“वैश्वीकरण के युग में राष्ट्रों के मध्य शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र समय की मांग है।”, आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए। “

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

वैश्वीकरण (Globalization) ने विश्व के राष्ट्रों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से परस्पर जुड़ दिया है। इस युग में किसी एक देश की नीतियाँ अन्य देशों को सीधे प्रभावित करती हैं। अतः अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र (International Ethics) वैश्विक शांति और स्थिरता का अनिवार्य आधार बन गया है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र राष्ट्रों के बीच न्याय, समानता और सहयोग के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करता है।
  • यह मानवता के हित को राष्ट्रीय स्वार्थों से ऊपर रखने की प्रेरणा देता है।
  • युद्ध, शोषण और पर्यावरणीय दोहन जैसी समस्याओं के समाधान हेतु नैतिक दृष्टिकोण आवश्यक है।
  • विकसित देशों का दायित्व है कि वे विकासशील देशों के प्रति सहयोग और निष्पक्षता दिखाएँ।
  • वैश्विक संस्थाएँ (जैसे—UN, WHO, WTO) तभी प्रभावी बन सकती हैं जब उनके निर्णय नैतिक सिद्धांतों पर आधारित हों।
  • परंतु व्यवहार में कई बार राष्ट्र अपने राजनीतिक और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हैं।
  • इसलिए अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र की सफलता नैतिक प्रतिबद्धता और पारदर्शिता पर निर्भर करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

निष्कर्षतः, अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र आज की वैश्विक व्यवस्था में शांति और संतुलन का मार्गदर्शक है। जब राष्ट्र नैतिक आचरण अपनाएँगे तभी वास्तविक वैश्विक सौहार्द और स्थिरता संभव होगी।

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