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Highlight the greater possibilities of tourism in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश में पर्यटन की वृहत्तर संभावनाओं पर प्रकाश डालिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश भारत का सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध राज्य है। यहाँ के विविध पर्यटन स्थलों में आध्यात्मिकता, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और वैश्विक पहचान को सशक्त बनाने की क्षमता रखता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) धार्मिक पर्यटन: काशी, अयोध्या, मथुरा, वृंदावन और प्रयागराज जैसे तीर्थस्थल करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।

(2) ऐतिहासिक पर्यटन: आगरा का ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, झाँसी किला जैसे स्थलों से समृद्ध ऐतिहासिक विरासत झलकती है।

(3) सांस्कृतिक पर्यटन: वाराणसी के घाट, लोकनृत्य, संगीत और कुंभ जैसे आयोजन विश्व प्रसिद्ध हैं।

(4) पारिस्थितिक पर्यटन: दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और चंद्रप्रभा अभयारण्य प्राकृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित करते हैं।

(5) आध्यात्मिक सर्किट विकास: रामायण सर्किट, बुद्ध सर्किट जैसी परियोजनाएँ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं।

(6) आर्थिक योगदान: पर्यटन से राज्य के राजस्व और रोजगार सृजन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

(7) चुनौतियाँ: आधारभूत संरचना, स्वच्छता और सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

पर्यटन उत्तर प्रदेश की आर्थिक उन्नति और सांस्कृतिक प्रसार का प्रभावी माध्यम है। सुव्यवस्थित प्रबंधन और प्रचार के माध्यम से राज्य विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बन सकता है।

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Describe the major stages in the formulation of Gram Panchayat Development Plan (GPDP) in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत विकास योजना (जी.पी.डी.पी.) के निर्माण के प्रमुख चरणों का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan – GPDP) ग्रामीण विकास का एक सहभागी एवं विकेन्द्रीकृत मॉडल है। यह योजना संविधान के 73वें संशोधन और पंचायती राज व्यवस्था की भावना पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्राम स्तर पर लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों की योजना बनाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) स्थिति विश्लेषण (Situation Analysis): ग्राम की सामाजिक, आर्थिक और भौतिक स्थिति का सर्वेक्षण किया जाता है।

(2) ग्राम सभा का आयोजन: ग्रामवासियों की भागीदारी से प्राथमिक आवश्यकताओं और समस्याओं की पहचान की जाती है।

(3) संसाधनों का आकलन: स्थानीय, राज्य और केंद्र स्तर पर उपलब्ध वित्तीय व भौतिक संसाधनों का निर्धारण किया जाता है।

(4) प्राथमिकता निर्धारण: ग्रामसभा द्वारा समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर क्रमबद्ध किया जाता है।

(5) योजना निर्माण: प्रत्येक क्षेत्र (शिक्षा, स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता, कृषि आदि) के लिए ठोस योजनाएँ बनाई जाती हैं।

(6) अनुमोदन और समन्वय: ग्राम पंचायत द्वारा तैयार योजना को ब्लॉक व जिला स्तर पर अनुमोदित किया जाता है।

(7) कार्यान्वयन एवं मूल्यांकन: स्वीकृत योजना के अनुसार कार्य संपन्न किए जाते हैं और समय-समय पर निगरानी की जाती है।

निष्कर्ष (Conclusion ):

जी.पी.डी.पी. ग्रामीण विकास को स्थानीय जरूरतों से जोड़कर सहभागी शासन को सशक्त बनाती है। यह योजना “गाँव की योजना, गाँव के लोग” की अवधारणा को साकार करती है।

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Discuss the nature of regional parties in Uttar Pradesh. Throw light on their importance in the politics of state. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय दलों की प्रकृति की विवेचना कीजिए । राज्य की राजनीति में उनके महत्व पर प्रकाश डालिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्षेत्रीय दलों (Regional Parties) की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है। इन दलों ने राज्य की सामाजिक, आर्थिक और जातीय विविधताओं को राजनीतिक स्वर प्रदान किया है। इनकी उपस्थिति ने राज्य में सत्ता संतुलन और लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को गहराई दी है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • क्षेत्रीय दल राज्य-विशिष्ट मुद्दों, जैसे—जाति, क्षेत्रीय असमानता और सामाजिक न्याय पर केंद्रित रहते हैं।
  • समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, अपना दल आदि प्रमुख क्षेत्रीय दल हैं।
  • इन दलों ने राष्ट्रीय दलों के एकाधिकार को चुनौती दी है।
  • सामाजिक न्याय, दलित सशक्तिकरण और पिछड़ों की भागीदारी को इन्होंने प्रमुखता दी।
  • गठबंधन राजनीति की परंपरा को बल प्रदान किया, जिससे बहुदलीय लोकतंत्र मजबूत हुआ।
  • इन दलों ने स्थानीय मुद्दों को राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का कार्य किया।
  • हालांकि, इनकी नीतियाँ कभी-कभी जातीय या वोट बैंक आधारित राजनीति तक सीमित रह जाती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

क्षेत्रीय दल उत्तर प्रदेश की राजनीति में लोकतांत्रिक विविधता और सामाजिक प्रतिनिधित्व के प्रतीक हैं। फिर भी, इनके दीर्घकालिक प्रभाव के लिए विकासोन्मुख और समावेशी राजनीति आवश्यक है।

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Critically examine the process of appointment of the Advocate General and his functions in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश में महाधिवक्ता के नियुक्ति की प्रक्रिया तथा उसके कार्यों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश में महाधिवक्ता (Advocate General) राज्य सरकार का सर्वोच्च विधिक अधिकारी होता है, जो राज्य की विधिक नीतियों और निर्णयों में परामर्श प्रदान करता है। इस पद की व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के अंतर्गत की गई है। यह पद राज्य शासन की विधिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने में सहायक है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है।
  • नियुक्त व्यक्ति उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता है।
  • वह राज्य सरकार को विधिक मामलों में परामर्श देता और न्यायालय में उसका प्रतिनिधित्व करता है।
  • कार्यकाल संविधान में निर्धारित नहीं है; वह राज्यपाल की इच्छा पर पदस्थ रहता है।
  • उसे वेतन व सुविधाएँ राज्य सरकार तय करती है।
  • वह विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकता है परंतु मतदान नहीं कर सकता।
  • आलोचनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो उसकी स्वतंत्रता सीमित है, क्योंकि उसका पद कार्यपालिका पर निर्भर है।

निष्कर्ष (Conclusion):

महाधिवक्ता राज्य की विधिक व्यवस्था का आधारस्तंभ है, जो शासन को संवैधानिक मर्यादाओं में रखता है।

फिर भी, उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए संवैधानिक सुरक्षा को और सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है।

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What are the major objectives and target group in Innovation Promotion Programmes of the Council of Science and Technology in Uttar Pradesh? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

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उत्तर प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रमों के प्रमुख उद्देश्य एवं लक्ष्य समूह क्या हैं ?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (Council of Science and Technology, Uttar Pradesh – CSTUP) राज्य में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था है। यह परिषद विभिन्न नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रमों के माध्यम से वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी उद्यमिता और शोध भावना को प्रोत्साहित करती है। इसका उद्देश्य विज्ञान को समाजोपयोगी बनाकर राज्य के सतत विकास में योगदान देना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • मुख्य उद्देश्य: राज्य में नवाचार की संस्कृति स्थापित करना और विज्ञान को स्थानीय जरूरतों से जोड़ना।
  • नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रम (Innovation Promotion Programme) के तहत युवाओं को नए विचार विकसित करने हेतु प्रेरित किया जाता है।
  • स्कूल और कॉलेज स्तर पर वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतियोगिताएँ और मेले आयोजित किए जाते हैं।
  • युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम (Young Scientist Scheme) के तहत शोध आधारित नवाचारों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
  • उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से स्टार्टअप्स और तकनीकी नवाचारों को प्रोत्साहन मिलता है।
  • महिला नवाचारकर्ता और शोधार्थी को विशेष प्राथमिकता देकर समान अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • ग्रामीण नवाचार मिशन के माध्यम से स्थानीय समस्याओं के लिए सस्ती तकनीकी समाधान खोजे जाते हैं।
  • प्रदर्शनी, कार्यशालाएँ और विज्ञान मेले आयोजित कर छात्रों में प्रयोगात्मक कौशल बढ़ाया जाता है।
  • संस्थान-उद्योग साझेदारी से अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग की दिशा में ले जाया जाता है।
  • नवाचार निधि (Innovation Fund) के माध्यम से उपयोगी शोध परियोजनाओं को अनुदान दिया जाता है।
  • मुख्य लक्ष्य समूह: छात्र, युवा वैज्ञानिक, शोधार्थी, नवाचारकर्ता, स्टार्टअप संस्थापक और ग्रामीण तकनीकी उद्यमी।
  • अंतिम लक्ष्य: विज्ञान एवं तकनीक को विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का साधन बनाना।

निष्कर्ष (Conclusion):

CSTUP के नवाचार प्रोत्साहन कार्यक्रम विज्ञान और तकनीक को समाज के निकट लाने का प्रभावी प्रयास हैं। इनसे राज्य में शोध, उद्यमिता और नवाचार की नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।

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Analyse the importance of minerals in industrial development of Bundelkhand region of Uttar Pradesh.[Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के औद्योगिक विकास में खनिजों के महत्व का विश्लेषण करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश का बुन्देलखण्ड क्षेत्र (झांसी, महोबा, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर आदि) खनिज संपदाओं से समृद्ध है। यह क्षेत्र राज्य के औद्योगिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ पाए जाने वाले खनिज अनेक उद्योगों की आधारशिला हैं। खनिज संसाधनों ने इस क्षेत्र में रोजगार, निवेश और आधारभूत संरचना के विकास को गति दी है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • ग्रेनाइट, बालू पत्थर और डोलोमाइट बुन्देलखण्ड के प्रमुख खनिज हैं, जिनका उपयोग निर्माण और सजावटी उद्योगों में होता है।
  • महोबा का ग्रेनाइट अपनी गुणवत्ता और चमक के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रसिद्ध है।
  • लाइमस्टोन (चूना पत्थर) से सीमेंट उद्योग को कच्चा माल प्राप्त होता है, जिससे क्षेत्र में सीमेंट उद्योग विकसित हुआ है।
  • फॉस्फोराइट और क्वार्ट्जाइट जैसे खनिजों से रासायनिक और ग्लास उद्योगों को बल मिला है।
  • बांदा और चित्रकूट में पाए जाने वाले बालू पत्थर (Sandstone) से भवन निर्माण और मूर्तिकला उद्योग को प्रोत्साहन मिला।
  • खनिज आधारित लघु उद्योगों (Stone cutting, polishing, tiles manufacturing) का विकास तेजी से हुआ है।
  • खनन गतिविधियों से स्थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
  • सड़क और परिवहन अवसंरचना में सुधार हुआ है ताकि खनिजों का परिवहन सुचारू रूप से हो सके।
  • खनिज निर्यात से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह और औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिला।
  • खनिज नीति और पारदर्शी ई-नीलामी व्यवस्था ने निजी निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया।
  • खनन से पर्यावरणीय चुनौतियाँ जैसे भू-क्षरण और जल स्रोतों पर दबाव भी उत्पन्न हुए हैं, जिनके लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
  • भविष्य की संभावना: खनिज-आधारित औद्योगिक क्लस्टर और प्रोसेसिंग यूनिट्स से बुन्देलखण्ड को औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

बुन्देलखण्ड के खनिज न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था बल्कि उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास के प्रमुख प्रेरक तत्व हैं। संतुलित खनन और पर्यावरणीय संरक्षण के साथ यह क्षेत्र राज्य के सतत औद्योगिक विकास का मजबूत आधार बन सकता है।

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Explain the ecological importance of the Wildlife Sanctuaries in the Tarai region of Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

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उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के वन्यजीव अभयारण्यों के पारिस्थितिक महत्व की व्याख्या करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

उत्तर प्रदेश का तराई क्षेत्र राज्य के उत्तरी भाग में स्थित है, जो नेपाल की सीमा से लगा हुआ अत्यंत समृद्ध जैव-विविधता वाला क्षेत्र है। यहाँ के वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) न केवल दुर्लभ जीव-जंतुओं का आश्रय स्थल हैं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इन अभयारण्यों का संरक्षण राज्य की पारिस्थितिकी, जल स्रोतों और जलवायु स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • दुधवा राष्ट्रीय उद्यान (लखीमपुर खीरी): बंगाल टाइगर, एक सींग वाले गैंडे और बारहसिंगा के संरक्षण का प्रमुख केंद्र।
  • कटारनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य (बहराइच): गंगा नदी की सहायक नदियों के किनारे स्थित, जलीय पारिस्थितिकी के संरक्षण में महत्वपूर्ण।
  • किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य: दुधवा टाइगर रिज़र्व का हिस्सा, जिसमें घासभूमि और दलदली क्षेत्रों की समृद्ध जैव विविधता है।
  • पीलीभीत टाइगर रिज़र्व: बाघों के प्राकृतिक निवास स्थल के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध।
  • तराई क्षेत्र के जंगल गंगा और घाघरा जैसी नदियों के जलस्रोतों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • दलदली क्षेत्र (Wetlands) यहाँ की जलवायु को संतुलित करते हैं और सूक्ष्म पारिस्थितिकी तंत्र को सहारा देते हैं।
  • मृदा संरक्षण: इन अभयारण्यों के वृक्ष आवरण से कटाव रुकता है और भू-जल पुनर्भरण होता है।
  • कार्बन सिंक के रूप में योगदान: तराई के वन कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करते हैं।
  • पक्षी विविधता: यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए शीतकालीन आश्रय स्थल के रूप में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • स्थानीय समुदायों की आजीविका: ईको-टूरिज़्म और वनों पर आधारित उत्पादों से ग्रामीणों को रोजगार मिलता है।
  • जैविक संतुलन: शिकारी और शिकार प्रजातियों के सह-अस्तित्व से प्राकृतिक संतुलन बना रहता है।
  • संरक्षण की चुनौतियाँ: अवैध कटाई, मानव-वन्यजीव संघर्ष और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएँ जैव विविधता के लिए खतरा हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

तराई क्षेत्र के वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश की पारिस्थितिक धरोहर हैं, जो जैव विविधता और जलवायु स्थिरता दोनों के लिए अनमोल हैं। इनका संरक्षण न केवल पर्यावरणीय सुरक्षा बल्कि मानव जीवन की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।

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Present an account of the missions included in the State Action Plan on Climate Change in Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

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उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्य योजना में शामिल मिशनों का विवरण प्रस्तुत करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) वर्तमान समय की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती है, जिसका प्रभाव उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर विशेष रूप से देखा जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (State Action Plan on Climate Change – SAPCC) तैयार की है। इस योजना में विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशेष “मिशन आधारित रणनीतियाँ” अपनाई गई हैं, जिनका उद्देश्य पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास सुनिश्चित करना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • सौर ऊर्जा मिशन: राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देकर जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाना।
  • कृषि एवं खाद्य सुरक्षा मिशन: जलवायु-सहिष्णु फसलों, सूक्ष्म सिंचाई और मृदा संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा।
  • जल संसाधन मिशन: जल संरक्षण, पुनर्भरण और सिंचाई दक्षता सुधार के लिए योजनाएँ लागू की गईं।
  • वन एवं जैव विविधता मिशन: वृक्षारोपण, सामाजिक-वानिकी और वन आवरण बढ़ाने पर बल।
  • ऊर्जा दक्षता मिशन: उद्योगों, भवनों और परिवहन क्षेत्र में ऊर्जा दक्ष तकनीकों को प्रोत्साहन।
  • शहरी विकास मिशन: स्मार्ट सिटी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और हरित परिवहन को बढ़ावा।
  • स्वास्थ्य मिशन: जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न बीमारियों जैसे हीट स्ट्रोक और मलेरिया की रोकथाम हेतु नीति।
  • औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण मिशन: प्रदूषणकारी इकाइयों की निगरानी और स्वच्छ उत्पादन तकनीकों को प्रोत्साहन।
  • परिवहन मिशन: इलेक्ट्रिक वाहनों, सार्वजनिक परिवहन और स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा।
  • जलवायु जागरूकता मिशन: विद्यालयों, कॉलेजों और पंचायतों में जन-जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन।
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण मिशन: बाढ़, सूखा और अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाओं से निपटने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित।
  • अनुसंधान और नीति मिशन: जलवायु परिवर्तन पर अनुसंधान को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक नीति निर्माण का आधार तैयार।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश की जलवायु कार्य योजना राज्य को पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण प्रदान करती है। इन मिशनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य सतत विकास और जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) की दिशा में सशक्त रूप से आगे बढ़ रहा है।

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Outline the importance of the Meteorological Centre, Lucknow with reference to weather forecasts in Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

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उत्तर प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान के संदर्भ में मौसम विज्ञान केन्द्र, लखनऊ के महत्व को रेखांकित करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecasting) कृषि, आपदा प्रबंधन और जनजीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ (Meteorological Centre, Lucknow) भारतीय मौसम विभाग का प्रमुख क्षेत्रीय केंद्र है। यह केंद्र राज्य में सटीक मौसम पूर्वानुमान, चेतावनी प्रणाली और जलवायु विश्लेषण में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।

मुख्य बिंदु (12 Important Bullet Points):

  • स्थापना: यह केंद्र भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अधीन कार्य करता है और उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के मौसम डेटा का संकलन करता है।
  • सटीक मौसम पूर्वानुमान: तापमान, वर्षा, आर्द्रता और वायु गति जैसे तत्वों का वास्तविक समय में विश्लेषण करता है।
  • कृषि मौसम सेवा: किसानों के लिए साप्ताहिक पूर्वानुमान और फसल सलाह जारी की जाती है, जिससे कृषि निर्णयों में मदद मिलती है।
  • आपदा चेतावनी प्रणाली: बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि और शीतलहर जैसी प्राकृतिक घटनाओं की समय पर चेतावनी प्रदान करता है।
  • डॉप्लर वेदर रडार (DWR): लखनऊ में स्थापित आधुनिक रडार से वर्षा और तूफानों की सटीक निगरानी की जाती है।
  • राज्य सरकार के साथ समन्वय: आपदा प्रबंधन विभाग और कृषि विभाग को समय पर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती है।
  • शहरी मौसम निगरानी: वायु गुणवत्ता और तापमान असंतुलन पर निगरानी रखकर नागरिकों को सचेत करता है।
  • जलवायु परिवर्तन अध्ययन: दीर्घकालिक जलवायु डेटा का विश्लेषण कर राज्य में बदलते मौसमी रुझानों की पहचान।
  • मौसम एप और SMS सेवाएँ: किसानों और नागरिकों को मोबाइल संदेशों के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान पहुँचाया जाता है।
  • एविएशन सेवाएँ: हवाई अड्डों को उड़ान सुरक्षा हेतु आवश्यक मौसम जानकारी प्रदान करता है।
  • शोध और प्रशिक्षण केंद्र: छात्रों और वैज्ञानिकों के लिए मौसम संबंधी प्रशिक्षण और अध्ययन की सुविधा।
  • भविष्य की दिशा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उपग्रह आधारित डेटा से और अधिक सटीक पूर्वानुमान की दिशा में कार्य जारी है।

निष्कर्ष (Conclusion):

मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ उत्तर प्रदेश के मौसम पूर्वानुमान तंत्र का आधार स्तंभ है। यह न केवल कृषि और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाता है, बल्कि राज्य की जलवायु नीति निर्माण में भी निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

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Critically analyse the current initiatives and future prospects for bio-energy development in Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-6

उत्तर प्रदेश में जैव-ऊर्जा विकास के लिए वर्तमान पहलों और भविष्य की संभावनाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

जैव-ऊर्जा (Bio-Energy) एक नवीकरणीय और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोत है, जो कृषि अपशिष्ट, गोबर और जैविक पदार्थों से प्राप्त होती है। उत्तर प्रदेश, जो कृषि प्रधान राज्य है, जैव-ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में उभर रहा है। राज्य सरकार ने इस क्षेत्र को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास से जोड़ने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • उत्तर प्रदेश जैव-ऊर्जा नीति 2022 लागू की गई, जिसका उद्देश्य जैव-गैस, बायो-सीएनजी और एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
  • कृषि अपशिष्ट एवं गोबर आधारित संयंत्रों की स्थापना हेतु निवेशकों को भूमि, कर रियायतें और पूंजी अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
  • एथेनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी है — गन्ना मोलासेस और मक्का आधारित इकाइयों को प्रोत्साहन।
  • बायो-सीएनजी संयंत्रों की स्थापना लखनऊ, वाराणसी, कानपुर और गाजियाबाद जैसे नगरों में की जा रही है।
  • कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर संचालित किया जा रहा है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा निवेश नीति के तहत विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ऑनलाइन सिंगल-विंडो सिस्टम लागू।
  • स्वच्छ भारत मिशन और गोबर-धन योजना के तहत ग्राम स्तर पर छोटे बायोगैस प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
  • किसानों को जैव-ऊर्जा फसलों जैसे गन्ना, मक्का और जट्रोफा की खेती के लिए प्रोत्साहन।
  • राज्य ऊर्जा विकास एजेंसी (UPNEDA) जैव-ऊर्जा परियोजनाओं की निगरानी और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है।
  • शहरों के ठोस अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन हेतु “वेस्ट टू एनर्जी” परियोजनाओं को बढ़ावा।
  • भविष्य की रणनीति में 2030 तक 1000 मेगावाट जैव-ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा गया है।
  • चुनौतियाँ – तकनीकी लागत अधिक, अपशिष्ट संग्रहण की समस्या और निवेशकों के लिए व्यवहारिक कठिनाइयाँ अभी बनी हुई हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

जैव-ऊर्जा विकास से उत्तर प्रदेश को ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। हालाँकि, इसकी दीर्घकालिक सफलता के लिए तकनीकी नवाचार, वित्तीय समर्थन और ठोस नीति क्रियान्वयन आवश्यक हैं।

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