उत्तर प्रदेश के तीन पारिस्थितिक क्षेत्रों: आवास स्थिति, वनस्पति और जीव-जन्तुओं का वर्णन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश भौगोलिक रूप से विविध राज्य है, जहाँ की पारिस्थितिकी (Ecology) जलवायु, स्थलाकृति और मिट्टी के आधार पर भिन्न-भिन्न रूपों में पाई जाती है। इसे तीन प्रमुख पारिस्थितिक क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है — तराई क्षेत्र, गंगा–यमुना दोआब, और विंध्य क्षेत्र — जिनकी अपनी विशिष्ट आवास स्थिति, वनस्पति और जीव-जंतु हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • तराई क्षेत्र:
  • आवास स्थिति: नेपाल सीमा से लगा आर्द्र और दलदली क्षेत्र, प्रचुर वर्षा और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी।
  • वनस्पति: साल, सागौन, शीशम, बांस और गन्ने की खेती प्रमुख।
  • जीव-जंतु: बाघ, हाथी, बारहसिंगा, घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन यहाँ पाई जाती हैं।
  • गंगा–यमुना दोआब:
  • आवास स्थिति: समतल मैदान, मध्यम वर्षा, सिंचाई सुविधाओं से संपन्न।
  • वनस्पति: कृषि प्रधान क्षेत्र – गेहूँ, गन्ना, चना और सरसों की प्रमुख फसलें।
  • जीव-जंतु: लोमड़ी, सियार, नीलगाय, खरगोश और अनेक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • विंध्य क्षेत्र:
  • आवास स्थिति: पथरीला, ऊँचा-नीचा और शुष्क भूभाग (मिर्जापुर, सोनभद्र)।
  • वनस्पति: झाड़ियों, सागौन, बबूल व तेंदू वृक्षों की अधिकता।
  • जीव-जंतु: तेंदुआ, चीतल, भालू, सर्प और कई पक्षी प्रजातियाँ।

निष्कर्ष (Conclusion): ये तीनों पारिस्थितिक क्षेत्र उत्तर प्रदेश की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन के मूल आधार हैं, जो राज्य की प्राकृतिक संपदा और पर्यावरणीय स्थिरता को बनाए रखते हैं।

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