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Indo-Pak relations are illusion at present’. Discuss the inherent problems that bitters India-Pak relations repeatedly. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

‘वर्तमान में भारत-पाक सम्बन्ध एक छलावा है।’ उन अन्तर्निहित समस्याओं को स्पष्ट कीजिए जो भारत-पाक सम्बन्धों में बार-बार कटुता उत्पन्न करती है। ‘

Ans: परिचय:

भारत और पाकिस्तान के संबंध 1947 के विभाजन के बाद से ही तनाव और अविश्वास से घिरे रहे हैं। यद्यपि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता और समझौते कई बार हुए, परंतु वास्तविक संबंध स्थिर नहीं हो सके। “भारत-पाक संबंध एक छलावा हैं” — यह कथन उन गहरी समस्याओं की ओर संकेत करता है जो बार-बार कटुता उत्पन्न करती हैं।

मुख्य बिंदु:

1. कश्मीर विवाद: जम्मू-कश्मीर पर संप्रभुता का विवाद दोनों देशों के बीच स्थायी तनाव का मुख्य कारण है।

2. सीमा पार आतंकवाद: पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियाँ, विशेषकर पुलवामा (2019) और उरी (2016) जैसी घटनाएँ, विश्वास को कमजोर करती हैं।

3. राजनीतिक अस्थिरता: पाकिस्तान में बार-बार सैन्य शासन और कमजोर लोकतंत्र से नीति में निरंतरता नहीं रहती।

4. जल विवाद: सिंधु जल संधि के बावजूद जल-वितरण पर असंतोष और आरोप-प्रत्यारोप बने रहते हैं।

5. व्यापारिक अवरोध: द्विपक्षीय व्यापार को राजनीतिक कारणों से कई बार निलंबित किया गया है।

6. घुसपैठ और सीमा संघर्ष: नियंत्रण रेखा (LoC) पर बार-बार होने वाली गोलाबारी तनाव को बढ़ाती है।

7. पाकिस्तान की भारत-विरोधी नीतियाँ: शिक्षा, मीडिया और राजनीति में भारत-विरोधी भावनाएँ भड़काई जाती हैं।

8. आतंकवादी संगठनों को समर्थन: लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन पाकिस्तान से संचालित होते हैं।

9. कूटनीतिक संवाद का अभाव: वार्ता प्रक्रिया बार-बार आतंकवादी घटनाओं के कारण बाधित होती है।

10. अफगानिस्तान और चीन के साथ रणनीतिक समीकरण: पाकिस्तान का झुकाव चीन की ओर भारत के लिए रणनीतिक चुनौती है।

11. परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा: दोनों देशों के बीच परमाणु संतुलन क्षेत्रीय शांति के लिए जोखिम पैदा करता है।

12. जनभावनाएँ और मीडिया भूमिका: दोनों देशों के मीडिया में राष्ट्रवादी बयानबाज़ी से आपसी अविश्वास बढ़ता है।

निष्कर्ष:

भारत-पाक संबंधों में शांति के प्रयास अक्सर सतही साबित हुए हैं क्योंकि मूल समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। स्थायी संबंध तभी संभव हैं जब पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन बंद करे और परस्पर विश्वास बहाली के ठोस कदम उठाए जाएँ।

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How the Indian diaspora has emerged as an asset in the protection of national interest in America ? Analyse it. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

भारतीय प्रवासी किस प्रकार अमेरिका में राष्ट्रीय हितों के संवर्द्धन में परिसम्पत्ति के रूप में उभरे है ? विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय:

भारतीय प्रवासी (Indian Diaspora) अमेरिका में आज एक प्रभावशाली समुदाय के रूप में उभरा है। उनकी आर्थिक, शैक्षिक और तकनीकी उपलब्धियों ने न केवल अमेरिका में उनकी पहचान मजबूत की है, बल्कि भारत के राष्ट्रीय हितों को भी सशक्त बनाया है। यह समुदाय भारत-अमेरिका संबंधों का एक महत्वपूर्ण सेतु बन चुका है।

मुख्य बिंदु:

1. आर्थिक योगदान: भारतीय प्रवासी अमेरिका की अर्थव्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाते हैं और भारत को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा प्रेषण (Remittances) भेजते हैं।

2. तकनीकी नेतृत्व: अमेरिकी Silicon Valley में बड़ी संख्या में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ और उद्यमी हैं, जिन्होंने भारत की तकनीकी छवि को मज़बूत किया है।

3. नीति-निर्माण में प्रभाव: भारतीय-अमेरिकी नागरिक जैसे कमला हैरिस, विवेक मूर्ति आदि अमेरिकी राजनीति में प्रमुख पदों पर हैं, जो भारत-अनुकूल दृष्टिकोण रखते हैं।

4. द्विपक्षीय संबंधों में सेतु: भारतीय प्रवासी दोनों देशों के बीच आर्थिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंधों को गहराई प्रदान करते हैं।

5. निवेश को प्रोत्साहन: प्रवासी समुदाय भारत में स्टार्टअप्स, आईटी और शिक्षा क्षेत्र में निवेश कर ‘मेक इन इंडिया’ को बल दे रहा है।

6. सांस्कृतिक कूटनीति: भारतीय त्यौहारों, योग और आयुर्वेद के प्रचार से प्रवासियों ने भारत की Soft Power को बढ़ाया है।

7. शिक्षा और अनुसंधान में योगदान: भारतीय मूल के वैज्ञानिक और शिक्षाविद वैश्विक नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

8. आपदा और संकट के समय सहयोग: कोविड-19 जैसी परिस्थितियों में प्रवासी भारतीयों ने भारत को आर्थिक और सामग्री सहायता दी।

9. जनमत निर्माण: भारतीय प्रवासी अमेरिकी मीडिया और थिंक टैंक्स में भारत की सकारात्मक छवि को प्रस्तुत करते हैं।

10. व्यापारिक साझेदारी: अमेरिकी कंपनियों में शीर्ष पदों पर भारतीयों की उपस्थिति भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को मजबूती देती है।

11. राजनीतिक लॉबिंग: US-India Political Action Committee (USINPAC) जैसे संगठन भारत समर्थक नीतियों के पक्ष में कार्य करते हैं।

12. राष्ट्रीय छवि निर्माण: सफल प्रवासी भारतीयों की उपलब्धियाँ भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाती हैं।

निष्कर्ष:

अमेरिका में भारतीय प्रवासी भारत की आर्थिक, कूटनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति के वाहक बन गए हैं। उनकी उपलब्धियाँ और योगदान भारत के राष्ट्रीय हितों के संवर्द्धन में एक अमूल्य परिसंपत्ति सिद्ध हुए हैं।

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‘India is ready for the World leadership’. Analyse this Comment. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

‘भारत विश्व नेतृत्व के लिए तत्पर है।’ इस कथन की विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय:

21वीं सदी में भारत एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उसकी आर्थिक प्रगति, तकनीकी क्षमता, लोकतांत्रिक परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों ने उसे विश्व मंच पर सम्मानजनक स्थान दिलाया है। “भारत विश्व नेतृत्व के लिए तत्पर है” — यह कथन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।

मुख्य बिंदु:

1. आर्थिक शक्ति: भारत विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण भागीदार है।

2. जनसांख्यिकीय लाभ: युवा आबादी और मानव संसाधन भारत को नवाचार और उत्पादन का केंद्र बना रहे हैं।

3. लोकतांत्रिक मूल्य: भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जो मानवाधिकार और समावेशी शासन का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

4. वैज्ञानिक प्रगति: इसरो (ISRO) की उपलब्धियाँ, जैसे चंद्रयान-3 और गगनयान मिशन, भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाती हैं।

5. डिजिटल क्रांति: Digital India और UPI जैसे कार्यक्रम भारत को वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की ओर अग्रसर कर रहे हैं।

6. वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज: भारत विकासशील देशों की समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुखर रूप से उठाता है।

7. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भूमिका: G-20, BRICS, QUAD और BIMSTEC में भारत की सक्रिय भागीदारी उसकी वैश्विक दृष्टि को प्रदर्शित करती है।

8. जलवायु नेतृत्व: International Solar Alliance जैसी पहलें भारत को पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी बनाती हैं।

9. विदेश नीति में संतुलन: भारत ने अमेरिका, रूस और चीन जैसे शक्तिशाली देशों के बीच रणनीतिक संतुलन बनाए रखा है।

10. रक्षा एवं अंतरिक्ष शक्ति: स्वदेशी हथियार निर्माण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता से भारत की रणनीतिक स्थिति सुदृढ़ हुई है।

11. सांस्कृतिक कूटनीति: योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति ने भारत की Soft Power को विश्व स्तर पर फैलाया है।

12. चुनौतियाँ: गरीबी, असमानता, और पड़ोसी देशों से सुरक्षा संबंधी तनाव भारत की नेतृत्व क्षमता को सीमित कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

भारत आर्थिक, सांस्कृतिक और नैतिक रूप से विश्व नेतृत्व की दिशा में अग्रसर है। यदि आंतरिक चुनौतियों का समाधान और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित रखा जाए, तो भारत वैश्विक नेतृत्व का केंद्र बन सकता है।

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What is Citizen’s Charter ? What is its role in Welfare of Citizens ? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

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नागरिक अधिकार पत्र क्या है ? नागरिकों के कल्याण में इसकी क्या भूमिका है ?

Ans: परिचय :

नागरिक अधिकार पत्र (Citizens’ Charter) एक ऐसा दस्तावेज है जो सरकारी विभागों द्वारा जनता को दी जाने वाली सेवाओं के मानक, समयसीमा और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है। इसकी शुरुआत यूके में 1991 में हुई थी, और भारत में इसे सुशासन (Good Governance) के एक महत्त्वपूर्ण उपकरण के रूप में अपनाया गया। इसका उद्देश्य नागरिकों को पारदर्शी, जवाबदेह और कुशल प्रशासन प्रदान करना है।

मुख्य बिंदु:

1. परिभाषा: नागरिक अधिकार पत्र वह घोषणा है जिसमें किसी विभाग की सेवाओं, समय-सीमा और शिकायत निवारण प्रक्रिया का विवरण होता है।

2. उद्देश्य: सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।

3. नागरिक-केंद्रित प्रशासन: यह शासन को नागरिकों की अपेक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है।

4. पारदर्शिता: नागरिकों को यह जानने का अधिकार देता है कि उन्हें कौन सी सेवा कब और कैसे मिलेगी।

5. जवाबदेही: यदि सेवाएँ समय पर न मिलें तो संबंधित अधिकारी को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।

6. शिकायत निवारण तंत्र: प्रत्येक विभाग में शिकायत दर्ज करने और समाधान की प्रक्रिया निर्धारित होती है।

7. सेवा मानक निर्धारण: प्रत्येक सेवा की समयसीमा और गुणवत्ता का स्तर तय किया जाता है।

8. नागरिक सहभागिता: नागरिकों की प्रतिक्रिया लेकर नीतियों और सेवाओं में सुधार किया जा सकता है।

9. भ्रष्टाचार में कमी: प्रक्रियाओं की स्पष्टता से रिश्वतखोरी और अनावश्यक देरी घटती है।

10. सुशासन को प्रोत्साहन: यह पारदर्शिता, दक्षता और विश्वसनीयता को बढ़ावा देता है।

11. उदाहरण: लोक सेवा गारंटी अधिनियम (जैसे – उत्तर प्रदेश जनहित गारंटी अधिनियम, 2011) नागरिक अधिकार पत्र का प्रभावी रूप है।

12. सीमाएँ: नागरिकों में जागरूकता की कमी, जवाबदेही तंत्र की कमजोरी और अधिकारियों की उदासीनता इसकी सफलता में बाधक हैं।

निष्कर्ष:

नागरिक अधिकार पत्र शासन को अधिक जनोन्मुखी और उत्तरदायी बनाता है। यदि इसे प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी और नागरिक भागीदारी के साथ लागू किया जाए, तो यह सुशासन का सशक्त उपकरण सिद्ध हो सकता है।

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Discuss the various aspects relating to the management of Health Services in the State of Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबन्धन से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं की व्याख्या कीजिए।

Ans: परिचय:

उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य अवसंरचना, मानव संसाधन और डिजिटल प्रबंधन के क्षेत्र में अनेक सुधार किए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य सभी नागरिकों को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है।

मुख्य बिंदु:

1. प्राथमिक, सामुदायिक एवं जिला स्तर पर स्वास्थ्य ढाँचा: राज्य में Primary Health Centres (PHC), Community Health Centres (CHC) और District Hospitals के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएँ दी जाती हैं।

2. स्वास्थ्य अवसंरचना विस्तार: नई मेडिकल कॉलेजों, सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों और मातृ-शिशु कल्याण केंद्रों की स्थापना की जा रही है।

3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने, टीकाकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार हेतु प्रमुख कार्यक्रम है।

4. आयुष्मान भारत योजना: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवच प्रदान किया गया है।

5. ई-संजीवनी पोर्टल: टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श की सुविधा।

6. दवा उपलब्धता: जन औषधि केंद्रों और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के तहत सस्ती दवाओं की आपूर्ति।

7. कोविड-19 प्रबंधन: परीक्षण, टीकाकरण और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण के माध्यम से संकट प्रबंधन की मिसाल पेश की।

8. महिला एवं बाल स्वास्थ्य: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और जननी सुरक्षा योजना के माध्यम से सुरक्षित प्रसव को प्रोत्साहन।

9. स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण: डॉक्टरों, नर्सों और ANM कर्मचारियों के लिए निरंतर कौशल विकास कार्यक्रम।

10. निजी क्षेत्र की भागीदारी: PPP मॉडल (Public-Private Partnership) के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार।

11. निगरानी एवं मूल्यांकन: जिला स्तर पर स्वास्थ्य संकेतकों की मॉनिटरिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

12. चुनौतियाँ: ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी, अवसंरचना का अभाव और वित्तीय संसाधनों की सीमाएँ अभी भी बनी हुई हैं।

निष्कर्ष:

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं, परंतु चुनौतियाँ अब भी विद्यमान हैं। समग्र सफलता के लिए चिकित्सा अवसंरचना, मानव संसाधन और तकनीकी नवाचार में निरंतर निवेश आवश्यक है।

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Clarify the role of Civil Servants in strengthening the democratic process in India. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

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भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सुदृढ़ीकरण में सिविल सेवकों की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

Ans: परिचय:

भारत में सिविल सेवक (Civil Servants) प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ माने जाते हैं। वे नीतियों को धरातल पर लागू करके लोकतांत्रिक शासन को प्रभावी बनाते हैं। उनकी निष्पक्षता, जवाबदेही और दक्षता लोकतंत्र को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

मुख्य बिंदु:

1. नीति-कार्यान्वयन: सिविल सेवक सरकार की नीतियों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं।

2. प्रशासनिक निरंतरता: राजनीतिक बदलावों के बावजूद शासन की स्थिरता और निरंतरता बनाए रखते हैं।

3. जनसेवा भावना: नागरिकों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर लोकतंत्र को जन-केंद्रित बनाते हैं।

4. विधि का शासन (Rule of Law): सभी के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित कर संविधान की भावना को बनाए रखते हैं।

5. पारदर्शिता और जवाबदेही: सुशासन के सिद्धांतों को लागू कर जनता का विश्वास बढ़ाते हैं।

6. चुनाव प्रक्रिया में योगदान: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कर लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव मजबूत करते हैं।

7. नीतिगत सलाह: मंत्रीगण को नीतियों के निर्माण हेतु वस्तुनिष्ठ और तथ्यपरक सलाह देते हैं।

8. सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाकर समानता को प्रोत्साहित करते हैं।

9. नैतिक प्रशासन: ईमानदारी, तटस्थता और अनुशासन से प्रशासनिक विश्वसनीयता बनाए रखते हैं।

10. संकट प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं या सामाजिक तनाव की स्थिति में प्रशासनिक दक्षता से शांति और व्यवस्था बनाए रखते हैं।

11. नागरिक सहभागिता: जनसुनवाई, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवा वितरण से नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।

12. सुधारात्मक भूमिका: शासन में नवाचार (innovation) और ई-गवर्नेंस से प्रशासन को आधुनिक और उत्तरदायी बनाते हैं।

निष्कर्ष:

सिविल सेवक लोकतंत्र के मौन प्रहरी हैं जो शासन को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं। उनकी ईमानदारी, निष्पक्षता और जनसेवा की भावना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सुदृढ़ीकरण की वास्तविक नींव है।

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Describe the law-making process in the Legislative Assembly of Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

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उत्तर प्रदेश की विधान सभा में विधि-निर्माण प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

Ans: परिचय:

उत्तर प्रदेश की विधान सभा (Legislative Assembly) राज्य की प्रमुख विधायी संस्था है, जो कानून निर्माण का मुख्य कार्य करती है। यह प्रक्रिया संविधान द्वारा निर्धारित नियमों और विधायी परंपराओं पर आधारित होती है। विधान निर्माण की प्रत्येक अवस्था में लोकतांत्रिक चर्चा और अनुमोदन आवश्यक होता है।

मुख्य बिंदु :

1. विधेयक का प्रारूप (Drafting of Bill): किसी मंत्री या सदस्य द्वारा नया कानून बनाने हेतु विधेयक का प्रारूप तैयार किया जाता है।

2. विधेयक के प्रकार: विधेयक दो प्रकार के होते हैं — सरकारी (Government Bill) और निजी सदस्य विधेयक (Private Member Bill)।

3. प्रथम पठन (First Reading): विधेयक को विधान सभा में प्रस्तुत किया जाता है और शीर्षक पढ़ा जाता है।

4. प्रकाशन (Publication): विधेयक को राज्य राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है ताकि सदस्यों को इसकी जानकारी हो।

5. द्वितीय पठन (Second Reading): इसमें विधेयक पर सामान्य चर्चा होती है और आवश्यकता पड़ने पर इसे समिति को भेजा जाता है।

6. समिति चरण (Committee Stage): समिति विधेयक का गहन परीक्षण कर संशोधन के सुझाव देती है।

7. रिपोर्ट प्रस्तुति: समिति अपनी रिपोर्ट विधान सभा को सौंपती है।

8. तृतीय पठन (Third Reading): विधेयक पर विस्तृत चर्चा कर मतदान कराया जाता है।

9. पारित होना: बहुमत से विधेयक पारित होने पर इसे विधान परिषद (यदि लागू हो) को भेजा जाता है।

10. परिषद द्वारा अनुमोदन: यदि परिषद 14 दिनों में संशोधन नहीं सुझाती, तो विधेयक स्वीकृत माना जाता है।

11. राज्यपाल की स्वीकृति: पारित विधेयक राज्यपाल को भेजा जाता है, जो उसे स्वीकृति, अस्वीकृति या पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं।

12. अधिनियम बनना: राज्यपाल की स्वीकृति के पश्चात विधेयक राज्य अधिनियम (State Act) बन जाता है और राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है।

निष्कर्ष:

उत्तर प्रदेश की विधान सभा में विधि-निर्माण प्रक्रिया लोकतांत्रिक विमर्श और सहमति पर आधारित है।यह प्रणाली जनता की इच्छाओं को कानून का रूप देकर शासन को संवैधानिक वैधता प्रदान करती है।

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What alternative mechanism of dispute resolution have emerged in recent years ? How far have they been effective ? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

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विवादों के समाधान के लिए, हाल के वर्षों में कौन-से वैकल्पिक तंत्र उभरे है ? वे कितने प्रभावी सिद्ध हुए है ?

Ans: परिचय:

भारत में पारंपरिक न्यायालयों पर बढ़ते भार और लंबित मामलों की समस्या के कारण वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र (Alternative Dispute Resolution – ADR) की अवधारणा तेजी से विकसित हुई है। ये तंत्र विवादों को तेज, सस्ता और मैत्रीपूर्ण तरीके से सुलझाने में सहायक हैं। हाल के वर्षों में इनकी प्रभावशीलता ने न्यायिक प्रणाली को नया विकल्प प्रदान किया है।

मुख्य बिंदु:

  • मध्यस्थता (Mediation): पक्षकारों के बीच समझौता कराने की प्रक्रिया, विशेषकर दीवानी मामलों में प्रभावी रही है।
  • सुलह (Conciliation): इसमें एक निष्पक्ष सुलहकर्ता पक्षों को समझौते तक पहुँचने में मदद करता है।
  • पंचायती न्याय (Arbitration): व्यावसायिक व अंतरराष्ट्रीय विवादों में प्रचलित, जिसमें न्यायालय की जगह पंच निर्णय करता है।
  • लोक अदालतें (Lok Adalats): राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के तहत संचालित, लाखों छोटे-मोटे मामले निपटाए गए हैं।
  • परिवार न्यायालयों में मध्यस्थता केंद्र: पारिवारिक विवादों को संवेदनशीलता के साथ सुलझाने का माध्यम बने हैं।
  • ई-मध्यस्थता (E-Mediation): तकनीकी प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन विवाद निपटान की सुविधा बढ़ी है।
  • ग्रामीण स्तर पर ग्राम न्यायालय: स्थानीय विवादों को सुलझाने में ग्रामीण न्याय तक पहुंच आसान हुई है।
  • कॉर्पोरेट और व्यापारिक विवादों में संस्थागत मध्यस्थता केंद्र (जैसे NDIAC): भरोसेमंद मंच प्रदान करते हैं।
  • उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग: उपभोक्ताओं को सस्ता और तेज न्याय दिलाने में कारगर रहे हैं।
  • प्री-लिटिगेशन सुलह बोर्ड: अदालतों में जाने से पहले ही विवाद निपटाने की व्यवस्था करते हैं।
  • ADR को कानूनी मान्यता: आर्बिट्रेशन एंड कन्सिलिएशन एक्ट, 1996 और लीगल सर्विसेज अथॉरिटी एक्ट, 1987 ने इसे मजबूत आधार दिया।
  • चुनौतियाँ: प्रशिक्षित मध्यस्थों की कमी, जागरूकता का अभाव और कुछ मामलों में समझौते का पालन न होना।

निष्कर्ष:

वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र ने न्याय व्यवस्था का बोझ कम किया और शीघ्र समाधान का मार्ग खोला है। यदि इनकी पारदर्शिता, जागरूकता और संस्थागत क्षमता बढ़ाई जाए, तो ये न्याय तक पहुँच का प्रभावी साधन बन सकते हैं।

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How does the federal structure in India accommodates the diverse needs and aspiration of different states ? Are there any challenges, if yes, then how are they addressed ? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

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भारत में संघीय ढाँचा विभिन्न राज्यों की विविध आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को कैसे समायोजित करता है ? क्या इसके सम्मुख कुछ चुनौतियाँ भी है, यदि है, तो उसका समाधान कैसे किया जाता है ?

Ans: परिचय:

भारत का संघीय ढाँचा (Federal Structure) एक संविधानिक समझौता है जो एकता में विविधता को बनाए रखता है। यह केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करके शासन को संतुलित बनाता है। परंतु, विविध सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

मुख्य बिंदु:

  • भारतीय संविधान ने शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों – संघ, राज्य और समवर्ती – में किया है।
  • यह विभाजन राज्यों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नीति बनाने की स्वतंत्रता देता है।
  • वित्त आयोग राज्यों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है ताकि विकास का असमानता कम की जा सके।
  • भाषा, संस्कृति और धर्म की विविधता को संविधान द्वारा मान्यता दी गई है।
  • राज्यों को अपनी आधिकारिक भाषा, शिक्षा नीति और स्थानीय प्रशासन में लचीलापन दिया गया है।
  • अंतरराज्यीय परिषद् और नीति आयोग जैसे संस्थान सहयोगात्मक संघवाद को बढ़ावा देते हैं।
  • आपातकालीन स्थितियों में केंद्र को अधिक अधिकार मिलते हैं, जिससे राष्ट्रीय एकता बनी रहती है।
  • राजनीतिक दलों का राज्य और केंद्र स्तर पर समन्वय नीति-निर्माण में मदद करता है।
  • फिर भी, वित्तीय असमानता और संसाधन वितरण पर विवाद संघीय संतुलन को चुनौती देते हैं।
  • राज्यों द्वारा क्षेत्रीय अस्मिता या अलगाववाद की भावना कभी-कभी तनाव उत्पन्न करती है।
  • केंद्र का अत्यधिक हस्तक्षेप राज्यों की स्वायत्तता को सीमित करता है।
  • इन चुनौतियों से निपटने के लिए संवाद, संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती और सहकारी संघवाद की भावना आवश्यक है

निष्कर्ष:

भारतीय संघवाद लचीला और व्यावहारिक है, जो विविध राज्यों की आकांक्षाओं को संतुलित करता है। परंतु इसकी सफलता निरंतर संवाद, सहयोग और समान विकास के प्रयासों पर निर्भर करती है।

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Critically examine the increasing powers and role of Prime Minister. How does it impact other institutions ? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-2

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प्रधानमंत्री की बढ़ती शक्तियों और भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण करें। अन्य संस्थाओं पर इसका कैसे प्रभाव पडता है ?

Ans: परिचय:

भारत में प्रधानमंत्री संसदीय लोकतंत्र का प्रमुख स्तंभ हैं। समय के साथ प्रधानमंत्री की शक्तियाँ और भूमिका काफी बढ़ी हैं, जिससे वे शासन का वास्तविक केंद्र बन गए हैं। परंतु इस शक्ति-संतुलन ने अन्य संस्थाओं की स्वायत्तता पर भी प्रभाव डाला है।

मुख्य बिंदु:

  • प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के नेता होते हैं और सरकार की नीतियों की दिशा तय करते हैं।
  • वे मंत्रियों की नियुक्ति, पदमुक्ति एवं कार्य-विभाजन में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
  • नीति-निर्माण एवं प्रशासनिक निर्णयों में अंतिम अधिकार प्रायः प्रधानमंत्री के पास होता है।
  • संसद में बहुमत पर उनका नियंत्रण उन्हें अत्यधिक राजनीतिक शक्ति प्रदान करता है।
  • कैबिनेट का कार्य प्रायः ‘प्रधानमंत्री-केंद्रित’ हो गया है, जिसे “प्रधानमंत्री शासन” कहा जाता है।
  • प्रधानमंत्री का मीडिया, जनमत और नौकरशाही पर भी प्रभाव बढ़ा है।
  • पार्टी संगठन पर मजबूत पकड़ होने से वे राजनीतिक एजेंडा तय करते हैं।
  • विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत भूमिका निर्णायक हो गई है।
  • राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका व्यवहार में प्रतीकात्मक रह गई है।
  • संसद की भूमिका सीमित हो गई है क्योंकि अधिकांश निर्णय मंत्रिपरिषद द्वारा लिए जाते हैं।
  • संघीय ढाँचे में राज्यों पर केंद्र का नियंत्रण बढ़ा है, जिससे ‘सहकारी संघवाद’ कमजोर पड़ता है।
  • न्यायपालिका और मीडिया पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव देखने को मिलता है, जिससे संस्थागत संतुलन प्रभावित होता है।

निष्कर्ष :

प्रधानमंत्री की बढ़ती शक्तियाँ शासन की स्थिरता और निर्णायकता के लिए उपयोगी हैं। परंतु लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने के लिए अन्य संस्थाओं की स्वतंत्रता और जवाबदेही भी समान रूप से आवश्यक है।

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