उत्तर प्रदेश की वास्तुकला की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ? इसके प्रमुख तत्त्वों और शैलियों का वर्णन कीजिए ।
Ans: परिचय (Introduction):
उत्तर प्रदेश की वास्तुकला (Architecture) भारतीय कला और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यहाँ की इमारतें विभिन्न कालों — मौर्य, गुप्त, मुगल और ब्रिटिश — की स्थापत्य शैली को दर्शाती हैं। यह क्षेत्र धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है।
मुख्य विशेषताएँ और तत्व:
• मौर्य काल में अशोक स्तंभ और स्तूप जैसे स्थापत्य का विकास हुआ (जैसे सारनाथ स्तूप)।
• गुप्त काल में मंदिर निर्माण की उत्कृष्ट परंपरा आरंभ हुई — सादगी और संतुलन इसका आधार था।
• मुगल काल में लाल पत्थर और संगमरमर का व्यापक उपयोग हुआ।
• गुम्बद, मेहराब और मीनारें इस काल की प्रमुख पहचान बनीं।
• लखनऊ की नवाबी वास्तुकला में फारसी, मुगल और यूरोपीय प्रभाव देखा जाता है।
• बड़ा इमामबाड़ा और रूमी दरवाज़ा इसके श्रेष्ठ उदाहरण हैं।
• काशी, अयोध्या और मथुरा में धार्मिक वास्तुकला का उत्कर्ष देखने को मिलता है।
• ब्रिटिश काल में औपनिवेशिक भवन जैसे इलाहाबाद हाईकोर्ट और कचहरी बने।
• मंदिर वास्तुकला में नागर शैली प्रमुख रही।
• राजसी इमारतों में नक्काशी, झरोखे और जालियों का प्रयोग हुआ।
• जल संरचनाएँ (घाट, कुएँ, बावड़ियाँ) स्थानीय जीवन का अभिन्न हिस्सा थीं।
• स्थापत्य में सौंदर्य, धर्म और उपयोगिता का समन्वय देखने को मिलता है।
निष्कर्ष (Conclusion ):
उत्तर प्रदेश की वास्तुकला भारतीय इतिहास का जीवंत प्रतिबिंब है। यह न केवल कला की परंपरा बल्कि सांस्कृतिक एकता और विविधता का प्रतीक भी है।
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