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What do you understand by buffer stock? Is it essential for food security in India? Explain clearly. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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बफर स्टॉक से आप क्या समझते हैं ? क्या भारत में खाद्य सुरक्षा के लिये यह आवश्यक है ? स्पष्ट रूप से व्याख्या कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

बफर स्टॉक (Buffer Stock) से तात्पर्य सरकार द्वारा आवश्यक मात्रा में खाद्यान्नों (जैसे गेहूँ, चावल आदि) का भंडारण करना है, ताकि आपातकालीन स्थितियों—जैसे सूखा, बाढ़ या बाजार में मूल्य अस्थिरता—में जन-आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। यह प्रणाली भारत की खाद्य सुरक्षा नीति का एक प्रमुख आधार है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • बफर स्टॉक का निर्माण भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा किया जाता है।
  • इसका उद्देश्य किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) देना और उपभोक्ताओं के लिए खाद्यान्न की स्थिर आपूर्ति बनाए रखना है।
  • यह स्टॉक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से गरीब व कमजोर वर्गों तक भोजन पहुँचाने में सहायक होता है।
  • प्राकृतिक आपदाओं या आपूर्ति संकट के समय यह भंडार देश को राहत प्रदान करता है।
  • बफर स्टॉक मूल्य स्थिरीकरण (Price Stabilization) का भी प्रभावी साधन है।
  • सरकार प्रत्येक वर्ष खाद्य सुरक्षा मानदंडों के अनुसार न्यूनतम बफर स्टॉक सीमा निर्धारित करती है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 ने इस प्रणाली को कानूनी समर्थन दिया है।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी योजनाओं के सफल संचालन के पीछे यही तंत्र कार्य करता है।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान बफर स्टॉक ने देशभर में मुफ्त अनाज वितरण संभव बनाया।
  • हालांकि, अत्यधिक भंडारण से गोदामों पर दबाव, खाद्यान्न की बर्बादी और वित्तीय बोझ भी बढ़ता है।
  • इसलिए, तकनीकी भंडारण, आपूर्ति प्रबंधन और समयबद्ध निकासी जरूरी है।
  • डिजिटल निगरानी और ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली बफर स्टॉक प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बना सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बफर स्टॉक नितांत आवश्यक है। यह न केवल संकट के समय भोजन की उपलब्धता बनाए रखता है, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा भी करता है।

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Critically evaluate the strategy of poverty alleviation programmes in India, in recent years. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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हाल के वर्षों में, भारत में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की रणनीति का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारत में गरीबी उन्मूलन (Poverty Alleviation) स्वतंत्रता के बाद से सरकार की प्रमुख प्राथमिकता रही है। हाल के वर्षों में गरीबी घटाने की रणनीति में केवल आय वृद्धि नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और समावेशी विकास पर भी ध्यान दिया गया है। फिर भी, चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रारंभिक कार्यक्रम जैसे – गरीबी हटाओ योजना, IRDP, NREP आदि प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने पर केंद्रित थे।
  • हाल के वर्षों में दृष्टिकोण “कल्याण आधारित” से “सशक्तिकरण आधारित” (Empowerment-based) रणनीति की ओर बदला है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना, जन-धन योजना और उज्ज्वला योजना ने जीवन स्तर सुधारने में मदद की।
  • मनरेगा (MGNREGA) ने ग्रामीण रोजगार व आय सुरक्षा को मजबूत किया।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित किया।
  • Direct Benefit Transfer (DBT) प्रणाली ने भ्रष्टाचार और रिसाव को कम किया।
  • डिजिटल इंडिया और आधार ने पारदर्शिता व वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया।
  • हालांकि, कई योजनाओं में लक्षित लाभार्थियों की पहचान, निगरानी और स्थायित्व की समस्या बनी रही।
  • असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों व शहरी गरीबों तक योजनाओं की पहुँच सीमित है।
  • बहु-आयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) — शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण— पर अभी और ध्यान की आवश्यकता है।
  • नीतियों में क्षेत्रीय असमानता व सामाजिक विषमता को कम करने के लिए स्थानीय समाधान जरूरी हैं।
  • सरकार अब “गरीबी से समृद्धि” की दिशा में टिकाऊ आजीविका और कौशल विकास पर बल दे रही है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः हाल की रणनीतियाँ गरीबी घटाने में प्रभावी रही हैं, परंतु स्थायी परिणामों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और सामाजिक सुरक्षा पर निरंतर निवेश आवश्यक है। गरीबी उन्मूलन तभी सफल होगा जब विकास वास्तव में समावेशी और न्यायसंगत बने।

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Assess the role of States and Central Government in developing irrigation infrastructure in India. How has Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana (P.M.K.S.Y.) helped in improving irrigation access across the country? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत में सिंचाई के बुनियादी ढाँचे के विकास में राज्यों और केन्द्र सरकार की भूमिका का आकलन करें । प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पी. एम. के. एस. वाई.) देश भर में सिंचाई की पहुँच को बेहतर बनाने में कैसे मदद की है ?

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारत मुख्यतः कृषि प्रधान देश है, जहाँ सिंचाई (Irrigation) कृषि उत्पादन की रीढ़ मानी जाती है। सिंचाई के बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) के विकास में केन्द्र और राज्य सरकार दोनों की भूमिकाएँ परस्पर पूरक हैं। इन दोनों के समन्वय से ही जल संसाधनों का न्यायपूर्ण एवं कुशल उपयोग संभव है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • जल संसाधन एक राज्य विषय (State Subject) है, परन्तु बड़े और अन्तरराज्यीय परियोजनाओं के लिए केन्द्र की भूमिका निर्णायक होती है।
  • केन्द्र सरकार जल नीति, वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान करती है।
  • राज्य सरकारें सिंचाई परियोजनाओं का क्रियान्वयन, रखरखाव और जल वितरण करती हैं।
  • केन्द्रीय जल आयोग (CWC) और जल शक्ति मंत्रालय नीतिगत दिशा और समन्वय सुनिश्चित करते हैं।
  • बड़ी बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जैसे – भाखड़ा-नांगल, सरदार सरोवर, और टिहरी बाँध – केन्द्र-राज्य साझेदारी के उदाहरण हैं।
  • लघु सिंचाई योजनाएँ (Minor Irrigation Projects) जैसे ट्यूबवेल, तालाब, चेक डैम आदि राज्यों के अधीन हैं।
  • वित्त आयोगों द्वारा राज्यों को जल संसाधन विकास हेतु अनुदान दिया जाता है।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) 2015 में शुरू की गई, जिसका उद्देश्य “हर खेत को पानी” पहुँचाना है।
  • यह योजना चार घटकों पर आधारित है – परंपरागत जल स्रोतों का पुनरुद्धार, सूक्ष्म सिंचाई (Drip/Sprinkler) को बढ़ावा, जल संरक्षण और खेत-स्तरीय सिंचाई विस्तार।
  • योजना से जल उपयोग दक्षता में सुधार, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में उत्पादकता वृद्धि, और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
  • PMKSY के अंतर्गत “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियान ने पानी की बचत के साथ फसल उत्पादन को प्रोत्साहन दिया।
  • केन्द्र–राज्य साझा वित्तपोषण (60:40) ने योजना को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहुँच दिलाई।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि भारत में सिंचाई अवसंरचना के विकास में केन्द्र और राज्य दोनों की भूमिकाएँ समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ने इस सहयोग को संस्थागत रूप देकर जल प्रबंधन और कृषि विकास में नई ऊर्जा प्रदान की है।

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Budgets are half used if they serve only as planning device”. Critically examine this statement. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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“बजट का आधा उपयोग हो पाता है यदि उन्हें केवल नियोजन के उपकरण के रूप में ही प्रयोग किया जाये |” इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये । “

Ans: भूमिका (Introduction) –

बजट किसी भी सरकार का वार्षिक वित्तीय वक्तव्य है, जो देश की आय और व्यय का अनुमान प्रस्तुत करता है। इसे सामान्यतः नियोजन (Planning) का एक उपकरण माना जाता है, परंतु यदि इसे केवल नियोजन तक सीमित कर दिया जाए, तो इसके व्यापक उद्देश्यों की प्राप्ति अधूरी रह जाती है। यह कथन इसी सीमित दृष्टिकोण की आलोचना प्रस्तुत करता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • बजट का उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना भी है।
  • नियोजन के स्तर पर बजट मात्र अनुमान प्रस्तुत करता है; वास्तविक सफलता उसके कार्यान्वयन में निहित होती है।
  • यदि बजट को केवल योजनाबद्ध व्यय तक सीमित कर दिया जाए, तो संसाधनों का दुरुपयोग और अपव्यय बढ़ सकता है।
  • सामाजिक न्याय, गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन जैसे उद्देश्यों की प्राप्ति तभी संभव है जब बजट परिणामोन्मुख (Outcome-oriented) हो।
  • कई बार योजनाओं के लिए निधि आवंटित होती है, परंतु निगरानी तंत्र की कमी से खर्च अधूरा रह जाता है।
  • भारत में कई मंत्रालय अपने आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं कर पाते, जिससे योजनाओं का प्रभाव घट जाता है।
  • नीति आयोग ने “परिणाम आधारित बजटिंग” (Outcome Budgeting) की संकल्पना इसी समस्या के समाधान हेतु दी है।
  • जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के बिना बजट अपने लक्ष्य से भटक सकता है।
  • प्रभावी ऑडिट, समयबद्ध मूल्यांकन और वित्तीय अनुशासन इसकी उपयोगिता बढ़ाते हैं।
  • बजट को नियोजन के साथ-साथ नीति निर्माण, नियंत्रण और जनकल्याण का माध्यम बनाना आवश्यक है।
  • केवल नियोजन पर केंद्रित बजट “आर्थिक दृष्टि” से अधूरा और “विकास दृष्टि” से कमजोर बन जाता है।
  • इसलिए बजट को एक गतिशील उपकरण के रूप में प्रयोग करना चाहिए, जो लक्ष्य निर्धारण से लेकर परिणाम मूल्यांकन तक सक्रिय भूमिका निभाए।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः यह सत्य है कि यदि बजट को केवल नियोजन का उपकरण माना जाए, तो उसकी उपयोगिता आधी रह जाती है। वास्तविक अर्थों में बजट तभी प्रभावी है, जब वह विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण को समान रूप से सुनिश्चित करे।

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Does inclusive growth ensure social justice? Discuss. What steps have been taken by the Government of India for bringing inclusive growth with social justice? Elucidate your answer. [ Marks-12 ] UPPCS Mains 2024 GS-3

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क्या समावेशी विकास, सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करता है ? विवेचना कीजिये । भारत सरकार द्वारा सामाजिक न्याय के साथ समावेशी विकास लाने हेतु क्या कदम उठाये गये हैं ? अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

समावेशी विकास (Inclusive Development) का अर्थ है ऐसा आर्थिक विकास जिसमें समाज के सभी वर्ग—गरीब, वंचित, महिलाएँ, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अल्पसंख्यक—समान रूप से सहभागी हों। इसका उद्देश्य केवल GDP वृद्धि नहीं बल्कि समान अवसरों के माध्यम से सामाजिक न्याय (Social Justice) सुनिश्चित करना है। भारत में यह नीति सामाजिक समानता, अवसर की समानता और क्षेत्रीय संतुलन पर आधारित है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • समावेशी विकास सामाजिक न्याय का व्यावहारिक रूप है, जो समाज में असमानताओं को घटाता है।
  • यह विकास के लाभों को सभी वर्गों तक पहुँचाने पर बल देता है।
  • गरीबी उन्मूलन एवं रोजगार सृजन इसकी प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवास में समान पहुँच सामाजिक न्याय की नींव बनती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यक्रमों से क्षेत्रीय असमानता कम होती है।
  • महिला सशक्तिकरण योजनाएँ (जैसे – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्ट्रीट वेंडर योजना) लैंगिक न्याय सुनिश्चित करती हैं।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण व उद्यमिता योजनाएँ अवसर समानता को बढ़ाती हैं।
  • अल्पसंख्यक मंत्रालय की योजनाएँ (जैसे – नई मंज़िल, नई रोशनी) समावेशी नीति का हिस्सा हैं।
  • मनरेगा (MGNREGA) ग्रामीण रोजगार व सामाजिक सुरक्षा का उदाहरण है।
  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना व आधार-DBT प्रणाली आर्थिक समावेशन को सुदृढ़ करती है।
  • शिक्षा का अधिकार व स्वास्थ्य बीमा योजनाएँ सामाजिक सुरक्षा को व्यापक बनाती हैं।
  • नीति आयोग द्वारा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की नीति समावेशी विकास की दिशा को पुष्ट करती है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि समावेशी विकास, सामाजिक न्याय की प्राप्ति का प्रभावी साधन है। भारत सरकार की नीतियाँ यदि प्रभावी रूप से लागू हों, तो आर्थिक विकास के साथ सामाजिक समानता भी सुनिश्चित की जा सकती है।

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Outline the major challenges faced by the coast guard of India and explain the efforts taken to deal with them. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारतीय तट रक्षक बल के सम्मुख प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित कीजिये तथा उनसे निपटने के लिये किये गये प्रयासों की व्याख्या कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारतीय तट रक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) की स्थापना 1978 में समुद्री सीमाओं की रक्षा, तस्करी रोकने और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए की गई थी। यह बल देश की तटीय सुरक्षा का प्रमुख अंग है।

मुख्य चुनौतियाँ (Major Challenges):

  • 7,500 किमी लंबी तटरेखा की निरंतर निगरानी कठिन।
  • समुद्री आतंकवाद और घुसपैठ की बढ़ती घटनाएँ।
  • अवैध मछली पकड़ना और समुद्री तस्करी।
  • तेल रिसाव व प्रदूषण नियंत्रण में तकनीकी सीमाएँ।
  • अपर्याप्त जहाज, रडार व मानव संसाधन।
  • विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की चुनौती।
  • निपटने के प्रयास (Efforts to Address):
  • तटीय निगरानी नेटवर्क (CSN) व IMAC से रीयल-टाइम सूचना साझाकरण।
  • आधुनिक गश्ती जहाज, ड्रोन और एयर स्क्वाड्रन की तैनाती।
  • सागर रक्षा योजना के तहत तटीय चौकियों का विस्तार।
  • नौसेना व राज्य पुलिस के साथ संयुक्त अभ्यास (Joint Exercises)।
  • तटीय समुदायों को सुरक्षा सहयोग हेतु प्रशिक्षित किया जा रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारतीय तट रक्षक बल आधुनिक तकनीक और बहु-एजेंसी समन्वय के माध्यम से समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ बना रहा है, जिससे भारत की समुद्री संप्रभुता और तटीय स्थिरता सुनिश्चित होती है।

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Mention the role of Indian Defence Research and Development Organisation in India’s security set-up. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत की सुरक्षा व्यवस्था में भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की भूमिका का उल्लेख कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation – DRDO) की स्थापना 1958 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाना और सशस्त्र सेनाओं को अत्याधुनिक उपकरण प्रदान करना है।

मुख्य भूमिकाएँ (Key Roles):

  • स्वदेशी रक्षा तकनीक का विकास – मिसाइल, रडार, टैंक, पनडुब्बी व युद्धक विमान जैसी तकनीकों का निर्माण।
  • मिसाइल कार्यक्रम की सफलता – ‘अग्नि’, ‘पृथ्वी’, ‘आकाश’, ‘नाग’ और ‘ब्रहमोस’ जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों का विकास।
  • रक्षा उपकरणों का आधुनिकीकरण – सैनिकों के लिए हल्के हथियार, बुलेटप्रूफ जैकेट व संचार प्रणाली में सुधार।
  • अंतरिक्ष व साइबर सुरक्षा में योगदान – उपग्रह-आधारित निगरानी और साइबर रक्षा प्रणालियों का विकास।
  • नवाचार व अनुसंधान प्रोत्साहन – ‘डेयर टू ड्रीम’ जैसी योजनाओं से निजी व अकादमिक क्षेत्र को जोड़ना।
  • स्वावलंबन में योगदान – ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अंतर्गत विदेशी निर्भरता में कमी।
  • सैन्य-नागरिक तकनीक का उपयोग – रक्षा तकनीकों का नागरिक क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, परिवहन व पर्यावरण में प्रयोग।

निष्कर्ष (Conclusion):

DRDO ने भारत की रक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया है। इसके नवाचारों ने न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी स्थान दिलाया है।

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Describe the role of Artificial Intelligence in the safety and security during disaster management. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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आपदा प्रबन्धन के दौरान सुरक्षा एवं संरक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका का वर्णन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आज आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी उपकरण बन चुकी है। यह प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदाओं के पूर्वानुमान, राहत कार्यों और पुनर्वास में सटीक व त्वरित निर्णय लेने में मदद करती है।

मुख्य भूमिकाएँ (Key Roles):

  • पूर्वानुमान (Prediction): सैटेलाइट डेटा और मशीन लर्निंग मॉडल के माध्यम से भूकम्प, चक्रवात, बाढ़ आदि की समयपूर्व चेतावनी।
  • जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment): AI आधारित डेटा विश्लेषण से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारण।
  • आपात प्रतिक्रिया (Emergency Response): ड्रोन और रोबोट द्वारा खोज एवं राहत कार्यों में त्वरित सहायता।
  • संचार और समन्वय (Coordination): चैटबॉट्स और रीयल-टाइम ट्रैकिंग से राहत टीमों के बीच बेहतर तालमेल।
  • संसाधन प्रबंधन (Resource Allocation): AI से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं का कुशल वितरण।
  • सोशल मीडिया विश्लेषण: संकट के दौरान जनसंदेशों से वास्तविक स्थिति का त्वरित आकलन।
  • पुनर्वास योजना (Rehabilitation Planning): क्षति मूल्यांकन के आधार पर दीर्घकालिक पुनर्निर्माण रणनीति बनाना।

निष्कर्ष (Conclusion):

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आपदा प्रबंधन में मानवीय क्षमता को कई गुना बढ़ाकर सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करती है। इसका प्रभावी उपयोग न केवल जनहानि घटाता है बल्कि आपदा-उत्तर पुनर्वास को भी अधिक संगठित बनाता है।

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What is digital arrest ? Which are the States most effected by the problem of digital arrest in India in the last three years ? Mention the effective measures taken by the Government of India in this direction. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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डिजिटल अरेस्ट क्या है ? विगत तीन वर्षों में भारत में डिजिटल अरेस्ट की समस्या से सर्वाधिक प्रभावित राज्य कौन-से हैं ? इस दिशा में भारत सरकार द्वारा उठाये गये प्रभावी उपायों का उल्लेख करें ।

Ans: परिचय (Introduction):  

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) एक उभरता हुआ साइबर अपराध है जिसमें अपराधी स्वयं को सरकारी एजेंसी (जैसे CBI, पुलिस या NCB) का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या संदेशों के माध्यम से लोगों को डराते हैं कि वे किसी अपराध में शामिल हैं और “ऑनलाइन गिरफ्तारी” से बचने के लिए धन जमा करें।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • यह अपराध भय और भ्रम फैलाकर आर्थिक ठगी करने का तरीका है।
  • कानूनी रूप से “डिजिटल गिरफ्तारी” का कोई अस्तित्व नहीं है।
  • पिछले तीन वर्षों में कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित राज्य रहे हैं।
  • 2024 में कर्नाटक में 600 से अधिक मामले दर्ज हुए और ₹100 करोड़ से अधिक की हानि हुई।
  • सरकार ने Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से नियंत्रण के प्रयास किए।
  • ‘Stop-Think-Act’ अभियान के ज़रिए जनजागरूकता बढ़ाई जा रही है।
  • फर्जी सिम कार्ड, व्हाट्सएप व स्काइप खातों को ब्लॉक करने की कार्रवाई जारी है।

निष्कर्ष (Conclusion):

सरकार के साइबर नियंत्रण उपायों और नागरिक जागरूकता से इस डिजिटल ठगी पर रोक लगाई जा सकती है। सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार ही डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों से बचाव का सर्वोत्तम उपाय है।

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What are major initiatives of Government of India for promoting technology-based solutions for rural upliftment ? [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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ग्रामीण उत्थान के लिये तकनीक-आधारित समाधान को बढ़ावा देने हेतु भारत सरकार के प्रमुख प्रयास क्या हैं ?

Ans: परिचय (Introduction):

ग्रामीण भारत देश की जनसंख्या और अर्थव्यवस्था का आधार है। इसके सतत विकास के लिए भारत सरकार ने तकनीक-आधारित समाधान (Technology-Based Solutions) को ग्रामीण जीवन, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य में लागू करने के अनेक प्रयास किए हैं।

मुख्य प्रयास (Key Initiatives):

  • डिजिटल इंडिया अभियान – ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, डिजिटल भुगतान और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा।
  • कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) – ग्रामीण नागरिकों को सरकारी सेवाओं की डिजिटल पहुँच।
  • ई-नाम (e-NAM) पोर्टल – किसानों को ऑनलाइन कृषि बाजार उपलब्ध कराना।
  • भारतनेट परियोजना – ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुँचाना।
  • स्मार्ट ग्राम योजना – ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार में स्मार्ट समाधान लागू करना।
  • कृषि तकनीकी उपयोग – ड्रोन, सेंसर, और मोबाइल ऐप से सटीक कृषि को प्रोत्साहन।
  • आरोग्य सेतु व टेलीमेडिसिन सेवाएँ – ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल नवाचार।

निष्कर्ष (Conclusion):

तकनीक-आधारित पहलों ने ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। इनसे न केवल जीवन स्तर सुधर रहा है, बल्कि ग्रामीण भारत आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहा है।

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