Home Blog Page 9

What role do private-public partnership play in improving employability in Uttar Pradesh? How can this be strengthened to provide more job opportunities to the youth? (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

0

उत्तर प्रदेश में रोजगार क्षमता बढ़ाने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की क्या भूमिका है? युवाओं को अधिक रोजगार के अवसर देने के लिये इसे कैसे सशक्त किया जा सकता है?

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है जहाँ युवाओं की संख्या बड़ी है। ऐसे में रोजगार सृजन राज्य की प्राथमिक आवश्यकता है। इस दिशा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public–Private Partnership: PPP) मॉडल राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार क्षमता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास: PPP मॉडल से सड़कों, औद्योगिक गलियारों, हवाईअड्डों और लॉजिस्टिक्स पार्कों का निर्माण हुआ, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार सृजित हुए।
  • शिक्षा एवं कौशल विकास: निजी क्षेत्र के सहयोग से कौशल विश्वविद्यालयों और ITI संस्थानों की स्थापना हुई।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र में PPP: निजी अस्पतालों के साथ करार से चिकित्सा सेवाएँ विस्तारित हुईं, जिससे मेडिकल स्टाफ को रोजगार मिला।
  • औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) जैसी पहलों से MSME क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ा।
  • डिजिटल और स्टार्टअप इकोसिस्टम: PPP मॉडल के तहत आईटी पार्क और इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
  • पर्यटन विकास: PPP के माध्यम से धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों पर बुनियादी ढांचे का विकास, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार।
  • कृषि मूल्य श्रृंखला: निजी निवेश से कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयाँ और एग्री-बिजनेस को बल मिला।

सशक्तिकरण हेतु सुझाव (Suggestions):

PPP परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए।

स्किल इंडिया जैसी योजनाओं को निजी उद्योगों से सीधे जोड़ा जाए।

नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को सरकारी वित्तीय सहायता दी जाए।

निष्कर्ष (Conclusion): सार्वजनिक-निजी भागीदारी रोजगार सृजन का सशक्त उपकरण है। यदि इसे कौशल विकास और उद्योग विस्तार से जोड़ा जाए, तो उत्तर प्रदेश युवाओं के लिए अवसरों का केन्द्र बन सकता है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

What are the main challenges facing the production, distribution and marketing of agricultural products in Uttar Pradesh? How can they be addressed by utilising science and technology developments while ensuring sustainable and inclusive growth? (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

0

उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादों के उत्पादन, वितरण और विपणन के सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं? सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित करते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास का उपयोग करके उन्हें कैसे संबोधित किया जा सकता है?

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। राज्य में गेहूँ, चावल, गन्ना, आलू, दालें और तिलहन जैसे प्रमुख फसलें उत्पादित होती हैं। किन्तु कृषि उत्पादों के उत्पादन, वितरण और विपणन में अनेक संरचनात्मक चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

मुख्य चुनौतियाँ (Main Challenges):

  • भूमि विखंडन: छोटे व बिखरे खेतों के कारण उत्पादकता कम है।
  • सिंचाई असमानता: पश्चिमी क्षेत्रों में अधिक सिंचाई जबकि पूर्वी में अभाव।
  • भंडारण और कोल्ड चेन की कमी: फलों व सब्जियों का भारी नुकसान।
  • कृषि विपणन में बिचौलियों की भूमिका: किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
  • कृषि आधारित उद्योगों की कमी: मूल्य संवर्द्धन सीमित है।
  • आधुनिक तकनीकों की जानकारी का अभाव: पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता।
  • मौसमीय अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन उत्पादन को प्रभावित करते हैं।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समाधान (Science & Tech-based Solutions):
  • स्मार्ट कृषि तकनीकें जैसे IoT, सेंसर और ड्रोन से फसल प्रबंधन सुधारा जा सकता है।
  • ई-नाम (e-NAM) और डिजिटल मार्केट प्लेटफॉर्म से किसानों को सीधा बाजार मिल सकता है।
  • कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स और लॉजिस्टिक नेटवर्क को बढ़ाकर हानि घटाई जा सकती है।
  • कृषि जैव प्रौद्योगिकी से उच्च उत्पादक व रोग-रोधी किस्में विकसित की जा सकती हैं।
  • कृषि-स्टार्टअप्स और मिलियम फार्मर्स स्कूल से प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion): विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से उत्तर प्रदेश की कृषि अधिक उत्पादक, टिकाऊ और समावेशी बन सकती है, जिससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों सशक्त होंगी।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

What are the research and development achievements in biotechnology in Uttar Pradesh? How will it help to uplift the poor section of society? (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

0

उत्तर प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास की क्या उपलब्धियाँ हैं? इससे समाज के गरीब वर्ग के उत्थान में किस प्रकार मदद मिलेगी?

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) का क्षेत्र तेजी से उभर रहा है। राज्य सरकार ने कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और उद्योग में इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई अनुसंधान संस्थान और नीतिगत पहल की हैं। यह विज्ञान राज्य के आर्थिक विकास के साथ-साथ समाज के गरीब वर्गों के जीवन स्तर सुधार में भी सहायक बन रहा है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • उत्तर प्रदेश की बायोटेक नीति 2022 ने अनुसंधान और स्टार्टअप को बढ़ावा दिया।
  • लखनऊ बायोटेक पार्क और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के प्रमुख केंद्र हैं।
  • सीएसआईआर–आईआईएमटी (लखनऊ) में औषधीय पौधों और जैविक दवाओं पर कार्य हो रहा है।
  • कृषि क्षेत्र में टिश्यू कल्चर तकनीक से उच्च उत्पादक किस्में विकसित की गईं।
  • सूखा-रोधी और रोग-प्रतिरोधी बीजों का विकास किया गया, जिससे किसानों की आय बढ़ी।
  • डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में जीनोमिक सुधार से उत्पादन में वृद्धि हुई।
  • पर्यावरण संरक्षण हेतु अपशिष्ट जल उपचार में सूक्ष्मजीव आधारित तकनीक अपनाई जा रही है।
  • बायोफर्टिलाइज़र और बायोपेस्टिसाइड से खेती की लागत कम हुई।
  • जैव चिकित्सा अनुसंधान से सस्ती वैक्सीन और औषधियाँ विकसित की जा रही हैं।
  • ग्रामीण युवाओं के लिए बायोटेक स्टार्टअप और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए।

गरीब वर्ग के उत्थान में योगदान: इन नवाचारों से किसानों की उत्पादकता, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जिससे गरीब वर्ग की आय व जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

निष्कर्ष (Conclusion): जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम सिद्ध हो रहा है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Describe the habitat condition, flora and fauna: the three ecozones of Uttar Pradesh. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

0

उत्तर प्रदेश के तीन पारिस्थितिक क्षेत्रों: आवास स्थिति, वनस्पति और जीव-जन्तुओं का वर्णन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश भौगोलिक रूप से विविध राज्य है, जहाँ की पारिस्थितिकी (Ecology) जलवायु, स्थलाकृति और मिट्टी के आधार पर भिन्न-भिन्न रूपों में पाई जाती है। इसे तीन प्रमुख पारिस्थितिक क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है — तराई क्षेत्र, गंगा–यमुना दोआब, और विंध्य क्षेत्र — जिनकी अपनी विशिष्ट आवास स्थिति, वनस्पति और जीव-जंतु हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • तराई क्षेत्र:
  • आवास स्थिति: नेपाल सीमा से लगा आर्द्र और दलदली क्षेत्र, प्रचुर वर्षा और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी।
  • वनस्पति: साल, सागौन, शीशम, बांस और गन्ने की खेती प्रमुख।
  • जीव-जंतु: बाघ, हाथी, बारहसिंगा, घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन यहाँ पाई जाती हैं।
  • गंगा–यमुना दोआब:
  • आवास स्थिति: समतल मैदान, मध्यम वर्षा, सिंचाई सुविधाओं से संपन्न।
  • वनस्पति: कृषि प्रधान क्षेत्र – गेहूँ, गन्ना, चना और सरसों की प्रमुख फसलें।
  • जीव-जंतु: लोमड़ी, सियार, नीलगाय, खरगोश और अनेक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • विंध्य क्षेत्र:
  • आवास स्थिति: पथरीला, ऊँचा-नीचा और शुष्क भूभाग (मिर्जापुर, सोनभद्र)।
  • वनस्पति: झाड़ियों, सागौन, बबूल व तेंदू वृक्षों की अधिकता।
  • जीव-जंतु: तेंदुआ, चीतल, भालू, सर्प और कई पक्षी प्रजातियाँ।

निष्कर्ष (Conclusion): ये तीनों पारिस्थितिक क्षेत्र उत्तर प्रदेश की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन के मूल आधार हैं, जो राज्य की प्राकृतिक संपदा और पर्यावरणीय स्थिरता को बनाए रखते हैं।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Explain the problems and prospects for cultivation of flowers with reference to Uttar Pradesh. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

0

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में फूलों की खेती की समस्याओं और संभावनाओं की व्याख्या कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश में कृषि विविधीकरण के अंतर्गत फूलों की खेती (Floriculture) तेजी से उभरता क्षेत्र है। यह न केवल किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करती है बल्कि रोजगार और निर्यात के नए अवसर भी उपलब्ध कराती है। राज्य की भौगोलिक विविधता फूल उत्पादन के लिए उपयुक्त है, फिर भी इस क्षेत्र में कई चुनौतियाँ विद्यमान हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • राज्य में गुलाब, गेंदा, रजनीगंधा, ग्लैडियोलस और गेंदा प्रमुख रूप से उगाए जाते हैं।
  • फूलों की खेती मुख्यतः बाराबंकी, लखनऊ, कानपुर, सहारनपुर, वाराणसी और मेरठ जिलों में होती है।
  • अनुकूल जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और बड़े उपभोक्ता बाज़ार इसके प्रमुख लाभ हैं।
  • सरकार द्वारा फ्लोरिकल्चर मिशन और कृषि विविधीकरण योजना से प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
  • फूलों की मांग धार्मिक, औद्योगिक, सौंदर्य प्रसाधन और निर्यात क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है।
  • मुख्य समस्याएँ:
  • बाजार ढाँचा व कोल्ड स्टोरेज की कमी।
  • परिवहन व आपूर्ति श्रृंखला कमजोर।
  • किसानों में तकनीकी ज्ञान व प्रशिक्षण की कमी।
  • निर्यात गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में कठिनाई।
  • संभावनाएँ:
  • ग्रीनहाउस तकनीक से उत्पादन क्षमता में वृद्धि।
  • ई-मार्केटिंग व कॉर्पोरेट टाई-अप से स्थायी बाजार।
  • सरकारी सहायता से फूल-आधारित उद्योगों का विकास।

निष्कर्ष (Conclusion): यदि आधुनिक तकनीक, विपणन ढाँचा और प्रशिक्षण को सशक्त किया जाए, तो उत्तर प्रदेश फूलों की खेती में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।

How “Million Farmers School Program” and “National Mission on Natural Farming Scheme” can become key elements in promoting the commercialization of agriculture in Uttar Pradesh? Give your suggestions. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

0

उत्तर प्रदेश में कृषि के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने में “मिलियन फार्मर्स स्कूल प्रोग्राम” और “नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग स्कीम” कैसे प्रमुख घटक बन सकते हैं? अपने सुझाव दीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश में कृषि को पारंपरिक स्वरूप से आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय में बदलने हेतु अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें मिलियम फार्मर्स स्कूल प्रोग्राम और नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) प्रमुख घटक बनकर उभरे हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • मिलियम फार्मर्स स्कूल प्रोग्राम (MFS):
  • ग्राम पंचायत स्तर पर किसानों को वैज्ञानिक कृषि प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • फसल विविधीकरण, मिट्टी परीक्षण और आधुनिक तकनीक पर जोर देता है।
  • समूह आधारित खेती और बाजार उन्मुख उत्पादन को प्रोत्साहन देता है।
  • किसानों को लागत घटाने और लाभ बढ़ाने के उपाय सिखाता है।
  • नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF):
  • रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर प्राकृतिक तरीकों से खेती को बढ़ावा देता है।
  • जैविक खाद, गोबर और जीवामृत के उपयोग से लागत कम व मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
  • पर्यावरण संरक्षण व प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग से किसानों की आय बढ़ती है।
  • सुझाव (Suggestions):
  • इन योजनाओं से जुड़ा प्रशिक्षण डिजिटल माध्यम से अधिक किसानों तक पहुँचाया जाए।
  • प्राकृतिक उत्पादों की ब्रांडिंग और बाज़ार सुविधा को सुदृढ़ किया जाए।

निष्कर्ष (Conclusion): दोनों योजनाएँ कृषि को टिकाऊ, लाभकारी और व्यावसायिक बनाने में सहायक हैं, जिससे किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Divide the geographical regions of Uttar Pradesh and explain their geographical, economic and cultural significance. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

0

उत्तर प्रदेश को भौगोलिक प्रदेशों में विभक्त कीजिए और इनके भौगोलिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व को समझाइये ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विविध राज्य है। इसकी स्थलाकृति, जलवायु और मिट्टी की भिन्नता के आधार पर इसे चार प्रमुख भौगोलिक प्रदेशों में बाँटा गया है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • तराई एवं भावर प्रदेश:
  • स्थान: नेपाल सीमा के समानांतर फैला क्षेत्र।
  • भौगोलिक महत्त्व: जलोढ़ मिट्टी, घने वन और नमी युक्त जलवायु।
  • आर्थिक महत्त्व: धान, गन्ना उत्पादन और पशुपालन के लिए उपयुक्त।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: थारू व स्थानीय जनजातीय संस्कृति प्रमुख।
  • गंगा–यमुना दोआब:
  • भौगोलिक महत्त्व: समतल मैदान और उपजाऊ मिट्टी।
  • आर्थिक महत्त्व: गन्ना, गेहूँ उत्पादन तथा कानपुर, मेरठ जैसे औद्योगिक नगर।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: प्रयागराज धार्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध।
  • अवध–बुंदेलखंड पठार:
  • भौगोलिक महत्त्व: मिश्रित भू-आकृतियाँ और मध्यम उपजाऊ मिट्टी।
  • आर्थिक महत्त्व: कृषि, हस्तशिल्प व खनन।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: अवध की नवाबी संस्कृति और बुंदेलखंड की लोक परंपराएँ।
  • विंध्य प्रदेश:
  • भौगोलिक महत्त्व: पहाड़ी व वनाच्छादित क्षेत्र (सोनभद्र, मिर्जापुर)।
  • आर्थिक महत्त्व: कोयला, चूना पत्थर जैसे खनिजों से समृद्ध।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: मंदिर, लोकनृत्य और जनजातीय जीवन।

निष्कर्ष (Conclusion): ये चारों प्रदेश उत्तर प्रदेश की भौगोलिक विविधता, आर्थिक आधार और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक हैं।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Describe the wildlife sanctuaries of Uttar Pradesh. Which of these sanctuaries are crucial for conservation of endangered species? (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

0

उत्तर प्रदेश के वन्यजीव अभयारण्यों का वर्णन कीजिये । इनमें से कौन-सा अभयारण्य लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिये महत्त्वपूर्ण हैं?

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश का लगभग 6.88% भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। राज्य में अनेक वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य जैव विविधता तथा लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण करना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • कतर्नियाघाट अभयारण्य (बहराइच): घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और दलदली मगरमच्छ के संरक्षण हेतु प्रसिद्ध।
  • सोहागीबरवा अभयारण्य (महराजगंज): हाथी, बाघ और अनेक पक्षियों का प्राकृतिक आवास।
  • चंद्रप्रभा अभयारण्य (चंदौली): तेंदुआ, सांभर और नीलगाय के लिए जाना जाता है।
  • किशनपुर अभयारण्य (लखीमपुर-खीरी): दुधवा टाइगर रिज़र्व का हिस्सा, बाघ और बारहसिंगा के लिए महत्त्वपूर्ण।
  • कैमूर अभयारण्य (मिर्जापुर-सोनभद्र): चीतल, तेंदुआ और विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं।
  • समसपुर पक्षी अभयारण्य (रायबरेली): प्रवासी पक्षियों जैसे साइबेरियन हंस के लिए प्रसिद्ध।
  • सुरहा ताल (बलिया): जलीय पक्षियों और मछलियों की विविधता का केंद्र।
  • पिलीभीत अभयारण्य: अब पिलीभीत टाइगर रिज़र्व, बाघ संरक्षण के लिए प्रसिद्ध।
  • दुधवा राष्ट्रीय उद्यान: बारहसिंगा, बाघ और हाथी जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण का प्रमुख केंद्र।
  • महत्त्वपूर्ण अभयारण्य: दुधवा, किशनपुर, कतर्नियाघाट और पिलीभीत अभयारण्य लुप्तप्राय प्रजातियों जैसे बाघ, बारहसिंगा, घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन के संरक्षण में विशेष भूमिका निभाते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion): उत्तर प्रदेश के वन्यजीव अभयारण्य जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में राज्य की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Introduce the major welfare schemes in the Uttar Pradesh State Budget 2025-26. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

0

उत्तर प्रदेश राज्य के बजट 2025-26 में प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं का परिचय दीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

 उत्तर प्रदेश सरकार का बजट 2025–26 “समग्र विकास और सबका कल्याण” के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें समाज के कमजोर वर्गों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह बजट राज्य को आत्मनिर्भर और समावेशी अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना कल्याण योजना – किसानों व भूमिधरों को आकस्मिक मृत्यु या अपंगता पर आर्थिक सहायता।
  • मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना – बालिकाओं की शिक्षा और संरक्षण हेतु वित्तीय सहायता।
  • मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना – गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता।
  • मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना – युवाओं को उद्यमिता व स्वरोजगार हेतु ऋण सुविधा।
  • मुख्यमंत्री युवा हब योजना – नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने हेतु सहायता।
  • मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना – महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और कौशल विकास पर केंद्रित।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण/शहरी) – गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध कराने हेतु।
  • मुख्यमंत्री फ्री टैबलेट/स्मार्टफोन योजना – छात्रों और युवाओं को डिजिटल सशक्तिकरण हेतु।
  • मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना – गरीबों को सस्ती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना।
  • मुख्यमंत्री जल जीवन मिशन – ग्रामीण घरों तक नल से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  • मुख्यमंत्री सौर ऊर्जा योजना – नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन।
  • मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना – निर्धन परिवारों को निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा सुविधा।

निष्कर्ष (Conclusion): बजट 2025–26 की कल्याणकारी योजनाएँ समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने का प्रयास हैं। ये योजनाएँ प्रदेश के समावेशी विकास और सामाजिक न्याय को सशक्त बनाती हैं।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Critically evaluate the achievements of global investor summits organized by the Uttar Pradesh Government. (12 Marks) UPPCS Mains 2024 GS-6

0

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर सम्मेलनों की उपलब्धियों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को औद्योगिक रूप से विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) की शुरुआत की। इसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश को ‘ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • पहला ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2018 में लखनऊ में आयोजित हुआ।
  • इसमें लगभग ₹4.68 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।
  • वर्ष 2023 में दूसरा समिट हुआ, जिसमें ₹33.5 लाख करोड़ के प्रस्ताव मिले।
  • इस सम्मेलन में 29 से अधिक देशों ने भाग लिया।
  • प्रमुख निवेश क्षेत्र – रक्षा, एयरोस्पेस, IT, MSME, कृषि, पर्यटन और ऊर्जा रहे।
  • ‘ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी’ के माध्यम से कई परियोजनाएँ शुरू की गईं।
  • लगभग 10 लाख से अधिक रोजगार सृजन की संभावना बताई गई।
  • निवेश से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
  • सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई औद्योगिक नीतियाँ लागू कीं।
  • बुनियादी ढाँचे में सुधार से एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर और लॉजिस्टिक पार्क विकसित हुए।
  • आलोचनात्मक रूप से, अधिकांश MoU अभी क्रियान्वयन के प्रारंभिक चरण में हैं।
  • छोटे निवेशकों और ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रभाव अभी सीमित है।

निष्कर्ष (Conclusion): ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय निवेश मानचित्र पर स्थापित किया है। इसकी स्थायी सफलता वास्तविक परियोजनाओं के शीघ्र और समान रूप से क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Popular Posts

My Favorites

Analyze the statement, “State legislatures are often seen as the voice...

0
इस कथन का विश्लेषण कीजिए, "राज्य विधान-मंडलों को अक्सर भारत के संघीय ढाँचे के भीतर राज्यों की आवाज के रूप में देखा जाता है।"...