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In the era of Globalization International ethics is the need of hour for ensuring peace and stability among the nations”. Explain critically. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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“वैश्वीकरण के युग में राष्ट्रों के मध्य शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र समय की मांग है।”, आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए। “

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

वैश्वीकरण (Globalization) ने विश्व के राष्ट्रों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से परस्पर जुड़ दिया है। इस युग में किसी एक देश की नीतियाँ अन्य देशों को सीधे प्रभावित करती हैं। अतः अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र (International Ethics) वैश्विक शांति और स्थिरता का अनिवार्य आधार बन गया है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र राष्ट्रों के बीच न्याय, समानता और सहयोग के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करता है।
  • यह मानवता के हित को राष्ट्रीय स्वार्थों से ऊपर रखने की प्रेरणा देता है।
  • युद्ध, शोषण और पर्यावरणीय दोहन जैसी समस्याओं के समाधान हेतु नैतिक दृष्टिकोण आवश्यक है।
  • विकसित देशों का दायित्व है कि वे विकासशील देशों के प्रति सहयोग और निष्पक्षता दिखाएँ।
  • वैश्विक संस्थाएँ (जैसे—UN, WHO, WTO) तभी प्रभावी बन सकती हैं जब उनके निर्णय नैतिक सिद्धांतों पर आधारित हों।
  • परंतु व्यवहार में कई बार राष्ट्र अपने राजनीतिक और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हैं।
  • इसलिए अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र की सफलता नैतिक प्रतिबद्धता और पारदर्शिता पर निर्भर करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

निष्कर्षतः, अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र आज की वैश्विक व्यवस्था में शांति और संतुलन का मार्गदर्शक है। जब राष्ट्र नैतिक आचरण अपनाएँगे तभी वास्तविक वैश्विक सौहार्द और स्थिरता संभव होगी।

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A child learns values by what he observes around him”. Discuss the role of family and society in the formation of values in the light of this statement. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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“बालक अपने चतुर्दिक जो देखता है, उससे मूल्यों को सीखता है” – इस कथन के आलोक में मूल्यों के निर्माण में परिवार और समाज की भूमिका की विवेचना कीजिए। “

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

मूल्य (Values) किसी व्यक्ति के जीवन की नैतिक दिशा निर्धारित करते हैं। बालक का व्यक्तित्व जन्मजात नहीं होता, बल्कि उसके परिवेश से विकसित होता है। वह अपने परिवार और समाज से देखकर, सुनकर और अनुभव करके मूल्य सीखता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • परिवार बालक का प्रथम विद्यालय होता है, जहाँ वह सत्य, ईमानदारी, और अनुशासन जैसे मूल्य सीखता है।
  • माता-पिता के आचरण से बालक आदर्श व्यवहार का अनुकरण करता है।
  • घर का वातावरण – प्रेम, सहयोग और सहिष्णुता – बालक की भावनात्मक स्थिरता बनाता है।
  • समाज बालक को सामाजिक मूल्य जैसे समानता, न्याय, और सहअस्तित्व सिखाता है।
  • विद्यालय, मित्र समूह और मीडिया भी मूल्य निर्माण में सहायक माध्यम बनते हैं।
  • समाज की सांस्कृतिक परंपराएँ और रीति-रिवाज नैतिकता की जड़ों को मजबूत करते हैं।
  • परिवार और समाज के समन्वित प्रयास से बालक में जिम्मेदारी और नैतिक चेतना विकसित होती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः परिवार और समाज बालक के मूल्य-निर्माण के दो प्रमुख स्तंभ हैं। इनके आदर्श व्यवहार से ही एक नैतिक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण होता है।

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Examine the relevance of the following in the context of civil service. a) Spirit of service b) Courage of firm conviction. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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सिविल सेवा के सन्दर्भ में निम्नलिखित की प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिए। अ) सेवा भाव ब) दृढ़ विश्वास का साहस।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सिविल सेवा केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि जनता की सेवा का माध्यम है। इसमें लोकहित, निष्पक्षता और उत्तरदायित्व सर्वोपरि होते हैं। सेवा भाव और दृढ़ विश्वास का साहस, दोनों ही गुण एक आदर्श लोकसेवक की पहचान हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • सेवा भाव लोकसेवक को जनता की आवश्यकताओं और समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाता है।
  • यह करुणा, सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
  • लोकसेवक को आत्मकेंद्रित न होकर सार्वजनिक कल्याण के प्रति समर्पित रखता है।
  • दृढ़ विश्वास का साहस नैतिकता और सत्य के मार्ग पर टिके रहने की शक्ति देता है।
  • यह लोकसेवक को राजनीतिक या व्यक्तिगत दबावों से स्वतंत्र होकर निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
  • नैतिक दुविधाओं की स्थिति में यह गुण सही के पक्ष में खड़े रहने का साहस प्रदान करता है।
  • दोनों गुण मिलकर प्रशासन में नैतिक नेतृत्व और जनविश्वास को सशक्त करते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः सेवा भाव और दृढ़ विश्वास का साहस सिविल सेवक के चरित्र की दो आधारशिलाएँ हैं।

इनके समन्वय से प्रशासन जनहितकारी, नैतिक और उत्तरदायी बनता है।

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What do you understand by Moral insight? How does it help in Moral situation of civil servants? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

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नैतिक अन्तर्दृष्टि से आप क्या समझते हैं? लोकसेवकों की नैतिक परिस्थिति में यह किस प्रकार सहायक है?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

नैतिक अन्तर्दृष्टि (Moral Insight) का अर्थ है—सही और गलत के बीच भेद करने की गहरी समझ। यह व्यक्ति को अपने आचरण और निर्णयों में नैतिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करने की दिशा देती है। लोकसेवकों के लिए यह अंतर्दृष्टि ईमानदारी, निष्पक्षता और सार्वजनिक हित बनाए रखने की नींव है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • यह लोकसेवक को जटिल परिस्थितियों में नैतिक निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।
  • व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर सार्वजनिक कल्याण को प्राथमिकता देने में सहायता करती है।
  • भ्रष्टाचार, पक्षपात और शक्ति दुरुपयोग से बचाव का आधार बनती है।
  • पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को सुदृढ़ करती है।
  • नैतिक दुविधाओं में विवेकपूर्ण संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
  • सेवा के आदर्शों जैसे सत्यनिष्ठा, करुणा और सहिष्णुता को प्रोत्साहित करती है।
  • प्रशासनिक निर्णयों में मानवता और न्याय के मूल्यों का समावेश सुनिश्चित करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार नैतिक अन्तर्दृष्टि लोकसेवकों के लिए एक नैतिक दिशा-सूचक का कार्य करती है। यह उनके कार्य को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और जनोन्मुख बनाती है।

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Examine state government’s efforts, initiatives and policy directions in the medical and healthcare sphere with reference to Uttar Pradesh Health Policy 2018. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति 2018 के संदर्भ में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में राज्य सरकार के प्रयासों, पहलों और नीति निर्देशों का परीक्षण कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति 2018 राज्य में सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इस नीति का लक्ष्य सभी नागरिकों को समान स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना और प्राथमिक स्वास्थ्य संरचना को मजबूत करना है। राज्य सरकार ने इस नीति के तहत चिकित्सा क्षेत्र में अनेक सुधारात्मक कदम और नवाचार अपनाए हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • मुख्य उद्देश्य: ‘सबका स्वास्थ्य–सबके लिए स्वास्थ्य’ के लक्ष्य के अनुरूप सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) सुनिश्चित करना।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य ढाँचा सुदृढ़ीकरण: प्रत्येक ब्लॉक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) को सशक्त किया गया।
  • आयुष्मान भारत योजना का समन्वय: गरीब परिवारों को ₹5 लाख तक की स्वास्थ्य बीमा सुविधा प्रदान की गई।
  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: जननी सुरक्षा योजना और मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में कमी का प्रयास।
  • चिकित्सा शिक्षा में सुधार: नए मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग कॉलेजों और पैरामेडिकल संस्थानों की स्थापना की गई।
  • ई-स्वास्थ्य पहल: ई-हॉस्पिटल, टेलीमेडिसिन और हेल्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार।
  • रोग नियंत्रण कार्यक्रम: टीबी, मलेरिया, डेंगू और कुपोषण जैसी बीमारियों के नियंत्रण हेतु विशेष अभियान चलाए गए।
  • आपातकालीन चिकित्सा सेवा: 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं के माध्यम से त्वरित सहायता सुनिश्चित की गई।
  • जन-जागरूकता अभियान: ‘पोषण अभियान’, ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे कार्यक्रमों से स्वास्थ्य व्यवहार में सुधार।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: PPP (Public-Private Partnership) मॉडल के तहत निजी क्षेत्र को स्वास्थ्य ढाँचा सुदृढ़ करने में जोड़ा गया।
  • महिला एवं किशोरी स्वास्थ्य: ‘मिशन शक्ति’ और किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से महिला स्वास्थ्य सशक्तिकरण।
  • वित्तीय प्रबंधन: स्वास्थ्य बजट में वृद्धि और योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन पर बल।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य नीति 2018 ने राज्य के चिकित्सा और स्वास्थ्य तंत्र को नई दिशा दी है। इन पहलों ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, गुणवत्ता और विश्वसनीयता को सशक्त बनाया है।

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Discuss the nature and objectives of the first Ayush University established in Uttar Pradesh. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश में स्थापित प्रथम आयुष विश्वविद्यालय के स्वरूप और उद्देश्यों की विवेचना कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

भारत की परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य का प्रथम आयुष विश्वविद्यालय स्थापित किया है। यह विश्वविद्यालय आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा प्रणालियों के समन्वित विकास हेतु समर्पित है। इसकी स्थापना से राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नई दिशा प्राप्त हुई है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • स्थापना वर्ष: उत्तर प्रदेश का प्रथम आयुष विश्वविद्यालय वर्ष 2020 में स्थापित किया गया।
  • नाम: विश्वविद्यालय का नाम है महाराज सुहेलदेव राज्य आयुष विश्वविद्यालय, जो भदोही (पूर्व में सिद्धार्थनगर) में स्थित है।
  • प्रमुख उद्देश्य: पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के अध्ययन, शोध और प्रसार को प्रोत्साहित करना।
  • आयुष पद्धतियों का एकीकरण: आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी की शिक्षा को एक मंच पर लाना।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: आयुष संस्थानों में उच्चस्तरीय पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और मानकीकरण सुनिश्चित करना।
  • अनुसंधान एवं नवाचार: पारंपरिक चिकित्सा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक अनुसंधान को प्रोत्साहन।
  • स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान: ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सस्ती और सुलभ चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराना।
  • जन-जागरूकता: प्राकृतिक उपचार और जीवनशैली सुधार के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना।
  • संस्थानिक संबद्धता: राज्य के सभी आयुष कॉलेजों और संस्थानों को इस विश्वविद्यालय से संबद्ध किया गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक स्तर पर आयुष चिकित्सा की पहचान और प्रसार को बढ़ावा देना।
  • रोजगार सृजन: आयुष क्षेत्र में शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना।
  • सरकारी दृष्टिकोण: यह विश्वविद्यालय ‘स्वस्थ उत्तर प्रदेश, स्वस्थ भारत’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

निष्कर्ष (Conclusion):

महाराज सुहेलदेव राज्य आयुष विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा के पुनर्जागरण का प्रतीक है। यह न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बना रहा है, बल्कि भारतीय चिकित्सा परंपरा को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित कर रहा है।

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Uttar Pradesh has an important place in the propagation of Buddhism. Explain. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण स्थान है। व्याख्या कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश बौद्ध धर्म के उद्भव, विकास और प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ बुद्ध के जीवन से जुड़ी अनेक ऐतिहासिक घटनाएँ घटीं, जिन्होंने बौद्ध धर्म को विश्वव्यापी स्वरूप दिया। इस प्रदेश की भूमि बुद्ध के उपदेशों, शिक्षाओं और स्मृतियों से अनुप्राणित मानी जाती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • लुम्बिनी के समीप कपिलवस्तु: सिद्धार्थ गौतम का बाल्यकाल कपिलवस्तु (वर्तमान सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश के निकट) में बीता।
  • सारणाथ (वाराणसी): बुद्ध ने यहाँ अपने पाँच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिया — ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ यही से प्रारंभ हुआ।
  • कुशीनगर (गोरखपुर): यहीं बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ, जो बौद्ध श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ है।
  • श्रावस्ती: बुद्ध ने अपने जीवन के अधिकतम वर्ष यहाँ बिताए और अनेक उपदेश दिए।
  • कौशाम्बी: यहाँ बुद्ध ने संघ की स्थापना और संगठनात्मक कार्यों का विस्तार किया।
  • संकिसा (फर्रुखाबाद): माना जाता है कि यहीं बुद्ध स्वर्ग से उतरकर पृथ्वी पर आए थे।
  • बौद्ध स्तूप और विहार: सारनाथ, श्रावस्ती और कुशीनगर में बने प्राचीन स्तूप बौद्ध कला के अनमोल उदाहरण हैं।
  • अशोक का योगदान: सम्राट अशोक ने उत्तर प्रदेश में अनेक स्तंभ, स्तूप और शिलालेख बनवाकर बौद्ध धर्म को बढ़ावा दिया।
  • बौद्ध शिक्षा केंद्र: सारनाथ और श्रावस्ती प्राचीन काल में बौद्ध अध्ययन के प्रमुख केंद्र रहे।
  • अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ यात्रा मार्ग: उत्तर प्रदेश के बौद्ध स्थल आज भी वैश्विक पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं।
  • आधुनिक पुनर्जागरण: डॉ. भीमराव अंबेडकर ने यहाँ से बौद्ध धर्म के नवजागरण को गति दी।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: बौद्ध विचारधारा ने प्रदेश की कला, वास्तुकला और सामाजिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश बौद्ध धर्म की जीवन यात्रा का साक्षी और केंद्र बिंदु रहा है। यह भूमि आज भी विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए श्रद्धा, अध्ययन और प्रेरणा का प्रमुख स्थल है।

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Throw light on the contributions of the warriors of Uttar Pradesh in the Freedom Struggle of 1857. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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1857 के स्वातंत्र्य समर में उत्तर प्रदेश के योद्धाओं के योगदान पर प्रकाश डालिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सन 1857 का स्वातंत्र्य समर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रथम व्यापक प्रयास था। उत्तर प्रदेश इस विद्रोह का केंद्र रहा, जहाँ अनेक वीरों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध शौर्य और बलिदान का परिचय दिया। यह आंदोलन देशभक्ति, एकता और स्वराज की भावना का प्रतीक बन गया।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • मेरठ से शुरुआत: 10 मई 1857 को मेरठ में सैनिक विद्रोह से आंदोलन की चिंगारी भड़की।
  • दिल्ली की ओर कूच: मेरठ के सिपाहियों ने दिल्ली पहुँचकर बहादुरशाह ज़फर को सम्राट घोषित किया।
  • कानपुर में नाना साहेब पेशवा: उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध मोर्चा संभाला और कानपुर को विद्रोह का केंद्र बनाया।
  • तात्या टोपे: नाना साहेब के सेनापति के रूप में उन्होंने अंग्रेजों को अनेक बार पराजित किया।
  • झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई: वीरांगना लक्ष्मीबाई ने झाँसी की रक्षा में अभूतपूर्व साहस दिखाया।
  • अज़ीमुल्ला खाँ: आंदोलन के बौद्धिक और रणनीतिक योजनाकार रहे।
  • फ़ैज़ाबाद के मौलवी अहमदुल्ला शाह: धार्मिक एकता और विद्रोह के संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • लखनऊ में बेगम हज़रत महल: उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रशासनिक और सैन्य नेतृत्व संभाला।
  • बलिया और गाज़ीपुर के क्रांतिकारी: ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेजी ठिकानों पर हमले कर जन-आंदोलन को बल दिया।
  • बरेली के ख़ान बहादुर ख़ाँ: उन्होंने स्वतंत्र शासन की घोषणा कर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी।
  • इलाहाबाद और बनारस: यहाँ विद्रोह ने धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का स्वरूप लिया।
  • जनसामान्य की भागीदारी: किसानों, कारीगरों और सामान्य जनता ने भी बड़े पैमाने पर विद्रोह का समर्थन किया।

निष्कर्ष (Conclusion):

1857 के स्वातंत्र्य समर में उत्तर प्रदेश के वीर योद्धाओं ने अपार साहस और देशभक्ति का परिचय दिया। उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नींव बना, जिसने आगे आज़ादी की लड़ाई को दिशा दी।

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Analyse the achievements of Baba Ramchandra as a Peasant Leader. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

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एक किसान नेता के रूप में बाबा रामचन्द्र की उपलब्धियों का विश्लेषण कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

बाबा रामचन्द्र 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्तर प्रदेश के प्रमुख किसान नेता थे। उन्होंने किसानों के आर्थिक शोषण, अत्याचार और ज़मींदारी प्रथा के विरुद्ध जनआंदोलन का नेतृत्व किया। उनका आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ग्रामीण चेतना और किसान एकता का प्रतीक बन गया।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रारंभिक जीवन: मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले बाबा रामचन्द्र ने बाद में अवध क्षेत्र को अपने आंदोलन का केंद्र बनाया।
  • फिजी से वापसी: उन्होंने गिरमिटिया मज़दूर के रूप में फिजी में अन्याय का अनुभव किया, जिसने उनके भीतर सामाजिक न्याय की भावना को प्रबल किया।
  • अवध किसान सभा (1919): बाबा रामचन्द्र ने अवध किसान सभा की स्थापना की, जो किसानों के अधिकारों की प्रमुख संस्था बनी।
  • मुख्य उद्देश्य: ज़मींदारों द्वारा लगान, बेगार और शोषण के खिलाफ संगठित प्रतिरोध।
  • किसान आंदोलन: उन्होंने रायबरेली, प्रतापगढ़, और फैज़ाबाद जिलों में किसानों को एकजुट किया।
  • रामायण पाठ’ आंदोलन: किसानों को धार्मिक-लोकभाषा के माध्यम से जागरूक करने की अनूठी पद्धति अपनाई।
  • महात्मा गांधी से संपर्क: गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़कर किसानों की समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर उठाया।
  • हिंसामुक्त आंदोलन: उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों के अनुरूप संघर्ष किया।
  • किसान अधिकारों की माँग: उन्होंने ‘लगान में कमी’, ‘बेगार की समाप्ति’ और ‘कृषि भूमि पर किसानों के अधिकार’ की मांग की।
  • सामाजिक एकता: जाति और वर्ग से ऊपर उठकर किसानों में एकजुटता पैदा की।
  • राजनीतिक प्रभाव: उनके नेतृत्व ने ग्रामीण राजनीति में किसान वर्ग को नई पहचान दिलाई।
  • दीर्घकालिक प्रभाव: उनके आंदोलन ने आगे चलकर भारत के किसान आंदोलनों की नींव को मजबूत किया।

निष्कर्ष (Conclusion):

बाबा रामचन्द्र ने किसानों को संगठित कर शोषण के विरुद्ध एक सशक्त आवाज़ दी। उनकी नेतृत्व क्षमता और संघर्ष ने भारतीय किसान आंदोलनों को नई दिशा और चेतना प्रदान की।

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Describe the role of Uttar Pradesh Police ‘Special Task Force’ in the prevention of the organized crime. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-5

संगठित अपराध को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ की भूमिका का वर्णन कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction ):

उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध (Organized Crime) राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती रहा है। इसे नियंत्रित करने हेतु 1998 में उत्तर प्रदेश पुलिस स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की स्थापना की गई। इस विशेष बल का उद्देश्य अपराधियों, माफिया गिरोहों और आतंकी नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

मुख्य बिंदु (Main Points ):

  • स्थापना वर्ष: 1998 में राज्य सरकार द्वारा STF की स्थापना की गई थी।
  • मुख्य उद्देश्य: संगठित अपराध, आतंकवाद, फिरौती, अपहरण और तस्करी जैसे गंभीर अपराधों पर नियंत्रण।
  • विशेषीकृत बल: STF में प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और खुफिया कर्मी शामिल हैं।
  • खुफिया सूचना एकत्रण: अपराधियों की गतिविधियों पर निगरानी और सटीक खुफिया जानकारी एकत्र करना।
  • तकनीकी सहायता: आधुनिक संचार तकनीक, सॉफ्टवेयर ट्रैकिंग और साइबर निगरानी उपकरणों का उपयोग।
  • अंतर-जिला समन्वय: विभिन्न जिलों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग में कार्य करना
  • गैंगस्टर नियंत्रण: कुख्यात अपराधियों और माफिया गिरोहों के विरुद्ध संगठित अभियान चलाना।
  • आतंकी गतिविधियों पर नियंत्रण: आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी तत्वों की पहचान और गिरफ्तारी में भूमिका।
  • साइबर अपराध जांच: डिजिटल अपराधों और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की जाँच में विशेषज्ञता।
  • आपराधिक संपत्ति जब्ती: माफिया की अवैध संपत्तियों की पहचान और जब्ती के लिए कार्रवाई।
  • राजनीतिक-प्रशासनिक सहयोग: शासन के निर्देशानुसार कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय सहयोग।
  • सफल अभियानों का उदाहरण: अतीक अहमद, विकास दुबे, मुख्तार अंसारी जैसे गिरोहों पर कार्रवाई STF की उल्लेखनीय उपलब्धि रही।

निष्कर्ष (Conclusion):

स्पेशल टास्क फोर्स ने उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध पर नियंत्रण और भयमुक्त वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसकी दक्षता और तकनीकी क्षमता ने राज्य की कानून-व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाया है।

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