न्यायिक सक्रियता के तीन दोषों का वर्णन कीजिए ।

Ans: भूमिका:

न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से न्यायालय संविधान की भावना के अनुरूप कार्यपालिका और विधायिका के निर्णयों की समीक्षा करता है। हालांकि इसका उद्देश्य जनहित की रक्षा करना है, परंतु अत्यधिक हस्तक्षेप कई बार नकारात्मक प्रभाव भी छोड़ता है।

मुख्य बिंदु:

  • सत्ता पृथक्करण का उल्लंघन: न्यायपालिका का प्रशासनिक या विधायी क्षेत्र में हस्तक्षेप संविधान की त्रिसत्ता सिद्धांत को कमजोर करता है।
  • लोकतांत्रिक जवाबदेही में कमी: न्यायाधीश निर्वाचित नहीं होते, फिर भी नीतिगत निर्णय लेने लगते हैं।
  • नीतिगत असंतुलन: न्यायिक आदेश कभी-कभी सरकार की नीतियों के व्यावहारिक क्रियान्वयन को बाधित करते हैं।
  • अत्यधिक जनहित याचिकाएँ (PIL misuse): तुच्छ या राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित याचिकाएँ न्यायिक समय की हानि करती हैं।
  • विधायिका की भूमिका में हस्तक्षेप: न्यायालय कभी-कभी कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ जाता है।
  • प्रशासनिक दक्षता पर प्रभाव: बार-बार के हस्तक्षेप से प्रशासनिक अधिकारियों में निर्णय लेने की स्वतंत्रता घटती है।
  • न्यायिक विश्वसनीयता पर प्रश्न: अत्यधिक हस्तक्षेप से न्यायपालिका की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न होता है।

निष्कर्ष :

इस प्रकार न्यायिक सक्रियता तभी लाभकारी है जब वह संवैधानिक सीमाओं में रहे। अति सक्रियता लोकतंत्र की संतुलित संरचना को कमजोर कर सकती है।

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