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Indian society is known for its uniqueness and cultural diversity. Discuss. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारतीय समाज अपनी विशिष्टता और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है । चर्चा कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

भारतीय समाज विश्व के सबसे प्राचीन और विविधतापूर्ण समाजों में से एक है। यहाँ अनेक धर्म, भाषाएँ, जातियाँ और परम्पराएँ एक साथ पनपी हैं। यह विविधता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशिष्टता और शक्ति मानी जाती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • धार्मिक विविधता: भारत में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि अनेक धर्म शान्तिपूर्वक सह-अस्तित्व में हैं।
  • भाषाई विविधता: संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ मान्यता प्राप्त हैं।
  • सांस्कृतिक समन्वय: आर्य, द्रविड़, मुगल और यूरोपीय प्रभावों से भारतीय संस्कृति में अद्भुत मिश्रण हुआ है।
  • भौगोलिक विविधता: हिमालय से लेकर समुद्र तक विभिन्न जलवायु और जीवनशैली ने क्षेत्रीय संस्कृतियों को जन्म दिया।
  • सामाजिक संगठन: जाति, वर्ग और पेशों के आधार पर बना समाज समय के साथ बदलता और विकसित होता रहा।
  • परिवार प्रणाली: संयुक्त परिवार भारतीय समाज की पहचान है, जहाँ सामूहिकता और सहयोग को महत्व दिया जाता है।
  • त्योहारों की बहुलता: दीवाली, ईद, होली, पोंगल, बिहू आदि उत्सव राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हैं।
  • पहनावा और खान-पान की विविधता: प्रत्येक क्षेत्र का वस्त्र, भोजन और रहन-सहन अलग होते हुए भी भारतीयता से जुड़ा है।
  • कला और संगीत: भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी जैसे नृत्य रूप और शास्त्रीय संगीत परंपराएँ विविधता की पहचान हैं।
  • लोक परम्पराएँ: लोकगीत, लोककथाएँ और लोकनृत्य ग्रामीण भारत की आत्मा हैं।
  • सामाजिक सहिष्णुता: विविधताओं के बावजूद आपसी सम्मान और सहअस्तित्व भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता है।
  • एकता में विविधता: यही भारतीय संस्कृति की मूल भावना है, जिसने देश को सदियों से एक सूत्र में बाँधे रखा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार भारतीय समाज अपनी विविधता, सहिष्णुता और समन्वय के कारण अद्वितीय है। यही विशेषताएँ भारत को “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना का जीवंत उदाहरण बनाती हैं।

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What are the main features of Sangam Period Culture? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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संगमकालीन संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ क्या है ?

Ans: भूमिका (Introduction):

संगमकाल (लगभग 300 ई.पू. से 300 ई.) दक्षिण भारत के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण काल था। इस समय तमिल भाषा, साहित्य, समाज और संस्कृति का अद्भुत विकास हुआ। संगमकालीन संस्कृति जीवन के विविध पक्षों – धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक – का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • साहित्यिक उत्कर्ष: ‘संगम साहित्य’ में प्रेम, युद्ध, नीति, और समाज के वास्तविक चित्रण मिलते हैं।
  • भाषा का विकास: तमिल भाषा का शुद्ध और परिष्कृत रूप इसी काल में उभरा।
  • राजनीतिक जीवन: छोटे-छोटे चेर, चोल और पांड्य राज्यों का शासन प्रमुख था।
  • समाज व्यवस्था: समाज जातिगत न होकर व्यवसाय और गुणों पर आधारित था।
  • महिलाओं की स्थिति: महिलाओं को शिक्षा और सम्मान प्राप्त था; अव्वैयार जैसी कवयित्रियाँ प्रसिद्ध थीं।
  • आर्थिक जीवन: कृषि, व्यापार और समुद्री वाणिज्य अत्यंत उन्नत था; रोम तक व्यापारिक सम्बन्ध थे।
  • धार्मिक जीवन: लोग शैव, वैष्णव, मुरुगन और मातृदेवी की उपासना करते थे।
  • नैतिक मूल्य: वीरता, प्रेम और दानशीलता को सर्वोच्च गुण माना गया।
  • कला और स्थापत्य: संगीत, नृत्य और चित्रकला का उल्लेख संगम ग्रंथों में मिलता है।
  • शहरीकरण: नगरों में सुव्यवस्थित बाजार, सड़कें और सामाजिक संस्थाएँ विकसित थीं।
  • लोक संस्कृति: उत्सव, नृत्य और लोकगीत सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग थे।
  • राजनयिक सम्बन्ध: विदेशी व्यापार और सांस्कृतिक सम्पर्क से समाज उदार व प्रगतिशील बना।

निष्कर्ष (Conclusion): संगमकालीन संस्कृति ने दक्षिण भारत को साहित्य, कला और सामाजिक चेतना का केन्द्र बनाया। यह काल भारतीय संस्कृति के स्थानीय और सार्वभौमिक मूल्यों के संगम का प्रतीक माना जाता है।

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Outline the development of revolutionary movement in Bengal. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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बंगाल में क्रान्तिकारी आन्दोलन के विकास को रेखांकित कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

बंगाल भारत में क्रान्तिकारी आन्दोलन का सबसे सशक्त केन्द्र रहा। प्रारम्भ में यह आन्दोलन राजनीतिक असंतोष से प्रेरित था, परंतु शीघ्र ही यह सशस्त्र स्वतंत्रता संग्राम में बदल गया। बंगाल के युवाओं ने संगठन, बलिदान और साहस से आज़ादी के संघर्ष को नई दिशा दी।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • 1905 में बंग-भंग (Partition of Bengal) के विरोध ने क्रान्तिकारी गतिविधियों की भूमि तैयार की।
  • अनुशीलन समिति (1906) की स्थापना ने संगठित क्रान्तिकारी आन्दोलन की शुरुआत की।
  • अरविन्द घोष और बारिन्द्र घोष ने युवाओं को देशभक्ति और सशस्त्र क्रान्ति के लिए प्रेरित किया।
  • युगान्तर और संध्या जैसे पत्रों ने जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1908 का अलीपुर बम काण्डबंगाल के आन्दोलन का निर्णायक मोड़ बना।
  • खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी जैसे युवाओं ने बलिदान से राष्ट्र को झकझोर दिया।
  • 1912 का हार्डिंग बम काण्ड ने आन्दोलन को अखिल भारतीय स्वरूप दिया।
  • प्रथम विश्वयुद्ध के समय जर्मनी के सहयोग से गदर व अनुशीलन समिति ने विद्रोह की योजना बनाई।
  • 1915 के बाद आन्दोलन भूमिगत होकर गुप्त संगठनों में जारी रहा।
  • रासबिहारी बोस और जतिन मुखर्जी (बाघा जतिन) ने राष्ट्रीय क्रान्ति की रूपरेखा तैयार की।
  • 1920 के बाद गाँधीजी के असहयोग आन्दोलन से कई क्रान्तिकारी राष्ट्रीय धारा में जुड़े।
  • बंगाल के इस आन्दोलन ने अगली पीढ़ी के क्रान्तिकारियों (जैसे भगत सिंह, चन्द्रशेखर आज़ाद) को प्रेरित किया।

निष्कर्ष (Conclusion):

बंगाल का क्रान्तिकारी आन्दोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा था। इसने पूरे देश में देशभक्ति, साहस और बलिदान की लौ प्रज्वलित कर स्वतंत्रता की नींव को सुदृढ़ किया।

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The French Revolution was a great result of enlightenment period.” – Comment. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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“फ्रांस की क्रान्ति प्रबोधनकाल का सुपरिणाम थी ।” – टिप्पणी कीजिए । “

Ans: भूमिका (Introduction):

फ्रांस की क्रांति (1789) यूरोप के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक थी। यह केवल एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि विचारों की क्रांति भी थी। इस क्रांति की जड़ें प्रबोधनकाल (Age of Enlightenment) के उन विचारों में थीं जिन्होंने स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व का संदेश दिया।

मुख्य बिंदु ( Important Points):

  • प्रबोधनकाल (Enlightenment) ने मानव बुद्धि, तर्क और विज्ञान को महत्व देने की प्रेरणा दी।
  • दार्शनिकों जैसे रूसो (Rousseau), वोल्टेयर (Voltaire) और मोंतेस्क्यू (Montesquieu) ने निरंकुश राजतंत्र की आलोचना की।
  • रूसो के “Social Contract” सिद्धांत ने जनसत्ता (sovereignty of people) की अवधारणा को जन्म दिया।
  • मोंतेस्क्यू ने शासन में शक्ति-विभाजन (separation of powers) का विचार दिया, जो बाद में लोकतंत्र की नींव बना।
  • वोल्टेयर ने धार्मिक असहिष्णुता और चर्च के प्रभुत्व का विरोध किया।
  • तर्क और विवेक को प्रबोधनकाल ने पारंपरिक मान्यताओं पर श्रेष्ठ ठहराया।
  • फ्रांस की जनता में समानता और न्याय की भावना प्रबोधन विचारों से जागी।
  • इन विचारों ने राजा लुई 16वें की निरंकुश सत्ता को चुनौती देने का साहस दिया।
  • मुद्रण और प्रकाशन के विकास से प्रबोधन के विचार जन-जन तक पहुँचे।
  • क्रांति के घोषणापत्र “मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा” में प्रबोधन विचार झलकते हैं।
  • क्रांति के बाद धर्मनिरपेक्षता और नागरिक अधिकारों की स्थापना प्रबोधन की उपलब्धि थी।
  • इस प्रकार, प्रबोधनकाल की वैचारिक चेतना ही क्रांति का बौद्धिक आधार बनी।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः फ्रांस की क्रांति केवल राजनीतिक विद्रोह नहीं, बल्कि विचारों का विस्फोट थी। यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि फ्रांस की क्रांति प्रबोधनकाल का प्रत्यक्ष सुपरिणाम थी, जिसने आधुनिक लोकतांत्रिक युग की नींव रखी।

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Write a note on seismic zones of India. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारत के भूकम्पीय क्षेत्रों पर टिप्पणी लिखिए ।

Ans: प्रस्तावना:

भारत भूकम्पीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील देश है क्योंकि यह भारतीय प्लेट (Indian Plate) और यूरेशियाई प्लेट (Eurasian Plate) के संधि क्षेत्र पर स्थित है। इस कारण देश के विभिन्न भागों में भूकम्प की तीव्रता और आवृत्ति भिन्न-भिन्न पाई जाती है।

मुख्य बिंदु:

  • भूकम्पीय विभाजन: भारत को भूकम्प संभाव्यता के आधार पर पाँच क्षेत्रों (Zone I से V) में बाँटा गया है।
  • सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र (Zone V): जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर-पूर्वी राज्य और अंडमान-निकोबार द्वीप।
  • उच्च संवेदनशील क्षेत्र (Zone IV): दिल्ली, बिहार, सिक्किम, पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग, गुजरात का कुछ हिस्सा।
  • मध्यम क्षेत्र (Zone III): महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा और दक्षिण राजस्थान के कुछ भाग।
  • कम संवेदनशील क्षेत्र (Zone II): दक्कन पठार और दक्षिणी भारत के अधिकांश क्षेत्र।
  • कारण: प्लेट विवर्तनिकी, भ्रंश रेखाएँ और पर्वत निर्माण की प्रक्रियाएँ।
  • निवारण उपाय: भूकम्परोधी भवन निर्माण और जन-जागरूकता आवश्यक है।

उपसंहार:

भारत के भूकम्पीय क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से विविध हैं। उचित योजना और तकनीकी उपायों से भूकम्प के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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What is smart city? Describe its main characteristics. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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स्मार्ट सिटी क्या है ? इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

स्मार्ट सिटी (Smart City) वह आधुनिक शहरी क्षेत्र है जहाँ सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) और नवाचार के माध्यम से नागरिकों को बेहतर जीवन-स्तर, सुशासन और सतत विकास के अवसर प्रदान किए जाते हैं। भारत में स्मार्ट सिटी मिशन 2015 में प्रारंभ किया गया था।

मुख्य विशेषताएँ:

  • स्मार्ट अवसंरचना: बेहतर सड़कों, जल आपूर्ति, बिजली और परिवहन की सुविधाएँ।
  • डिजिटल गवर्नेंस: ई-गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शी और तेज प्रशासन।
  • सतत विकास: नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान।
  • स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम: सेंसर और कैमरों से यातायात नियंत्रण व सुरक्षा।
  • कचरा प्रबंधन: स्वच्छता और अपशिष्ट पुनर्चक्रण की आधुनिक तकनीकें।
  • सार्वजनिक सुरक्षा: सीसीटीवी, स्मार्ट लाइटिंग और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली।
  • नागरिक सहभागिता: योजनाओं में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और फीडबैक प्रणाली।

उपसंहार:

स्मार्ट सिटी का उद्देश्य शहरों को तकनीकी रूप से सशक्त, पर्यावरणीय रूप से संतुलित और नागरिकों के लिए अधिक रहने योग्य बनाना है। यह भारत के शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Explain the inter relationship between climate, soils and vegetation. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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जलवायु, मृदा और वनस्पति के अन्तर्सम्बन्धों को स्पष्ट कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

जलवायु (Climate), मृदा (Soil) और वनस्पति (Vegetation) एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए प्राकृतिक घटक हैं। ये तीनों मिलकर किसी क्षेत्र की भौगोलिक विशेषता और पारिस्थितिक संतुलन को निर्धारित करते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • जलवायु का प्रभाव: तापमान और वर्षा की मात्रा यह तय करती है कि किस प्रकार की मिट्टी और वनस्पति विकसित होगी।
  • मृदा निर्माण पर जलवायु का प्रभाव: वर्षा और तापमान चट्टानों के अपक्षय (weathering) को प्रभावित करते हैं, जिससे मिट्टी बनती है।
  • वनस्पति पर मृदा का प्रभाव: मृदा की उर्वरता, नमी और बनावट पौधों की वृद्धि को नियंत्रित करती है।
  • जलवायु और वनस्पति का संबंध: आर्द्र जलवायु में सघन वन, जबकि शुष्क क्षेत्रों में झाड़ियाँ और घास पाई जाती हैं।
  • मृदा और जलवायु की पारस्परिक क्रिया: जलवायु मिट्टी को पोषक तत्व देती है, और मिट्टी वनस्पति को पोषण प्रदान करती है।
  • मानव प्रभाव: कृषि, वनों की कटाई और औद्योगिकीकरण से यह संतुलन प्रभावित होता है।
  • पारिस्थितिक संतुलन: इन तीनों का सामंजस्य जीवन और पर्यावरण की स्थिरता के लिए आवश्यक है।

उपसंहार:

इस प्रकार जलवायु, मृदा और वनस्पति एक-दूसरे के पूरक हैं। इनके संतुलित संबंध से ही पृथ्वी पर जीवन का प्राकृतिक चक्र सुचारु रूप से संचालित होता है।

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What is the use of oceans for humans? [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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मनुष्यों के लिए महासागरों का क्या उपयोग है ?

Ans: प्रस्तावना:

महासागर (Oceans) पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग घेरे हुए हैं और मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। वे न केवल जलवायु को संतुलित रखते हैं, बल्कि भोजन, व्यापार और ऊर्जा के प्रमुख स्रोत भी हैं।

मुख्य उपयोग:

  • खाद्य स्रोत: मछली, शैवाल (algae) और अन्य समुद्री जीव भोजन का प्रमुख साधन हैं।
  • खनिज संपदा: पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, नमक और मैग्नीशियम जैसी खनिजें महासागर तल से प्राप्त होती हैं।
  • परिवहन मार्ग: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का लगभग 80% हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है।
  • ऊर्जा उत्पादन: ज्वार-भाटा, तरंग और पवन से ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
  • जलवायु नियंत्रण: महासागर तापमान और वर्षा चक्र को नियंत्रित कर जलवायु संतुलन बनाए रखते हैं।
  • पर्यटन और मनोरंजन: तटीय क्षेत्र रोजगार और आय के प्रमुख केंद्र हैं।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान: महासागर जैव विविधता और पर्यावरणीय अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उपसंहार:

महासागर मानव जीवन के लिए अपरिहार्य हैं — वे हमारी अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और अस्तित्व के आधार हैं। इसलिए इनका संरक्षण मानवता की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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Describe the main characteristics of Indian culture. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारतीय संस्कृति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

भारतीय संस्कृति (Indian Culture) विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। यह विविधता में एकता, सहिष्णुता और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है। इसकी जड़ें हज़ारों वर्षों पुरानी परंपराओं और जीवन मूल्यों में निहित हैं।

मुख्य विशेषताएँ:

  • आध्यात्मिकता (Spirituality): भारतीय संस्कृति में भौतिकता से अधिक आत्मा और धर्म को महत्व दिया गया है।
  • सहनशीलता और सह-अस्तित्व: विभिन्न धर्मों, भाषाओं और जातियों के बीच सहिष्णुता का भाव।
  • विविधता में एकता: भौगोलिक, भाषाई और सामाजिक भिन्नताओं के बावजूद राष्ट्रीय एकता कायम।
  • पारिवारिक व्यवस्था: संयुक्त परिवार प्रणाली सामाजिक स्थिरता का प्रतीक रही है।
  • धर्म और नैतिकता: जीवन के हर क्षेत्र में धर्म, करुणा और सत्य का मार्गदर्शन।
  • कला और साहित्य: नृत्य, संगीत, मूर्तिकला और साहित्य में गहरी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति।
  • संस्कृति का निरंतरता भाव: परंपरा और आधुनिकता का संतुलित समावेश।

उपसंहार:

भारतीय संस्कृति मानवता, समरसता और आध्यात्मिक विकास का संदेश देती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ ही इसे विश्व में अद्वितीय और प्रेरणास्रोत बनाती हैं।

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Explain the contribution of woman’s organisation in the development of Indian rural society. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

भारतीय ग्रामीण समाज के विकास में महिला संगठनों के योगदान का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

भारतीय ग्रामीण समाज में महिलाओं की भूमिका पारंपरिक रूप से सीमित रही, परंतु महिला संगठनों (Women Organizations) ने इस स्थिति में परिवर्तन लाने का कार्य किया। इन संगठनों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर, शिक्षित और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्य बिंदु:

  • स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups – SHGs): ग्रामीण महिलाओं को लघु ऋण और उद्यमशीलता के अवसर प्रदान किए।
  • राष्ट्रीय महिला कोष (Rashtriya Mahila Kosh): महिलाओं को वित्तीय सहायता देकर आजीविका बढ़ाने में सहयोग किया।
  • सेल्फ एम्प्लॉयड वूमेन्स एसोसिएशन (SEWA): असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को संगठित कर आर्थिक सशक्तिकरण किया।
  • महिला मंडल और एनजीओ: स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
  • सरकारी योजनाएँ: महिला समाख्या, डी.डब्ल्यू.सी.आर.ए. जैसी योजनाओं ने सहभागिता को बढ़ावा दिया।
  • पंचायती राज में भागीदारी: 33% आरक्षण से ग्रामीण शासन में महिलाओं की भूमिका सशक्त हुई।
  • सामाजिक परिवर्तन: महिला संगठनों ने बाल विवाह, दहेज और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आंदोलन चलाए।

उपसंहार:

महिला संगठनों ने ग्रामीण समाज में नई चेतना और आत्मविश्वास का संचार किया। इनके प्रयासों से ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण सामाजिक विकास का आधार बन गया है।

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