स्वतन्त्रता के तुरंत बाद भारत के समक्ष चुनौतियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत कीजिए ।
Ans: प्रस्तावना:
1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। देश विभाजन से उपजी समस्याओं और नवगठित लोकतांत्रिक व्यवस्था ने प्रशासनिक क्षमता की परीक्षा ली। राष्ट्र निर्माण का यह दौर भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सिद्ध हुआ।
मुख्य बिंदु:
- देश का विभाजन और शरणार्थियों का पुनर्वास सबसे बड़ी चुनौती थी।
- साम्प्रदायिक दंगों ने सामाजिक एकता को खतरे में डाला।
- रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया कठिन और जटिल थी।
- गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता गंभीर समस्या बनी।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचनाओं का अभाव विकास में बाधक था।
- लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना और स्थायित्व आवश्यक था।
- सीमाओं पर सुरक्षा और पड़ोसी देशों से संबंध स्थिर करना जरूरी था।
उपसंहार:
इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने दृढ़ संकल्प और लोकतांत्रिक मूल्यों के बल पर प्रगति की दिशा में कदम बढ़ाया। स्वतंत्रता के बाद की यह यात्रा भारत की सहनशीलता और एकता का प्रतीक बनी।
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