प्रस्तावना को भारतीय संविधान का दर्शन क्यों कहा जाता है ?
Ans: भूमिका (Introduction):
भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान की आत्मा मानी जाती है। यह न केवल संविधान की मूल भावना को व्यक्त करती है, बल्कि उसके उद्देश्यों और आदर्शों का दार्शनिक मार्गदर्शन भी प्रदान करती है। इसे संविधान का दर्पण कहा जाता है क्योंकि इसमें भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सोच का सार निहित है।
मुख्य बिंदु (Important points):
- प्रस्तावना संविधान के मूल उद्देश्यों – न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—को स्पष्ट करती है।
- यह भारत को “संपूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य” घोषित करती है।
- यह संविधान की भावना और आदर्शों की दिशा निर्धारित करती है।
- प्रस्तावना नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के मूल स्रोत की प्रेरणा देती है
- यह संविधान निर्माताओं की विचारधारा और उद्देश्य को दर्शाती है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे संविधान की “मूल संरचना” का भाग माना है।
- यह भारत की लोकतांत्रिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
निष्कर्ष:
अतः प्रस्तावना संविधान के आदर्शों और मूल्यों का सार प्रस्तुत करती है। यही कारण है कि इसे भारतीय संविधान का दर्शन कहा जाता है।
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