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Outline the major challenges faced by the coast guard of India and explain the efforts taken to deal with them. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारतीय तट रक्षक बल के सम्मुख प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित कीजिये तथा उनसे निपटने के लिये किये गये प्रयासों की व्याख्या कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारतीय तट रक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) की स्थापना 1978 में समुद्री सीमाओं की रक्षा, तस्करी रोकने और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए की गई थी। यह बल देश की तटीय सुरक्षा का प्रमुख अंग है।

मुख्य चुनौतियाँ (Major Challenges):

  • 7,500 किमी लंबी तटरेखा की निरंतर निगरानी कठिन।
  • समुद्री आतंकवाद और घुसपैठ की बढ़ती घटनाएँ।
  • अवैध मछली पकड़ना और समुद्री तस्करी।
  • तेल रिसाव व प्रदूषण नियंत्रण में तकनीकी सीमाएँ।
  • अपर्याप्त जहाज, रडार व मानव संसाधन।
  • विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की चुनौती।
  • निपटने के प्रयास (Efforts to Address):
  • तटीय निगरानी नेटवर्क (CSN) व IMAC से रीयल-टाइम सूचना साझाकरण।
  • आधुनिक गश्ती जहाज, ड्रोन और एयर स्क्वाड्रन की तैनाती।
  • सागर रक्षा योजना के तहत तटीय चौकियों का विस्तार।
  • नौसेना व राज्य पुलिस के साथ संयुक्त अभ्यास (Joint Exercises)।
  • तटीय समुदायों को सुरक्षा सहयोग हेतु प्रशिक्षित किया जा रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारतीय तट रक्षक बल आधुनिक तकनीक और बहु-एजेंसी समन्वय के माध्यम से समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ बना रहा है, जिससे भारत की समुद्री संप्रभुता और तटीय स्थिरता सुनिश्चित होती है।

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Mention the role of Indian Defence Research and Development Organisation in India’s security set-up. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत की सुरक्षा व्यवस्था में भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की भूमिका का उल्लेख कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation – DRDO) की स्थापना 1958 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाना और सशस्त्र सेनाओं को अत्याधुनिक उपकरण प्रदान करना है।

मुख्य भूमिकाएँ (Key Roles):

  • स्वदेशी रक्षा तकनीक का विकास – मिसाइल, रडार, टैंक, पनडुब्बी व युद्धक विमान जैसी तकनीकों का निर्माण।
  • मिसाइल कार्यक्रम की सफलता – ‘अग्नि’, ‘पृथ्वी’, ‘आकाश’, ‘नाग’ और ‘ब्रहमोस’ जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों का विकास।
  • रक्षा उपकरणों का आधुनिकीकरण – सैनिकों के लिए हल्के हथियार, बुलेटप्रूफ जैकेट व संचार प्रणाली में सुधार।
  • अंतरिक्ष व साइबर सुरक्षा में योगदान – उपग्रह-आधारित निगरानी और साइबर रक्षा प्रणालियों का विकास।
  • नवाचार व अनुसंधान प्रोत्साहन – ‘डेयर टू ड्रीम’ जैसी योजनाओं से निजी व अकादमिक क्षेत्र को जोड़ना।
  • स्वावलंबन में योगदान – ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अंतर्गत विदेशी निर्भरता में कमी।
  • सैन्य-नागरिक तकनीक का उपयोग – रक्षा तकनीकों का नागरिक क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, परिवहन व पर्यावरण में प्रयोग।

निष्कर्ष (Conclusion):

DRDO ने भारत की रक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया है। इसके नवाचारों ने न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी स्थान दिलाया है।

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Describe the role of Artificial Intelligence in the safety and security during disaster management. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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आपदा प्रबन्धन के दौरान सुरक्षा एवं संरक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका का वर्णन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आज आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी उपकरण बन चुकी है। यह प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदाओं के पूर्वानुमान, राहत कार्यों और पुनर्वास में सटीक व त्वरित निर्णय लेने में मदद करती है।

मुख्य भूमिकाएँ (Key Roles):

  • पूर्वानुमान (Prediction): सैटेलाइट डेटा और मशीन लर्निंग मॉडल के माध्यम से भूकम्प, चक्रवात, बाढ़ आदि की समयपूर्व चेतावनी।
  • जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment): AI आधारित डेटा विश्लेषण से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारण।
  • आपात प्रतिक्रिया (Emergency Response): ड्रोन और रोबोट द्वारा खोज एवं राहत कार्यों में त्वरित सहायता।
  • संचार और समन्वय (Coordination): चैटबॉट्स और रीयल-टाइम ट्रैकिंग से राहत टीमों के बीच बेहतर तालमेल।
  • संसाधन प्रबंधन (Resource Allocation): AI से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं का कुशल वितरण।
  • सोशल मीडिया विश्लेषण: संकट के दौरान जनसंदेशों से वास्तविक स्थिति का त्वरित आकलन।
  • पुनर्वास योजना (Rehabilitation Planning): क्षति मूल्यांकन के आधार पर दीर्घकालिक पुनर्निर्माण रणनीति बनाना।

निष्कर्ष (Conclusion):

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आपदा प्रबंधन में मानवीय क्षमता को कई गुना बढ़ाकर सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करती है। इसका प्रभावी उपयोग न केवल जनहानि घटाता है बल्कि आपदा-उत्तर पुनर्वास को भी अधिक संगठित बनाता है।

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What is digital arrest ? Which are the States most effected by the problem of digital arrest in India in the last three years ? Mention the effective measures taken by the Government of India in this direction. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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डिजिटल अरेस्ट क्या है ? विगत तीन वर्षों में भारत में डिजिटल अरेस्ट की समस्या से सर्वाधिक प्रभावित राज्य कौन-से हैं ? इस दिशा में भारत सरकार द्वारा उठाये गये प्रभावी उपायों का उल्लेख करें ।

Ans: परिचय (Introduction):  

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) एक उभरता हुआ साइबर अपराध है जिसमें अपराधी स्वयं को सरकारी एजेंसी (जैसे CBI, पुलिस या NCB) का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या संदेशों के माध्यम से लोगों को डराते हैं कि वे किसी अपराध में शामिल हैं और “ऑनलाइन गिरफ्तारी” से बचने के लिए धन जमा करें।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • यह अपराध भय और भ्रम फैलाकर आर्थिक ठगी करने का तरीका है।
  • कानूनी रूप से “डिजिटल गिरफ्तारी” का कोई अस्तित्व नहीं है।
  • पिछले तीन वर्षों में कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित राज्य रहे हैं।
  • 2024 में कर्नाटक में 600 से अधिक मामले दर्ज हुए और ₹100 करोड़ से अधिक की हानि हुई।
  • सरकार ने Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से नियंत्रण के प्रयास किए।
  • ‘Stop-Think-Act’ अभियान के ज़रिए जनजागरूकता बढ़ाई जा रही है।
  • फर्जी सिम कार्ड, व्हाट्सएप व स्काइप खातों को ब्लॉक करने की कार्रवाई जारी है।

निष्कर्ष (Conclusion):

सरकार के साइबर नियंत्रण उपायों और नागरिक जागरूकता से इस डिजिटल ठगी पर रोक लगाई जा सकती है। सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार ही डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों से बचाव का सर्वोत्तम उपाय है।

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What are major initiatives of Government of India for promoting technology-based solutions for rural upliftment ? [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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ग्रामीण उत्थान के लिये तकनीक-आधारित समाधान को बढ़ावा देने हेतु भारत सरकार के प्रमुख प्रयास क्या हैं ?

Ans: परिचय (Introduction):

ग्रामीण भारत देश की जनसंख्या और अर्थव्यवस्था का आधार है। इसके सतत विकास के लिए भारत सरकार ने तकनीक-आधारित समाधान (Technology-Based Solutions) को ग्रामीण जीवन, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य में लागू करने के अनेक प्रयास किए हैं।

मुख्य प्रयास (Key Initiatives):

  • डिजिटल इंडिया अभियान – ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, डिजिटल भुगतान और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा।
  • कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) – ग्रामीण नागरिकों को सरकारी सेवाओं की डिजिटल पहुँच।
  • ई-नाम (e-NAM) पोर्टल – किसानों को ऑनलाइन कृषि बाजार उपलब्ध कराना।
  • भारतनेट परियोजना – ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुँचाना।
  • स्मार्ट ग्राम योजना – ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार में स्मार्ट समाधान लागू करना।
  • कृषि तकनीकी उपयोग – ड्रोन, सेंसर, और मोबाइल ऐप से सटीक कृषि को प्रोत्साहन।
  • आरोग्य सेतु व टेलीमेडिसिन सेवाएँ – ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल नवाचार।

निष्कर्ष (Conclusion):

तकनीक-आधारित पहलों ने ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। इनसे न केवल जीवन स्तर सुधर रहा है, बल्कि ग्रामीण भारत आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहा है।

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India is experiencing the phase of population-dividend’. In this context, discuss the measures adopted by the Government to tackle appropriately the problem of unemployment in the country. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत जनसंख्या-लाभांश की अवस्था से गुजर रहा है’। इस परिप्रेक्ष्य में, देश में बेरोजगारी की समस्या से समोपयुक्त तरीके से निपटने के लिये सरकार द्वारा अपनाये गये उपायों की विवेचना कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत वर्तमान में जनसंख्या-लाभांश (Demographic Dividend) की अवस्था में है, जहाँ कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या अधिक है। यदि इस विशाल मानव संसाधन का सही उपयोग न हो, तो यह लाभांश बेरोजगारी की चुनौती में बदल सकता है। इसलिए सरकार ने रोजगार सृजन हेतु अनेक नीतिगत उपाय अपनाए हैं।

मुख्य उपाय (Key Measures):

  • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) – सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा।
  • मेक इन इंडिया – विनिर्माण क्षेत्र में निवेश व रोजगार के अवसरों में वृद्धि।
  • स्किल इंडिया मिशन – युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगारयोग्य बनाना।
  • स्टार्टअप इंडिया और मुद्रा योजना – नवाचार व उद्यमिता को प्रोत्साहन।
  • मनरेगा (MGNREGA) – ग्रामीण स्तर पर रोजगार की गारंटी और आय-सुरक्षा।
  • डिजिटल इंडिया – आईटी एवं ऑनलाइन सेवाओं में नए रोजगार अवसरों का सृजन।
  • राष्ट्रीय रोजगार नीति – औपचारिक रोजगार बढ़ाने हेतु दीर्घकालिक रणनीति।

निष्कर्ष (Conclusion):

सरकारी योजनाओं ने युवाओं को कौशल, वित्त और अवसर प्रदान कर रोजगार परिदृश्य को सशक्त किया है। यदि शिक्षा, उद्योग और नीति के बीच समन्वय बना रहे, तो भारत अपने जनसंख्या-लाभांश को वास्तविक आर्थिक शक्ति में बदल सकता है।

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How does the New Economic Policy change the structure of employment in India ? Evaluate. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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नई आर्थिक नीति ने किस प्रकार भारत में रोजगार के ढाँचे को परिवर्तित किया है ? मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

1991 में लागू की गई नई आर्थिक नीति (New Economic Policy – NEP) के तीन मुख्य घटक थे — उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization) और वैश्वीकरण (Globalization)। इस नीति ने भारत की अर्थव्यवस्था को खुले बाजार से जोड़ा और रोजगार संरचना में व्यापक परिवर्तन लाए।

मुख्य प्रभाव (Key Impacts):

  • सेवा क्षेत्र का विस्तार – आईटी, बैंकिंग, टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में रोजगार तेजी से बढ़ा।
  • असंगठित क्षेत्र में वृद्धि – लचीले श्रम बाज़ार के कारण अस्थायी व अनुबंधित नौकरियों में वृद्धि हुई।
  • औद्योगिक रोजगार में गिरावट – स्वचालन और प्रतिस्पर्धा से पारंपरिक उद्योगों में नौकरियाँ घटीं।
  • महिला रोजगार में परिवर्तन – सेवा और लघु उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी।
  • कौशल आधारित रोजगार – उच्च शिक्षा व तकनीकी दक्षता की माँग बढ़ी।
  • ग्रामीण-शहरी असमानता – ग्रामीण रोजगार अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ा।
  • स्वरोजगार व स्टार्टअप संस्कृति – उद्यमिता को प्रोत्साहन मिला।

निष्कर्ष (Conclusion): नई आर्थिक नीति ने भारत के रोजगार ढाँचे को पारंपरिक कृषि आधारित से सेवा व कौशल आधारित अर्थव्यवस्था में रूपांतरित किया। यद्यपि इससे अवसर बढ़े, परंतु असमानता और अस्थायी रोजगार जैसी चुनौतियाँ भी उभरीं।

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Was the ‘Bhoodan Movement’ a part of land reforms in India ? Discuss its major effects. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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‘भूदान आन्दोलन’ भारत में भूमि सुधार का एक हिस्सा था ? इसके प्रमुख प्रभावों की विवेचना कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

‘भूदान आन्दोलन’ (Bhoodan Movement) की शुरुआत 1951 में आचार्य विनोबा भावे ने की थी, जिसका उद्देश्य भूमिहीन किसानों को स्वेच्छा से दान में भूमि दिलाना था। यह आंदोलन अहिंसा और स्वैच्छिक सहयोग पर आधारित था।

मुख्य प्रभाव (Key Impacts):

  • भूमि सुधार का नैतिक पहलू – यह आंदोलन कानूनी न होकर नैतिक भूमि पुनर्वितरण का माध्यम बना।
  • भूमिहीनों को भूमि प्राप्ति – लाखों एकड़ भूमि दान में मिलने से गरीब किसानों को जमीन मिली।
  • सामाजिक समरसता – जमींदारों और किसानों के बीच संबंधों में सुधार हुआ।
  • ग्राम स्वराज की भावना – गांवों में आत्मनिर्भरता और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिला।
  • सरकारी भूमि सुधारों पर प्रभाव – इस आंदोलन ने सरकार को भूमि सुधार नीतियाँ अपनाने के लिए प्रेरित किया।
  • सीमित सफलता – कई मामलों में दान की गई भूमि कानूनी या उपयोगी नहीं थी।
  • आन्दोलन का प्रसार – बाद में ग्रामदान, संपत्तिदान जैसे आंदोलनों में भी विस्तार हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion):

भूदान आन्दोलन को भारत में भूमि सुधार का नैतिक व सामाजिक अंग कहा जा सकता है। यद्यपि इसकी सीमाएँ थीं, परंतु इसने ग्रामीण चेतना और समानता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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Give a brief account of measures adopted by the Government to provide adequate credit to the farmers. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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किसानों को पर्याप्त ऋण प्रदान करने के लिये सरकार द्वारा अपनाये गये उपायों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

कृषि क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, परंतु किसानों के सामने वित्तीय संसाधनों की कमी एक प्रमुख चुनौती रही है। इस समस्या के समाधान हेतु सरकार ने विभिन्न योजनाओं और संस्थागत उपायों के माध्यम से सुलभ एवं सस्ते ऋण की व्यवस्था की है।

मुख्य उपाय (Key Measures):

  • कृषि ऋण पर ब्याज सब्सिडी योजना (Interest Subvention Scheme) — समय पर भुगतान करने वाले किसानों को रियायती ब्याज दर।
  • किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card – KCC) — लघु अवधि के ऋण के लिए सरल व त्वरित सुविधा।
  • नाबार्ड (NABARD) — ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त सुविधा प्रदान कर कृषि निवेश को बढ़ावा।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) — ऋण सुरक्षा हेतु फसल हानि पर बीमा कवरेज।
  • ग्रामीण बैंक एवं सहकारी समितियाँ — ऋण वितरण का विकेन्द्रित तंत्र।
  • डिजिटल ऋण प्रणाली — आधार आधारित त्वरित ऋण स्वीकृति।
  • सरकारी गारंटी योजनाएँ — कृषि निवेशकों को जोखिम संरक्षण।

निष्कर्ष (Conclusion):

इन उपायों से किसानों की ऋण पहुँच में सुधार हुआ है, जिससे उत्पादन, निवेश और ग्रामीण आय में वृद्धि संभव हुई है। सतत वित्तीय सहयोग से कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।

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Highlight the key components of upstream and downstream activities in food processing supply chain management with suitable examples.[Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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खाद्य प्रसंस्करण की आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्धन में ऊर्ध्व प्रवाह तथा अधो प्रवाह क्रियाओं के प्रमुख अवयवों को सोदाहरण चिन्हांकित कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

खाद्य प्रसंस्करण की आपूर्ति श्रृंखला (Food Processing Supply Chain) एक ऐसी प्रणाली है जो कच्चे कृषि उत्पादों को उपभोक्ता तक पहुँचने योग्य तैयार खाद्य में बदलती है। इसमें ऊर्ध्व प्रवाह (Upstream) और अधो प्रवाह (Downstream) दोनों चरण शामिल होते हैं। इन दोनों का कुशल प्रबंधन खाद्य गुणवत्ता, लागत और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करता है।

मुख्य अवयव (Key Components):

  • ऊर्ध्व प्रवाह क्रियाएँ (Upstream Activities):
  • कृषि उत्पादन एवं कच्चे माल की आपूर्ति
  • संग्रहण, ग्रेडिंग और प्राथमिक प्रसंस्करण
  • किसानों, आपूर्तिकर्ताओं और प्रसंस्करण इकाइयों के बीच समन्वय
  • अधो प्रवाह क्रियाएँ (Downstream Activities):
  • प्रसंस्कृत उत्पादों का पैकेजिंग और भंडारण
  • वितरण नेटवर्क एवं लॉजिस्टिक्स
  • थोक, खुदरा और ई-कॉमर्स विपणन
  • उपभोक्ता प्रतिक्रिया और गुणवत्ता प्रबंधन

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार, ऊर्ध्व एवं अधो प्रवाह दोनों की दक्षता से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में मूल्यवर्धन होता है। इनका समुचित समन्वय खाद्य सुरक्षा, निर्यात वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करता है।

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