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Infrastructure plays an important role in the economic development of a country.” Discuss. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-3

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“एक देश के आर्थिक विकास में आधारभूत संरचना महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” विवेचना कीजिये। “

Ans: परिचय (Introduction):

आधारभूत संरचना (Infrastructure) किसी भी देश की आर्थिक वृद्धि का मूल स्तंभ होती है। यह उद्योग, कृषि, व्यापार और सेवाओं के विकास के लिए आवश्यक भौतिक एवं संगठनात्मक ढांचा प्रदान करती है।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • परिवहन नेटवर्क: सड़क, रेल और बंदरगाह उद्योगों को कच्चा माल और बाजार से जोड़ते हैं।
  • ऊर्जा आपूर्ति: बिजली उत्पादन और वितरण से औद्योगिक गतिविधियाँ संचालित होती हैं।
  • संचार व्यवस्था: डिजिटल नेटवर्क से सूचना प्रवाह और सेवाओं की दक्षता बढ़ती है।
  • सिंचाई और जल प्रबंधन: कृषि उत्पादन में स्थिरता और उत्पादकता लाता है।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचा: मानव पूंजी (Human Capital) को सशक्त बनाता है।
  • शहरी बुनियादी सेवाएँ: आवास, स्वच्छता और परिवहन से जीवनस्तर में सुधार।
  • निवेश आकर्षण: विकसित संरचना विदेशी निवेश (FDI) को प्रोत्साहित करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

स्पष्ट है कि सुदृढ़ आधारभूत संरचना आर्थिक विकास की रीढ़ है। यदि भारत इस क्षेत्र में निरंतर निवेश बढ़ाए, तो वह सतत और समावेशी विकास की दिशा में तेजी से अग्रसर हो सकता है।

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Explain the budget making process of the Government of India. Also explain the difference between plan expenditure and non-plan expenditure. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-3

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भारत सरकार के बजट बनाने की प्रक्रिया समझाइये। योजना व्यय एवं गैर योजना व्यय में अन्तर स्पष्ट कीजिये।

Ans: परिचय (Introduction):

भारत सरकार का बजट एक वार्षिक वित्तीय विवरण है जिसमें आगामी वर्ष के लिए आय और व्यय का अनुमान प्रस्तुत किया जाता है। यह संसद द्वारा स्वीकृत होने वाली एक विधिक और नीतिगत प्रक्रिया है।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • बजट की तैयारी वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग द्वारा की जाती है।
  • सभी मंत्रालय अपने-अपने व्यय प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजते हैं।
  • मंत्रालयों के प्रस्तावों की समीक्षा कर बजट अनुमानों (Budget Estimates) को अंतिम रूप दिया जाता है।
  • मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) आर्थिक सर्वेक्षण तैयार करते हैं।
  • बजट को लोकसभा में वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।
  • संसद द्वारा पारित होने पर राष्ट्रपति की स्वीकृति से यह लागू होता है।
  • वित्त विधेयक (Finance Bill) कर और नीतिगत प्रावधानों को लागू करता है।
  • योजना व्यय बनाम गैर-योजना व्यय (Difference):
  • योजना व्यय (Plan Expenditure): विकास योजनाओं, परियोजनाओं और पंचवर्षीय योजनाओं पर व्यय।
  • गैर-योजना व्यय (Non-Plan Expenditure): प्रशासन, रक्षा, ब्याज भुगतान व सब्सिडी जैसे नियमित खर्चे।

निष्कर्ष (Conclusion):

बजट निर्माण एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया है जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और आर्थिक संतुलन दोनों को सुनिश्चित करती है।

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What are the important challenges faced in the implementation of land reforms in India? Give your suggestions to remove these challenges. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-3

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भारत में भूमि सुधारों के क्रियान्वयन में प्रमुख चुनौतियाँ कौन-सी हैं? इन चुनौतियों के निस्तारण हेतु सुझाव दीजिये।

भारत में भूमि सुधारों का उद्देश्य भूमिहीनों को भूमि उपलब्ध कराना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना और ग्रामीण असमानता घटाना रहा है। किंतु इन सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन में अनेक बाधाएँ सामने आई हैं।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • अस्पष्ट एवं अपूर्ण भूमि अभिलेख, जिससे स्वामित्व विवाद उत्पन्न होते हैं।
  • राजनीतिक हस्तक्षेप और स्थानीय जमींदारों का विरोध।
  • राज्यों में भूमि कानूनों की विविधता और कमजोर प्रवर्तन तंत्र।
  • बंटाईदारों की सही पहचान और अधिकार सुनिश्चित करने में कठिनाई।
  • भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक उदासीनता से सुधारों की धीमी प्रगति।
  • भूमि के अत्यधिक विखंडन से उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव।
  • शहरीकरण और औद्योगीकरण से कृषि भूमि में लगातार कमी।

निष्कर्ष (Conclusion):

भूमि सुधारों के सफल क्रियान्वयन हेतु भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण, पारदर्शी कानून, सहकारी खेती और राजनीतिक इच्छाशक्ति आवश्यक हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में न्यायपूर्ण विकास संभव होगा।

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Explain the implications of using E-technology to help the farmers. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-3

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किसानों की सहायता के लिए ई-तकनीक के प्रयोग के निहितार्थों को समझाइये।

Ans: परिचय (Introduction):

ई-तकनीक (E-Technology) आधुनिक कृषि के लिए एक क्रांतिकारी साधन बनकर उभरी है। यह किसानों को जानकारी, बाजार, और सेवाओं तक डिजिटल पहुंच प्रदान करती है। इससे कृषि उत्पादन, दक्षता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हुई है।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • ई-नाम (e-NAM): राष्ट्रीय कृषि बाजार प्लेटफॉर्म से किसानों को उचित मूल्य और व्यापक बाजार तक पहुंच।
  • किसान कॉल सेंटर और मोबाइल ऐप्स: फसल सलाह, मौसम पूर्वानुमान और रोग नियंत्रण की जानकारी।
  • डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission): ड्रोन, IoT और AI आधारित डेटा संग्रह।
  • डिजिटल भुगतान: DBT (Direct Benefit Transfer) से पारदर्शिता और समय पर सहायता।
  • ई-चौपाल: ग्रामीण क्षेत्रों में आईटी के माध्यम से ज्ञान और विपणन सुविधा।
  • कृषि पोर्टल्स और वेबसाइट्स: नीतियों, बीमा और ऋण जानकारी तक पहुंच।
  • सैटेलाइट इमेजिंग: भूमि उपयोग और फसल स्वास्थ्य की निगरानी।

निष्कर्ष (Conclusion):

ई-तकनीक ने कृषि को ज्ञान आधारित और पारदर्शी बनाया है। यदि डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट पहुंच बढ़ाई जाए, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थायी परिवर्तन ला सकती है।

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Evaluate the policies of the Government of India regarding the promotion of food processing and related industries. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-3

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खाद्य प्रसंस्करण और संबंधित उद्योगों को प्रोत्साहन देने के सम्बन्ध में भारत सरकार की नीतियों का मूल्यांकन कीजिये।

Ans: परिचय (Introduction):

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग (Food Processing Industry) भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मूल्य संवर्धन, रोजगार और निर्यात अवसर प्रदान करता है। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अनेक नीतिगत कदम उठाए हैं। इन नीतियों का उद्देश्य किसान से लेकर उपभोक्ता तक एक सशक्त आपूर्ति श्रृंखला बनाना है।

मुख्य बिंदु (Key Points):

  • प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) के तहत मेगा फूड पार्क, कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा।
  • “प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)” योजना से निवेश और प्रतिस्पर्धा में वृद्धि।
  • 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति, विशेषकर खुदरा व्यापार में।
  • कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर और खाद्य पार्कों का विकास।
  • “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” के माध्यम से क्षेत्रीय उत्पादों का प्रोत्साहन।
  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों से लाइसेंसिंग और नियामकीय प्रक्रियाओं में सरलता
  • ‘PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises (PMFME)’ योजना से सूक्ष्म उद्यमों को सहायता।

निष्कर्ष (Conclusion):

इन नीतियों से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को संरचनात्मक बल मिला है, परंतु आधारभूत ढांचे, आपूर्ति श्रृंखला और निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार की आवश्यकता बनी हुई है। सरकार की निरंतर पहलें इस क्षेत्र को कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना सकती हैं।

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Discuss the functions of National Security Council of India. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के क्रिया कलापों की व्याख्या कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (National Security Council – NSC) की स्थापना वर्ष 1998 में देश की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के समन्वित निर्धारण और रणनीतिक मार्गदर्शन के लिए की गई थी। यह भारत की सर्वोच्च सलाहकारी संस्था है, जो आंतरिक, बाह्य, आर्थिक और सामरिक खतरों से निपटने हेतु समग्र सुरक्षा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का गठन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में किया गया है।
  • इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित नीतिगत सलाह देना और विभिन्न मंत्रालयों, एजेंसियों एवं सशस्त्र बलों के बीच समन्वय स्थापित करना है।
  • परिषद की संरचना तीन स्तरों पर आधारित है:
  • राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) – नीति निर्धारण निकाय।
  • स्ट्रैटेजिक पॉलिसी ग्रुप (SPG) – रणनीतिक नीतियों पर विचार-विमर्श।
  • नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर बोर्ड (NSAB) – विशेषज्ञ सलाह व अनुसंधान।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) परिषद के कार्यों का समन्वयन करता है और प्रधानमंत्री को प्रत्यक्ष सलाह देता है।
  • परिषद आतंकवाद, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, रक्षा नीति, आंतरिक विद्रोह और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषयों पर विचार करती है।
  • यह खुफिया एजेंसियों, विदेश नीति और रक्षा तंत्र के बीच सूचना-साझाकरण को सुदृढ़ करती है।
  • NSC संकट प्रबंधन तंत्र (Crisis Management Group) के माध्यम से आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के निर्माण में दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करना इसका मुख्य कार्य है।
  • परिषद भारत की “एकीकृत सुरक्षा संरचना” (Integrated Security Framework) का केंद्रीय स्तंभ मानी जाती है।
  • NSAB द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टें और नीति सुझाव सरकार की रक्षा एवं विदेश नीतियों को दिशा प्रदान करते हैं।
  • यह वैश्विक सुरक्षा परिवर्तनों के अनुरूप भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को अद्यतन रखती है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

इस प्रकार, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद भारत की समग्र सुरक्षा व्यवस्था का बौद्धिक और नीतिगत केंद्र है। यह संस्था राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए आंतरिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित करती है।

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Narco-terrorism has emerged as a serious threat across the country. Suggest suitable measures to counter it. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

पूरे देश में नार्को-आतंकवाद एक गंभीर खतरे के रूप में उभरा है । इससे निपटने के लिये उपयुक्त उपाय सुझाइये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

नार्को-आतंकवाद (Narco-Terrorism) का आशय है मादक पदार्थों (Drugs) की तस्करी से प्राप्त धन का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण में करना। हाल के वर्षों में यह भारत की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और युवा पीढ़ी के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में उभरा है, विशेषकर सीमावर्ती राज्यों जैसे पंजाब, जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • आतंकवादी संगठन ड्रग व्यापार से अर्जित धन का प्रयोग हथियार खरीद, प्रशिक्षण और नेटवर्क विस्तार में करते हैं।
  • भारत की भौगोलिक स्थिति—“Golden Crescent” (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान) और “Golden Triangle” (म्यांमार-लाओस-थाईलैंड)—के बीच होने से इसे दोहरे खतरे का सामना है।
  • युवाओं में नशे की लत सामाजिक अस्थिरता और अपराध दर को बढ़ा रही है।
  • NDPS Act, 1985 (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) के तहत मादक पदार्थों की तस्करी पर कड़ा नियंत्रण है।
  • Narcotics Control Bureau (NCB), BSF और Indian Coast Guard ड्रग तस्करी पर निगरानी रखते हैं।
  • सीमा पार निगरानी को मज़बूत करने हेतु “स्मार्ट फेंसिंग”, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
  • Enforcement Directorate (ED) और Financial Intelligence Unit (FIU) मनी लॉन्ड्रिंग पर निगरानी रखती हैं।
  • UNODC व SAARC Drug Control Programme के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सशक्त किया गया है।
  • स्कूल-कॉलेज स्तर पर Drug-Free India जैसे अभियानों से जन-जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
  • नशा पीड़ितों के पुनर्वास केंद्रों के विस्तार पर भी बल दिया जा रहा है।
  • सीमा क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ाना प्रभावी रणनीति सिद्ध हो सकती है।
  • आधुनिक साइबर निगरानी से ऑनलाइन ड्रग नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

स्पष्ट है कि नार्को-आतंकवाद केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता का भी प्रश्न है। सख्त कानून, उन्नत तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जन-जागरूकता के समन्वय से ही भारत इस जटिल खतरे का स्थायी समाधान पा सकता है।

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What are ‘Social Networking Sites’ and how does their uncontrolled use increase the possibilities of cyber attacks? [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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‘सामाजिक संजाल स्थल’ क्या होते हैं ? और इनका अनियंत्रित उपयोग साइबर हमलों की संभावनाओं में किस प्रकार वृद्धि करता है ?

Ans: भूमिका (Introduction) –

‘सामाजिक संजाल स्थल’ (Social Networking Sites) वे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म हैं जहाँ उपयोगकर्ता आपसी संवाद, विचार, सूचना और सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं। जैसे – फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (X), यूट्यूब, लिंक्डइन आदि। ये आज सामाजिक सहभागिता और सूचना प्रसार का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सामाजिक संजाल स्थल लोगों को जोड़ने, अभिव्यक्ति और सूचना साझा करने का अवसर देते हैं।
  • ये व्यवसाय, शिक्षा, राजनीति और जन-जागरूकता के प्रभावी साधन बन चुके हैं।
  • परंतु इनका अनियंत्रित और असावधान उपयोग साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
  • उपयोगकर्ता अपनी व्यक्तिगत जानकारी, फोटो, लोकेशन और बैंक विवरण साझा करते हैं, जिन्हें साइबर अपराधी दुरुपयोग कर सकते हैं।
  • फिशिंग (Phishing) और मैलवेयर (Malware) जैसे हमले अक्सर सोशल मीडिया लिंक के माध्यम से फैलते हैं।
  • नकली प्रोफाइल और फेक न्यूज़ से न केवल भ्रम फैलता है, बल्कि डेटा चोरी और पहचान की जालसाजी भी बढ़ती है।
  • सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) तकनीक द्वारा हैकर्स लोगों को भावनात्मक रूप से भ्रमित कर पासवर्ड या निजी जानकारी प्राप्त करते हैं।
  • अनियंत्रित उपयोग से डेटा लीकेज, गोपनीयता भंग और राष्ट्रीय सुरक्षा तक को खतरा हो सकता है।
  • साइबर हमले अक्सर सोशल मीडिया पर साझा लापरवाह जानकारी के कारण संभव होते हैं।
  • भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट, 2000 तथा CERT-In जैसी संस्थाएँ साइबर सुरक्षा की निगरानी करती हैं।
  • सरकार “डिजिटल साक्षरता अभियान” के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है।
  • उपयोगकर्ताओं को मजबूत पासवर्ड, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण और सावधानीपूर्ण साझा करने की आदत अपनानी चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion) –

इस प्रकार, सामाजिक संजाल स्थल जहाँ संवाद का सशक्त माध्यम हैं, वहीं अनियंत्रित उपयोग साइबर हमलों की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देता है। इनका सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक उपयोग ही डिजिटल युग में सुरक्षा और विश्वास का आधार बन सकता है।

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What are the ecologically sensitive areas in India? Mention the policies of the Government of India for their protection. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारत में पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र कौन-कौन से हैं ? इनके संरक्षण के लिये भारत सरकार की नीतियों का उल्लेख कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारत अपनी भौगोलिक विविधता और जैविक समृद्धि के कारण कई पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (Ecologically Sensitive Areas – ESAs) का घर है। ये क्षेत्र पारिस्थितिक संतुलन, जलवायु स्थिरता और जैव विविधता संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनके संरक्षण हेतु भारत सरकार ने अनेक नीतियाँ व कानूनी उपाय अपनाए हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र वे होते हैं जहाँ मानव हस्तक्षेप से पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित हो सकता है।
  • भारत में प्रमुख संवेदनशील क्षेत्र हैं –
  • पश्चिमी घाट (Western Ghats) – यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, जैव विविधता से समृद्ध।
  • हिमालयी क्षेत्र – हिमनद, नदियों के स्रोत और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र।
  • सुंदरबन डेल्टा – विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव क्षेत्र।
  • अंडमान-निकोबार द्वीप समूह – समुद्री जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध
  • मरुस्थलीय क्षेत्र (थार रेगिस्तान) – शुष्क पारिस्थितिक संतुलन वाला क्षेत्र।
  • पूर्वोत्तर भारत – उच्च वर्षा और घनी वनस्पति वाला पारिस्थितिक क्षेत्र।
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत इन क्षेत्रों को विशेष संरक्षण प्रदान किया गया है।
  • ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) नीति के अनुसार संरक्षित क्षेत्रों के आसपास सीमित मानवीय गतिविधियाँ अनुमति-प्राप्त होती हैं।
  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र की निगरानी करता है।
  • CAMPA (Compensatory Afforestation Fund Management Act, 2016) वनों के क्षरण की भरपाई हेतु लागू है।
  • नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज़ हिमालय क्षेत्र के संरक्षण पर केंद्रित है।
  • ग्रीन इंडिया मिशन और राष्ट्रीय कार्य योजना जलवायु परिवर्तन पर (NAPCC) पारिस्थितिक पुनर्स्थापन को प्रोत्साहित करते हैं।
  • ई-कोरिडोर परियोजनाएँ वन्यजीवों की आवाजाही और आवास संरक्षण के लिए लागू हैं।
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण कार्यों में शामिल करने की नीति ने स्थायी परिणाम दिए हैं।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः भारत के पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र न केवल पर्यावरणीय संतुलन के प्रतीक हैं, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए भी आवश्यक हैं। सरकार की नीतियाँ यदि वैज्ञानिक दृष्टि और स्थानीय सहभागिता के साथ लागू हों, तो इनका संरक्षण स्थायी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

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Compare Indian Knowledge Tradition based aeronautics with modern aeronautics. Mention the policies of the Department of Science and Technology for the research in this field. [Marks-12] UPPCS Mains 2024 GS-3

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भारतीय ज्ञान परम्परा आधारित वैमानिकी शास्त्र की तुलना आधुनिक वैमानिकी शास्त्र से कीजिये । इस क्षेत्र में अनुसंधान हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की नीतियों का उल्लेख कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारतीय ज्ञान परम्परा में वैमानिकी शास्त्र (Aeronautics) का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों जैसे विमानिका शास्त्र और संहिताओं में मिलता है, जिनमें उड़ने वाले यंत्रों, उनकी संरचना और संचालन सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। आधुनिक वैमानिकी शास्त्र (Modern Aeronautics) वैज्ञानिक परीक्षणों, भौतिकी के सिद्धांतों और प्रौद्योगिकी के प्रयोग पर आधारित है। दोनों की तुलना परंपरा और विज्ञान के विकासक्रम को दर्शाती है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्राचीन वैमानिकी शास्त्र में वायुयान के प्रकार, ईंधन, दिशा नियंत्रण एवं गति का वर्णन मिलता है।
  • यह ज्यामिति, यांत्रिकी और धातु विज्ञान के प्रारंभिक स्वरूपों से जुड़ा था।
  • आधुनिक वैमानिकी वायुगतिकी (Aerodynamics), प्रणोदन (Propulsion), सामग्री विज्ञान (Material Science) और इलेक्ट्रॉनिक्स पर आधारित है।
  • भारतीय परम्परा में यह अवधारणा वैचारिक और सैद्धांतिक थी; आधुनिक विज्ञान ने इसे प्रयोगात्मक रूप दिया।
  • आज वैमानिकी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और नैनो प्रौद्योगकी का प्रयोग बढ़ रहा है।
  • प्राचीन ग्रंथों का पुनःअध्ययन भारतीय वैज्ञानिक सोच की ऐतिहासिक गहराई को उजागर करता है।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) इस क्षेत्र में Indigenous Knowledge Systems (IKS) पर अनुसंधान को प्रोत्साहित कर रहा है।
  • DST ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र” (IKS Division) की स्थापना कर पारंपरिक विज्ञान के वैज्ञानिक विश्लेषण को बढ़ावा दिया है।
  • एयरोस्पेस अनुसंधान हेतु DST-AR&DB (Aeronautics Research and Development Board) विभिन्न संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • यह नीतियाँ प्राचीन सिद्धांतों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
  • ISRO और DRDO भी वैमानिकी के क्षेत्र में स्वदेशी नवाचारों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
  • नीति का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर वैमानिकी प्रौद्योगिकी (Aatmanirbhar Aeronautics) के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः कहा जा सकता है कि भारतीय वैमानिकी परम्परा ने वैचारिक आधार प्रदान किया, जबकि आधुनिक वैमानिकी ने उसे वैज्ञानिक रूप दिया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की नीतियाँ इन दोनों के समन्वय से भारत को प्राचीन ज्ञान और आधुनिक अनुसंधान के संगम पर अग्रसर कर रही हैं।

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