“सार्वजनिक नीतियां बनाते समय एक सिविल सेवक को केवल जनता की भलाई पर ध्यान देना चाहिए और उन नीतियों को लागू करते समय उसमें संभावित अनपेक्षित परिणामों का अनुमान लगाने की दूरदर्शिता होनी चाहिए।” – क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के लिए युक्ति तथा प्रमाण प्रस्तुत कीजिए।
Ans: परिचय:
सिविल सेवक शासन व्यवस्था का नैतिक स्तंभ होता है, जिसका मुख्य उद्देश्य जनता की भलाई सुनिश्चित करना है। नीतियों का निर्माण केवल वर्तमान लाभ के लिए नहीं बल्कि दीर्घकालिक प्रभावों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। इसलिए नीति-निर्माण में दूरदर्शिता और जनहित दोनों का संतुलन आवश्यक है।
मुख्य बिंदु:
- मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ क्योंकि नीति का मूल उद्देश्य लोककल्याण होता है।
- सिविल सेवक को व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए।
- नीति बनाते समय सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर विचार आवश्यक है।
- दूरदर्शिता (Foresight) नीति की सफलता का प्रमुख तत्व है।
- नीतियों के अनपेक्षित परिणामों (Unintended Consequences) की पूर्वानुमान से प्रशासनिक विफलता रोकी जा सकती है।
- उदाहरण: कृषि में हरित क्रांति से उत्पादन बढ़ा, परंतु पर्यावरणीय क्षति भी हुई—दूरदर्शिता का अभाव स्पष्ट हुआ।
- सिविल सेवक को Evidence-based Policy Making अपनानी चाहिए।
- नीति लागू करने से पूर्व Impact Assessment आवश्यक है।
- जनसहभागिता से नीति अधिक यथार्थवादी बनती है।
- नैतिक उत्तरदायित्व नीति-निर्माण को मानवीय दृष्टिकोण देता है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही नीति के प्रति जनविश्वास बढ़ाती है।
- नीति-निर्माण में संवेदनशीलता और विवेक का संतुलन आवश्यक है।
निष्कर्ष:
इस प्रकार, सिविल सेवक का कर्तव्य केवल नीति बनाना नहीं, बल्कि उसके दूरगामी प्रभावों का पूर्वानुमान लगाना भी है। जनहित और दूरदर्शिता के संतुलन से ही सुशासन और सतत विकास संभव है।
Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.