42 वें भारतीय संशोधन को संविधान का पुनः लेखन क्यों कहा जाता है ?

Ans:  भूमिका:

सन् 1976 में किया गया 42वां संविधान संशोधन भारतीय संविधान के इतिहास का सबसे व्यापक संशोधन माना जाता है। इसे “मिनी संविधान” या “संविधान का पुनः लेखन” कहा गया क्योंकि इसने संविधान के अनेक भागों में बड़े पैमाने पर परिवर्तन किए। इस संशोधन से संविधान की मूल भावना पर भी गहरा प्रभाव पड़ा।

मुख्य बिंदु:

  • प्रस्तावना में “समाजवादी”, “पंथनिरपेक्ष” और “अखंडता” शब्द जोड़े गए।
  • मौलिक कर्तव्यों (अनुच्छेद 51A) का नया भाग जोड़ा गया।
  • न्यायपालिका की शक्तियों पर नियंत्रण के प्रयास किए गए।
  • संसद को व्यापक संशोधन शक्तियाँ प्रदान की गईं।
  • केन्द्र सरकार की शक्तियाँ राज्यों की तुलना में बढ़ाई गईं।
  • न्यायिक पुनरावलोकन की सीमा तय करने का प्रयास किया गया।
  • नियोजन नीति और समाजवादी सिद्धांतों पर बल दिया गया।

निष्कर्ष:

इस प्रकार 42वां संशोधन संविधान की संरचना, स्वरूप और दिशा में व्यापक बदलाव लाया। इसलिए इसे भारतीय संविधान का पुनः लेखन कहा जाता है।

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