‘सामाजिक संजाल स्थल’ क्या होते हैं ? और इनका अनियंत्रित उपयोग साइबर हमलों की संभावनाओं में किस प्रकार वृद्धि करता है ?

Ans: भूमिका (Introduction) –

‘सामाजिक संजाल स्थल’ (Social Networking Sites) वे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म हैं जहाँ उपयोगकर्ता आपसी संवाद, विचार, सूचना और सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं। जैसे – फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (X), यूट्यूब, लिंक्डइन आदि। ये आज सामाजिक सहभागिता और सूचना प्रसार का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सामाजिक संजाल स्थल लोगों को जोड़ने, अभिव्यक्ति और सूचना साझा करने का अवसर देते हैं।
  • ये व्यवसाय, शिक्षा, राजनीति और जन-जागरूकता के प्रभावी साधन बन चुके हैं।
  • परंतु इनका अनियंत्रित और असावधान उपयोग साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
  • उपयोगकर्ता अपनी व्यक्तिगत जानकारी, फोटो, लोकेशन और बैंक विवरण साझा करते हैं, जिन्हें साइबर अपराधी दुरुपयोग कर सकते हैं।
  • फिशिंग (Phishing) और मैलवेयर (Malware) जैसे हमले अक्सर सोशल मीडिया लिंक के माध्यम से फैलते हैं।
  • नकली प्रोफाइल और फेक न्यूज़ से न केवल भ्रम फैलता है, बल्कि डेटा चोरी और पहचान की जालसाजी भी बढ़ती है।
  • सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) तकनीक द्वारा हैकर्स लोगों को भावनात्मक रूप से भ्रमित कर पासवर्ड या निजी जानकारी प्राप्त करते हैं।
  • अनियंत्रित उपयोग से डेटा लीकेज, गोपनीयता भंग और राष्ट्रीय सुरक्षा तक को खतरा हो सकता है।
  • साइबर हमले अक्सर सोशल मीडिया पर साझा लापरवाह जानकारी के कारण संभव होते हैं।
  • भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट, 2000 तथा CERT-In जैसी संस्थाएँ साइबर सुरक्षा की निगरानी करती हैं।
  • सरकार “डिजिटल साक्षरता अभियान” के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है।
  • उपयोगकर्ताओं को मजबूत पासवर्ड, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण और सावधानीपूर्ण साझा करने की आदत अपनानी चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion) –

इस प्रकार, सामाजिक संजाल स्थल जहाँ संवाद का सशक्त माध्यम हैं, वहीं अनियंत्रित उपयोग साइबर हमलों की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देता है। इनका सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक उपयोग ही डिजिटल युग में सुरक्षा और विश्वास का आधार बन सकता है।

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