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Narco-terrorism has emerged as a serious threat across the country. Suggest suitable measures to counter it. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

पूरे देश में नार्को-आतंकवाद एक गंभीर खतरे के रूप में उभरा है । इससे निपटने के लिये उपयुक्त उपाय सुझाइये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

नार्को-आतंकवाद (Narco-Terrorism) का आशय है मादक पदार्थों (Drugs) की तस्करी से प्राप्त धन का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण में करना। हाल के वर्षों में यह भारत की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और युवा पीढ़ी के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में उभरा है, विशेषकर सीमावर्ती राज्यों जैसे पंजाब, जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • आतंकवादी संगठन ड्रग व्यापार से अर्जित धन का प्रयोग हथियार खरीद, प्रशिक्षण और नेटवर्क विस्तार में करते हैं।
  • भारत की भौगोलिक स्थिति—“Golden Crescent” (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान) और “Golden Triangle” (म्यांमार-लाओस-थाईलैंड)—के बीच होने से इसे दोहरे खतरे का सामना है।
  • युवाओं में नशे की लत सामाजिक अस्थिरता और अपराध दर को बढ़ा रही है।
  • NDPS Act, 1985 (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) के तहत मादक पदार्थों की तस्करी पर कड़ा नियंत्रण है।
  • Narcotics Control Bureau (NCB), BSF और Indian Coast Guard ड्रग तस्करी पर निगरानी रखते हैं।
  • सीमा पार निगरानी को मज़बूत करने हेतु “स्मार्ट फेंसिंग”, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
  • Enforcement Directorate (ED) और Financial Intelligence Unit (FIU) मनी लॉन्ड्रिंग पर निगरानी रखती हैं।
  • UNODC व SAARC Drug Control Programme के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सशक्त किया गया है।
  • स्कूल-कॉलेज स्तर पर Drug-Free India जैसे अभियानों से जन-जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
  • नशा पीड़ितों के पुनर्वास केंद्रों के विस्तार पर भी बल दिया जा रहा है।
  • सीमा क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ाना प्रभावी रणनीति सिद्ध हो सकती है।
  • आधुनिक साइबर निगरानी से ऑनलाइन ड्रग नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि नार्को-आतंकवाद केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता का भी प्रश्न है। सख्त कानून, उन्नत तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जन-जागरूकता के समन्वय से ही भारत इस जटिल खतरे का स्थायी समाधान पा सकता है।

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Outline the major challenges faced by the coast guard of India and explain the efforts taken to deal with them. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारतीय तट रक्षक बल के सम्मुख प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित कीजिये तथा उनसे निपटने के लिये किये गये प्रयासों की व्याख्या कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारतीय तट रक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) की स्थापना 1978 में समुद्री सीमाओं की रक्षा, तस्करी रोकने और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए की गई थी। यह बल देश की तटीय सुरक्षा का प्रमुख अंग है।

मुख्य चुनौतियाँ (Major Challenges):

  • 7,500 किमी लंबी तटरेखा की निरंतर निगरानी कठिन।
  • समुद्री आतंकवाद और घुसपैठ की बढ़ती घटनाएँ।
  • अवैध मछली पकड़ना और समुद्री तस्करी।
  • तेल रिसाव व प्रदूषण नियंत्रण में तकनीकी सीमाएँ।
  • अपर्याप्त जहाज, रडार व मानव संसाधन।
  • विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की चुनौती।
  • निपटने के प्रयास (Efforts to Address):
  • तटीय निगरानी नेटवर्क (CSN) व IMAC से रीयल-टाइम सूचना साझाकरण।
  • आधुनिक गश्ती जहाज, ड्रोन और एयर स्क्वाड्रन की तैनाती।
  • सागर रक्षा योजना के तहत तटीय चौकियों का विस्तार।
  • नौसेना व राज्य पुलिस के साथ संयुक्त अभ्यास (Joint Exercises)।
  • तटीय समुदायों को सुरक्षा सहयोग हेतु प्रशिक्षित किया जा रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

भारतीय तट रक्षक बल आधुनिक तकनीक और बहु-एजेंसी समन्वय के माध्यम से समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ बना रहा है, जिससे भारत की समुद्री संप्रभुता और तटीय स्थिरता सुनिश्चित होती है।

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Budgets are half used if they serve only as planning device”. Critically examine this statement. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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“बजट का आधा उपयोग हो पाता है यदि उन्हें केवल नियोजन के उपकरण के रूप में ही प्रयोग किया जाये |” इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये । “

Ans: भूमिका (Introduction) –

बजट किसी भी सरकार का वार्षिक वित्तीय वक्तव्य है, जो देश की आय और व्यय का अनुमान प्रस्तुत करता है। इसे सामान्यतः नियोजन (Planning) का एक उपकरण माना जाता है, परंतु यदि इसे केवल नियोजन तक सीमित कर दिया जाए, तो इसके व्यापक उद्देश्यों की प्राप्ति अधूरी रह जाती है। यह कथन इसी सीमित दृष्टिकोण की आलोचना प्रस्तुत करता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • बजट का उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना भी है।
  • नियोजन के स्तर पर बजट मात्र अनुमान प्रस्तुत करता है; वास्तविक सफलता उसके कार्यान्वयन में निहित होती है।
  • यदि बजट को केवल योजनाबद्ध व्यय तक सीमित कर दिया जाए, तो संसाधनों का दुरुपयोग और अपव्यय बढ़ सकता है।
  • सामाजिक न्याय, गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन जैसे उद्देश्यों की प्राप्ति तभी संभव है जब बजट परिणामोन्मुख (Outcome-oriented) हो।
  • कई बार योजनाओं के लिए निधि आवंटित होती है, परंतु निगरानी तंत्र की कमी से खर्च अधूरा रह जाता है।
  • भारत में कई मंत्रालय अपने आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं कर पाते, जिससे योजनाओं का प्रभाव घट जाता है।
  • नीति आयोग ने “परिणाम आधारित बजटिंग” (Outcome Budgeting) की संकल्पना इसी समस्या के समाधान हेतु दी है।
  • जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के बिना बजट अपने लक्ष्य से भटक सकता है।
  • प्रभावी ऑडिट, समयबद्ध मूल्यांकन और वित्तीय अनुशासन इसकी उपयोगिता बढ़ाते हैं।
  • बजट को नियोजन के साथ-साथ नीति निर्माण, नियंत्रण और जनकल्याण का माध्यम बनाना आवश्यक है।
  • केवल नियोजन पर केंद्रित बजट “आर्थिक दृष्टि” से अधूरा और “विकास दृष्टि” से कमजोर बन जाता है।
  • इसलिए बजट को एक गतिशील उपकरण के रूप में प्रयोग करना चाहिए, जो लक्ष्य निर्धारण से लेकर परिणाम मूल्यांकन तक सक्रिय भूमिका निभाए।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः यह सत्य है कि यदि बजट को केवल नियोजन का उपकरण माना जाए, तो उसकी उपयोगिता आधी रह जाती है। वास्तविक अर्थों में बजट तभी प्रभावी है, जब वह विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण को समान रूप से सुनिश्चित करे।

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Was the ‘Bhoodan Movement’ a part of land reforms in India ? Discuss its major effects. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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‘भूदान आन्दोलन’ भारत में भूमि सुधार का एक हिस्सा था ? इसके प्रमुख प्रभावों की विवेचना कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

‘भूदान आन्दोलन’ (Bhoodan Movement) की शुरुआत 1951 में आचार्य विनोबा भावे ने की थी, जिसका उद्देश्य भूमिहीन किसानों को स्वेच्छा से दान में भूमि दिलाना था। यह आंदोलन अहिंसा और स्वैच्छिक सहयोग पर आधारित था।

मुख्य प्रभाव (Key Impacts):

  • भूमि सुधार का नैतिक पहलू – यह आंदोलन कानूनी न होकर नैतिक भूमि पुनर्वितरण का माध्यम बना।
  • भूमिहीनों को भूमि प्राप्ति – लाखों एकड़ भूमि दान में मिलने से गरीब किसानों को जमीन मिली।
  • सामाजिक समरसता – जमींदारों और किसानों के बीच संबंधों में सुधार हुआ।
  • ग्राम स्वराज की भावना – गांवों में आत्मनिर्भरता और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिला।
  • सरकारी भूमि सुधारों पर प्रभाव – इस आंदोलन ने सरकार को भूमि सुधार नीतियाँ अपनाने के लिए प्रेरित किया।
  • सीमित सफलता – कई मामलों में दान की गई भूमि कानूनी या उपयोगी नहीं थी।
  • आन्दोलन का प्रसार – बाद में ग्रामदान, संपत्तिदान जैसे आंदोलनों में भी विस्तार हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion):

भूदान आन्दोलन को भारत में भूमि सुधार का नैतिक व सामाजिक अंग कहा जा सकता है। यद्यपि इसकी सीमाएँ थीं, परंतु इसने ग्रामीण चेतना और समानता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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Critically evaluate the strategy of poverty alleviation programmes in India, in recent years. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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हाल के वर्षों में, भारत में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की रणनीति का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारत में गरीबी उन्मूलन (Poverty Alleviation) स्वतंत्रता के बाद से सरकार की प्रमुख प्राथमिकता रही है। हाल के वर्षों में गरीबी घटाने की रणनीति में केवल आय वृद्धि नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और समावेशी विकास पर भी ध्यान दिया गया है। फिर भी, चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रारंभिक कार्यक्रम जैसे – गरीबी हटाओ योजना, IRDP, NREP आदि प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने पर केंद्रित थे।
  • हाल के वर्षों में दृष्टिकोण “कल्याण आधारित” से “सशक्तिकरण आधारित” (Empowerment-based) रणनीति की ओर बदला है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना, जन-धन योजना और उज्ज्वला योजना ने जीवन स्तर सुधारने में मदद की।
  • मनरेगा (MGNREGA) ने ग्रामीण रोजगार व आय सुरक्षा को मजबूत किया।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित किया।
  • Direct Benefit Transfer (DBT) प्रणाली ने भ्रष्टाचार और रिसाव को कम किया।
  • डिजिटल इंडिया और आधार ने पारदर्शिता व वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया।
  • हालांकि, कई योजनाओं में लक्षित लाभार्थियों की पहचान, निगरानी और स्थायित्व की समस्या बनी रही।
  • असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों व शहरी गरीबों तक योजनाओं की पहुँच सीमित है।
  • बहु-आयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) — शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण— पर अभी और ध्यान की आवश्यकता है।
  • नीतियों में क्षेत्रीय असमानता व सामाजिक विषमता को कम करने के लिए स्थानीय समाधान जरूरी हैं।
  • सरकार अब “गरीबी से समृद्धि” की दिशा में टिकाऊ आजीविका और कौशल विकास पर बल दे रही है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः हाल की रणनीतियाँ गरीबी घटाने में प्रभावी रही हैं, परंतु स्थायी परिणामों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और सामाजिक सुरक्षा पर निरंतर निवेश आवश्यक है। गरीबी उन्मूलन तभी सफल होगा जब विकास वास्तव में समावेशी और न्यायसंगत बने।

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India is experiencing the phase of population-dividend’. In this context, discuss the measures adopted by the Government to tackle appropriately the problem of unemployment in the country. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत जनसंख्या-लाभांश की अवस्था से गुजर रहा है’। इस परिप्रेक्ष्य में, देश में बेरोजगारी की समस्या से समोपयुक्त तरीके से निपटने के लिये सरकार द्वारा अपनाये गये उपायों की विवेचना कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत वर्तमान में जनसंख्या-लाभांश (Demographic Dividend) की अवस्था में है, जहाँ कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या अधिक है। यदि इस विशाल मानव संसाधन का सही उपयोग न हो, तो यह लाभांश बेरोजगारी की चुनौती में बदल सकता है। इसलिए सरकार ने रोजगार सृजन हेतु अनेक नीतिगत उपाय अपनाए हैं।

मुख्य उपाय (Key Measures):

  • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) – सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा।
  • मेक इन इंडिया – विनिर्माण क्षेत्र में निवेश व रोजगार के अवसरों में वृद्धि।
  • स्किल इंडिया मिशन – युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगारयोग्य बनाना।
  • स्टार्टअप इंडिया और मुद्रा योजना – नवाचार व उद्यमिता को प्रोत्साहन।
  • मनरेगा (MGNREGA) – ग्रामीण स्तर पर रोजगार की गारंटी और आय-सुरक्षा।
  • डिजिटल इंडिया – आईटी एवं ऑनलाइन सेवाओं में नए रोजगार अवसरों का सृजन।
  • राष्ट्रीय रोजगार नीति – औपचारिक रोजगार बढ़ाने हेतु दीर्घकालिक रणनीति।

निष्कर्ष (Conclusion):

सरकारी योजनाओं ने युवाओं को कौशल, वित्त और अवसर प्रदान कर रोजगार परिदृश्य को सशक्त किया है। यदि शिक्षा, उद्योग और नीति के बीच समन्वय बना रहे, तो भारत अपने जनसंख्या-लाभांश को वास्तविक आर्थिक शक्ति में बदल सकता है।

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Describe the role of Artificial Intelligence in the safety and security during disaster management. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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आपदा प्रबन्धन के दौरान सुरक्षा एवं संरक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका का वर्णन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आज आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी उपकरण बन चुकी है। यह प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदाओं के पूर्वानुमान, राहत कार्यों और पुनर्वास में सटीक व त्वरित निर्णय लेने में मदद करती है।

मुख्य भूमिकाएँ (Key Roles):

  • पूर्वानुमान (Prediction): सैटेलाइट डेटा और मशीन लर्निंग मॉडल के माध्यम से भूकम्प, चक्रवात, बाढ़ आदि की समयपूर्व चेतावनी।
  • जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment): AI आधारित डेटा विश्लेषण से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारण।
  • आपात प्रतिक्रिया (Emergency Response): ड्रोन और रोबोट द्वारा खोज एवं राहत कार्यों में त्वरित सहायता।
  • संचार और समन्वय (Coordination): चैटबॉट्स और रीयल-टाइम ट्रैकिंग से राहत टीमों के बीच बेहतर तालमेल।
  • संसाधन प्रबंधन (Resource Allocation): AI से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं का कुशल वितरण।
  • सोशल मीडिया विश्लेषण: संकट के दौरान जनसंदेशों से वास्तविक स्थिति का त्वरित आकलन।
  • पुनर्वास योजना (Rehabilitation Planning): क्षति मूल्यांकन के आधार पर दीर्घकालिक पुनर्निर्माण रणनीति बनाना।

निष्कर्ष (Conclusion):

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आपदा प्रबंधन में मानवीय क्षमता को कई गुना बढ़ाकर सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करती है। इसका प्रभावी उपयोग न केवल जनहानि घटाता है बल्कि आपदा-उत्तर पुनर्वास को भी अधिक संगठित बनाता है।

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Mention the role of Indian Defence Research and Development Organisation in India’s security set-up. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत की सुरक्षा व्यवस्था में भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की भूमिका का उल्लेख कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation – DRDO) की स्थापना 1958 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाना और सशस्त्र सेनाओं को अत्याधुनिक उपकरण प्रदान करना है।

मुख्य भूमिकाएँ (Key Roles):

  • स्वदेशी रक्षा तकनीक का विकास – मिसाइल, रडार, टैंक, पनडुब्बी व युद्धक विमान जैसी तकनीकों का निर्माण।
  • मिसाइल कार्यक्रम की सफलता – ‘अग्नि’, ‘पृथ्वी’, ‘आकाश’, ‘नाग’ और ‘ब्रहमोस’ जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों का विकास।
  • रक्षा उपकरणों का आधुनिकीकरण – सैनिकों के लिए हल्के हथियार, बुलेटप्रूफ जैकेट व संचार प्रणाली में सुधार।
  • अंतरिक्ष व साइबर सुरक्षा में योगदान – उपग्रह-आधारित निगरानी और साइबर रक्षा प्रणालियों का विकास।
  • नवाचार व अनुसंधान प्रोत्साहन – ‘डेयर टू ड्रीम’ जैसी योजनाओं से निजी व अकादमिक क्षेत्र को जोड़ना।
  • स्वावलंबन में योगदान – ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अंतर्गत विदेशी निर्भरता में कमी।
  • सैन्य-नागरिक तकनीक का उपयोग – रक्षा तकनीकों का नागरिक क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, परिवहन व पर्यावरण में प्रयोग।

निष्कर्ष (Conclusion):

DRDO ने भारत की रक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया है। इसके नवाचारों ने न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी स्थान दिलाया है।

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Does inclusive growth ensure social justice? Discuss. What steps have been taken by the Government of India for bringing inclusive growth with social justice? Elucidate your answer. [ Marks-12 ] UPPCS Mains 2024 GS-3

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क्या समावेशी विकास, सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करता है ? विवेचना कीजिये । भारत सरकार द्वारा सामाजिक न्याय के साथ समावेशी विकास लाने हेतु क्या कदम उठाये गये हैं ? अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

समावेशी विकास (Inclusive Development) का अर्थ है ऐसा आर्थिक विकास जिसमें समाज के सभी वर्ग—गरीब, वंचित, महिलाएँ, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अल्पसंख्यक—समान रूप से सहभागी हों। इसका उद्देश्य केवल GDP वृद्धि नहीं बल्कि समान अवसरों के माध्यम से सामाजिक न्याय (Social Justice) सुनिश्चित करना है। भारत में यह नीति सामाजिक समानता, अवसर की समानता और क्षेत्रीय संतुलन पर आधारित है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • समावेशी विकास सामाजिक न्याय का व्यावहारिक रूप है, जो समाज में असमानताओं को घटाता है।
  • यह विकास के लाभों को सभी वर्गों तक पहुँचाने पर बल देता है।
  • गरीबी उन्मूलन एवं रोजगार सृजन इसकी प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवास में समान पहुँच सामाजिक न्याय की नींव बनती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यक्रमों से क्षेत्रीय असमानता कम होती है।
  • महिला सशक्तिकरण योजनाएँ (जैसे – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्ट्रीट वेंडर योजना) लैंगिक न्याय सुनिश्चित करती हैं।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण व उद्यमिता योजनाएँ अवसर समानता को बढ़ाती हैं।
  • अल्पसंख्यक मंत्रालय की योजनाएँ (जैसे – नई मंज़िल, नई रोशनी) समावेशी नीति का हिस्सा हैं।
  • मनरेगा (MGNREGA) ग्रामीण रोजगार व सामाजिक सुरक्षा का उदाहरण है।
  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना व आधार-DBT प्रणाली आर्थिक समावेशन को सुदृढ़ करती है।
  • शिक्षा का अधिकार व स्वास्थ्य बीमा योजनाएँ सामाजिक सुरक्षा को व्यापक बनाती हैं।
  • नीति आयोग द्वारा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की नीति समावेशी विकास की दिशा को पुष्ट करती है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि समावेशी विकास, सामाजिक न्याय की प्राप्ति का प्रभावी साधन है। भारत सरकार की नीतियाँ यदि प्रभावी रूप से लागू हों, तो आर्थिक विकास के साथ सामाजिक समानता भी सुनिश्चित की जा सकती है।

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Give a brief account of measures adopted by the Government to provide adequate credit to the farmers. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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किसानों को पर्याप्त ऋण प्रदान करने के लिये सरकार द्वारा अपनाये गये उपायों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

कृषि क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, परंतु किसानों के सामने वित्तीय संसाधनों की कमी एक प्रमुख चुनौती रही है। इस समस्या के समाधान हेतु सरकार ने विभिन्न योजनाओं और संस्थागत उपायों के माध्यम से सुलभ एवं सस्ते ऋण की व्यवस्था की है।

मुख्य उपाय (Key Measures):

  • कृषि ऋण पर ब्याज सब्सिडी योजना (Interest Subvention Scheme) — समय पर भुगतान करने वाले किसानों को रियायती ब्याज दर।
  • किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card – KCC) — लघु अवधि के ऋण के लिए सरल व त्वरित सुविधा।
  • नाबार्ड (NABARD) — ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त सुविधा प्रदान कर कृषि निवेश को बढ़ावा।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) — ऋण सुरक्षा हेतु फसल हानि पर बीमा कवरेज।
  • ग्रामीण बैंक एवं सहकारी समितियाँ — ऋण वितरण का विकेन्द्रित तंत्र।
  • डिजिटल ऋण प्रणाली — आधार आधारित त्वरित ऋण स्वीकृति।
  • सरकारी गारंटी योजनाएँ — कृषि निवेशकों को जोखिम संरक्षण।

निष्कर्ष (Conclusion):

इन उपायों से किसानों की ऋण पहुँच में सुधार हुआ है, जिससे उत्पादन, निवेश और ग्रामीण आय में वृद्धि संभव हुई है। सतत वित्तीय सहयोग से कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।

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