उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भूमिका और लोक सेवकों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चयन के लिए उसके समक्ष चुनौतियों पर चर्चा कीजिए ।

Ans:  परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC – Uttar Pradesh Public Service Commission) राज्य सरकार की एक संवैधानिक संस्था है। इसका मुख्य कार्य राज्य सेवाओं के लिए योग्य, निष्पक्ष और सक्षम अभ्यर्थियों का चयन करना है। आयोग राज्य प्रशासन की दक्षता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य बिंदु:

• UPPSC की स्थापना 1 अप्रैल 1937 को की गई थी।

• इसका उद्देश्य योग्यता आधारित (Merit-based) चयन प्रक्रिया के माध्यम से लोक सेवकों की भर्ती करना है।

• आयोग राज्य सिविल सेवा, पुलिस, शिक्षा, और अन्य विभागों की परीक्षाएँ आयोजित करता है।

• यह परीक्षाओं की योजना, प्रश्नपत्र निर्माण, मूल्यांकन और साक्षात्कार प्रक्रिया का संचालन करता है।

• पारदर्शिता और निष्पक्षता आयोग की कार्यप्रणाली के प्रमुख सिद्धांत हैं।

• आयोग के सुझावों के आधार पर सरकार भर्ती नीतियों में सुधार करती है।

• चुनौतियों में परीक्षा परिणामों में देरी और पारदर्शिता पर उठते सवाल शामिल हैं।

• पेपर लीक जैसी घटनाएँ आयोग की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।

• राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप इसकी स्वतंत्रता के लिए चुनौती हैं।

• आधुनिक तकनीक और ई-गवर्नेंस के अभाव में प्रक्रियाएँ कभी-कभी धीमी रहती हैं।

• अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या के कारण निष्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ा है।

• डिजिटल परीक्षा प्रणाली और पारदर्शी मूल्यांकन से आयोग की विश्वसनीयता पुनर्स्थापित हो रही है।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग राज्य प्रशासन की रीढ़ है, जो योग्य अधिकारियों के चयन में अहम भूमिका निभाता है। यदि इसे पूर्ण स्वतंत्रता और तकनीकी सुदृढ़ता दी जाए, तो यह और अधिक निष्पक्ष व प्रभावी बन सकता है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.