदेशी वस्त्र जलाने और खादी के प्रयोग का व्यापक प्रचार हुआ।

(5) किसान आंदोलन: अवध क्षेत्र में बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में किसानों ने नीलामी, लगान और बेगार के विरोध में आंदोलन किया।

(6) चौरी-चौरा घटना (1922): गोरखपुर की इस घटना ने आंदोलन की दिशा को निर्णायक रूप से प्रभावित किया।

(7) महिला भागीदारी: प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी की महिलाओं ने सभाओं, जुलूसों और बहिष्कार आंदोलनों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।

निष्कर्ष (Conclusion):

असहयोग आंदोलन में उत्तर प्रदेश ने स्वतंत्रता संघर्ष को जनजागरण का रूप देने में अग्रणी भूमिका निभाई। इस आंदोलन ने राज्य में राष्ट्रवाद की भावना को गहराई से स्थापित किया।

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Identify the sites related to Harappan Civilization in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश में हड़प्पा सभ्यता से संबंधित पुरास्थलों की पहचान कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश में हड़प्पा सभ्यता (Harappan Civilization) के अनेक पुरास्थल पाए गए हैं, जो इस क्षेत्र के प्राचीन सांस्कृतिक विकास के प्रमाण हैं। ये स्थल दर्शाते हैं कि गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र भी सिंधु सभ्यता के प्रभाव क्षेत्र में था। यहाँ मिली वस्तुएँ उस युग की कृषि, व्यापार और शहरी संस्कृति का संकेत देती हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) आलमगीरपुर (मेरठ): इसे हड़प्पा सभ्यता की पूर्वी सीमा माना जाता है; यहाँ से मिट्टी के बर्तन, मोती और ताम्र उपकरण मिले हैं।

(2) हास्तिनापुर (मेरठ): यहाँ उत्खनन से हड़प्पाई संस्कृति के उत्तरवर्ती अवशेष मिले हैं।

(3) सिनौली (बागपत): हाल के उत्खनन में यहाँ से ताम्र रथ, हथियार और मानव कंकाल प्राप्त हुए हैं, जो उन्नत सभ्यता के संकेत हैं।

(4) भिर्साड़ी (बिजनौर): यहाँ से मिट्टी के पात्र और ताम्र अवशेष मिले हैं, जो हड़प्पाई प्रभाव दर्शाते हैं।

(5) मिर्जापुर और सोनभद्र क्षेत्र: इन क्षेत्रों में चित्रित शैलाश्रय और पत्थर के औजार प्राचीन मानव संस्कृति की निरंतरता को दर्शाते हैं।

(6) कास्गंज और सहारनपुर: यहाँ से भी हड़प्पा कालीन शैली के बर्तन और औजार मिले हैं।

(7) ये सभी स्थल दर्शाते हैं कि हड़प्पा संस्कृति का प्रसार केवल सिंधु घाटी तक सीमित नहीं था, बल्कि गंगा-यमुना दोआब तक फैला था।

निष्कर्ष (Conclusion): उत्तर प्रदेश के ये पुरास्थल हड़प्पा सभ्यता के व्यापक भूगोल और उसकी सांस्कृतिक पहुंच को प्रमाणित करते हैं।ये स्थल भारतीय पुरातत्व और सभ्यता के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

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Discuss the architectural features of the monuments of Agra. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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आगरा के स्मारकों की वास्तुकला की विशेषताओं की विवेचना कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

आगरा भारत की ऐतिहासिक और स्थापत्य धरोहर का प्रमुख केंद्र है, जहाँ मुगल काल की कला और स्थापत्य का उत्कर्ष देखने को मिलता है। यहाँ निर्मित स्मारक न केवल सौंदर्य के प्रतीक हैं बल्कि उस युग की सांस्कृतिक समृद्धि के भी साक्षी हैं। ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे स्मारक विश्व वास्तुकला के अद्वितीय उदाहरण हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग: आगरा के स्मारकों में मुख्यतः सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर का संयोजन देखा जाता है।

(2) इस्लामी और भारतीय शैली का संगम: इन स्मारकों में फारसी, तुर्की और भारतीय स्थापत्य शैलियों का उत्कृष्ट मिश्रण है।

(3) गुंबद, मेहराब और मीनारें: ताजमहल और फतेहपुर सीकरी में विशाल गुंबद और सुंदर मेहराबें इसकी शान बढ़ाती हैं।

(4) नक्काशी और जड़ाई कला: संगमरमर पर की गई जड़ाई, बेल-बूटे और कलात्मक आकृतियाँ अत्यंत बारीकी से निर्मित हैं।

(5) सममितीय योजना: ताजमहल जैसी इमारतों में पूर्ण सममिति और ज्यामितीय संतुलन का अद्भुत प्रयोग किया गया है।

(6) उद्यान योजना: चारबाग शैली के बगीचे इन स्मारकों की सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

(7) फतेहपुर सीकरी की स्थापत्य विविधता: इसमें दीवाने-खास, बुलंद दरवाज़ा और जामा मस्जिद जैसे अनेक स्थापत्य चमत्कार शामिल हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

आगरा के स्मारक भारतीय स्थापत्य कला की उत्कृष्टता और मुगल सौंदर्यबोध के प्रतीक हैं। इनकी संरचनाएँ आज भी भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं।

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Explain the security challenges in the border areas of Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों की व्याख्या कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश की सीमाएँ बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और नेपाल से मिलती हैं। इन सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति और सामाजिक विविधता राज्य की सुरक्षा के लिए विशेष चुनौती प्रस्तुत करती है। सीमा प्रबंधन की कमजोरियाँ अक्सर अवैध गतिविधियों और अपराधों को बढ़ावा देती हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) अंतर्राष्ट्रीय सीमा सुरक्षा: नेपाल से लगी खुली सीमा तस्करी, घुसपैठ और जालसाजी जैसी गतिविधियों के लिए संवेदनशील है।

(2) अवैध तस्करी: सीमावर्ती जिलों में मादक पदार्थ, हथियार, पशु व मानव तस्करी की घटनाएँ चिंता का विषय हैं।

(3) आतंकवाद और उग्रवाद: सीमाई क्षेत्रों का उपयोग असामाजिक तत्वों द्वारा आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

(4) सीमाई अपराध: अपहरण, तस्करी और अवैध व्यापार राज्य की कानून-व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।

(5) सामाजिक-आर्थिक असंतुलन: सीमावर्ती क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी सुरक्षा को कमजोर करती है।

(6) प्रशासनिक समन्वय की कमी: विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी से सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता घटती है।

(7) समाधान प्रयास: सीमा चौकियों का सुदृढ़ीकरण, तकनीकी निगरानी और सामुदायिक सहयोग से स्थिति सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई है।

समेकित नीति, आधुनिक तकनीक और स्थानीय भागीदारी से इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।

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