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Write a note on ‘Failure and future of public schooling education’ in Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में ‘सार्वजनिक स्कूली शिक्षा की विफलता एवं भविष्य’ पर टिप्पणी लिखिए ।

Ans:   परिचय (Introduction):

सार्वजनिक स्कूली शिक्षा (Public School Education) किसी भी राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास की नींव होती है। उत्तर प्रदेश में यह प्रणाली व्यापक नेटवर्क के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई है। गुणवत्ताहीन शिक्षण, संसाधनों की कमी और जवाबदेही के अभाव ने इसकी प्रभावशीलता को कमजोर किया है।

मुख्य बिंदु:

• राज्य में 1.5 लाख से अधिक सरकारी विद्यालय हैं, परंतु छात्र उपस्थिति में लगातार गिरावट देखी गई है।

• शिक्षकों की अनुपस्थिति और गैर-शैक्षिक कार्यों में व्यस्तता शिक्षण गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

• आधारभूत सुविधाओं — बिजली, पानी, शौचालय, फर्नीचर — की कमी प्रमुख समस्या है।

• सीखने के स्तर (Learning Outcomes) में गिरावट ASER Report द्वारा बार-बार उजागर की गई है।

• अभिभावकों का झुकाव निजी विद्यालयों की ओर बढ़ा है।

• सरकारी विद्यालयों में English-medium और Digital Learning की कमी प्रतिस्पर्धा घटाती है।

• बजट आवंटन तो पर्याप्त है, पर उसका प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता।

• छात्र-शिक्षक अनुपात कई क्षेत्रों में निर्धारित मानक से अधिक है।

• Mission Prerna और Operation Kayakalp जैसी योजनाएँ सुधार की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं।

• शिक्षकों का प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रणाली अभी भी पारंपरिक है।

• ग्रामीण क्षेत्रों में छात्राओं की निरंतरता (Retention) एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

• शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी और तकनीकी हस्तक्षेप से सुधार की संभावनाएँ बढ़ रही हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली चुनौतियों से जूझ रही है, पर सुधार की दिशा में प्रयास जारी हैं। यदि गुणवत्ता, जवाबदेही और तकनीकी नवाचार पर ध्यान दिया जाए, तो इसका भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

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Examine the challenges of food security in Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

खाद्य सुरक्षा (Food Security) का अर्थ है — प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त, पौष्टिक और सुरक्षित भोजन सुलभ कराना। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और जनसंख्या-बहुल राज्य में यह एक बड़ी नीतिगत चुनौती बनी हुई है। कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद यहाँ खाद्य वितरण, पोषण और भंडारण से जुड़ी कई समस्याएँ विद्यमान हैं।

मुख्य बिंदु:

• राज्य की बड़ी जनसंख्या (25 करोड़+) पर पर्याप्त खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है।

• ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी के कारण पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सीमित रहती है।

• सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में अनियमितता और भ्रष्टाचार प्रमुख समस्या है।

• खाद्यान्न भंडारण क्षमता की कमी से बड़ी मात्रा में अनाज नष्ट हो जाता है।

• कुपोषण (Malnutrition) की दर विशेषकर महिलाओं और बच्चों में अभी भी अधिक है।

• जलवायु परिवर्तन और सूखे की घटनाएँ कृषि उत्पादन को प्रभावित करती हैं।

• लघु और सीमांत किसानों की आय कम होने से उत्पादन क्षमता घटती है।

• सिंचाई सुविधाओं और कृषि तकनीक में असमानता से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होता है।

• खाद्यान्न के वितरण में डिजिटल कार्ड और बायोमेट्रिक प्रणाली का कार्यान्वयन अभी पूर्ण नहीं हुआ है।

• शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि और पलायन से खाद्य मांग असंतुलित होती है।

• पोषण योजनाएँ (जैसे आंगनवाड़ी, मिड-डे मील) कई बार गुणवत्ताहीन भोजन से ग्रसित हैं।

• कोविड-19 काल में खाद्य आपूर्ति शृंखला की कमजोरियाँ स्पष्ट रूप से सामने आईं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि सुधार, पारदर्शी वितरण प्रणाली और पोषण कार्यक्रमों की दक्षता आवश्यक है। यदि यह नीतिगत रूप से सुदृढ़ किया जाए, तो राज्य में “भोजन सबके लिए” का लक्ष्य साकार हो सकता है।

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Organised crime and terrorism are grave challenges to national security. What arrangements have been made in Uttar Pradesh to counter this? Explain. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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संगठित अपराध एवं आतंकवाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियाँ हैं । इनका प्रतिकार करने के लिए उत्तर प्रदेश में क्या प्रबंधन किया गया है ? स्पष्ट कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

संगठित अपराध (Organized Crime) और आतंकवाद (Terrorism) आज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे बन चुके हैं। उत्तर प्रदेश, अपनी भौगोलिक स्थिति और घनी आबादी के कारण, इन अपराधों से विशेष रूप से प्रभावित रहा है। राज्य सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए बहुआयामी सुरक्षा एवं कानूनी प्रबंधन विकसित किया है।

मुख्य बिंदु:

• राज्य में उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी सोशल एक्टिविटीज़ (UP Gangsters Act) के तहत अपराधियों पर कठोर कार्रवाई की जाती है।

• राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) का प्रयोग देश विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण हेतु किया जाता है।

• आतंकवाद-निरोधी बल (Anti-Terror Squad – ATS) को विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक से सशक्त किया गया है।

• साइबर अपराधों से निपटने हेतु Cyber Crime Police Stations सभी जोनों में स्थापित किए गए हैं।

• खुफिया विभाग (Intelligence Department) को आधुनिक सर्विलांस उपकरणों से लैस किया गया है।

• डायल 112 और आई-खोज पोर्टल जैसी पहलें त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करती हैं।

• सीमा और संवेदनशील जिलों में पुलिस चौकियाँ और चेकपोस्ट बढ़ाई गई हैं।

• अपराधियों की संपत्ति जब्ती और अवैध गिरोहों पर आर्थिक प्रहार की नीति अपनाई गई है।

• अंतरराज्यीय अपराध नियंत्रण के लिए पड़ोसी राज्यों से समन्वय बढ़ाया गया है।

• सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को सतर्कता अभियान में जोड़ा गया है।

• पुलिस बल में आधुनिक हथियार, ड्रोन और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम का प्रयोग बढ़ाया गया है।

• न्यायिक तंत्र में विशेष न्यायालयों की स्थापना से मामलों के शीघ्र निपटान पर बल दिया जा रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश सरकार ने संगठित अपराध और आतंकवाद से निपटने के लिए सशक्त कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक ढाँचा विकसित किया है। इन उपायों से राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और जनविश्वास दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

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Discuss the role of Uttar Pradesh Public Service Commission and explain the challenges before it for independent and impartial selection of public servants. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भूमिका और लोक सेवकों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चयन के लिए उसके समक्ष चुनौतियों पर चर्चा कीजिए ।

Ans:  परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC – Uttar Pradesh Public Service Commission) राज्य सरकार की एक संवैधानिक संस्था है। इसका मुख्य कार्य राज्य सेवाओं के लिए योग्य, निष्पक्ष और सक्षम अभ्यर्थियों का चयन करना है। आयोग राज्य प्रशासन की दक्षता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य बिंदु:

• UPPSC की स्थापना 1 अप्रैल 1937 को की गई थी।

• इसका उद्देश्य योग्यता आधारित (Merit-based) चयन प्रक्रिया के माध्यम से लोक सेवकों की भर्ती करना है।

• आयोग राज्य सिविल सेवा, पुलिस, शिक्षा, और अन्य विभागों की परीक्षाएँ आयोजित करता है।

• यह परीक्षाओं की योजना, प्रश्नपत्र निर्माण, मूल्यांकन और साक्षात्कार प्रक्रिया का संचालन करता है।

• पारदर्शिता और निष्पक्षता आयोग की कार्यप्रणाली के प्रमुख सिद्धांत हैं।

• आयोग के सुझावों के आधार पर सरकार भर्ती नीतियों में सुधार करती है।

• चुनौतियों में परीक्षा परिणामों में देरी और पारदर्शिता पर उठते सवाल शामिल हैं।

• पेपर लीक जैसी घटनाएँ आयोग की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।

• राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप इसकी स्वतंत्रता के लिए चुनौती हैं।

• आधुनिक तकनीक और ई-गवर्नेंस के अभाव में प्रक्रियाएँ कभी-कभी धीमी रहती हैं।

• अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या के कारण निष्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ा है।

• डिजिटल परीक्षा प्रणाली और पारदर्शी मूल्यांकन से आयोग की विश्वसनीयता पुनर्स्थापित हो रही है।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग राज्य प्रशासन की रीढ़ है, जो योग्य अधिकारियों के चयन में अहम भूमिका निभाता है। यदि इसे पूर्ण स्वतंत्रता और तकनीकी सुदृढ़ता दी जाए, तो यह और अधिक निष्पक्ष व प्रभावी बन सकता है।

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“Panchayati Raj System has long success stories in Uttar Pradesh.” Corroborate with suitable examples. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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“उत्तर प्रदेश में पंचायती राज प्रणाली की सफलता की लंबी कहानियाँ हैं ।” उपयुक्त उदाहरणों से इसकी पुष्टि कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

पंचायती राज प्रणाली (Panchayati Raj System) भारत के ग्रामीण लोकतंत्र की आधारशिला है। उत्तर प्रदेश में यह प्रणाली स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम बनी है। इससे ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और जनसहभागिता को नई दिशा मिली है।

मुख्य बिंदु:

• 73वें संविधान संशोधन (1992) के बाद उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू की गई।

• ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तीनों स्तरों पर जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं।

• राज्य में लगभग 58,000 ग्राम पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ हैं।

• पंचायतों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क निर्माण जैसी जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।

• स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

• कई पंचायतों ने डिजिटल शासन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं — जैसे “ई-गवर्नेंस ग्राम” मॉडल।

• महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण ने स्थानीय नेतृत्व में बड़ा परिवर्तन लाया।

• शाहजहाँपुर, बहराइच और बाराबंकी जिलों की पंचायतों ने सामुदायिक स्वास्थ्य व जल संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य किए हैं।

• ग्राम निधि और जनसहयोग से पंचायतें आत्मनिर्भर बन रही हैं।

• पंचायत चुनावों ने ग्रामीण नागरिकों में राजनीतिक चेतना को प्रबल किया।

• सामाजिक न्याय और हाशिए के वर्गों की भागीदारी में वृद्धि हुई है।

• पंचायतें स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान करने में सफल रही हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश की पंचायती राज प्रणाली ने लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुँचाया है। यह जनसहभागिता, स्वावलंबन और ग्रामीण विकास का जीवंत उदाहरण बन चुकी है।

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“If a Second Chamber dissents from the first, it is mischievous; if it agrees, it is superfluous.” In the light of this famous statement, discuss the utility of Uttar Pradesh Legislative Council. (12 marks)

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“यदि दूसरा सदन पहले सदन से असहमत हो तो वह शरारतपूर्ण है; यदि वह सहमत हो तो अनावश्यक है ।” इस प्रसिद्ध कथन के प्रकाश में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की उपयोगिता की चर्चा कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction ):

द्विसदनीय विधानमंडल (Bicameral Legislature) का उद्देश्य कानून निर्माण में संतुलन और विवेक सुनिश्चित करना है। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (Legislative Council) इस व्यवस्था का दूसरा सदन है। यद्यपि इसकी उपयोगिता पर अक्सर विवाद होता रहा है, परंतु इसका लोकतांत्रिक महत्व अभी भी बना हुआ है।

मुख्य बिंदु:

• विधान परिषद राज्य का उच्च सदन है, जो परोक्ष रूप से निर्वाचित सदस्यों से बनता है।

• इसका कार्य विधान सभा द्वारा पारित विधेयकों की समीक्षा करना होता है।

• यह शासन में जल्दबाज़ी से बने कानूनों पर अंकुश लगाने का कार्य करती है।

• अनुभवी शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को इसमें प्रतिनिधित्व मिलता है।

• यह प्रशासनिक नीतियों पर सार्थक बहस का मंच प्रदान करती है।

• विधान परिषद को वित्त विधेयकों पर सीमित अधिकार प्राप्त हैं।

• यह विधानसभा के निर्णयों पर पुनर्विचार का अवसर देती है, परंतु उन्हें रोक नहीं सकती।

• आलोचक कहते हैं कि इसकी शक्तियाँ सीमित हैं, इसलिए यह “अनावश्यक” है।

• वहीं समर्थक मानते हैं कि यह लोकतांत्रिक परिपक्वता और विचारशीलता का प्रतीक है।

• कई बार इसे राजनीतिक शरणस्थली के रूप में भी देखा गया है।

• इसकी समाप्ति या बनाए रखने पर समय-समय पर बहस होती रही है।

• उत्तर प्रदेश की विविध सामाजिक संरचना में यह प्रतिनिधित्व की पूरक भूमिका निभाती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

यद्यपि विधान परिषद की शक्तियाँ सीमित हैं, फिर भी यह विधायी प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखने में सहायक है। इसे सुधार कर अधिक प्रभावी बनाया जाए तो यह लोकतंत्र की सशक्त संस्था बन सकती है।

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Elucidate in detail the characteristics of major festivals and their socio-economic role in the rural areas of Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख त्योहारों की विशेषताएँ और उनकी सामाजिक-आर्थिक भूमिका पर विस्तृत व्याख्या कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में मनाए जाने वाले त्योहार लोक-जीवन, संस्कृति और परम्पराओं का जीवंत रूप हैं। ये सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामुदायिक एकता, पारिवारिक संपन्नता और सामाजिक सौहार्द के प्रतीक भी हैं। साथ ही, ये कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाकर ग्रामीण जीवन में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हैं।

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण त्योहारों की प्रमुख विशेषताएँ और सामाजिक-आर्थिक भूमिका

  • कृषि-आधारित प्रकृति – होली, दीपावली, मकर संक्रांति और हरियाली तीज जैसे त्योहार कृषि चक्र, फसल कटाई और मौसम परिवर्तन से जुड़े होते हैं।
  • सामुदायिक एकजुटता – मेलों, कीर्तन, भंडारों और सामूहिक पूजन से गाँवों में सामाजिक एकता और पारस्परिक सहयोग बढ़ता है।
  • लोक संस्कृति का संरक्षण – कजरी, कजरी महोत्सव, नौटंकी, बिरहा, और लोक-नृत्यों के माध्यम से पारंपरिक कला-संस्कृति सुरक्षित रहती है।
  • परिवारिक सद्भाव – त्योहार परिवारों को जोड़ते हैं; प्रवासी श्रमिक भी त्योहारों पर गाँव लौटकर सामुदायिक रिश्तों को मजबूत बनाते हैं।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा – त्योहारों पर खरीदारी, मिठाइयों, कपड़ों, मिट्टी के दीयों, सजावट सामग्री की मांग बढ़ती है, जिससे स्थानीय शिल्पकारों की आय बढ़ती है।
  • माँग और रोजगार का सृजन – मेलों व बाजारों में दुकानों, अस्थायी रोजगार और परिवहन सेवाओं से आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ती हैं।
  • हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग को बढ़ावा – चरखा, हथकरघा, माटी कला, बुनकरी और खिलौना उद्योग को त्योहारों में विशेष मांग मिलती है।
  • धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व – देवी-देवताओं से जुड़ी पूजा-परम्पराएँ नैतिक मूल्य, विश्वास एवं आध्यात्मिकता को मजबूत करती हैं।
  • स्वस्थ सामाजिक व्यवहार का विकास – सामूहिक भागीदारी से सहयोग, दान, परोपकार एवं सामुदायिक नीतियों का पालन बढ़ता है।
  • पर्यटन को बढ़ावा – काशी, अयोध्या, मथुरा जैसे क्षेत्रों में पर्व-त्योहारों पर ग्रामीण पर्यटन की संभावनाएँ बढ़ती हैं।
  • लैंगिक सहभागिता – तीज, कजरी, करवाचौथ जैसे पर्व महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और उनकी सामाजिक भूमिका को प्रबल करते हैं।
  • पर्यावरणीय संतुलन का संदेश – हरियाली तीज, छठ पूजा जैसे पर्व प्रकृति, जल और पर्यावरण के संरक्षण की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।

Conclusion

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण त्योहार सिर्फ सांस्कृतिक परम्पराएँ नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आर्थिक विकास के मजबूत स्तंभ हैं। ये ग्रामीण समाज को जीवंत, सहयोगी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाते हैं।

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Critically analyse the role of Uttar Pradesh in the Indian Freedom Movement. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उत्तर प्रदेश की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction – 3 lines):
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian Freedom Movement) में उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। यह प्रदेश न केवल कई प्रमुख आंदोलनों का केंद्र बना, बल्कि यहाँ से अनेक महान नेता भी उभरे। इसकी भूमि ने स्वतंत्रता संघर्ष को वैचारिक, राजनीतिक और जनांदोलन दोनों रूपों में दिशा दी।

मुख्य बिंदु (12 Bullet Points):
• 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मेरठ और कानपुर जैसे नगरों से प्रारंभ हुआ।
• मंगल पांडे और नाना साहब जैसे वीर सेनानियों ने विद्रोह का नेतृत्व किया।
• बनारस, लखनऊ और झाँसी इस संग्राम के प्रमुख केंद्र रहे।
• झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान महिला वीरता का प्रतीक बना।
• कांग्रेस की कई अधिवेशन (जैसे 1910, 1916 का लखनऊ अधिवेशन) यहीं आयोजित हुए।
• 1916 के लखनऊ समझौते ने हिंदू-मुस्लिम एकता को बल दिया।
• असहयोग आंदोलन (1920) में वाराणसी, इलाहाबाद और गोरखपुर सक्रिय केंद्र बने।
• चौरी-चौरा की घटना (1922) यहीं घटी, जिसने आंदोलन की दिशा बदली।
• सविनय अवज्ञा आंदोलन में उत्तर प्रदेश के किसानों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
• नेताजी सुभाषचंद्र बोस और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं का संबंध इस प्रदेश से था।
• क्रांतिकारी संगठनों — हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) — की गतिविधियाँ कानपुर और इलाहाबाद में केंद्रित थीं।
• ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (1942) में बलिया ने स्वतंत्र सरकार बनाकर उदाहरण प्रस्तुत किया।

निष्कर्ष (Conclusion – 2 lines):
उत्तर प्रदेश ने स्वतंत्रता संग्राम को जन-आंदोलन का रूप दिया। इसकी भूमिका न केवल नेतृत्वकारी रही, बल्कि इसने भारतीय राष्ट्रवाद को स्थायी आधार प्रदान किया।

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Discuss the causes for the rise of the towns in ancient Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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प्राचीन उत्तर प्रदेश में नगरों के उदय के कारणों की चर्चा कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

प्राचीन उत्तर प्रदेश भारत की सभ्यता का प्रमुख केंद्र रहा है जहाँ नगरों (Cities) का विकास सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक कारणों से हुआ। गंगा–घाटी की उपजाऊ भूमि, व्यापारिक मार्गों और राजनीतिक स्थिरता ने नगरों के उत्थान में भूमिका निभाई। इन नगरों ने भारतीय संस्कृति, शासन और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।

मुख्य कारण:

• गंगा और यमुना जैसी नदियों के किनारे उपजाऊ भूमि ने कृषि उत्पादन को बढ़ाया।

• अधिशेष कृषि उत्पादन ने व्यापार और शिल्प के विकास को प्रेरित किया।

• व्यापारिक मार्गों और नदियों ने आंतरिक व बाहरी व्यापार को बढ़ावा दिया।

• लोहे के उपकरणों के प्रयोग से कृषि और निर्माण कार्य अधिक प्रभावी हुए।

• राजनीतिक स्थिरता और शक्तिशाली जनपदों का उदय हुआ, जैसे कोशल, काशी, मगध।

• धार्मिक केंद्रों (जैसे श्रावस्ती, सारनाथ) के कारण लोगों का आवागमन बढ़ा।

• शिल्पकारों और व्यापारियों के समूह (गिल्ड) नगरों में बसने लगे।

• मुद्रा प्रचलन ने व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाया।

• शिक्षा केंद्रों (जैसे तक्षशिला, वाराणसी) ने सांस्कृतिक प्रतिष्ठा बढ़ाई।

• सुरक्षा हेतु नगरों के चारों ओर दीवारें और द्वार बनाए गए।

• स्थानीय शासन प्रणाली (नगरपालिका रूप) ने प्रशासनिक सुविधा प्रदान की।

• सामाजिक विविधता और शहरी जीवन शैली का विकास हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion ):

प्राचीन उत्तर प्रदेश में नगरों का उदय आर्थिक, धार्मिक और भौगोलिक कारणों से हुआ। ये नगर आगे चलकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति के प्रमुख केंद्र बने।

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What are the salient features of the architecture of Uttar Pradesh? Describe its key elements and styles.(12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश की वास्तुकला की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ? इसके प्रमुख तत्त्वों और शैलियों का वर्णन कीजिए ।

Ans:  परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश की वास्तुकला (Architecture) भारतीय कला और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यहाँ की इमारतें विभिन्न कालों — मौर्य, गुप्त, मुगल और ब्रिटिश — की स्थापत्य शैली को दर्शाती हैं। यह क्षेत्र धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है।

मुख्य विशेषताएँ और तत्व:

• मौर्य काल में अशोक स्तंभ और स्तूप जैसे स्थापत्य का विकास हुआ (जैसे सारनाथ स्तूप)।

• गुप्त काल में मंदिर निर्माण की उत्कृष्ट परंपरा आरंभ हुई — सादगी और संतुलन इसका आधार था।

• मुगल काल में लाल पत्थर और संगमरमर का व्यापक उपयोग हुआ।

• गुम्बद, मेहराब और मीनारें इस काल की प्रमुख पहचान बनीं।

• लखनऊ की नवाबी वास्तुकला में फारसी, मुगल और यूरोपीय प्रभाव देखा जाता है।

• बड़ा इमामबाड़ा और रूमी दरवाज़ा इसके श्रेष्ठ उदाहरण हैं।

• काशी, अयोध्या और मथुरा में धार्मिक वास्तुकला का उत्कर्ष देखने को मिलता है।

• ब्रिटिश काल में औपनिवेशिक भवन जैसे इलाहाबाद हाईकोर्ट और कचहरी बने।

• मंदिर वास्तुकला में नागर शैली प्रमुख रही।

• राजसी इमारतों में नक्काशी, झरोखे और जालियों का प्रयोग हुआ।

• जल संरचनाएँ (घाट, कुएँ, बावड़ियाँ) स्थानीय जीवन का अभिन्न हिस्सा थीं।

• स्थापत्य में सौंदर्य, धर्म और उपयोगिता का समन्वय देखने को मिलता है।

निष्कर्ष (Conclusion ):

उत्तर प्रदेश की वास्तुकला भारतीय इतिहास का जीवंत प्रतिबिंब है। यह न केवल कला की परंपरा बल्कि सांस्कृतिक एकता और विविधता का प्रतीक भी है।

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