Rajeev is an idealist. He believes that, “Service to humanity is service to God”. One day he was going for an interview for government Job. He saw a severely injured person lying on the road who was asking for help. No one came forward to help. Rajeev took the injured person to the hospital and saved his life. But due to this reason, he lost the opportunity to get a government Job. Comment on Rajeev’s decision in the light of above circumstance. [Marks-12] UPPCS Mains 2023 GS-4
राजीव एक आदर्शवादी है। उसका विश्वास है कि “मानवता की सेवा ईश्वर की सेवा है।” एक दिन वह सरकारी नौकरी के लिए साक्षात्कार देने जा रहा था। उसने सड़क पर एक व्यक्ति को गम्भीर रूप से घायल अवस्था में पड़े देखा जो सहायता मांग रहा था। कोई सहायता के लिए सामने नहीं आया। राजीव घायल व्यक्ति को अस्पताल ले गया और उसके जीवन की रक्षा की। लेकिन इस कारण उसने सरकारी नौकरी प्राप्त करने के अवसर को खो दिया। उपर्युक्त परिस्थिति के प्रकाश में राजीव के निर्णय पर टिप्पणी कीजिए।
Ans: परिचय:
राजीव की स्थिति नैतिकता और स्वार्थ के बीच के द्वंद्व को दर्शाती है। उसका निर्णय इस विचार पर आधारित था कि “मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा है।” उसने व्यक्तिगत लाभ की बजाय मानवीय कर्तव्य को प्राथमिकता दी, जो एक सच्चे नैतिक व्यक्ति का लक्षण है।
मुख्य बिंदु:
- नैतिक दृष्टि से, राजीव का निर्णय पूर्णतः सही है क्योंकि उसने मानवीय करुणा को प्राथमिकता दी।
- उसने कर्तव्यनिष्ठा (Duty-based Ethics) का पालन किया — जहाँ परिणाम नहीं बल्कि कर्तव्य महत्वपूर्ण होता है।
- इमानुएल कांट (Immanuel Kant) के नैतिक सिद्धांत के अनुसार, नैतिक कर्म वही है जो कर्तव्य के भाव से किया जाए, न कि स्वार्थवश।
- राजीव ने मानवता के सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत — “दूसरे की पीड़ा में सहायता करना” — का पालन किया।
- उसका निर्णय उपकार, सहानुभूति और निःस्वार्थता पर आधारित था।
- भले ही उसने नौकरी का अवसर खो दिया, लेकिन उसने नैतिक सफलता प्राप्त की।
- समाज के लिए ऐसे उदाहरण प्रेरणादायी होते हैं और नैतिक चेतना को प्रोत्साहित करते हैं।
- प्रशासनिक दृष्टि से भी ऐसे व्यक्तियों की आवश्यकता होती है जिनमें करुणा और मानवीय संवेदना हो।
- उसका कार्य “सामाजिक उत्तरदायित्व” और “नैतिक साहस” का परिचायक है।
- यह उदाहरण बताता है कि सच्चे मूल्य भौतिक सफलता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष:
राजीव ने कठिन परिस्थिति में भी नैतिकता को सर्वोच्च रखा, जो उसके चरित्र की महानता दर्शाता है। उसका निर्णय भले ही उसे नौकरी से वंचित कर गया, पर उसने मानवता की रक्षा कर एक सच्चे आदर्शवादी की पहचान बनाई।
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