इस कथन का विश्लेषण कीजिए, “राज्य विधान-मंडलों को अक्सर भारत के संघीय ढाँचे के भीतर राज्यों की आवाज के रूप में देखा जाता है।”
Ans: परिचय (Introduction ):
भारत का संविधान संघीय (Federal) शासन प्रणाली पर आधारित है, जिसमें केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है। राज्य विधान-मंडल (State Legislature) राज्य स्तर पर जनता की प्रतिनिधि संस्था है। इसे भारत के संघीय ढाँचे में राज्यों की आवाज़ के रूप में देखा जाता है क्योंकि यह राज्य की नीतियों, हितों और आवश्यकताओं को अभिव्यक्त करता है।
मुख्य बिंदु (Important Points):
- भारत में 28 राज्यों में से अधिकांश के पास द्विसदनीय (Bicameral) या एकसदनीय (Unicameral) विधान-मंडल है।
- विधान सभा (Legislative Assembly) राज्य की निचली सदन है, जो प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा चुनी जाती है।
- विधान परिषद (Legislative Council) ऊपरी सदन है, जो विभिन्न सामाजिक समूहों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है।
- राज्य विधान-मंडल राज्य की नीतियों, कानूनों और बजट को निर्धारित करता है।
- यह केन्द्र की नीतियों पर भी चर्चा कर राज्य के दृष्टिकोण को सामने लाता है।
- संघीय ढाँचे में यह संस्था राज्यों की स्वायत्तता को सुदृढ़ करती है।
- विधान सभा राज्य सरकार की कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है।
- यह केन्द्र-राज्य सम्बन्धों में संतुलन बनाए रखने का माध्यम है।
- विधान परिषद् शिक्षाविदों, स्नातकों व शिक्षकों की राय को अभिव्यक्त करने का मंच है।
- यह राज्य की समस्याओं और आकांक्षाओं को केन्द्र तक पहुँचाने का कार्य करती है।
- राज्य विधान-मंडल के माध्यम से राज्य के नागरिक सीधे शासन प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
- यह संघीय लोकतंत्र की आत्मा – ‘राज्यों की भागीदारी’ को मूर्त रूप देती है।
निष्कर्ष (Conclusion):
इस प्रकार राज्य विधान-मंडल भारत के संघीय ढाँचे में राज्यों की लोकतांत्रिक आवाज़ के रूप में कार्य करता है। यह न केवल राज्य के हितों की रक्षा करता है, बल्कि केन्द्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को भी सुदृढ़ बनाता है।
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