आणविक प्रसार के मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण क्या है? स्पष्ट कीजिये।
Ans: परिचय (Introduction):
आणविक प्रसार (Nuclear Proliferation) का अर्थ है परमाणु हथियारों और तकनीक का अनियंत्रित प्रसार। भारत हमेशा से परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण उपयोग का समर्थक रहा है और वैश्विक निरस्त्रीकरण के पक्ष में स्पष्ट नीति अपनाए हुए है।
मुख्य बिंदु (Key Points):
- भारत वैश्विक निरस्त्रीकरण (Global Disarmament) का समर्थन करता है, न कि एकतरफा निरस्त्रीकरण का।
- परमाणु हथियारों का उपयोग केवल प्रतिरोधक (Deterrence) रूप में करने की नीति अपनाई है।
- “No First Use” (पहले प्रयोग न करने) की नीति भारत की रणनीतिक प्रतिबद्धता है।
- परमाणु अप्रसार संधि (NPT) और व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) में असमानता के कारण भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए।
- भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) में सदस्यता की मांग कर रहा है।
- भारत ने यूरेनियम आपूर्ति और सिविल न्यूक्लियर समझौतों से जिम्मेदार परमाणु राष्ट्र की छवि बनाई है।
- भारत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग पर बल देता है।
निष्कर्ष (Conclusion):
भारत का दृष्टिकोण संतुलित और उत्तरदायी है—न तो परमाणु प्रसार का समर्थन करता है, न ही अपनी सुरक्षा से समझौता। यह नीति विश्व शांति और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के अनुरूप है।
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