सुनामी की विशेषताओं, कारणों एवं प्रभावों का सोदाहरण विवेचन प्रस्तुत कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

सुनामी समुद्र की गहराइयों में उत्पन्न होने वाली तीव्र ऊर्जा का परिणाम होती है, जो विशाल तरंगों के रूप में तटों की ओर बढ़ती है। यह प्राकृतिक आपदा अचानक और व्यापक विनाश करने की क्षमता रखती है। इसके कारण और प्रभाव भौगोलिक, भूवैज्ञानिक तथा मानवीय पहलुओं से गहराई से जुड़े होते हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points) :

  • समुद्र तल में अचानक ऊर्जा विस्फोट—जैसे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, भू-स्खलन आदि—सुनामी का प्रमुख कारण होता है।
  • अधिकांश सुनामी समुद्र के नीचे आने वाले टेक्टॉनिक भूकंपों से उत्पन्न होती हैं।
  • समुद्र में उठने वाली तरंगों की गति 700–800 किमी/घंटा तक पहुँच सकती है।
  • गहरे समुद्र में तरंगों की ऊँचाई कम होती है, जिससे वे दिखाई नहीं देतीं।
  • तटीय क्षेत्रों के पास पहुँचने पर जल की गहराई कम होने से तरंगों की ऊँचाई अचानक कई मीटर तक बढ़ जाती है।
  • सुनामी की तरंगें एकल नहीं होतीं; वे कई तरंगों की श्रृंखला के रूप में आती हैं।
  • सुनामी तट पर पहुंचकर बड़े पैमाने पर जन-हानि और संपत्ति क्षति का कारण बनती है।
  • तटीय पारिस्थितिकी तंत्र—जैसे मैंग्रोव, कोरल रीफ और समुद्री जैव विविधता—पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।
  • पेयजल स्रोतों में खारे पानी के मिल जाने से जल-उपलब्धता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
  • सड़क, बंदरगाह, पुल, विद्युत और संचार जैसी आधारभूत संरचनाएँ व्यापक रूप से नष्ट हो जाती हैं।
  • सुनामी के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ—जैसे पानी से फैलने वाली बीमारियाँ—बढ़ने का खतरा रहता है।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, तटीय सुरक्षा संरचनाएँ और सामुदायिक जागरूकता से इसके प्रभावों को कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष : सुनामी एक जटिल प्राकृतिक घटना है जिसका प्रभाव मानव जीवन, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ता है। समुचित तैयारी, वैज्ञानिक समझ और चेतावनी तंत्र ही इसके विनाशकारी प्रभावों को न्यूनतम कर सकते हैं।

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