नैतिक शासन व्यवस्था से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Ans: परिचय:
नैतिक शासन व्यवस्था (Ethical Governance) का अर्थ ऐसी प्रशासनिक प्रणाली से है जो न्याय, पारदर्शिता, जवाबदेही और लोककल्याण पर आधारित हो। यह केवल नियमों का पालन नहीं बल्कि नैतिक मूल्यों का आचरण भी सुनिश्चित करती है। ऐसी शासन व्यवस्था नागरिकों के विश्वास और सुशासन की नींव रखती है।
मुख्य बिंदु:
- नैतिक शासन में ईमानदारी (Integrity) और निष्पक्षता (Impartiality) प्रमुख आधार होते हैं।
- यह निर्णय-प्रक्रिया को पारदर्शी और उत्तरदायी बनाता है।
- सत्ता का उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाता है, न कि निजी लाभ हेतु।
- नैतिकता नीति-निर्माण को मानव-केंद्रित बनाती है।
- इसमें संवेदनशीलता (Sensitivity) और करुणा (Compassion) का समावेश होता है।
- लोकसेवक अपने कर्तव्यों का पालन नैतिक मूल्यों के अनुरूप करते हैं।
- यह भ्रष्टाचार, पक्षपात और दुरुपयोग को रोकने में सहायक है।
- जनता की भागीदारी और विश्वास बढ़ाता है।
- समाज में समानता (Equality) और न्याय (Justice) को बढ़ावा देता है।
- तकनीकी पारदर्शिता जैसे ई-गवर्नेंस के माध्यम से जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
- उदाहरण: भारत में “लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम” नैतिक शासन की दिशा में एक कदम है।
- महात्मा गांधी द्वारा प्रस्तुत “रामराज्य” की परिकल्पना भी नैतिक शासन का आदर्श उदाहरण है।
निष्कर्ष:
नैतिक शासन व्यवस्था वह तंत्र है जो सत्ता को सेवा में परिवर्तित करता है। ऐसी व्यवस्था से न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है, बल्कि जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।
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