नागरिक अधिकार पत्र क्या है ? नागरिकों के कल्याण में इसकी क्या भूमिका है ?

Ans: परिचय :

नागरिक अधिकार पत्र (Citizens’ Charter) एक ऐसा दस्तावेज है जो सरकारी विभागों द्वारा जनता को दी जाने वाली सेवाओं के मानक, समयसीमा और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है। इसकी शुरुआत यूके में 1991 में हुई थी, और भारत में इसे सुशासन (Good Governance) के एक महत्त्वपूर्ण उपकरण के रूप में अपनाया गया। इसका उद्देश्य नागरिकों को पारदर्शी, जवाबदेह और कुशल प्रशासन प्रदान करना है।

मुख्य बिंदु:

1. परिभाषा: नागरिक अधिकार पत्र वह घोषणा है जिसमें किसी विभाग की सेवाओं, समय-सीमा और शिकायत निवारण प्रक्रिया का विवरण होता है।

2. उद्देश्य: सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।

3. नागरिक-केंद्रित प्रशासन: यह शासन को नागरिकों की अपेक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है।

4. पारदर्शिता: नागरिकों को यह जानने का अधिकार देता है कि उन्हें कौन सी सेवा कब और कैसे मिलेगी।

5. जवाबदेही: यदि सेवाएँ समय पर न मिलें तो संबंधित अधिकारी को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।

6. शिकायत निवारण तंत्र: प्रत्येक विभाग में शिकायत दर्ज करने और समाधान की प्रक्रिया निर्धारित होती है।

7. सेवा मानक निर्धारण: प्रत्येक सेवा की समयसीमा और गुणवत्ता का स्तर तय किया जाता है।

8. नागरिक सहभागिता: नागरिकों की प्रतिक्रिया लेकर नीतियों और सेवाओं में सुधार किया जा सकता है।

9. भ्रष्टाचार में कमी: प्रक्रियाओं की स्पष्टता से रिश्वतखोरी और अनावश्यक देरी घटती है।

10. सुशासन को प्रोत्साहन: यह पारदर्शिता, दक्षता और विश्वसनीयता को बढ़ावा देता है।

11. उदाहरण: लोक सेवा गारंटी अधिनियम (जैसे – उत्तर प्रदेश जनहित गारंटी अधिनियम, 2011) नागरिक अधिकार पत्र का प्रभावी रूप है।

12. सीमाएँ: नागरिकों में जागरूकता की कमी, जवाबदेही तंत्र की कमजोरी और अधिकारियों की उदासीनता इसकी सफलता में बाधक हैं।

निष्कर्ष:

नागरिक अधिकार पत्र शासन को अधिक जनोन्मुखी और उत्तरदायी बनाता है। यदि इसे प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी और नागरिक भागीदारी के साथ लागू किया जाए, तो यह सुशासन का सशक्त उपकरण सिद्ध हो सकता है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.