नई आर्थिक नीति से देश का श्रमिक वर्ग बहुत प्रभावित हुआ है। स्पष्ट कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत में 1991 में लागू की गई नई आर्थिक नीति (New Economic Policy – NEP) ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की दिशा में बड़ा परिवर्तन लाया। इस नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रतिस्पर्धात्मक बनाया, परंतु इसके प्रभाव से श्रमिक वर्ग (Working Class) पर गहरा असर पड़ा। आर्थिक सुधारों ने जहाँ विकास के अवसर बढ़ाए, वहीं श्रमिकों की सुरक्षा और स्थायित्व को चुनौती भी दी।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • नई आर्थिक नीति के तहत सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) का दायरा घटा और निजीकरण बढ़ा।
  • इससे लाखों श्रमिकों की नौकरी अस्थिर (Job insecurity) हो गई।
  • ठेका प्रणाली (Contract system) के विस्तार से स्थायी रोजगार घटे।
  • श्रम कानूनों को लचीला बनाने से श्रमिकों की सौदेबाज़ी शक्ति कमजोर हुई।
  • औद्योगिक पुनर्गठन से कई पारंपरिक उद्योग बंद हुए, जिससे बेरोजगारी बढ़ी।
  • असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector) में काम करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी।
  • मजदूरी दरें (Wages) महँगाई के अनुपात में नहीं बढ़ीं।
  • सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ (Social Security Schemes) सीमित दायरे में रह गईं।
  • श्रमिकों की यूनियनें (Trade Unions) कमजोर पड़ीं और उनका प्रभाव घटा।
  • महिलाएँ और प्रवासी मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हुए।
  • प्रतिस्पर्धा और उत्पादकता के दबाव से कार्य-परिस्थितियाँ कठिन हुईं।
  • कौशल विकास (Skill Development) के प्रयासों के बावजूद निम्न आय वर्ग पर असमानता बढ़ी।

निष्कर्ष (Conclusion):

नई आर्थिक नीति ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ा, पर श्रमिक वर्ग पर इसके नकारात्मक प्रभाव गहरे रहे। आवश्यक है कि विकास के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक न्याय को भी प्राथमिकता दी जाए।

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