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India is experiencing the phase of population-dividend’. In this context, discuss the measures adopted by the Government to tackle appropriately the problem of unemployment in the country. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत जनसंख्या-लाभांश की अवस्था से गुजर रहा है’। इस परिप्रेक्ष्य में, देश में बेरोजगारी की समस्या से समोपयुक्त तरीके से निपटने के लिये सरकार द्वारा अपनाये गये उपायों की विवेचना कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत वर्तमान में जनसंख्या-लाभांश (Demographic Dividend) की अवस्था में है, जहाँ कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या अधिक है। यदि इस विशाल मानव संसाधन का सही उपयोग न हो, तो यह लाभांश बेरोजगारी की चुनौती में बदल सकता है। इसलिए सरकार ने रोजगार सृजन हेतु अनेक नीतिगत उपाय अपनाए हैं।

मुख्य उपाय (Key Measures):

  • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) – सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा।
  • मेक इन इंडिया – विनिर्माण क्षेत्र में निवेश व रोजगार के अवसरों में वृद्धि।
  • स्किल इंडिया मिशन – युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगारयोग्य बनाना।
  • स्टार्टअप इंडिया और मुद्रा योजना – नवाचार व उद्यमिता को प्रोत्साहन।
  • मनरेगा (MGNREGA) – ग्रामीण स्तर पर रोजगार की गारंटी और आय-सुरक्षा।
  • डिजिटल इंडिया – आईटी एवं ऑनलाइन सेवाओं में नए रोजगार अवसरों का सृजन।
  • राष्ट्रीय रोजगार नीति – औपचारिक रोजगार बढ़ाने हेतु दीर्घकालिक रणनीति।

निष्कर्ष (Conclusion):

सरकारी योजनाओं ने युवाओं को कौशल, वित्त और अवसर प्रदान कर रोजगार परिदृश्य को सशक्त किया है। यदि शिक्षा, उद्योग और नीति के बीच समन्वय बना रहे, तो भारत अपने जनसंख्या-लाभांश को वास्तविक आर्थिक शक्ति में बदल सकता है।

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How does the New Economic Policy change the structure of employment in India ? Evaluate. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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नई आर्थिक नीति ने किस प्रकार भारत में रोजगार के ढाँचे को परिवर्तित किया है ? मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

1991 में लागू की गई नई आर्थिक नीति (New Economic Policy – NEP) के तीन मुख्य घटक थे — उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization) और वैश्वीकरण (Globalization)। इस नीति ने भारत की अर्थव्यवस्था को खुले बाजार से जोड़ा और रोजगार संरचना में व्यापक परिवर्तन लाए।

मुख्य प्रभाव (Key Impacts):

  • सेवा क्षेत्र का विस्तार – आईटी, बैंकिंग, टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में रोजगार तेजी से बढ़ा।
  • असंगठित क्षेत्र में वृद्धि – लचीले श्रम बाज़ार के कारण अस्थायी व अनुबंधित नौकरियों में वृद्धि हुई।
  • औद्योगिक रोजगार में गिरावट – स्वचालन और प्रतिस्पर्धा से पारंपरिक उद्योगों में नौकरियाँ घटीं।
  • महिला रोजगार में परिवर्तन – सेवा और लघु उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी।
  • कौशल आधारित रोजगार – उच्च शिक्षा व तकनीकी दक्षता की माँग बढ़ी।
  • ग्रामीण-शहरी असमानता – ग्रामीण रोजगार अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ा।
  • स्वरोजगार व स्टार्टअप संस्कृति – उद्यमिता को प्रोत्साहन मिला।

निष्कर्ष (Conclusion): नई आर्थिक नीति ने भारत के रोजगार ढाँचे को पारंपरिक कृषि आधारित से सेवा व कौशल आधारित अर्थव्यवस्था में रूपांतरित किया। यद्यपि इससे अवसर बढ़े, परंतु असमानता और अस्थायी रोजगार जैसी चुनौतियाँ भी उभरीं।

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Was the ‘Bhoodan Movement’ a part of land reforms in India ? Discuss its major effects. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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‘भूदान आन्दोलन’ भारत में भूमि सुधार का एक हिस्सा था ? इसके प्रमुख प्रभावों की विवेचना कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

‘भूदान आन्दोलन’ (Bhoodan Movement) की शुरुआत 1951 में आचार्य विनोबा भावे ने की थी, जिसका उद्देश्य भूमिहीन किसानों को स्वेच्छा से दान में भूमि दिलाना था। यह आंदोलन अहिंसा और स्वैच्छिक सहयोग पर आधारित था।

मुख्य प्रभाव (Key Impacts):

  • भूमि सुधार का नैतिक पहलू – यह आंदोलन कानूनी न होकर नैतिक भूमि पुनर्वितरण का माध्यम बना।
  • भूमिहीनों को भूमि प्राप्ति – लाखों एकड़ भूमि दान में मिलने से गरीब किसानों को जमीन मिली।
  • सामाजिक समरसता – जमींदारों और किसानों के बीच संबंधों में सुधार हुआ।
  • ग्राम स्वराज की भावना – गांवों में आत्मनिर्भरता और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिला।
  • सरकारी भूमि सुधारों पर प्रभाव – इस आंदोलन ने सरकार को भूमि सुधार नीतियाँ अपनाने के लिए प्रेरित किया।
  • सीमित सफलता – कई मामलों में दान की गई भूमि कानूनी या उपयोगी नहीं थी।
  • आन्दोलन का प्रसार – बाद में ग्रामदान, संपत्तिदान जैसे आंदोलनों में भी विस्तार हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion):

भूदान आन्दोलन को भारत में भूमि सुधार का नैतिक व सामाजिक अंग कहा जा सकता है। यद्यपि इसकी सीमाएँ थीं, परंतु इसने ग्रामीण चेतना और समानता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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Give a brief account of measures adopted by the Government to provide adequate credit to the farmers. [Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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किसानों को पर्याप्त ऋण प्रदान करने के लिये सरकार द्वारा अपनाये गये उपायों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

कृषि क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, परंतु किसानों के सामने वित्तीय संसाधनों की कमी एक प्रमुख चुनौती रही है। इस समस्या के समाधान हेतु सरकार ने विभिन्न योजनाओं और संस्थागत उपायों के माध्यम से सुलभ एवं सस्ते ऋण की व्यवस्था की है।

मुख्य उपाय (Key Measures):

  • कृषि ऋण पर ब्याज सब्सिडी योजना (Interest Subvention Scheme) — समय पर भुगतान करने वाले किसानों को रियायती ब्याज दर।
  • किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card – KCC) — लघु अवधि के ऋण के लिए सरल व त्वरित सुविधा।
  • नाबार्ड (NABARD) — ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त सुविधा प्रदान कर कृषि निवेश को बढ़ावा।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) — ऋण सुरक्षा हेतु फसल हानि पर बीमा कवरेज।
  • ग्रामीण बैंक एवं सहकारी समितियाँ — ऋण वितरण का विकेन्द्रित तंत्र।
  • डिजिटल ऋण प्रणाली — आधार आधारित त्वरित ऋण स्वीकृति।
  • सरकारी गारंटी योजनाएँ — कृषि निवेशकों को जोखिम संरक्षण।

निष्कर्ष (Conclusion):

इन उपायों से किसानों की ऋण पहुँच में सुधार हुआ है, जिससे उत्पादन, निवेश और ग्रामीण आय में वृद्धि संभव हुई है। सतत वित्तीय सहयोग से कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।

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Highlight the key components of upstream and downstream activities in food processing supply chain management with suitable examples.[Marks-8] UPPCS Mains 2024 GS-3

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खाद्य प्रसंस्करण की आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्धन में ऊर्ध्व प्रवाह तथा अधो प्रवाह क्रियाओं के प्रमुख अवयवों को सोदाहरण चिन्हांकित कीजिये ।

Ans: परिचय (Introduction):

खाद्य प्रसंस्करण की आपूर्ति श्रृंखला (Food Processing Supply Chain) एक ऐसी प्रणाली है जो कच्चे कृषि उत्पादों को उपभोक्ता तक पहुँचने योग्य तैयार खाद्य में बदलती है। इसमें ऊर्ध्व प्रवाह (Upstream) और अधो प्रवाह (Downstream) दोनों चरण शामिल होते हैं। इन दोनों का कुशल प्रबंधन खाद्य गुणवत्ता, लागत और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करता है।

मुख्य अवयव (Key Components):

  • ऊर्ध्व प्रवाह क्रियाएँ (Upstream Activities):
  • कृषि उत्पादन एवं कच्चे माल की आपूर्ति
  • संग्रहण, ग्रेडिंग और प्राथमिक प्रसंस्करण
  • किसानों, आपूर्तिकर्ताओं और प्रसंस्करण इकाइयों के बीच समन्वय
  • अधो प्रवाह क्रियाएँ (Downstream Activities):
  • प्रसंस्कृत उत्पादों का पैकेजिंग और भंडारण
  • वितरण नेटवर्क एवं लॉजिस्टिक्स
  • थोक, खुदरा और ई-कॉमर्स विपणन
  • उपभोक्ता प्रतिक्रिया और गुणवत्ता प्रबंधन

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार, ऊर्ध्व एवं अधो प्रवाह दोनों की दक्षता से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में मूल्यवर्धन होता है। इनका समुचित समन्वय खाद्य सुरक्षा, निर्यात वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करता है।

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