असहयोग आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश की भूमिका की विवेचना कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक चरण था, जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया। उत्तर प्रदेश ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और इसे जनआंदोलन का रूप प्रदान किया। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विद्यार्थियों, किसानों और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की।

मुख्य बिंदु (Important Points)

(1) राजनीतिक केंद्र: वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ और गोरखपुर आंदोलन के प्रमुख केंद्र रहे

(2) नेताओं की भूमिका: पं. मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत, डॉ. सम्पूर्णानंद और पुरुषोत्तमदास टंडन ने नेतृत्व किया।

(3) शिक्षा का बहिष्कार: विद्यार्थियों ने सरकारी विद्यालयों और कॉलेजों का बहिष्कार कर राष्ट्रीय शिक्षण संस्थाएँ स्थापित कीं।

(4) विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार: राज्यभर में विदेशी वस्त्र जलाने और खादी के प्रयोग का व्यापक प्रचार हुआ।

(5) किसान आंदोलन: अवध क्षेत्र में बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में किसानों ने नीलामी, लगान और बेगार के विरोध में आंदोलन किया।

(6) चौरी-चौरा घटना (1922): गोरखपुर की इस घटना ने आंदोलन की दिशा को निर्णायक रूप से प्रभावित किया।

(7) महिला भागीदारी: प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी की महिलाओं ने सभाओं, जुलूसों और बहिष्कार आंदोलनों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।

निष्कर्ष (Conclusion):

असहयोग आंदोलन में उत्तर प्रदेश ने स्वतंत्रता संघर्ष को जनजागरण का रूप देने में अग्रणी भूमिका निभाई। इस आंदोलन ने राज्य में राष्ट्रवाद की भावना को गहराई से स्थापित किया।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.