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What positive and negative changes occurred due to the media revolution in India and around the world? Explain the role of media in national and international security. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

भारत तथा विश्व में मीडिया से क्या सकारात्मक व नकारात्मक परिवर्तन हुए है? राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा में मीडिया का क्या योगदान है?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

मीडिया आधुनिक समाज का एक प्रभावशाली स्तंभ है, जो सूचना, विचार और जनमत निर्माण का प्रमुख साधन है। भारत और विश्व में मीडिया ने राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाए हैं। इन परिवर्तनों में जहाँ सकारात्मक पहलू हैं, वहीं इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी सामने आए हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सकारात्मक परिवर्तन: मीडिया ने पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया है।
  • इसने लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त किया और जनता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर जागरूकता फैलाई।
  • सोशल मीडिया ने आम नागरिक को अपनी आवाज़ बुलंद करने का अवसर दिया।
  • आपदा, आतंकवाद और संकट के समय त्वरित सूचना से राहत कार्यों में सहयोग मिला।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया ने देशों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन दिया।
  • नकारात्मक परिवर्तन: फेक न्यूज और भ्रामक प्रचार से सामाजिक विभाजन बढ़ा।
  • सनसनीखेज़ रिपोर्टिंग ने समाचारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता घटाई।
  • राजनीतिक और कॉरपोरेट दबाव ने मीडिया की निष्पक्षता को प्रभावित किया।
  • सोशल मीडिया पर अफवाहें और ट्रोलिंग ने सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाया।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा में मीडिया ने आतंकवाद, सीमाई तनाव और साइबर खतरों पर जनचेतना बढ़ाई।
  • अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा में यह वैश्विक संकटों, युद्धों और कूटनीतिक घटनाओं पर सही सूचना देकर शांति के प्रयासों को सशक्त करता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

मीडिया राष्ट्र और विश्व को जोड़ने वाला सशक्त माध्यम है। यदि यह जिम्मेदारी और सत्यनिष्ठा के साथ कार्य करे, तो यह सुरक्षा, शांति और विकास का मजबूत आधार बन सकता है।

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Money laundering poses a serious threat to a country’s economic sovereignty. Information and communication technology has made it more challenging.” Explain. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

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“अवैध धन स्थानान्तरण देश की आर्थिक प्रभुसत्ता के लिए गम्भीर खतरा है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ने इसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना दिया है।” व्याख्या कीजिए। “

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

अवैध धन स्थानान्तरण (Illegal Money Transfer) या मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अवैध कमाई को वैध रूप में दिखाया जाता है। यह देश की आर्थिक स्थिरता और वित्तीय प्रणाली के लिए बड़ा खतरा है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के विकास ने इसे और जटिल बना दिया है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • अवैध धन स्थानान्तरण से कर चोरी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है।
  • यह देश की आर्थिक प्रभुसत्ता (Economic Sovereignty) को कमजोर करता है क्योंकि पूंजी का अनियंत्रित बहिर्गमन होता है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन लेन-देन ने अपराधियों को गुप्त रूप से धन स्थानांतरित करने का आसान माध्यम दिया है।
  • क्रिप्टोकरेंसी और डार्क वेब के उपयोग से धन का स्रोत छिपाना और कठिन हो गया है।
  • इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय नीतियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह मनी लॉन्ड्रिंग और आतंक वित्तपोषण (Terror Financing) को बढ़ाता है।
  • सरकार ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 लागू किया है।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) इस पर निगरानी रखती हैं।
  • Know Your Customer (KYC) और PAN–Aadhaar linking से पहचान सत्यापन को मजबूत किया गया है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी ने निगरानी बढ़ाई है, परंतु साइबर अपराधियों ने नए तकनीकी तरीके अपनाए हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे FATF (Financial Action Task Force) के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
  • डिजिटल साक्षरता और डेटा सुरक्षा के उपाय इस खतरे को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

अवैध धन स्थानान्तरण आर्थिक सुरक्षा और नीति निर्माण की नींव को कमजोर करता है। सशक्त नियामक ढाँचा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी सतर्कता से ही इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

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Distinguish between natural and manmade disasters. Also, elucidate the effectiveness of the disaster management system in India. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

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प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं में अन्तर स्पष्ट करें। साथ ही, भारत में आपदा प्रबन्धन प्रणाली की प्रभावशीलता स्पष्ट करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

आपदाएँ दो प्रकार की होती हैं – प्राकृतिक (Natural) और मानव निर्मित (Man-made)। ये मानव जीवन, संपत्ति और पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। भारत, अपने भौगोलिक विविधता के कारण, दोनों प्रकार की आपदाओं के प्रति संवेदनशील है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्राकृतिक आपदाएँ – वे आपदाएँ जो प्रकृति की शक्तियों से उत्पन्न होती हैं, जैसे भूकम्प, बाढ़, चक्रवात, सूखा आदि।
  • मानव निर्मित आपदाएँ – वे आपदाएँ जो मानव की गतिविधियों से उत्पन्न होती हैं, जैसे औद्योगिक दुर्घटनाएँ, रासायनिक रिसाव, परमाणु दुर्घटनाएँ आदि।
  • प्राकृतिक आपदाएँ अप्रत्याशित होती हैं, जबकि मानव निर्मित आपदाएँ प्रायः लापरवाही या तकनीकी विफलता से होती हैं।
  • भारत विश्व के उन देशों में है जहाँ लगभग 60% भूमि भूकम्प संभावित क्षेत्र में है।
  • देश के तटीय भागों में चक्रवात और सुनामी का खतरा बना रहता है।
  • मानव निर्मित आपदाओं में भोपाल गैस त्रासदी (1984) प्रमुख उदाहरण है।
  • भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 लागू किया गया।
  • इसके तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना हुई।
  • राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) व जिला आपदा प्राधिकरण (DDMA) स्थानीय स्तर पर कार्य करते हैं।
  • NDRF (National Disaster Response Force) त्वरित राहत व बचाव कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाती है।
  • सरकार ने ‘Sendai Framework for Disaster Risk Reduction’ के अनुरूप नीति अपनाई है।
  • समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली से तैयारी में सुधार हुआ है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत की आपदा प्रबंधन प्रणाली निरंतर सुदृढ़ हो रही है, परंतु स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। समन्वित प्रयासों से ही आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है।

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What are India’s main achievements in biotechnology? How will these help in the upliftment of poor sections of society? [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

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जैव प्रौद्योगिकी में भारत की मुख्य उपलब्धियाँ कौन-सी हैं? इनसे समाज के गरीब वर्ग के उत्थान में कैसे मदद मिलेगी?

Ans: परिचय (Introduction):

जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) विज्ञान की वह शाखा है जिसमें जीवित कोशिकाओं, सूक्ष्मजीवों और उनके जैविक घटकों का उपयोग मानव कल्याण के लिए किया जाता है। भारत ने कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और उद्योग जैसे क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति की है।

भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ (Major Achievements of India in Biotechnology):

  • हरित क्रांति के बाद जैव क्रांति (Bio-Revolution): उच्च उत्पादकता वाली फसलों और रोग-प्रतिरोधी बीजों का विकास।
  • Bt कपास (Bt Cotton): कीट-प्रतिरोधी कपास की फसल से कृषि उत्पादन में वृद्धि।
  • COVID-19 वैक्सीन विकास: भारत बायोटेक द्वारा कोवैक्सिन का सफल निर्माण।
  • बायोफार्मास्यूटिकल्स: इंसुलिन, वैक्सीन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसे उत्पादों का घरेलू उत्पादन।
  • बायोफ्यूल उत्पादन: गन्ना, जैव कचरे और शैवाल से स्वच्छ ईंधन का विकास।
  • जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट: भारतीय जनसंख्या के आनुवंशिक मानचित्रण की पहल।
  • कृषि जैव प्रौद्योगिकी: सूखा-रोधी और पोषक तत्वों से भरपूर फसलों का विकास।
  • बायोइन्फॉर्मेटिक्स: जैविक डाटा विश्लेषण हेतु कंप्यूटर आधारित अनुसंधान को बढ़ावा।
  • बायोफर्टिलाइज़र और बायोपेस्टिसाइड्स: रासायनिक प्रदूषण कम करने में सहायक।
  • डी.बी.टी. (Department of Biotechnology) द्वारा नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहन।
  • राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी मिशन: अनुसंधान एवं उद्योग के बीच सेतु का कार्य।
  • मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी: सस्ती दवाओं और निदान तकनीकों का विकास।

गरीब वर्ग के उत्थान में योगदान (Contribution to Upliftment of Poor):

  • रोग-प्रतिरोधी बीजों से किसानों की आय में वृद्धि।
  • सस्ती वैक्सीन और दवाओं से स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ हुईं।
  • बायोफ्यूल उद्योग में ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़े।
  • पोषक तत्वों से युक्त फसलों से कुपोषण में कमी।
  • जैविक खेती से लागत में कमी और पर्यावरण की रक्षा।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत की जैव प्रौद्योगिकी उपलब्धियाँ न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के माध्यम से समाज के गरीब वर्ग के सर्वांगीण उत्थान की दिशा में भी निर्णायक कदम हैं।

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What steps are being taken to meet the continuously increasing demand of energy resources in India? Discuss with special reference to renewable and sustainable energy resources. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

भारत में ऊर्जा संसाधनों की लगातार बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं? विशेष रूप से अक्षय एवं टिकाऊ ऊर्जा संसाधनों के सन्दर्भ में चर्चा कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत एक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है, जहाँ ऊर्जा संसाधनों की माँग निरंतर बढ़ रही है। पारंपरिक स्रोतों जैसे कोयला और पेट्रोलियम पर अत्यधिक निर्भरता पर्यावरणीय संकट को जन्म दे रही है। इसलिए भारत अब अक्षय (Renewable) और टिकाऊ (Sustainable) ऊर्जा स्रोतों की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है।

भारत में ऊर्जा माँग पूरी करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम (Major Steps Taken to Meet Energy Demand):

  • राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission): 280 GW सौर ऊर्जा उत्पादन लक्ष्य (2030 तक)।
  • राष्ट्रीय पवन ऊर्जा नीति: पवन ऊर्जा के उत्पादन और निवेश को प्रोत्साहन।
  • ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना: नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर ग्रिड एकीकरण हेतु।
  • इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA): सौर ऊर्जा के वैश्विक सहयोग में भारत की अग्रणी भूमिका।
  • हाइड्रोपावर विकास: छोटे और मध्यम जलविद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा।
  • बायो-ऊर्जा और कचरे से ऊर्जा कार्यक्रम: कृषि अपशिष्ट और जैविक कचरे से ऊर्जा उत्पादन।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति: ईंधन खपत कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने हेतु।
  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE): ऊर्जा संरक्षण और स्मार्ट उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा।
  • प्रधानमंत्री कुसुम योजना: किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप उपलब्ध कराना।
  • नवीकरणीय ऊर्जा निवेश को प्रोत्साहन: निजी क्षेत्र के लिए कर रियायतें और निवेश सुरक्षा।
  • हाइड्रोजन मिशन: हरित हाइड्रोजन को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा के रूप में विकसित करना।
  • राज्यों में ऊर्जा नीति सुधार: विकेन्द्रीकृत सौर परियोजनाओं और माइक्रोग्रिड का विस्तार।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनने की दिशा में अग्रसर है। सौर, पवन और हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर आधारित नीतियाँ न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता लाएँगी बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास को भी सुनिश्चित करेंगी।

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The Public Distribution System (PDS) has proved to be the most effective instrument of Government policy over the years in stabilizing prices and making food available to consumers at affordable prices.” Explain the statement. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

“सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी. डी. एस.) ने सिद्ध किया है कि वह वर्षों से कीमतों के स्थिरीकरण तथा उपभोक्ता की पहुँच वाली कीमतों पर खाद्यान्न उपलब्ध करवाने में सरकार की नीतियों का सबसे महत्वपूर्ण अस्त्र रहा है।” कथन की व्याख्या कीजिये। “

Ans: परिचय (Introduction):

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) भारत सरकार की एक प्रमुख खाद्य सुरक्षा योजना है, जिसके माध्यम से गरीब व मध्यम वर्ग को सस्ते दरों पर आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। यह प्रणाली खाद्य सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन और मूल्य स्थिरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पी.डी.एस. की प्रमुख विशेषताएँ (Main Features of PDS):

  • केन्द्र और राज्य सरकारों के संयुक्त संचालन वाली व्यवस्था।
  • भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा अनाज की खरीद, भंडारण और वितरण।
  • राशन कार्ड प्रणाली के माध्यम से पात्र परिवारों को लाभ।
  • गेहूँ, चावल, चीनी और मिट्टी के तेल की रियायती दरों पर उपलब्धता।
  • गरीब वर्ग की क्रय शक्ति में वृद्धि और खाद्य असुरक्षा में कमी।

पी.डी.एस. की भूमिका एवं उपलब्धियाँ (Role and Achievements):

  • मूल्य स्थिरीकरण: बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता बढ़ाकर महँगाई को नियंत्रित किया।
  • गरीबों के लिए सुरक्षा कवच: निम्न आय वर्ग को रियायती दरों पर अनाज उपलब्ध कराया।
  • संकट काल में सहारा: महामारी, सूखा या प्राकृतिक आपदा के समय में खाद्य आपूर्ति बनाए रखी।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA-2013) से इसकी पहुँच और व्यापक हुई।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी पहल से मुफ्त अनाज वितरण सुनिश्चित हुआ।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा: किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद से आय स्थिर हुई।

चुनौतियाँ (Challenges):

  • लीकेज, कालाबाज़ारी और फर्जी राशन कार्ड।
  • भंडारण व परिवहन में हानि।
  • पोषण मूल्य वाले खाद्य पदार्थों का अभाव।

निष्कर्ष (Conclusion):

पी.डी.एस. ने दशकों से खाद्य मूल्य स्थिरीकरण और गरीबों को सुलभ दरों पर भोजन उपलब्ध कराने में अमूल्य योगदान दिया है। कुछ सुधारों के साथ, यह प्रणाली भारत की खाद्य सुरक्षा नीति का सबसे प्रभावी और स्थायी साधन बनी रह सकती है।

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Despite various measures to address food security, major challenges remain.” Explain with reference to India. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

“खाद्य सुरक्षा हेतु विभिन्न उपायों के बावजूद वृहत चुनौतियाँ बनी हुई हैं।” भारत के सन्दर्भ में व्याख्या कीजिए। “

Ans: परिचय (Introduction):

खाद्य सुरक्षा (Food Security) का अर्थ है – सभी व्यक्तियों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना। भारत ने इस दिशा में कई योजनाएँ और नीतियाँ लागू की हैं, जैसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA-2013)। फिर भी, खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में अनेक गंभीर चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

भारत में खाद्य सुरक्षा हेतु प्रमुख उपाय (Major Measures for Food Security in India):

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत 80 करोड़ लोगों को सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से अनाज का वितरण।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना द्वारा मुफ्त अनाज वितरण।
  • मिड-डे मील योजना और आंगनवाड़ी कार्यक्रम के तहत बच्चों व महिलाओं को पौष्टिक भोजन।
  • राष्ट्रीय पोषण मिशन (POSHAN Abhiyaan) से कुपोषण में कमी का प्रयास।
  • कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए हरित क्रांति, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, और पीएम-किसान योजना जैसी पहलें।

फिर भी बनी प्रमुख चुनौतियाँ (Major Challenges Still Persist):

  • जलवायु परिवर्तन से कृषि उत्पादन प्रभावित होना।
  • खाद्यान्न वितरण में भ्रष्टाचार और लीकेज।
  • भंडारण और परिवहन सुविधाओं की कमी।
  • कुपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी।
  • किसानों की आय में असमानता और ऋण संकट।
  • भूमि विखंडन और सिंचाई की असमान उपलब्धता।
  • खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें और शहरी गरीबी।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत में खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन का नहीं, बल्कि समान वितरण और पोषण गुणवत्ता का भी प्रश्न है। स्थायी खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि कृषि सुधार, पारदर्शी वितरण प्रणाली और पोषण आधारित योजनाओं पर अधिक ध्यान दिया जाए।

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Describe the various efforts being made in India to achieve the ‘Sustainable Development Goals’. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

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‘सतत विकास लक्ष्यों’ को प्राप्त करने के लिए भारत में किये जा रहे विभिन्न प्रयासों का वर्णन कीजिये।

Ans: परिचय (Introduction):

सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2015 में निर्धारित 17 वैश्विक लक्ष्य हैं, जिन्हें 2030 तक प्राप्त करना है। इनका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण और सभी के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। भारत ने इन लक्ष्यों को अपनी राष्ट्रीय नीतियों में समाहित किया है।

भारत में सतत विकास लक्ष्यों हेतु प्रमुख प्रयास (Major Efforts by India for SDGs):

  • नीति आयोग (NITI Aayog) को राष्ट्रीय समन्वयक बनाकर SDG कार्यान्वयन की निगरानी।
  • SDG India Index जारी कर राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन।
  • स्वच्छ भारत मिशन – लक्ष्य 6 (स्वच्छ जल एवं स्वच्छता) की दिशा में महत्वपूर्ण पहल।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना – लक्ष्य 11 (सतत नगर एवं समुदाय) को प्रोत्साहन।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और आयुष्मान भारत योजना – लक्ष्य 3 (स्वास्थ्य एवं कल्याण) हेतु।
  • बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ – लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) की दिशा में प्रयास।
  • मनरेगा और कौशल विकास योजनाएँ – लक्ष्य 8 (सम्मानजनक कार्य और आर्थिक वृद्धि) हेतु।
  • राष्ट्रीय सौर मिशन – लक्ष्य 7 (सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा) को बढ़ावा।
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना – लक्ष्य 2 (भूखमरी उन्मूलन) हेतु।
  • जल जीवन मिशन – लक्ष्य 6 के अंतर्गत हर घर जल की व्यवस्था।
  • राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) – लक्ष्य 13 (जलवायु कार्रवाई) की दिशा में कदम।
  • शिक्षा के अधिकार अधिनियम और नई शिक्षा नीति 2020 – लक्ष्य 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) हेतु।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत सतत विकास लक्ष्यों को “सबका विकास” के दृष्टिकोण से आगे बढ़ा रहा है। सरकार, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के संयुक्त प्रयासों से भारत 2030 तक सतत एवं समावेशी विकास के लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है।

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Explain the concept of inclusive growth. What are the issues and challenges with inclusive growth in India? Explain. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

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समावेशी विकास की अवधारणा समझाइये। भारत में समावेशी विकास के क्या मुद्दे एवं चुनौतियाँ हैं? स्पष्ट कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

समावेशी विकास (Inclusive Growth) का अर्थ है ऐसा विकास जिसमें समाज के सभी वर्गों – गरीब, महिला, किसान, श्रमिक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक –  को समान अवसर मिले। इसका उद्देश्य केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करना है। यह विकास को “सबका साथ, सबका विकास” की भावना से जोड़ता है।

समावेशी विकास के प्रमुख मुद्दे (Main Issues of Inclusive Growth):

  • आय और संपत्ति का असमान वितरण।
  • ग्रामीण-शहरी विकास में असंतुलन।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच।
  • रोजगार सृजन की कमी और असंगठित क्षेत्र की समस्याएँ।
  • सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी में कमी।
  • लैंगिक असमानता और महिलाओं की आर्थिक स्थिति।
  • कृषि क्षेत्र की धीमी प्रगति।
  • आधारभूत ढाँचे (Infrastructure) की कमी।
  • वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का अभाव।
  • पर्यावरणीय असंतुलन से प्रभावित गरीब वर्ग।
  • क्षेत्रीय असमानताएँ, विशेषकर पूर्वोत्तर और पिछड़े राज्यों में।
  • डिजिटल विभाजन (Digital Divide) की बढ़ती खाई।
  • भारत में चुनौतियाँ (Challenges in India):
  • नीति क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता की कमी।
  • भ्रष्टाचार और संसाधनों के अनुचित उपयोग।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश की आवश्यकता।

निष्कर्ष (Conclusion): समावेशी विकास तभी संभव है जब आर्थिक वृद्धि के साथ सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित किए जाएँ। इसके लिए जन-केन्द्रित नीतियाँ, सुशासन और समान भागीदारी आवश्यक हैं।

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State the important objectives of NITI Aayog. How are the principles and functions of NITI Aayog different from those of the planning commission? Comment. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-3

नीति आयोग के प्रमुख उद्देश्य बताइये। नीति आयोग के सिद्धान्त और कार्य किस प्रकार योजना आयोग से भिन्न हैं? टिप्पणी कीजिये।

Ans: परिचय (Introduction):

नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर की गई थी। इसका उद्देश्य भारत में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देना और राज्यों की सक्रिय भागीदारी से विकास प्रक्रिया को तेज करना है। यह आयोग सरकार को नीतिगत सलाह देने वाला एक “थिंक टैंक” के रूप में कार्य करता है।

नीति आयोग के प्रमुख उद्देश्य (Main Objectives):

  • राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं का निर्धारण।
  • सहकारी संघवाद को सशक्त बनाना।
  • राज्यों की भागीदारी से नीतियों का निर्माण।
  • दीर्घकालिक रणनीतियाँ और अल्पकालिक कार्ययोजनाएँ बनाना।
  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में कार्य करना।
  • नीति निर्माण में नवाचार और तकनीक को बढ़ावा देना।
  • सामाजिक-आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण करना।
  • केंद्र और राज्यों में बेहतर समन्वय स्थापित करना।
  • पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को प्रोत्साहन देना।
  • निजी क्षेत्र और नागरिक समाज की भूमिका को शामिल करना।
  • नीति कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन करना।
  • जन-केंद्रित शासन (People-Centric Governance) को बढ़ावा देना।
  • योजना आयोग से भिन्नता (Difference from Planning Commission):
  • नीति आयोग का कोई वित्तीय आवंटन अधिकार नहीं है, जबकि योजना आयोग राज्यों को धन आवंटित करता था।
  • यह “बॉटम-अप” दृष्टिकोण अपनाता है, जबकि योजना आयोग “टॉप-डाउन” मॉडल पर कार्य करता था।
  • नीति आयोग नीति निर्माण में लचीलापन और सहयोग पर बल देता है, न कि नियंत्रण पर।

निष्कर्ष (Conclusion):

नीति आयोग ने विकास प्रक्रिया को केंद्रीकृत से विकेन्द्रीकृत बनाया है। यह नए भारत की नीति प्रणाली को अधिक सहभागी, गतिशील और नवोन्मेषी दिशा प्रदान करता है।

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