भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सुदृढ़ीकरण में सिविल सेवकों की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

Ans: परिचय:

भारत में सिविल सेवक (Civil Servants) प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ माने जाते हैं। वे नीतियों को धरातल पर लागू करके लोकतांत्रिक शासन को प्रभावी बनाते हैं। उनकी निष्पक्षता, जवाबदेही और दक्षता लोकतंत्र को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

मुख्य बिंदु:

1. नीति-कार्यान्वयन: सिविल सेवक सरकार की नीतियों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं।

2. प्रशासनिक निरंतरता: राजनीतिक बदलावों के बावजूद शासन की स्थिरता और निरंतरता बनाए रखते हैं।

3. जनसेवा भावना: नागरिकों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर लोकतंत्र को जन-केंद्रित बनाते हैं।

4. विधि का शासन (Rule of Law): सभी के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित कर संविधान की भावना को बनाए रखते हैं।

5. पारदर्शिता और जवाबदेही: सुशासन के सिद्धांतों को लागू कर जनता का विश्वास बढ़ाते हैं।

6. चुनाव प्रक्रिया में योगदान: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कर लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव मजबूत करते हैं।

7. नीतिगत सलाह: मंत्रीगण को नीतियों के निर्माण हेतु वस्तुनिष्ठ और तथ्यपरक सलाह देते हैं।

8. सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाकर समानता को प्रोत्साहित करते हैं।

9. नैतिक प्रशासन: ईमानदारी, तटस्थता और अनुशासन से प्रशासनिक विश्वसनीयता बनाए रखते हैं।

10. संकट प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं या सामाजिक तनाव की स्थिति में प्रशासनिक दक्षता से शांति और व्यवस्था बनाए रखते हैं।

11. नागरिक सहभागिता: जनसुनवाई, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवा वितरण से नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।

12. सुधारात्मक भूमिका: शासन में नवाचार (innovation) और ई-गवर्नेंस से प्रशासन को आधुनिक और उत्तरदायी बनाते हैं।

निष्कर्ष:

सिविल सेवक लोकतंत्र के मौन प्रहरी हैं जो शासन को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं। उनकी ईमानदारी, निष्पक्षता और जनसेवा की भावना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सुदृढ़ीकरण की वास्तविक नींव है।

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