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Discuss the impacts of Globalisation on Indian Society. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारतीय समाज पर वैश्वीकरण के प्रभावों की चर्चा कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

वैश्वीकरण (Globalization) का अर्थ है — विश्व के देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी एकीकरण की प्रक्रिया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण (Liberalization) के बाद भारत में वैश्वीकरण ने तीव्र गति से प्रभाव डाला। इसने भारतीय समाज के अनेक आयामों को परिवर्तित किया।

मुख्य प्रभाव:

  • आर्थिक प्रभाव: रोजगार के नए अवसर बढ़े, परंतु असमानता भी बढ़ी।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: पश्चिमी जीवनशैली, पहनावा और उपभोक्तावाद का प्रसार हुआ।
  • शैक्षिक प्रभाव: तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार हुआ।
  • संचार क्रांति: इंटरनेट और मोबाइल ने सामाजिक जुड़ाव और जानकारी का प्रसार बढ़ाया।
  • महिलाओं की स्थिति: शिक्षा और रोजगार में अवसर बढ़े, परंतु सांस्कृतिक द्वंद्व भी उभरा।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: औद्योगिकीकरण और उपभोग ने पर्यावरणीय संकट बढ़ाया।
  • परिवार संरचना: संयुक्त परिवारों की जगह एकल परिवारों का चलन बढ़ा।

उपसंहार:

वैश्वीकरण ने भारतीय समाज को आधुनिक और विश्व से जुड़ा बनाया, परंतु इसके साथ सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुईं। अतः आवश्यक है कि भारत अपने मूल मूल्यों को बनाए रखते हुए वैश्वीकरण का संतुलित उपयोग करे।

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Discuss the causes and consequences of poverty. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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गरीबी के कारणों और परिणामों की चर्चा कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

गरीबी किसी भी देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है। भारत जैसे विकासशील देश में यह समस्या ऐतिहासिक, आर्थिक और संरचनात्मक कारणों से जुड़ी है। गरीबी न केवल आर्थिक अभाव बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में अवसरों की असमानता को भी दर्शाती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • गरीबी के प्रमुख कारण:
  • जनसंख्या वृद्धि: तेजी से बढ़ती जनसंख्या संसाधनों पर दबाव बढ़ाती है।
  • बेरोजगारी: रोजगार के अवसरों की कमी से आय घटती है और गरीबी बढ़ती है।
  • असमान आय वितरण: अमीर और गरीब के बीच आर्थिक खाई लगातार बढ़ रही है।
  • शिक्षा की कमी: अशिक्षा से लोग बेहतर रोजगार और आय के अवसर नहीं पा पाते।
  • कृषि पर निर्भरता: अस्थिर कृषि व्यवस्था और कम उत्पादकता ग्रामीण गरीबी का मुख्य कारण है।
  • औद्योगिक पिछड़ापन: सीमित औद्योगिक विकास से शहरी गरीबों की संख्या बढ़ी है।
  • गरीबी के परिणाम:
  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: कुपोषण, बीमारियाँ और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी बढ़ जाती है।
  • शिक्षा से वंचित रहना: गरीब परिवार अपने बच्चों को उचित शिक्षा नहीं दिला पाते।
  • सामाजिक असमानता: गरीबी सामाजिक वर्गों में दूरी और भेदभाव को जन्म देती है।
  • अपराध और असुरक्षा: आर्थिक अभाव अपराध दर और अस्थिरता को बढ़ाता है।
  • राष्ट्रीय विकास में बाधा: गरीबी उत्पादकता और मानव संसाधन विकास को सीमित करती है।
  • राजनीतिक अस्थिरता: असमानता और असंतोष लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव डालते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

गरीबी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानव विकास की चुनौती है। इसके समाधान हेतु शिक्षा, रोजगार, समान अवसर और सामाजिक न्याय पर आधारित समग्र नीति आवश्यक है।

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Describe the main characteristics of Indian culture. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारतीय संस्कृति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

भारतीय संस्कृति (Indian Culture) विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। यह विविधता में एकता, सहिष्णुता और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है। इसकी जड़ें हज़ारों वर्षों पुरानी परंपराओं और जीवन मूल्यों में निहित हैं।

मुख्य विशेषताएँ:

  • आध्यात्मिकता (Spirituality): भारतीय संस्कृति में भौतिकता से अधिक आत्मा और धर्म को महत्व दिया गया है।
  • सहनशीलता और सह-अस्तित्व: विभिन्न धर्मों, भाषाओं और जातियों के बीच सहिष्णुता का भाव।
  • विविधता में एकता: भौगोलिक, भाषाई और सामाजिक भिन्नताओं के बावजूद राष्ट्रीय एकता कायम।
  • पारिवारिक व्यवस्था: संयुक्त परिवार प्रणाली सामाजिक स्थिरता का प्रतीक रही है।
  • धर्म और नैतिकता: जीवन के हर क्षेत्र में धर्म, करुणा और सत्य का मार्गदर्शन।
  • कला और साहित्य: नृत्य, संगीत, मूर्तिकला और साहित्य में गहरी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति।
  • संस्कृति का निरंतरता भाव: परंपरा और आधुनिकता का संतुलित समावेश।

उपसंहार:

भारतीय संस्कृति मानवता, समरसता और आध्यात्मिक विकास का संदेश देती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ ही इसे विश्व में अद्वितीय और प्रेरणास्रोत बनाती हैं।

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Outline the development of revolutionary movement in Bengal. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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बंगाल में क्रान्तिकारी आन्दोलन के विकास को रेखांकित कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

बंगाल भारत में क्रान्तिकारी आन्दोलन का सबसे सशक्त केन्द्र रहा। प्रारम्भ में यह आन्दोलन राजनीतिक असंतोष से प्रेरित था, परंतु शीघ्र ही यह सशस्त्र स्वतंत्रता संग्राम में बदल गया। बंगाल के युवाओं ने संगठन, बलिदान और साहस से आज़ादी के संघर्ष को नई दिशा दी।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • 1905 में बंग-भंग (Partition of Bengal) के विरोध ने क्रान्तिकारी गतिविधियों की भूमि तैयार की।
  • अनुशीलन समिति (1906) की स्थापना ने संगठित क्रान्तिकारी आन्दोलन की शुरुआत की।
  • अरविन्द घोष और बारिन्द्र घोष ने युवाओं को देशभक्ति और सशस्त्र क्रान्ति के लिए प्रेरित किया।
  • युगान्तर और संध्या जैसे पत्रों ने जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1908 का अलीपुर बम काण्डबंगाल के आन्दोलन का निर्णायक मोड़ बना।
  • खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी जैसे युवाओं ने बलिदान से राष्ट्र को झकझोर दिया।
  • 1912 का हार्डिंग बम काण्ड ने आन्दोलन को अखिल भारतीय स्वरूप दिया।
  • प्रथम विश्वयुद्ध के समय जर्मनी के सहयोग से गदर व अनुशीलन समिति ने विद्रोह की योजना बनाई।
  • 1915 के बाद आन्दोलन भूमिगत होकर गुप्त संगठनों में जारी रहा।
  • रासबिहारी बोस और जतिन मुखर्जी (बाघा जतिन) ने राष्ट्रीय क्रान्ति की रूपरेखा तैयार की।
  • 1920 के बाद गाँधीजी के असहयोग आन्दोलन से कई क्रान्तिकारी राष्ट्रीय धारा में जुड़े।
  • बंगाल के इस आन्दोलन ने अगली पीढ़ी के क्रान्तिकारियों (जैसे भगत सिंह, चन्द्रशेखर आज़ाद) को प्रेरित किया।

निष्कर्ष (Conclusion):

बंगाल का क्रान्तिकारी आन्दोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा था। इसने पूरे देश में देशभक्ति, साहस और बलिदान की लौ प्रज्वलित कर स्वतंत्रता की नींव को सुदृढ़ किया।

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Give an account of the challenges faced by India immediately after Independence. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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स्वतन्त्रता के तुरंत बाद भारत के समक्ष चुनौतियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। देश विभाजन से उपजी समस्याओं और नवगठित लोकतांत्रिक व्यवस्था ने प्रशासनिक क्षमता की परीक्षा ली। राष्ट्र निर्माण का यह दौर भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सिद्ध हुआ।

मुख्य बिंदु:

  • देश का विभाजन और शरणार्थियों का पुनर्वास सबसे बड़ी चुनौती थी।
  • साम्प्रदायिक दंगों ने सामाजिक एकता को खतरे में डाला।
  • रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया कठिन और जटिल थी।
  • गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता गंभीर समस्या बनी।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचनाओं का अभाव विकास में बाधक था।
  • लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना और स्थायित्व आवश्यक था।
  • सीमाओं पर सुरक्षा और पड़ोसी देशों से संबंध स्थिर करना जरूरी था।

उपसंहार:

इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने दृढ़ संकल्प और लोकतांत्रिक मूल्यों के बल पर प्रगति की दिशा में कदम बढ़ाया। स्वतंत्रता के बाद की यह यात्रा भारत की सहनशीलता और एकता का प्रतीक बनी।

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What are the main features of Sangam Period Culture? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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संगमकालीन संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ क्या है ?

Ans: भूमिका (Introduction):

संगमकाल (लगभग 300 ई.पू. से 300 ई.) दक्षिण भारत के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण काल था। इस समय तमिल भाषा, साहित्य, समाज और संस्कृति का अद्भुत विकास हुआ। संगमकालीन संस्कृति जीवन के विविध पक्षों – धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक – का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • साहित्यिक उत्कर्ष: ‘संगम साहित्य’ में प्रेम, युद्ध, नीति, और समाज के वास्तविक चित्रण मिलते हैं।
  • भाषा का विकास: तमिल भाषा का शुद्ध और परिष्कृत रूप इसी काल में उभरा।
  • राजनीतिक जीवन: छोटे-छोटे चेर, चोल और पांड्य राज्यों का शासन प्रमुख था।
  • समाज व्यवस्था: समाज जातिगत न होकर व्यवसाय और गुणों पर आधारित था।
  • महिलाओं की स्थिति: महिलाओं को शिक्षा और सम्मान प्राप्त था; अव्वैयार जैसी कवयित्रियाँ प्रसिद्ध थीं।
  • आर्थिक जीवन: कृषि, व्यापार और समुद्री वाणिज्य अत्यंत उन्नत था; रोम तक व्यापारिक सम्बन्ध थे।
  • धार्मिक जीवन: लोग शैव, वैष्णव, मुरुगन और मातृदेवी की उपासना करते थे।
  • नैतिक मूल्य: वीरता, प्रेम और दानशीलता को सर्वोच्च गुण माना गया।
  • कला और स्थापत्य: संगीत, नृत्य और चित्रकला का उल्लेख संगम ग्रंथों में मिलता है।
  • शहरीकरण: नगरों में सुव्यवस्थित बाजार, सड़कें और सामाजिक संस्थाएँ विकसित थीं।
  • लोक संस्कृति: उत्सव, नृत्य और लोकगीत सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग थे।
  • राजनयिक सम्बन्ध: विदेशी व्यापार और सांस्कृतिक सम्पर्क से समाज उदार व प्रगतिशील बना।

निष्कर्ष (Conclusion): संगमकालीन संस्कृति ने दक्षिण भारत को साहित्य, कला और सामाजिक चेतना का केन्द्र बनाया। यह काल भारतीय संस्कृति के स्थानीय और सार्वभौमिक मूल्यों के संगम का प्रतीक माना जाता है।

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How is the growing regionalism in India affecting the economy and polity? Explain. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारत में बढ़ता हुआ क्षेत्रवाद किस प्रकार से अर्थव्यवस्था तथा राज्यव्यवस्था को प्रभावित कर रही है ? स्पष्ट कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction ):

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में क्षेत्रवाद (Regionalism) स्वाभाविक रूप से उभरने वाली प्रवृत्ति है। यह क्षेत्रीय पहचान, भाषा, संस्कृति या आर्थिक असमानता के कारण पैदा होता है। परंतु जब यह अति रूप ले लेता है, तो यह देश की अर्थव्यवस्था और राज्यव्यवस्था दोनों को प्रभावित करता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • क्षेत्रवाद के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:
  • विकास में असंतुलन: क्षेत्रीय असंतोष से निवेश और औद्योगिक विकास प्रभावित होता है।
  • निवेश में कमी: अशांति और अस्थिरता के कारण निजी व विदेशी निवेशक पीछे हटते हैं।
  • संसाधनों का अनुचित वितरण: क्षेत्रीय दबाव समूह विकास निधियों के असमान बँटवारे की माँग करते हैं।
  • आर्थिक प्रतिस्पर्धा: राज्य आपसी प्रतिस्पर्धा में सहयोग की भावना खो देते हैं।
  • राजकोषीय दबाव: क्षेत्रीय मांगों को पूरा करने हेतु सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ता है।
  • श्रमिक प्रवास पर असर: क्षेत्रीय भेदभाव से आंतरिक प्रवासन और श्रम बाज़ार में अस्थिरता आती है।
  • क्षेत्रवाद के राज्यव्यवस्था पर प्रभाव:
  • राष्ट्रीय एकता पर खतरा: क्षेत्रीय निष्ठा राष्ट्रीय एकता से बड़ी बन जाती है।
  • संघीय ढाँचे पर दबाव: राज्यों के बीच विवाद (जैसे जल बँटवारा, सीमा विवाद) बढ़ते हैं।
  • राजनीतिक दलों का विखंडन: क्षेत्रीय दलों के उदय से राष्ट्रीय नीतियों में असंतुलन आता है।
  • लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रभाव: क्षेत्रीय भावनाओं पर आधारित राजनीति विकास से ध्यान हटाती है।
  • नीतिगत अस्थिरता: केंद्र व राज्यों के बीच सहयोग की कमी नीति निर्माण को प्रभावित करती है।
  • सामाजिक तनाव: भाषाई, सांस्कृतिक और जातीय आधार पर समाज में विभाजन बढ़ता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारत में क्षेत्रवाद को केवल दमन से नहीं, बल्कि समान विकास, संवैधानिक संतुलन और संवाद से नियंत्रित किया जा सकता है। जब सभी क्षेत्र समान अवसर पाएँगे, तभी राष्ट्रीय एकता और स्थिरता सशक्त बनेगी।

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Introduce the literary sources for the study of Ancient Indian History. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन के लिए साहित्यिक स्रोत का परिचय दीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में साहित्यिक स्रोत (Literary Sources) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये उस काल की सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति का ज्ञान कराते हैं। ये स्रोत हमें भारत की सभ्यता और संस्कृति की निरंतरता को समझने में सहायता देते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • वैदिक साहित्य – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद से आरंभिक आर्यों के जीवन का ज्ञान।
  • उपनिषद – दार्शनिक विचारों और आत्मा-परमात्मा के संबंध की व्याख्या।
  • महाकाव्य – रामायण और महाभारत से राजनैतिक, सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों की जानकारी।
  • बौद्ध ग्रंथ – त्रिपिटक से मौर्यकालीन समाज और धर्म का चित्रण।
  • जैन ग्रंथ – आगम से श्रमण परंपरा और गणराज्य व्यवस्था की जानकारी।
  • संस्कृत नाटक एवं काव्य – कालिदास जैसे कवियों से गुप्तकालीन संस्कृति का परिचय।
  • विदेशी यात्रियों के वृत्तांत – मेगस्थनीज़, फाह्यान आदि से ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि।

उपसंहार:

इस प्रकार साहित्यिक स्रोत प्राचीन भारत के विविध पक्षों को उजागर करते हैं। ये इतिहास की आधारशिला हैं, जो हमें अतीत से वर्तमान तक की सांस्कृतिक यात्रा दिखाते हैं।

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Indian society is known for its uniqueness and cultural diversity. Discuss. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारतीय समाज अपनी विशिष्टता और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है । चर्चा कीजिए ।

Ans: भूमिका (Introduction):

भारतीय समाज विश्व के सबसे प्राचीन और विविधतापूर्ण समाजों में से एक है। यहाँ अनेक धर्म, भाषाएँ, जातियाँ और परम्पराएँ एक साथ पनपी हैं। यह विविधता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशिष्टता और शक्ति मानी जाती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • धार्मिक विविधता: भारत में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि अनेक धर्म शान्तिपूर्वक सह-अस्तित्व में हैं।
  • भाषाई विविधता: संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ मान्यता प्राप्त हैं।
  • सांस्कृतिक समन्वय: आर्य, द्रविड़, मुगल और यूरोपीय प्रभावों से भारतीय संस्कृति में अद्भुत मिश्रण हुआ है।
  • भौगोलिक विविधता: हिमालय से लेकर समुद्र तक विभिन्न जलवायु और जीवनशैली ने क्षेत्रीय संस्कृतियों को जन्म दिया।
  • सामाजिक संगठन: जाति, वर्ग और पेशों के आधार पर बना समाज समय के साथ बदलता और विकसित होता रहा।
  • परिवार प्रणाली: संयुक्त परिवार भारतीय समाज की पहचान है, जहाँ सामूहिकता और सहयोग को महत्व दिया जाता है।
  • त्योहारों की बहुलता: दीवाली, ईद, होली, पोंगल, बिहू आदि उत्सव राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हैं।
  • पहनावा और खान-पान की विविधता: प्रत्येक क्षेत्र का वस्त्र, भोजन और रहन-सहन अलग होते हुए भी भारतीयता से जुड़ा है।
  • कला और संगीत: भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी जैसे नृत्य रूप और शास्त्रीय संगीत परंपराएँ विविधता की पहचान हैं।
  • लोक परम्पराएँ: लोकगीत, लोककथाएँ और लोकनृत्य ग्रामीण भारत की आत्मा हैं।
  • सामाजिक सहिष्णुता: विविधताओं के बावजूद आपसी सम्मान और सहअस्तित्व भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता है।
  • एकता में विविधता: यही भारतीय संस्कृति की मूल भावना है, जिसने देश को सदियों से एक सूत्र में बाँधे रखा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार भारतीय समाज अपनी विविधता, सहिष्णुता और समन्वय के कारण अद्वितीय है। यही विशेषताएँ भारत को “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना का जीवंत उदाहरण बनाती हैं।

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Explain the contribution of woman’s organisation in the development of Indian rural society. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-1

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भारतीय ग्रामीण समाज के विकास में महिला संगठनों के योगदान का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना:

भारतीय ग्रामीण समाज में महिलाओं की भूमिका पारंपरिक रूप से सीमित रही, परंतु महिला संगठनों (Women Organizations) ने इस स्थिति में परिवर्तन लाने का कार्य किया। इन संगठनों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर, शिक्षित और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्य बिंदु:

  • स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups – SHGs): ग्रामीण महिलाओं को लघु ऋण और उद्यमशीलता के अवसर प्रदान किए।
  • राष्ट्रीय महिला कोष (Rashtriya Mahila Kosh): महिलाओं को वित्तीय सहायता देकर आजीविका बढ़ाने में सहयोग किया।
  • सेल्फ एम्प्लॉयड वूमेन्स एसोसिएशन (SEWA): असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को संगठित कर आर्थिक सशक्तिकरण किया।
  • महिला मंडल और एनजीओ: स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
  • सरकारी योजनाएँ: महिला समाख्या, डी.डब्ल्यू.सी.आर.ए. जैसी योजनाओं ने सहभागिता को बढ़ावा दिया।
  • पंचायती राज में भागीदारी: 33% आरक्षण से ग्रामीण शासन में महिलाओं की भूमिका सशक्त हुई।
  • सामाजिक परिवर्तन: महिला संगठनों ने बाल विवाह, दहेज और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आंदोलन चलाए।

उपसंहार:

महिला संगठनों ने ग्रामीण समाज में नई चेतना और आत्मविश्वास का संचार किया। इनके प्रयासों से ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण सामाजिक विकास का आधार बन गया है।

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