वर्तमान समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार की चुनौतियों से निपटने के लिए नैतिक आधारों की विवेचना कीजिए।
Ans: प्रस्तावना (Introduction):
भ्रष्टाचार वर्तमान समाज की सबसे गंभीर नैतिक एवं प्रशासनिक समस्या बन गया है। यह केवल आर्थिक हानि ही नहीं पहुँचाता, बल्कि लोक सेवा की विश्वसनीयता को भी कमजोर करता है। इससे निपटने के लिए नैतिक मूल्यों पर आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है।
मुख्य बिंदु (Main Points):
- सत्यनिष्ठा (Integrity): लोकसेवकों में ईमानदारी एवं पारदर्शिता का विकास।
- उत्तरदायित्व (Accountability): प्रत्येक निर्णय के लिए नैतिक और प्रशासनिक जवाबदेही तय हो।
- निष्पक्षता (Impartiality): व्यक्तिगत लाभ या पक्षपात से मुक्त निर्णय प्रक्रिया।
- लोकहित (Public Interest): निजी स्वार्थ के बजाय जनहित को प्राथमिकता देना।
- कर्तव्यपरायणता (Duty Consciousness): संविधान और सेवा नियमों के प्रति निष्ठा।
- पारदर्शिता (Transparency): कार्यप्रणालियों को खुला और जाँच योग्य बनाना।
- संवेदनशीलता (Sensitivity): नागरिकों की समस्याओं को समझने की नैतिक प्रतिबद्धता।
- स्वयं अनुशासन (Self-discipline): नैतिक सीमाओं का स्वयं पालन।
- शुचिता (Probity): भ्रष्टाचार रहित आचरण को जीवन का मूल सिद्धांत बनाना।
- नैतिक शिक्षा (Ethical Education): समाज और प्रशासन में नैतिक मूल्यों की शिक्षा का प्रसार।
- सामाजिक नियंत्रण (Social Control): नागरिक समाज और मीडिया द्वारा निगरानी को प्रोत्साहन।
- सांस्कृतिक पुनर्जागरण (Moral Renaissance): भारतीय नैतिक परंपराओं जैसे सत्य, अहिंसा, सेवा की पुनर्स्थापना।
निष्कर्ष (Conclusion): भ्रष्टाचार का उन्मूलन केवल कानूनी उपायों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए नैतिक जागरूकता अनिवार्य है। जब समाज और प्रशासन दोनों नैतिक मूल्यों को अपनाएँगे, तभी एक ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था संभव होगी।
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