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What is the significance of India’s Presidency in G-20 ? Discuss. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

समूह -20 (G-20) में भारत की अध्यक्षता का क्या महत्व है ? विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

समूह-20 (G-20) विश्व की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का समूह है जो वैश्विक आर्थिक नीतियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत ने 2023 में पहली बार इसकी अध्यक्षता की, जो उसके वैश्विक नेतृत्व और कूटनीतिक प्रभाव का प्रतीक है। यह अध्यक्षता भारत के “विश्वगुरु” और “वैश्विक दक्षिण की आवाज़” बनने के दृष्टिकोण को दर्शाती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • भारत की अध्यक्षता का विषय था — “वसुधैव कुटुम्बकम्” (One Earth, One Family, One Future)।
  • भारत ने जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, डिजिटल समावेशन और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर फोकस किया।
  • भारत ने ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आवाज दी।
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI मॉडल को विश्व स्तर पर सराहा गया।
  • भारत की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ (African Union) को G-20 की स्थायी सदस्यता दी गई।
  • यह अध्यक्षता भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और संतुलित वैश्विक दृष्टिकोण का प्रमाण रही।
  • भारत ने संवाद, सहयोग और समावेशिता की भावना के साथ वैश्विक नेतृत्व का परिचय दिया।

निष्कर्ष (Conclusion):

G-20 की अध्यक्षता ने भारत को विश्व मंच पर निर्णायक भूमिका में स्थापित किया। यह न केवल भारत की आर्थिक शक्ति बल्कि उसकी मानवीय और नैतिक नेतृत्व क्षमता का भी प्रतीक बनी।

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Explain the rationale behind India’s involvement in QUAD. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

‘क्वाड’ में भारत की भागीदारी के औचित्य की विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

‘क्वाड’ (QUAD – Quadrilateral Security Dialogue) एक रणनीतिक समूह है जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और मुक्त नौवहन सुनिश्चित करना है।

भारत की इसमें भागीदारी उसकी रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा नीतियों के अनुरूप है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन और शक्ति संतुलन बनाए रखना चाहता है।
  • क्वाड चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने का एक माध्यम है।
  • यह समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और सप्लाई चेन रेज़िलिएंस पर सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” और सागर (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण को यह मजबूती देता है।
  • क्वाड के माध्यम से भारत को उन्नत प्रौद्योगिकी और रक्षा साझेदारी के अवसर मिलते हैं।
  • यह बहुपक्षीय मंच भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को भी रेखांकित करता है।
  • भारत क्वाड को किसी सैन्य गठबंधन की बजाय सहयोग मंच के रूप में देखता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत की क्वाड में भागीदारी उसका रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए वैश्विक साझेदारी को संतुलित करने का प्रयास है। यह न केवल सुरक्षा बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

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The failure of ‘SAARC’ forced India to strengthen ‘BIMSTEC’. Explain. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

‘सार्क’ की असफलता ने भारत को ‘बिम्सटेक’ (BIMSTEC) को सशक्त बनाने के लिए बाध्य किया। विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) क्षेत्रीय एकता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बना था। परंतु राजनीतिक मतभेदों, विशेषकर भारत-पाकिस्तान तनावों के कारण सार्क निष्क्रिय हो गया। इसके परिणामस्वरूप भारत ने बिम्सटेक (BIMSTEC) को क्षेत्रीय सहयोग का नया मंच बनाया।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सार्क की बैठकों का स्थगन भारत-पाक तनावों का सीधा परिणाम रहा है।
  • बिम्सटेक में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं।
  • यह संगठन दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है, जिससे भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” को बल मिलता है।
  • बिम्सटेक आतंकवाद, व्यापार, ऊर्जा, संपर्क और आपदा प्रबंधन पर केंद्रित है
  • इसमें पाकिस्तान की अनुपस्थिति भारत को क्षेत्रीय नेतृत्व का अवसर देती है।
  • भारत ने बिम्सटेक को सार्क का विकल्प बनाते हुए क्षेत्रीय कूटनीति को पुनर्परिभाषित किया है।
  • हाल के वर्षों में BIMSTEC Summit और Connectivity Master Plan इसके सशक्तिकरण के संकेत हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

सार्क की विफलता ने भारत को नई रणनीतिक दिशा दी है। बिम्सटेक के माध्यम से भारत क्षेत्रीय सहयोग और एशियाई एकीकरण की प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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“The application of Information and Communication Technology (I.C.T.) is for delivering government service.” Discuss. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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“सरकारी सेवा देने के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आई.सी.टी.) एक अनुप्रयोग है।” व्याख्या कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology – ICT) आधुनिक शासन प्रणाली की रीढ़ बन चुकी है। यह सरकार और नागरिकों के बीच एक सेतु का कार्य करती है। आईसीटी के प्रयोग से सरकारी सेवाएँ अधिक पारदर्शी, त्वरित और सुलभ हो गई हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • ICT के माध्यम से ई-गवर्नेंस (E-Governance) को बढ़ावा मिला है।
  • नागरिक सेवाएँ जैसे — जन्म प्रमाणपत्र, भूमि रिकॉर्ड, पासपोर्ट, बिजली बिल आदि ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
  • इससे पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) में वृद्धि हुई है।
  • डिजिटल इंडिया जैसी पहल ICT के सफल उपयोग के उदाहरण हैं।
  • सरकारी प्रक्रियाओं में समय और लागत की बचत होती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुँच बढ़ी है।
  • डेटा प्रबंधन और नीति निर्माण में भी ICT महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार, ICT ने शासन को नागरिक-केंद्रित और कुशल बनाया है। यह “सुशासन” (Good Governance) प्राप्त करने का एक प्रभावी उपकरण बनकर उभरा है।

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Write an analytical note on Self Help Group’s composition and their functions. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

स्वयं सहायता समूह की संरचना और उनके कार्यों पर एक विश्लेषणात्मक टिप्पणी कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

स्वयं सहायता समूह (Self Help Group – SHG) ग्रामीण विकास की एक प्रभावी अवधारणा है, जो महिलाओं एवं कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम बनी है। यह समूह सामूहिक बचत, ऋण और आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसकी संरचना विकेन्द्रित, सहभागी एवं लोकतांत्रिक ढंग से निर्मित होती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रत्येक SHG में सामान्यतः 10 से 20 सदस्य होते हैं।
  • सदस्य समान सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से होते हैं।
  • समूह का नेतृत्व अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
  • नियमित बैठकें, बचत संग्रह और लघु ऋण वितरण इसकी प्रमुख क्रियाएँ हैं।
  • यह बैंक लिंकेज कार्यक्रम के माध्यम से वित्तीय संस्थानों से जुड़ा होता है।
  • निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
  • यह ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता, शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व के अवसर देता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ाया है इनके माध्यम से सामाजिक समानता, आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है।

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“Transparency and Accountability are complementary to each other.” Comment. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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“पारदर्शिता एवं जवाबदेही एक दूसरे के पूरक है।” टिप्पणी कीजिए।

Ans: भूमिका:

लोक प्रशासन में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) सुशासन के दो मूल स्तंभ हैं। पारदर्शिता से नागरिकों को शासन की गतिविधियों की जानकारी मिलती है, जबकि जवाबदेही यह सुनिश्चित करती है कि सत्ता का दुरुपयोग न हो। दोनों का संबंध आपस में गहराई से जुड़ा है।

मुख्य बिंदु:

  • पारदर्शिता से शासन की नीतियाँ, निर्णय और व्यय जनता के सामने स्पष्ट होते हैं।
  • यह नागरिकों को शासन में भागीदारी और निगरानी का अवसर देती है।
  • जवाबदेही यह सुनिश्चित करती है कि अधिकारी अपने कार्यों के लिए उत्तरदायी रहें।
  • पारदर्शिता के बिना जवाबदेही का मूल्यांकन संभव नहीं है।
  • सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • जब शासन पारदर्शी होता है, तो भ्रष्टाचार और अपारदर्शी निर्णयों में कमी आती है।
  • जवाबदेही नागरिक विश्वास को सुदृढ़ बनाती है, जिससे शासन अधिक प्रभावी होता है।

निष्कर्ष:

इस प्रकार पारदर्शिता और जवाबदेही एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों मिलकर लोकतंत्र में जनहित, विश्वास और सुशासन की नींव को मजबूत करते हैं।

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How the power of Governor to Pardon is different from the power of the President under Article 72 of the Indian Constitution ? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राज्यपाल की क्षमादान का अधिकार राष्ट्रपति की अधिकार से किस प्रकार भिन्न है ?

Ans: भूमिका :

भारतीय संविधान में दया, क्षमा, उपशमन और दंड परिवर्तन के अधिकार राष्ट्रपति (अनुच्छेद 72) और राज्यपाल (अनुच्छेद 161) दोनों को दिए गए हैं। इनका उद्देश्य न्याय के साथ मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखना है। किंतु दोनों के अधिकारों की सीमा और क्षेत्र अलग-अलग हैं।

मुख्य बिंदु:

  • संवैधानिक आधार: राष्ट्रपति का अधिकार अनुच्छेद 72 में, जबकि राज्यपाल का अनुच्छेद 161 में निहित है।
  • प्रभाव क्षेत्र: राष्ट्रपति का अधिकार पूरे भारत पर लागू होता है, जबकि राज्यपाल का अधिकार केवल अपने राज्य तक सीमित है।
  • विधायी क्षेत्र: राष्ट्रपति केंद्रीय कानूनों के अंतर्गत अपराधों पर दया दे सकते हैं; राज्यपाल केवल राज्य कानूनों के अंतर्गत।
  • मृत्युदंड: राष्ट्रपति मृत्युदंड को क्षमा कर सकते हैं; राज्यपाल केवल उसे स्थगित या परिवर्तित कर सकते हैं।
  • न्यायिक शक्तियाँ: राष्ट्रपति सैन्य न्यायालयों द्वारा दिए गए दंड को भी क्षमा कर सकते हैं; राज्यपाल नहीं।
  • अधिकार का उपयोग: राष्ट्रपति केंद्र सरकार की सलाह पर कार्य करते हैं; राज्यपाल राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर।
  • विस्तार का स्तर: राष्ट्रपति का दया अधिकार अधिक व्यापक और प्रभावशाली है।

निष्कर्ष :

अतः राज्यपाल का क्षमादान अधिकार सीमित है और केवल राज्य के अपराधों तक सीमित रहता है, जबकि राष्ट्रपति का अधिकार राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक और सर्वोच्च होता है।

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Mention three demerits of Judicial Activism. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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न्यायिक सक्रियता के तीन दोषों का वर्णन कीजिए ।

Ans: भूमिका:

न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से न्यायालय संविधान की भावना के अनुरूप कार्यपालिका और विधायिका के निर्णयों की समीक्षा करता है। हालांकि इसका उद्देश्य जनहित की रक्षा करना है, परंतु अत्यधिक हस्तक्षेप कई बार नकारात्मक प्रभाव भी छोड़ता है।

मुख्य बिंदु:

  • सत्ता पृथक्करण का उल्लंघन: न्यायपालिका का प्रशासनिक या विधायी क्षेत्र में हस्तक्षेप संविधान की त्रिसत्ता सिद्धांत को कमजोर करता है।
  • लोकतांत्रिक जवाबदेही में कमी: न्यायाधीश निर्वाचित नहीं होते, फिर भी नीतिगत निर्णय लेने लगते हैं।
  • नीतिगत असंतुलन: न्यायिक आदेश कभी-कभी सरकार की नीतियों के व्यावहारिक क्रियान्वयन को बाधित करते हैं।
  • अत्यधिक जनहित याचिकाएँ (PIL misuse): तुच्छ या राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित याचिकाएँ न्यायिक समय की हानि करती हैं।
  • विधायिका की भूमिका में हस्तक्षेप: न्यायालय कभी-कभी कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ जाता है।
  • प्रशासनिक दक्षता पर प्रभाव: बार-बार के हस्तक्षेप से प्रशासनिक अधिकारियों में निर्णय लेने की स्वतंत्रता घटती है।
  • न्यायिक विश्वसनीयता पर प्रश्न: अत्यधिक हस्तक्षेप से न्यायपालिका की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न होता है।

निष्कर्ष :

इस प्रकार न्यायिक सक्रियता तभी लाभकारी है जब वह संवैधानिक सीमाओं में रहे। अति सक्रियता लोकतंत्र की संतुलित संरचना को कमजोर कर सकती है।

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Why the 42nd Amendment is called a revision of the Indian Constitution? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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42 वें भारतीय संशोधन को संविधान का पुनः लेखन क्यों कहा जाता है ?

Ans:  भूमिका:

सन् 1976 में किया गया 42वां संविधान संशोधन भारतीय संविधान के इतिहास का सबसे व्यापक संशोधन माना जाता है। इसे “मिनी संविधान” या “संविधान का पुनः लेखन” कहा गया क्योंकि इसने संविधान के अनेक भागों में बड़े पैमाने पर परिवर्तन किए। इस संशोधन से संविधान की मूल भावना पर भी गहरा प्रभाव पड़ा।

मुख्य बिंदु:

  • प्रस्तावना में “समाजवादी”, “पंथनिरपेक्ष” और “अखंडता” शब्द जोड़े गए।
  • मौलिक कर्तव्यों (अनुच्छेद 51A) का नया भाग जोड़ा गया।
  • न्यायपालिका की शक्तियों पर नियंत्रण के प्रयास किए गए।
  • संसद को व्यापक संशोधन शक्तियाँ प्रदान की गईं।
  • केन्द्र सरकार की शक्तियाँ राज्यों की तुलना में बढ़ाई गईं।
  • न्यायिक पुनरावलोकन की सीमा तय करने का प्रयास किया गया।
  • नियोजन नीति और समाजवादी सिद्धांतों पर बल दिया गया।

निष्कर्ष:

इस प्रकार 42वां संशोधन संविधान की संरचना, स्वरूप और दिशा में व्यापक बदलाव लाया। इसलिए इसे भारतीय संविधान का पुनः लेखन कहा जाता है।

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Why the Preamble is called the Philosophy of the Indian Constitution?[Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-2

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प्रस्तावना को भारतीय संविधान का दर्शन क्यों कहा जाता है ?

Ans:  भूमिका (Introduction):

भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान की आत्मा मानी जाती है। यह न केवल संविधान की मूल भावना को व्यक्त करती है, बल्कि उसके उद्देश्यों और आदर्शों का दार्शनिक मार्गदर्शन भी प्रदान करती है। इसे संविधान का दर्पण कहा जाता है क्योंकि इसमें भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सोच का सार निहित है।

मुख्य बिंदु (Important points):

  • प्रस्तावना संविधान के मूल उद्देश्यों – न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—को स्पष्ट करती है।
  • यह भारत को “संपूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य” घोषित करती है।
  • यह संविधान की भावना और आदर्शों की दिशा निर्धारित करती है।
  • प्रस्तावना नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के मूल स्रोत की प्रेरणा देती है
  • यह संविधान निर्माताओं की विचारधारा और उद्देश्य को दर्शाती है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे संविधान की “मूल संरचना” का भाग माना है।
  • यह भारत की लोकतांत्रिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।

निष्कर्ष:

अतः प्रस्तावना संविधान के आदर्शों और मूल्यों का सार प्रस्तुत करती है। यही कारण है कि इसे भारतीय संविधान का दर्शन कहा जाता है।

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