GS-4

Home UPPCS Mains GS-4 Page 2

“Concealment of Information impedes public access and involvement”. In the light of this statement discuss the importance of information sharing and transparency in Government. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

“सूचना का छिपाव सार्वजनिक पहुंच और भागीदारी को बाधित करता है।”, – इस कथन के आलोक में सरकार में सूचना साझा करने और पारदर्शिता के महत्व पर चर्चा करें।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

लोकतांत्रिक शासन में नागरिकों का शासन प्रक्रियाओं में सहभागिता अधिकार है। सूचना का छिपाव इस सहभागिता को सीमित कर देता है और शासन में अविश्वास पैदा करता है। इसलिए सरकार में सूचना साझा करना और पारदर्शिता लोकतंत्र की आत्मा मानी जाती है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • सूचना का अधिकार (RTI) नागरिकों को सरकारी कार्यप्रणाली पर निगरानी का अवसर देता है।
  • पारदर्शिता जवाबदेही और जिम्मेदारी की भावना को सशक्त बनाती है।
  • सूचना साझा करने से भ्रष्टाचार, पक्षपात और कुप्रशासन में कमी आती है।
  • यह जनता को नीति निर्माण और क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।
  • खुली सूचना व्यवस्था जनविश्वास और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाती है।
  • मीडिया और सिविल सोसाइटी को शासन की समीक्षा और सुधार में सहायक बनाती है।
  • पारदर्शी शासन से सरकार की वैधता और नैतिक आधार मजबूत होता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः सूचना साझा करना और पारदर्शिता सुशासन (Good Governance) के मूल तत्व हैं। इनसे ही नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास, सहयोग और सहभागिता का वातावरण बनता है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

In the era of Globalization International ethics is the need of hour for ensuring peace and stability among the nations”. Explain critically. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

0

“वैश्वीकरण के युग में राष्ट्रों के मध्य शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र समय की मांग है।”, आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए। “

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

वैश्वीकरण (Globalization) ने विश्व के राष्ट्रों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से परस्पर जुड़ दिया है। इस युग में किसी एक देश की नीतियाँ अन्य देशों को सीधे प्रभावित करती हैं। अतः अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र (International Ethics) वैश्विक शांति और स्थिरता का अनिवार्य आधार बन गया है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र राष्ट्रों के बीच न्याय, समानता और सहयोग के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करता है।
  • यह मानवता के हित को राष्ट्रीय स्वार्थों से ऊपर रखने की प्रेरणा देता है।
  • युद्ध, शोषण और पर्यावरणीय दोहन जैसी समस्याओं के समाधान हेतु नैतिक दृष्टिकोण आवश्यक है।
  • विकसित देशों का दायित्व है कि वे विकासशील देशों के प्रति सहयोग और निष्पक्षता दिखाएँ।
  • वैश्विक संस्थाएँ (जैसे—UN, WHO, WTO) तभी प्रभावी बन सकती हैं जब उनके निर्णय नैतिक सिद्धांतों पर आधारित हों।
  • परंतु व्यवहार में कई बार राष्ट्र अपने राजनीतिक और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हैं।
  • इसलिए अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र की सफलता नैतिक प्रतिबद्धता और पारदर्शिता पर निर्भर करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

निष्कर्षतः, अंतर्राष्ट्रीय नीतिशास्त्र आज की वैश्विक व्यवस्था में शांति और संतुलन का मार्गदर्शक है। जब राष्ट्र नैतिक आचरण अपनाएँगे तभी वास्तविक वैश्विक सौहार्द और स्थिरता संभव होगी।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

A child learns values by what he observes around him”. Discuss the role of family and society in the formation of values in the light of this statement. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

0

“बालक अपने चतुर्दिक जो देखता है, उससे मूल्यों को सीखता है” – इस कथन के आलोक में मूल्यों के निर्माण में परिवार और समाज की भूमिका की विवेचना कीजिए। “

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

मूल्य (Values) किसी व्यक्ति के जीवन की नैतिक दिशा निर्धारित करते हैं। बालक का व्यक्तित्व जन्मजात नहीं होता, बल्कि उसके परिवेश से विकसित होता है। वह अपने परिवार और समाज से देखकर, सुनकर और अनुभव करके मूल्य सीखता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • परिवार बालक का प्रथम विद्यालय होता है, जहाँ वह सत्य, ईमानदारी, और अनुशासन जैसे मूल्य सीखता है।
  • माता-पिता के आचरण से बालक आदर्श व्यवहार का अनुकरण करता है।
  • घर का वातावरण – प्रेम, सहयोग और सहिष्णुता – बालक की भावनात्मक स्थिरता बनाता है।
  • समाज बालक को सामाजिक मूल्य जैसे समानता, न्याय, और सहअस्तित्व सिखाता है।
  • विद्यालय, मित्र समूह और मीडिया भी मूल्य निर्माण में सहायक माध्यम बनते हैं।
  • समाज की सांस्कृतिक परंपराएँ और रीति-रिवाज नैतिकता की जड़ों को मजबूत करते हैं।
  • परिवार और समाज के समन्वित प्रयास से बालक में जिम्मेदारी और नैतिक चेतना विकसित होती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः परिवार और समाज बालक के मूल्य-निर्माण के दो प्रमुख स्तंभ हैं। इनके आदर्श व्यवहार से ही एक नैतिक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण होता है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Examine the relevance of the following in the context of civil service. a) Spirit of service b) Courage of firm conviction. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

0

सिविल सेवा के सन्दर्भ में निम्नलिखित की प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिए। अ) सेवा भाव ब) दृढ़ विश्वास का साहस।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

सिविल सेवा केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि जनता की सेवा का माध्यम है। इसमें लोकहित, निष्पक्षता और उत्तरदायित्व सर्वोपरि होते हैं। सेवा भाव और दृढ़ विश्वास का साहस, दोनों ही गुण एक आदर्श लोकसेवक की पहचान हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • सेवा भाव लोकसेवक को जनता की आवश्यकताओं और समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाता है।
  • यह करुणा, सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
  • लोकसेवक को आत्मकेंद्रित न होकर सार्वजनिक कल्याण के प्रति समर्पित रखता है।
  • दृढ़ विश्वास का साहस नैतिकता और सत्य के मार्ग पर टिके रहने की शक्ति देता है।
  • यह लोकसेवक को राजनीतिक या व्यक्तिगत दबावों से स्वतंत्र होकर निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
  • नैतिक दुविधाओं की स्थिति में यह गुण सही के पक्ष में खड़े रहने का साहस प्रदान करता है।
  • दोनों गुण मिलकर प्रशासन में नैतिक नेतृत्व और जनविश्वास को सशक्त करते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः सेवा भाव और दृढ़ विश्वास का साहस सिविल सेवक के चरित्र की दो आधारशिलाएँ हैं।

इनके समन्वय से प्रशासन जनहितकारी, नैतिक और उत्तरदायी बनता है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

What do you understand by Moral insight? How does it help in Moral situation of civil servants? [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-4

0

नैतिक अन्तर्दृष्टि से आप क्या समझते हैं? लोकसेवकों की नैतिक परिस्थिति में यह किस प्रकार सहायक है?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

नैतिक अन्तर्दृष्टि (Moral Insight) का अर्थ है—सही और गलत के बीच भेद करने की गहरी समझ। यह व्यक्ति को अपने आचरण और निर्णयों में नैतिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करने की दिशा देती है। लोकसेवकों के लिए यह अंतर्दृष्टि ईमानदारी, निष्पक्षता और सार्वजनिक हित बनाए रखने की नींव है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • यह लोकसेवक को जटिल परिस्थितियों में नैतिक निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।
  • व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर सार्वजनिक कल्याण को प्राथमिकता देने में सहायता करती है।
  • भ्रष्टाचार, पक्षपात और शक्ति दुरुपयोग से बचाव का आधार बनती है।
  • पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को सुदृढ़ करती है।
  • नैतिक दुविधाओं में विवेकपूर्ण संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
  • सेवा के आदर्शों जैसे सत्यनिष्ठा, करुणा और सहिष्णुता को प्रोत्साहित करती है।
  • प्रशासनिक निर्णयों में मानवता और न्याय के मूल्यों का समावेश सुनिश्चित करती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इस प्रकार नैतिक अन्तर्दृष्टि लोकसेवकों के लिए एक नैतिक दिशा-सूचक का कार्य करती है। यह उनके कार्य को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और जनोन्मुख बनाती है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

“An environmental movement led by youth’s gain popularity through social media, rallies and collaboration with influences and scientists with time the movement gained public support and let the government to propose changes in the policy.” What will be your stand to cope with the situation as a civil servant? (Marks-12) UPPCS Mains 2024 GS-4

0

“युवाओं द्वारा संचालित एक पर्यावरणीय आंदोलन सोशल मीडिया, रैलियों और प्रभावकारी व्यक्तियों और वैज्ञानिकों के साथ सहयोग के माध्यम से लोकप्रियता प्राप्त करता है। समय के साथ इस आंदोलन ने सार्वजनिक समर्थन प्राप्त किया और सरकार को नीति में बदलाव का प्रस्ताव देने के लिए प्रेरित किया।” एक सिविल सेवक के रूप में इस स्थिति से निपटने के लिए आप का क्या रुख होगा?

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

युवाओं द्वारा संचालित पर्यावरणीय आंदोलन सामाजिक जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी का सशक्त उदाहरण है। एक सिविल सेवक के रूप में मेरा दायित्व होगा कि मैं इस आंदोलन को संवेदनशील, संवादात्मक और नीति-उन्मुख दृष्टिकोण से देखूँ। ऐसे आंदोलनों में प्रशासन को संतुलन रखना होता है—जनहित और नीतिगत व्यवहार्यता दोनों के बीच।

मुख्य बिंदु (Main Points):

1. संवाद स्थापित करना: आंदोलन के नेताओं से सकारात्मक बातचीत शुरू करना ताकि उनकी मांगें स्पष्ट रूप से समझी जा सकें।

2. तथ्यों का अध्ययन: आंदोलन से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों, रिपोर्टों और विशेषज्ञ मतों का निष्पक्ष विश्लेषण करना।

3. पारदर्शिता: जनता को यह बताना कि सरकार पर्यावरणीय मुद्दों पर क्या कदम उठा रही है।

4. नीति समीक्षा: संबंधित विभागों के साथ मिलकर नीतियों का मूल्यांकन कर आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव देना।

5. युवा सहभागिता: आंदोलन के प्रतिनिधियों को नीति-निर्माण प्रक्रिया में परामर्शदाता के रूप में शामिल करना।

6. संतुलित दृष्टिकोण: पर्यावरणीय संरक्षण और विकास की आवश्यकताओं के बीच व्यावहारिक संतुलन बनाना।

7. वैज्ञानिक सहयोग: पर्यावरण वैज्ञानिकों और अनुसंधान संस्थानों की राय को निर्णय प्रक्रिया में सम्मिलित करना।

8. सोशल मीडिया प्रबंधन: सकारात्मक सूचना साझा कर अफवाहों और गलत सूचनाओं को रोकना।

9. कानून व्यवस्था बनाए रखना: रैलियों या प्रदर्शनों के दौरान शांति और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।

10. जन-जागरूकता कार्यक्रम: नागरिकों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति दीर्घकालिक जागरूकता बढ़ाने हेतु अभियान चलाना।

11. सफलता का मूल्यांकन: आंदोलन के प्रभाव से लागू नीतियों की समीक्षा कर परिणामों का आकलन करना।

12. नैतिक दृष्टिकोण: जनभावनाओं का सम्मान करते हुए निष्पक्षता और उत्तरदायित्व का पालन करना।

निष्कर्ष (Conclusion):

एक सिविल सेवक के रूप में मेरा उद्देश्य होगा कि युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक नीति-परिवर्तन में परिवर्तित किया जाए। संवाद, पारदर्शिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर ही प्रशासन पर्यावरण संरक्षण और जनसंतोष दोनों सुनिश्चित कर सकता है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

“A person’s real behaviour was be contrary to the person’s attitude towards specific subject.” Do you agree with this statement? Answer with suitable argument.(Marks-12) UPPCS Mains 2024 GS-4

0

“एक व्यक्ति का वास्तविक व्यवहार व्यक्ति की विश्वास विषय के प्रति अभिव्यक्ति का विरुद्ध हो सकता है।” क्या आप इस कथन से सहमत है? उपयुक्त तर्कों सहित उत्तर दीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

मानव व्यवहार (Human Behaviour) सदैव उसकी आंतरिक मान्यताओं या विश्वासों (Beliefs) का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब नहीं होता। अक्सर व्यक्ति जो सोचता है, वही व्यवहार में प्रदर्शित नहीं करता—इसे “अभिवृत्ति और व्यवहार के अंतर (Attitude-Behaviour Gap)” कहा जाता है। इस अंतर के कई सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य कारण होते हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

1. सामाजिक दबाव (Social Pressure): व्यक्ति अपने वास्तविक विचारों के विपरीत व्यवहार करता है ताकि समाज में स्वीकृति बनी रहे।

2. परिस्थितिजन्य बाध्यता: कभी-कभी परिस्थिति या पद की सीमाएँ व्यक्ति को अपने विश्वास से अलग कार्य करने पर मजबूर करती हैं।

3. व्यक्तिगत लाभ: स्वार्थ या लाभ की भावना व्यक्ति को नैतिक मान्यताओं के विरुद्ध जाने को प्रेरित कर सकती है।

4. भय और असुरक्षा: सज़ा, आलोचना या अस्वीकृति के डर से व्यक्ति अपने विश्वासों को छिपा सकता है।

5. संगठनात्मक संस्कृति: किसी संस्था का वातावरण व्यक्ति के नैतिक आचरण को प्रभावित करता है।

6. नैतिक द्वंद्व (Moral Dilemma): जब दो नैतिक मूल्यों में टकराव हो, तो व्यवहार विश्वास से भिन्न हो सकता है।

7. आत्म-नियंत्रण की कमी: कभी-कभी व्यक्ति सही विश्वास रखता है, पर भावनाओं पर नियंत्रण न होने से गलत व्यवहार कर बैठता है।

8. अवसरवादिता (Opportunism): अवसर मिलने पर व्यक्ति सिद्धांतों से समझौता कर सकता है।

9. आदर्श और व्यवहार का अंतर: विचारों में व्यक्ति आदर्शवादी होता है, पर व्यवहार में व्यावहारिकता अपनाता है।

10. भूमिका-संघर्ष: विभिन्न सामाजिक भूमिकाओं (जैसे अधिकारी, पिता, मित्र) में व्यक्ति अलग-अलग व्यवहार करता है।

11. शिक्षा और आत्ममंथन की कमी: नैतिक शिक्षा की कमी से विश्वास और व्यवहार में दूरी बढ़ती है।

12. उदाहरण: कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार को गलत मानता है, पर रिश्वत देकर काम करवाने को “व्यवहारिकता” समझता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

अतः यह कथन सही है कि व्यक्ति का व्यवहार उसके विश्वासों से भिन्न हो सकता है।  इस अंतर को कम करने के लिए नैतिक शिक्षा, आत्म-जागरूकता और मूल्य-आधारित सामाजिक वातावरण की आवश्यकता है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

What are the key difference between ethics in private relations (family, friendships) and public relations (business, politics)? Explain.(Marks-12) UPPCS Mains 2024 GS-4

0

निजी संबंधों (परिवार, मित्रता) और सार्वजनिक संबंधों (व्यापार, राजनीति) में नैतिकता के बीच मुख्य अंतर क्या है? समझाइए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

नैतिकता (Ethics) हमारे व्यवहार को सही और गलत के मानदंडों से परखने का आधार प्रदान करती है। यह जीवन के हर क्षेत्र—निजी (Private) और सार्वजनिक (Public)—में समान रूप से आवश्यक है। फिर भी, दोनों क्षेत्रों की प्रकृति और दायित्व अलग होने के कारण उनकी नैतिकता में अंतर पाया जाता है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

1. संबंधों का आधार:

निजी संबंध भावनाओं, स्नेह और विश्वास पर आधारित होते हैं, जबकि सार्वजनिक संबंध कर्तव्य, नियम और निष्पक्षता पर टिका होता है।

2. उद्देश्य:

निजी संबंधों में व्यक्तिगत सुख-संतोष लक्ष्य होता है, जबकि सार्वजनिक संबंधों का उद्देश्य सामाजिक या सामूहिक कल्याण होता है।

3. जवाबदेही (Accountability):

परिवार या मित्रता में जवाबदेही व्यक्तिगत होती है, जबकि सार्वजनिक जीवन में यह जनता और कानून के प्रति होती है।

4. निर्णय-प्रक्रिया:

निजी जीवन में निर्णय भावनात्मक होते हैं, जबकि सार्वजनिक जीवन में निर्णय तार्किक और नीति-आधारित होते हैं।

5. नैतिक मानदंड:

निजी नैतिकता में करुणा, प्रेम और निष्ठा प्रमुख हैं; सार्वजनिक नैतिकता में सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और पारदर्शिता प्रमुख हैं।

6. गोपनीयता:

निजी संबंधों में गोपनीयता स्वीकार्य है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में पारदर्शिता आवश्यक है।

7. हितों का टकराव:

निजी संबंधों में पक्षपात स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक संबंधों में यह भ्रष्टाचार का रूप ले सकता है।

8. परिणाम का प्रभाव:

निजी नैतिकता का प्रभाव सीमित दायरे में रहता है, जबकि सार्वजनिक नैतिकता का असर व्यापक समाज पर पड़ता है।

9. मूल्य-निर्देशन:

निजी क्षेत्र में नैतिकता व्यक्तिगत मूल्यों से निर्देशित होती है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में संस्थागत नियमों से।

10. समय और परिस्थिति:

निजी नैतिकता लचीली होती है, जबकि सार्वजनिक नैतिकता अधिक स्थिर और औपचारिक।

11. दायित्व की प्रकृति:

निजी संबंध स्वैच्छिक होते हैं, जबकि सार्वजनिक संबंध संवैधानिक या कानूनी दायित्वों पर आधारित होते हैं।

12. नैतिक संघर्ष:

कई बार निजी स्नेह और सार्वजनिक कर्तव्य में टकराव होता है, जहाँ प्रशासक को सार्वजनिक नैतिकता को प्राथमिकता देनी चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion):

निजी और सार्वजनिक नैतिकता दोनों मानव जीवन के पूरक हैं, परंतु शासन और प्रशासन में सार्वजनिक नैतिकता सर्वोपरि है। जब व्यक्ति दोनों में संतुलन बनाए रखता है, तभी वह सच्चे अर्थों में नैतिक जीवन जी सकता है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

As an administrator, develop an intervention programme for attitude change in “corruption free India”.(Marks-12) UPPCS Mains 2024 GS-4

0

एक प्रशासक के रूप में “भ्रष्टाचार मुक्त भारत” के संवर्धन में अभिवृत्ति परिवर्तन है, अंतरावेशी कार्यक्रम विकसित कीजिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि लोगों की अभिवृत्तियों (attitudes) में सकारात्मक परिवर्तन से संभव है।एक प्रशासक के रूप में यह आवश्यक है कि प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नैतिक जागरूकता विकसित की जाए।इसके लिए एक अंतराकोशी (Interventional) कार्यक्रम तैयार किया जा सकता है जो व्यवहार, सोच और मूल्यों में बदलाव लाए।

मुख्य बिंदु (Main Points):

1. नैतिक शिक्षा अभियान: विद्यालयों, महाविद्यालयों और प्रशिक्षण संस्थानों में नैतिकता और ईमानदारी पर सत्र आयोजित करना।

2. लोक सेवकों का प्रशिक्षण: अधिकारियों व कर्मचारियों को “Integrity and Ethics” पर नियमित प्रशिक्षण देना।

3. पारदर्शिता बढ़ाना: ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा देकर मानव संपर्क आधारित भ्रष्टाचार को कम करना।

4. जन-जागरूकता कार्यक्रम: नारे, पोस्टर, सोशल मीडिया अभियान के माध्यम से नागरिकों में ईमानदारी की भावना जागृत करना।

5. प्रोत्साहन तंत्र: ईमानदार अधिकारियों और नागरिकों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करना।

6. शिकायत निवारण तंत्र: स्वतंत्र और पारदर्शी “जन-सुनवाई” प्रणाली लागू करना।

7. नैतिक क्लब (Ethics Clubs): स्कूलों व कॉलेजों में नैतिक क्लब स्थापित कर युवाओं को भ्रष्टाचार विरोधी संदेश देना।

8. नागरिक सहभागिता: समाज के विभिन्न समूहों—NGOs, RWA, मीडिया—को भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों से जोड़ना।

9. मूल्याधारित नेतृत्व: उच्च अधिकारियों को नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करना।

10. समाजिक अनुशासन: भ्रष्ट आचरण के प्रति समाज में अस्वीकार्यता (Zero Tolerance) का वातावरण बनाना।

11. मीडिया निगरानी: स्वतंत्र मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भ्रष्टाचार उजागर करने में सहयोगी बनाना।

12. सतत मूल्यांकन: अभियान की प्रभावशीलता मापने के लिए समय-समय पर निगरानी और सुधार करना।

निष्कर्ष (Conclusion):

भ्रष्टाचार मुक्त भारत की दिशा में सबसे प्रभावी उपाय नागरिकों और प्रशासकों की सोच में नैतिक परिवर्तन है। जब अभिवृत्ति, व्यवहार और प्रशासनिक संस्कृति ईमानदारी से जुड़ेंगी, तभी सच्चा सुशासन साकार होगा।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Critically evaluate the role of society in shaping and internationalizing political attitudes.(Marks-12) UPPCS Mains 2024 GS-4

0

राजनीतिक अभिवृत्तियों को आकार देने और अंतर्राष्ट्रीयकरण में समाज की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन करिए।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

राजनीतिक अभिवृत्तियाँ (Political Attitudes) किसी व्यक्ति या समाज की राजनीतिक व्यवस्था, नीतियों और नेतृत्व के प्रति सोच को दर्शाती हैं। इन अभिवृत्तियों के निर्माण में समाज की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि समाज ही व्यक्ति के मूल्य, दृष्टिकोण और व्यवहार को गढ़ता है। आज के वैश्वीकरण (Globalization) युग में इन राजनीतिक अभिवृत्तियों का अंतर्राष्ट्रीयकरण भी तेजी से बढ़ा है।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • सामाजिक संस्थाएँ: परिवार, विद्यालय और समुदाय व्यक्ति की प्रारंभिक राजनीतिक सोच को आकार देते हैं।
  • मीडिया की भूमिका: सोशल मीडिया और समाचार माध्यम राजनीतिक दृष्टिकोण को वैश्विक स्तर पर प्रभावित करते हैं।
  • शिक्षा का प्रभाव: शिक्षित समाज अधिक तार्किक और लोकतांत्रिक राजनीतिक सोच अपनाता है।
  • आर्थिक स्थिति: आर्थिक वर्गों के भेद राजनीतिक प्राथमिकताओं को निर्धारित करते हैं।
  • धर्म और संस्कृति: सामाजिक परंपराएँ और धार्मिक मान्यताएँ राजनीतिक दृष्टिकोण को प्रभावित करती हैं।
  • युवा शक्ति: आधुनिक समाज में युवा वर्ग नई राजनीतिक विचारधाराओं का वाहक बन रहा है।
  • वैश्वीकरण का प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय मीडिया, प्रवासन और इंटरनेट राजनीतिक विचारों का वैश्विक आदान-प्रदान संभव बना रहे हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ: संयुक्त राष्ट्र (UN), IMF, WTO जैसी संस्थाएँ नीतिगत सोच को अंतरराष्ट्रीय दिशा देती हैं।
  • लोकतांत्रिक मूल्य: मानवाधिकार, समानता, और स्वतंत्रता जैसे मूल्य अब विश्वव्यापी राजनीतिक अभिवृत्ति का हिस्सा बन गए हैं।
  • राजनीतिक आंदोलनों का प्रसार: अरब स्प्रिंग या #MeToo जैसे आंदोलन वैश्विक राजनीतिक चेतना के उदाहरण हैं।
  • आलोचनात्मक पक्ष: वैश्वीकरण से स्थानीय मुद्दों और सांस्कृतिक पहचान का ह्रास भी देखा जा रहा है।
  • संतुलन की आवश्यकता: राष्ट्रीय हितों और वैश्विक मूल्यों में संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी चुनौती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

समाज राजनीतिक अभिवृत्तियों का मूल स्रोत है और वैश्वीकरण ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया है। यदि यह प्रक्रिया नैतिकता और जनहित पर आधारित रहे, तो विश्व राजनीति अधिक मानवीय और सहयोगी बन सकती है।

Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.

Popular Posts

My Favorites

What are the challenges to promote viticulture in Uttar Pradesh and...

0
उत्तर प्रदेश में अंगूर की खेती को बढ़ावा देने में क्या चुनौतियाँ हैं और यह उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में किस प्रकार सहायक...