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Explain the contribution of woman’s organisation in the development of Indian rural society. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारतीय ग्रामीण समाज के विकास में महिला संगठनों के योगदान का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

भारतीय ग्रामीण समाज में महिलाओं की भूमिका पारंपरिक रूप से सीमित रही, परंतु महिला संगठनों (Women Organizations) ने इस स्थिति में परिवर्तन लाने का कार्य किया। इन संगठनों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर, शिक्षित और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्य बिंदु:

  • स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups – SHGs): ग्रामीण महिलाओं को लघु ऋण और उद्यमशीलता के अवसर प्रदान किए।
  • राष्ट्रीय महिला कोष (Rashtriya Mahila Kosh): महिलाओं को वित्तीय सहायता देकर आजीविका बढ़ाने में सहयोग किया।
  • सेल्फ एम्प्लॉयड वूमेन्स एसोसिएशन (SEWA): असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को संगठित कर आर्थिक सशक्तिकरण किया।
  • महिला मंडल और एनजीओ: स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
  • सरकारी योजनाएँ: महिला समाख्या, डी.डब्ल्यू.सी.आर.ए. जैसी योजनाओं ने सहभागिता को बढ़ावा दिया।
  • पंचायती राज में भागीदारी: 33% आरक्षण से ग्रामीण शासन में महिलाओं की भूमिका सशक्त हुई।
  • सामाजिक परिवर्तन: महिला संगठनों ने बाल विवाह, दहेज और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आंदोलन चलाए।

उपसंहार:

महिला संगठनों ने ग्रामीण समाज में नई चेतना और आत्मविश्वास का संचार किया। इनके प्रयासों से ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण सामाजिक विकास का आधार बन गया है।

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Discuss the impacts of Globalisation on Indian Society. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारतीय समाज पर वैश्वीकरण के प्रभावों की चर्चा कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

वैश्वीकरण (Globalization) का अर्थ है — विश्व के देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी एकीकरण की प्रक्रिया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण (Liberalization) के बाद भारत में वैश्वीकरण ने तीव्र गति से प्रभाव डाला। इसने भारतीय समाज के अनेक आयामों को परिवर्तित किया।

मुख्य प्रभाव:

  • आर्थिक प्रभाव: रोजगार के नए अवसर बढ़े, परंतु असमानता भी बढ़ी।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: पश्चिमी जीवनशैली, पहनावा और उपभोक्तावाद का प्रसार हुआ।
  • शैक्षिक प्रभाव: तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार हुआ।
  • संचार क्रांति: इंटरनेट और मोबाइल ने सामाजिक जुड़ाव और जानकारी का प्रसार बढ़ाया।
  • महिलाओं की स्थिति: शिक्षा और रोजगार में अवसर बढ़े, परंतु सांस्कृतिक द्वंद्व भी उभरा।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: औद्योगिकीकरण और उपभोग ने पर्यावरणीय संकट बढ़ाया।
  • परिवार संरचना: संयुक्त परिवारों की जगह एकल परिवारों का चलन बढ़ा।

उपसंहार:

वैश्वीकरण ने भारतीय समाज को आधुनिक और विश्व से जुड़ा बनाया, परंतु इसके साथ सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुईं। अतः आवश्यक है कि भारत अपने मूल मूल्यों को बनाए रखते हुए वैश्वीकरण का संतुलित उपयोग करे।

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“Nepolian was the son of the Revolution.” – Explain. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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“नेपोलियन क्रान्ति का पुत्र था ।” – व्याख्या कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

“नेपोलियन क्रांति का पुत्र था” (Napoleon was the child of the Revolution) – यह कथन इस तथ्य को दर्शाता है कि नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) का उदय फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution) के परिणामस्वरूप हुआ। क्रांति ने जिस समानता, स्वतंत्रता और भ्रातृत्व (Liberty, Equality, Fraternity) की भावना को जन्म दिया, उसी वातावरण ने नेपोलियन को शक्ति और अवसर प्रदान किए।

व्याख्या:

  • फ्रांसीसी क्रांति (1789) ने राजशाही का अंत कर समानता व योग्यता के आधार पर उन्नति का मार्ग खोला।
  • नेपोलियन, जो एक सामान्य सैनिक था, इसी क्रांतिकारी व्यवस्था के कारण उच्च पदों तक पहुँचा।
  • उसने क्रांति के सिद्धांतों — समान अधिकार, विधि का शासन और धार्मिक सहिष्णुता — को अपने प्रशासन में लागू किया।
  • नेपोलियनिक कोड (Napoleonic Code) ने नागरिक समानता और संपत्ति के अधिकार को कानूनी रूप दिया।
  • हालांकि बाद में उसने सम्राट बनकर निरंकुश शासन स्थापित किया, फिर भी उसकी नीतियों में क्रांति की छाप बनी रही।

उपसंहार:

इस प्रकार नेपोलियन वास्तव में क्रांति की उपज था — उसने उसके आदर्शों को आगे बढ़ाया और यूरोप में आधुनिक शासन की नींव रखी। अतः उचित ही कहा गया है कि “नेपोलियन क्रांति का पुत्र था।”

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Give an account of the challenges faced by India immediately after Independence. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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स्वतन्त्रता के तुरंत बाद भारत के समक्ष चुनौतियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। देश विभाजन से उपजी समस्याओं और नवगठित लोकतांत्रिक व्यवस्था ने प्रशासनिक क्षमता की परीक्षा ली। राष्ट्र निर्माण का यह दौर भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सिद्ध हुआ।

मुख्य बिंदु:

  • देश का विभाजन और शरणार्थियों का पुनर्वास सबसे बड़ी चुनौती थी।
  • साम्प्रदायिक दंगों ने सामाजिक एकता को खतरे में डाला।
  • रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया कठिन और जटिल थी।
  • गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता गंभीर समस्या बनी।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचनाओं का अभाव विकास में बाधक था।
  • लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना और स्थायित्व आवश्यक था।
  • सीमाओं पर सुरक्षा और पड़ोसी देशों से संबंध स्थिर करना जरूरी था।

उपसंहार:

इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने दृढ़ संकल्प और लोकतांत्रिक मूल्यों के बल पर प्रगति की दिशा में कदम बढ़ाया। स्वतंत्रता के बाद की यह यात्रा भारत की सहनशीलता और एकता का प्रतीक बनी।

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Introduce the literary sources for the study of Ancient Indian History. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन के लिए साहित्यिक स्रोत का परिचय दीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में साहित्यिक स्रोत (Literary Sources) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये उस काल की सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति का ज्ञान कराते हैं। ये स्रोत हमें भारत की सभ्यता और संस्कृति की निरंतरता को समझने में सहायता देते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • वैदिक साहित्य – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद से आरंभिक आर्यों के जीवन का ज्ञान।
  • उपनिषद – दार्शनिक विचारों और आत्मा-परमात्मा के संबंध की व्याख्या।
  • महाकाव्य – रामायण और महाभारत से राजनैतिक, सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों की जानकारी।
  • बौद्ध ग्रंथ – त्रिपिटक से मौर्यकालीन समाज और धर्म का चित्रण।
  • जैन ग्रंथ – आगम से श्रमण परंपरा और गणराज्य व्यवस्था की जानकारी।
  • संस्कृत नाटक एवं काव्य – कालिदास जैसे कवियों से गुप्तकालीन संस्कृति का परिचय।
  • विदेशी यात्रियों के वृत्तांत – मेगस्थनीज़, फाह्यान आदि से ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि।

उपसंहार:

इस प्रकार साहित्यिक स्रोत प्राचीन भारत के विविध पक्षों को उजागर करते हैं। ये इतिहास की आधारशिला हैं, जो हमें अतीत से वर्तमान तक की सांस्कृतिक यात्रा दिखाते हैं।

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