उत्तर प्रदेश की विधान सभा में विधि-निर्माण प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

Ans: परिचय:

उत्तर प्रदेश की विधान सभा (Legislative Assembly) राज्य की प्रमुख विधायी संस्था है, जो कानून निर्माण का मुख्य कार्य करती है। यह प्रक्रिया संविधान द्वारा निर्धारित नियमों और विधायी परंपराओं पर आधारित होती है। विधान निर्माण की प्रत्येक अवस्था में लोकतांत्रिक चर्चा और अनुमोदन आवश्यक होता है।

मुख्य बिंदु :

1. विधेयक का प्रारूप (Drafting of Bill): किसी मंत्री या सदस्य द्वारा नया कानून बनाने हेतु विधेयक का प्रारूप तैयार किया जाता है।

2. विधेयक के प्रकार: विधेयक दो प्रकार के होते हैं — सरकारी (Government Bill) और निजी सदस्य विधेयक (Private Member Bill)।

3. प्रथम पठन (First Reading): विधेयक को विधान सभा में प्रस्तुत किया जाता है और शीर्षक पढ़ा जाता है।

4. प्रकाशन (Publication): विधेयक को राज्य राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है ताकि सदस्यों को इसकी जानकारी हो।

5. द्वितीय पठन (Second Reading): इसमें विधेयक पर सामान्य चर्चा होती है और आवश्यकता पड़ने पर इसे समिति को भेजा जाता है।

6. समिति चरण (Committee Stage): समिति विधेयक का गहन परीक्षण कर संशोधन के सुझाव देती है।

7. रिपोर्ट प्रस्तुति: समिति अपनी रिपोर्ट विधान सभा को सौंपती है।

8. तृतीय पठन (Third Reading): विधेयक पर विस्तृत चर्चा कर मतदान कराया जाता है।

9. पारित होना: बहुमत से विधेयक पारित होने पर इसे विधान परिषद (यदि लागू हो) को भेजा जाता है।

10. परिषद द्वारा अनुमोदन: यदि परिषद 14 दिनों में संशोधन नहीं सुझाती, तो विधेयक स्वीकृत माना जाता है।

11. राज्यपाल की स्वीकृति: पारित विधेयक राज्यपाल को भेजा जाता है, जो उसे स्वीकृति, अस्वीकृति या पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं।

12. अधिनियम बनना: राज्यपाल की स्वीकृति के पश्चात विधेयक राज्य अधिनियम (State Act) बन जाता है और राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है।

निष्कर्ष:

उत्तर प्रदेश की विधान सभा में विधि-निर्माण प्रक्रिया लोकतांत्रिक विमर्श और सहमति पर आधारित है।यह प्रणाली जनता की इच्छाओं को कानून का रूप देकर शासन को संवैधानिक वैधता प्रदान करती है।

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