भारत में वनों एवं जल स्रोतों के जैविक विविधता का संरक्षण पारिस्थितिक सन्तुलन बनाये रखने के लिए आवश्यक है । विस्तार से स्पष्ट कीजिए ।
Ans: भूमिका (Introduction):
भारत अपनी भौगोलिक स्थिति और जलवायु विविधता के कारण विश्व के जैव विविधता (Biodiversity) हॉटस्पॉट्स में से एक है। यहाँ के वन और जल स्रोत अनेक प्रकार के जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का घर हैं। इनका संरक्षण न केवल प्रकृति के लिए, बल्कि पारिस्थितिक सन्तुलन (Ecological Balance) बनाये रखने के लिए भी अत्यावश्यक है।
मुख्य बिंदु (Important Points):
- वनों की जैविक विविधता का महत्व:
- ऑक्सीन उत्पादन और कार्बन अवशोषण: वन वातावरण में ऑक्सीजन बढ़ाते औरकार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करते हैं।
- मृदा संरक्षण: वृक्षों की जड़ें मिट्टी के कटाव को रोककर भूमि की उर्वरता बनाए रखती हैं।
- जल चक्र का संतुलन: वन वर्षा को आकर्षित करते और भूजल स्तर को बनाए रखते हैं।
- वन्यजीवों का आवास: जैविक विविधता से युक्त वन अनेक जीव प्रजातियों के अस्तित्व को सुरक्षित रखते हैं।
- औषधीय पौधों का स्रोत: अनेक औषधियाँ वनों से प्राप्त वनस्पतियों पर आधारित होती हैं।
- जलवायु नियंत्रण: वन तापमान और नमी को नियंत्रित कर जलवायु को संतुलित रखते हैं।
- जल स्रोतों की जैव विविधता का महत्व:
- जलचर जीवन का संरक्षण: नदियाँ, झीलें और समुद्र अनेक मछलियों, शैवालों और सूक्ष्म जीवों का घर हैं।
- प्राकृतिक शुद्धिकरण प्रणाली: जल स्रोत प्रदूषकों को फ़िल्टर कर जल की गुणवत्ता बनाए रखते हैं।
- खाद्य सुरक्षा: मत्स्य पालन से पोषण और आजीविका दोनों को बल मिलता है।
- पर्यावरणीय स्थिरता: जल निकाय सूखे और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में सहायक होते हैं।
- पारिस्थितिक अन्तर्सम्बन्ध: वन और जल स्रोत मिलकर सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं।
- मानव जीवन पर प्रभाव: जैविक विविधता का ह्रास मानव स्वास्थ्य, कृषि और जलवायु पर प्रतिकूल असर डालता है।
निष्कर्ष (Conclusion) – अनिवार्य है। यदि हम इन प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करें, तो सतत विकास और मानव अस्तित्व दोनों सुरक्षित रहेंगे।
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