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“If a Second Chamber dissents from the first, it is mischievous; if it agrees, it is superfluous.” In the light of this famous statement, discuss the utility of Uttar Pradesh Legislative Council. (12 marks)

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“यदि दूसरा सदन पहले सदन से असहमत हो तो वह शरारतपूर्ण है; यदि वह सहमत हो तो अनावश्यक है ।” इस प्रसिद्ध कथन के प्रकाश में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की उपयोगिता की चर्चा कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction ):

द्विसदनीय विधानमंडल (Bicameral Legislature) का उद्देश्य कानून निर्माण में संतुलन और विवेक सुनिश्चित करना है। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (Legislative Council) इस व्यवस्था का दूसरा सदन है। यद्यपि इसकी उपयोगिता पर अक्सर विवाद होता रहा है, परंतु इसका लोकतांत्रिक महत्व अभी भी बना हुआ है।

मुख्य बिंदु:

• विधान परिषद राज्य का उच्च सदन है, जो परोक्ष रूप से निर्वाचित सदस्यों से बनता है।

• इसका कार्य विधान सभा द्वारा पारित विधेयकों की समीक्षा करना होता है।

• यह शासन में जल्दबाज़ी से बने कानूनों पर अंकुश लगाने का कार्य करती है।

• अनुभवी शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को इसमें प्रतिनिधित्व मिलता है।

• यह प्रशासनिक नीतियों पर सार्थक बहस का मंच प्रदान करती है।

• विधान परिषद को वित्त विधेयकों पर सीमित अधिकार प्राप्त हैं।

• यह विधानसभा के निर्णयों पर पुनर्विचार का अवसर देती है, परंतु उन्हें रोक नहीं सकती।

• आलोचक कहते हैं कि इसकी शक्तियाँ सीमित हैं, इसलिए यह “अनावश्यक” है।

• वहीं समर्थक मानते हैं कि यह लोकतांत्रिक परिपक्वता और विचारशीलता का प्रतीक है।

• कई बार इसे राजनीतिक शरणस्थली के रूप में भी देखा गया है।

• इसकी समाप्ति या बनाए रखने पर समय-समय पर बहस होती रही है।

• उत्तर प्रदेश की विविध सामाजिक संरचना में यह प्रतिनिधित्व की पूरक भूमिका निभाती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

यद्यपि विधान परिषद की शक्तियाँ सीमित हैं, फिर भी यह विधायी प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखने में सहायक है। इसे सुधार कर अधिक प्रभावी बनाया जाए तो यह लोकतंत्र की सशक्त संस्था बन सकती है।

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Elucidate in detail the characteristics of major festivals and their socio-economic role in the rural areas of Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख त्योहारों की विशेषताएँ और उनकी सामाजिक-आर्थिक भूमिका पर विस्तृत व्याख्या कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में मनाए जाने वाले त्योहार लोक-जीवन, संस्कृति और परम्पराओं का जीवंत रूप हैं। ये सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामुदायिक एकता, पारिवारिक संपन्नता और सामाजिक सौहार्द के प्रतीक भी हैं। साथ ही, ये कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाकर ग्रामीण जीवन में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हैं।

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण त्योहारों की प्रमुख विशेषताएँ और सामाजिक-आर्थिक भूमिका

  • कृषि-आधारित प्रकृति – होली, दीपावली, मकर संक्रांति और हरियाली तीज जैसे त्योहार कृषि चक्र, फसल कटाई और मौसम परिवर्तन से जुड़े होते हैं।
  • सामुदायिक एकजुटता – मेलों, कीर्तन, भंडारों और सामूहिक पूजन से गाँवों में सामाजिक एकता और पारस्परिक सहयोग बढ़ता है।
  • लोक संस्कृति का संरक्षण – कजरी, कजरी महोत्सव, नौटंकी, बिरहा, और लोक-नृत्यों के माध्यम से पारंपरिक कला-संस्कृति सुरक्षित रहती है।
  • परिवारिक सद्भाव – त्योहार परिवारों को जोड़ते हैं; प्रवासी श्रमिक भी त्योहारों पर गाँव लौटकर सामुदायिक रिश्तों को मजबूत बनाते हैं।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा – त्योहारों पर खरीदारी, मिठाइयों, कपड़ों, मिट्टी के दीयों, सजावट सामग्री की मांग बढ़ती है, जिससे स्थानीय शिल्पकारों की आय बढ़ती है।
  • माँग और रोजगार का सृजन – मेलों व बाजारों में दुकानों, अस्थायी रोजगार और परिवहन सेवाओं से आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ती हैं।
  • हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग को बढ़ावा – चरखा, हथकरघा, माटी कला, बुनकरी और खिलौना उद्योग को त्योहारों में विशेष मांग मिलती है।
  • धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व – देवी-देवताओं से जुड़ी पूजा-परम्पराएँ नैतिक मूल्य, विश्वास एवं आध्यात्मिकता को मजबूत करती हैं।
  • स्वस्थ सामाजिक व्यवहार का विकास – सामूहिक भागीदारी से सहयोग, दान, परोपकार एवं सामुदायिक नीतियों का पालन बढ़ता है।
  • पर्यटन को बढ़ावा – काशी, अयोध्या, मथुरा जैसे क्षेत्रों में पर्व-त्योहारों पर ग्रामीण पर्यटन की संभावनाएँ बढ़ती हैं।
  • लैंगिक सहभागिता – तीज, कजरी, करवाचौथ जैसे पर्व महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और उनकी सामाजिक भूमिका को प्रबल करते हैं।
  • पर्यावरणीय संतुलन का संदेश – हरियाली तीज, छठ पूजा जैसे पर्व प्रकृति, जल और पर्यावरण के संरक्षण की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।

Conclusion

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण त्योहार सिर्फ सांस्कृतिक परम्पराएँ नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आर्थिक विकास के मजबूत स्तंभ हैं। ये ग्रामीण समाज को जीवंत, सहयोगी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाते हैं।

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Critically analyse the role of Uttar Pradesh in the Indian Freedom Movement. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उत्तर प्रदेश की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction – 3 lines):
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian Freedom Movement) में उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। यह प्रदेश न केवल कई प्रमुख आंदोलनों का केंद्र बना, बल्कि यहाँ से अनेक महान नेता भी उभरे। इसकी भूमि ने स्वतंत्रता संघर्ष को वैचारिक, राजनीतिक और जनांदोलन दोनों रूपों में दिशा दी।

मुख्य बिंदु (12 Bullet Points):
• 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मेरठ और कानपुर जैसे नगरों से प्रारंभ हुआ।
• मंगल पांडे और नाना साहब जैसे वीर सेनानियों ने विद्रोह का नेतृत्व किया।
• बनारस, लखनऊ और झाँसी इस संग्राम के प्रमुख केंद्र रहे।
• झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान महिला वीरता का प्रतीक बना।
• कांग्रेस की कई अधिवेशन (जैसे 1910, 1916 का लखनऊ अधिवेशन) यहीं आयोजित हुए।
• 1916 के लखनऊ समझौते ने हिंदू-मुस्लिम एकता को बल दिया।
• असहयोग आंदोलन (1920) में वाराणसी, इलाहाबाद और गोरखपुर सक्रिय केंद्र बने।
• चौरी-चौरा की घटना (1922) यहीं घटी, जिसने आंदोलन की दिशा बदली।
• सविनय अवज्ञा आंदोलन में उत्तर प्रदेश के किसानों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
• नेताजी सुभाषचंद्र बोस और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं का संबंध इस प्रदेश से था।
• क्रांतिकारी संगठनों — हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) — की गतिविधियाँ कानपुर और इलाहाबाद में केंद्रित थीं।
• ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (1942) में बलिया ने स्वतंत्र सरकार बनाकर उदाहरण प्रस्तुत किया।

निष्कर्ष (Conclusion – 2 lines):
उत्तर प्रदेश ने स्वतंत्रता संग्राम को जन-आंदोलन का रूप दिया। इसकी भूमिका न केवल नेतृत्वकारी रही, बल्कि इसने भारतीय राष्ट्रवाद को स्थायी आधार प्रदान किया।

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Discuss the causes for the rise of the towns in ancient Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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प्राचीन उत्तर प्रदेश में नगरों के उदय के कारणों की चर्चा कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

प्राचीन उत्तर प्रदेश भारत की सभ्यता का प्रमुख केंद्र रहा है जहाँ नगरों (Cities) का विकास सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक कारणों से हुआ। गंगा–घाटी की उपजाऊ भूमि, व्यापारिक मार्गों और राजनीतिक स्थिरता ने नगरों के उत्थान में भूमिका निभाई। इन नगरों ने भारतीय संस्कृति, शासन और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।

मुख्य कारण:

• गंगा और यमुना जैसी नदियों के किनारे उपजाऊ भूमि ने कृषि उत्पादन को बढ़ाया।

• अधिशेष कृषि उत्पादन ने व्यापार और शिल्प के विकास को प्रेरित किया।

• व्यापारिक मार्गों और नदियों ने आंतरिक व बाहरी व्यापार को बढ़ावा दिया।

• लोहे के उपकरणों के प्रयोग से कृषि और निर्माण कार्य अधिक प्रभावी हुए।

• राजनीतिक स्थिरता और शक्तिशाली जनपदों का उदय हुआ, जैसे कोशल, काशी, मगध।

• धार्मिक केंद्रों (जैसे श्रावस्ती, सारनाथ) के कारण लोगों का आवागमन बढ़ा।

• शिल्पकारों और व्यापारियों के समूह (गिल्ड) नगरों में बसने लगे।

• मुद्रा प्रचलन ने व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाया।

• शिक्षा केंद्रों (जैसे तक्षशिला, वाराणसी) ने सांस्कृतिक प्रतिष्ठा बढ़ाई।

• सुरक्षा हेतु नगरों के चारों ओर दीवारें और द्वार बनाए गए।

• स्थानीय शासन प्रणाली (नगरपालिका रूप) ने प्रशासनिक सुविधा प्रदान की।

• सामाजिक विविधता और शहरी जीवन शैली का विकास हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion ):

प्राचीन उत्तर प्रदेश में नगरों का उदय आर्थिक, धार्मिक और भौगोलिक कारणों से हुआ। ये नगर आगे चलकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति के प्रमुख केंद्र बने।

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What are the salient features of the architecture of Uttar Pradesh? Describe its key elements and styles.(12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश की वास्तुकला की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ? इसके प्रमुख तत्त्वों और शैलियों का वर्णन कीजिए ।

Ans:  परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश की वास्तुकला (Architecture) भारतीय कला और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यहाँ की इमारतें विभिन्न कालों — मौर्य, गुप्त, मुगल और ब्रिटिश — की स्थापत्य शैली को दर्शाती हैं। यह क्षेत्र धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है।

मुख्य विशेषताएँ और तत्व:

• मौर्य काल में अशोक स्तंभ और स्तूप जैसे स्थापत्य का विकास हुआ (जैसे सारनाथ स्तूप)।

• गुप्त काल में मंदिर निर्माण की उत्कृष्ट परंपरा आरंभ हुई — सादगी और संतुलन इसका आधार था।

• मुगल काल में लाल पत्थर और संगमरमर का व्यापक उपयोग हुआ।

• गुम्बद, मेहराब और मीनारें इस काल की प्रमुख पहचान बनीं।

• लखनऊ की नवाबी वास्तुकला में फारसी, मुगल और यूरोपीय प्रभाव देखा जाता है।

• बड़ा इमामबाड़ा और रूमी दरवाज़ा इसके श्रेष्ठ उदाहरण हैं।

• काशी, अयोध्या और मथुरा में धार्मिक वास्तुकला का उत्कर्ष देखने को मिलता है।

• ब्रिटिश काल में औपनिवेशिक भवन जैसे इलाहाबाद हाईकोर्ट और कचहरी बने।

• मंदिर वास्तुकला में नागर शैली प्रमुख रही।

• राजसी इमारतों में नक्काशी, झरोखे और जालियों का प्रयोग हुआ।

• जल संरचनाएँ (घाट, कुएँ, बावड़ियाँ) स्थानीय जीवन का अभिन्न हिस्सा थीं।

• स्थापत्य में सौंदर्य, धर्म और उपयोगिता का समन्वय देखने को मिलता है।

निष्कर्ष (Conclusion ):

उत्तर प्रदेश की वास्तुकला भारतीय इतिहास का जीवंत प्रतिबिंब है। यह न केवल कला की परंपरा बल्कि सांस्कृतिक एकता और विविधता का प्रतीक भी है।

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Discuss the role of ‘Smart City’ for better living conditions of the people of Uttar Pradesh. (Marks-8) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में लोगों के बेहतर जीवन स्तर के लिए ‘स्मार्ट सिटी’ की भूमिका की विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction) –

 उत्तर प्रदेश में बढ़ती शहरी जनसंख्या के साथ बेहतर जीवन स्तर और सुविधाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। इस दिशा में स्मार्ट सिटी मिशन (Smart City Mission) ने आधुनिक तकनीक, सुशासन और सतत विकास को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया है। इसका उद्देश्य शहरों को अधिक रहने योग्य, स्वच्छ और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, आगरा जैसे प्रमुख शहर स्मार्ट सिटी योजना में शामिल हैं।
  • मिशन का लक्ष्य डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाना है।
  • स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और सर्विलांस सिस्टम से सुरक्षा और यातायात नियंत्रण में सुधार हुआ।
  • कचरा प्रबंधन, स्वच्छ जल और हरित क्षेत्र के विस्तार पर जोर दिया गया है।
  • स्मार्ट स्ट्रीट लाइट्स और सोलर एनर्जी से ऊर्जा दक्षता में वृद्धि हुई।
  • स्टार्टअप और आईटी हब को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
  • नागरिक सहभागिता को बढ़ाने के लिए सिटीजन फीडबैक पोर्टल और मोबाइल ऐप्स लागू किए गए हैं।

निष्कर्ष (Conclusion) –

 स्मार्ट सिटी मिशन ने उत्तर प्रदेश के शहरों में शहरी जीवन को आधुनिक दिशा दी है। यदि इन परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा, तो यह नागरिकों के जीवन स्तर को स्थायी रूप से बेहतर बना सकता है।

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Discuss the role of ‘Inland Waterways Authority’ to boost the water transport and tourism in Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में जल परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा देने में ‘अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण’ की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction)

उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना और घाघरा जैसी नदियाँ जल परिवहन के लिए अत्यंत संभावनाशील हैं। इन नदियों के विकास हेतु अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI – Inland Waterways Authority of India) की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य जलमार्गों को आर्थिक, पर्यावरणीय और पर्यटन दृष्टि से उपयोगी बनाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • IWAI की स्थापना 1986 में हुई, ताकि देश में अंतर्देशीय जल परिवहन को प्रोत्साहन मिले।
  • उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (हल्दिया से वाराणसी) प्रमुख परियोजना है।
  • इस जलमार्ग से माल परिवहन की लागत घटाने और व्यापार को बढ़ावा देने में मदद मिली।
  • वाराणसी मल्टीमॉडल टर्मिनल का निर्माण पर्यटन और व्यापार दोनों को सशक्त कर रहा है।
  • गंगा नदी पर क्रूज़ पर्यटन की शुरुआत से रोजगार और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी।
  • पर्यावरण अनुकूल परिवहन से प्रदूषण में कमी आई है।
  • IWAI राज्य सरकार के साथ मिलकर नदी तट विकास और घाट सुधार पर कार्य कर रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion) – अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश में जल आधारित परिवहन और पर्यटन की नई संभावनाएँ खोली हैं। उचित रखरखाव और निवेश से यह राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

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Analyse the problems related to Non-Governmental Organisations (NGOs) in Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में गैर-सरकारी संगठनों से संबंधित समस्याओं का विश्लेषण कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction)

 ग़ैर-सरकारी संगठन (NGOs) उत्तर प्रदेश में सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परंतु इनके संचालन में कई व्यावहारिक और नीतिगत चुनौतियाँ सामने आती हैं, जो इनके प्रभाव को सीमित करती हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से जनता का विश्वास कमजोर होता है।
  • कई एनजीओ केवल धन प्राप्ति के उद्देश्य से संचालित होते हैं।
  • सरकारी पंजीकरण और विनियमन प्रक्रिया जटिल और धीमी है।
  • वित्तीय संसाधनों की कमी और अनियमित फंडिंग से कार्य रुक जाते हैं।
  • राजनीतिक और नौकरशाही हस्तक्षेप इनकी स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी कार्यकुशलता घटाती है।
  • समान कार्य करने वाले संगठनों में समन्वय की कमी से दोहराव और अपव्यय होता है।

निष्कर्ष (Conclusion) – यदि पारदर्शिता, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग में सुधार किया जाए, तो एनजीओ राज्य के विकास में सशक्त भागीदार बन सकते हैं। प्रभावी निगरानी और समन्वय से इनकी कार्यक्षमता और सामाजिक योगदान बढ़ाया जा सकता है।

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What are the key challenges in ensuring an efficient law and order situation in Uttar Pradesh? (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में कुशल कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं ?

  1. उत्तर प्रदेश में कुशल कानून व्यावस्था सुनिश्चित करने में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?                     8

Ans: परिचय (Introduction) –

उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहाँ कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। राज्य सरकार निरंतर सुधारों के प्रयास कर रही है, परन्तु अनेक सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत समस्याएँ अब भी बनी हुई हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • जनसंख्या घनत्व अधिक होने से अपराध नियंत्रण में कठिनाई होती है।
  • पुलिस बल की कमी और आधुनिक प्रशिक्षण का अभाव प्रभावी कार्रवाई में बाधक है।
  • भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप कानून प्रवर्तन की निष्पक्षता को प्रभावित करते हैं।
  • महिलाओं और दलितों के विरुद्ध अपराधों की बढ़ती घटनाएँ चिंता का विषय हैं।
  • साइबर अपराध और संगठित अपराध के नए रूप प्रशासन के लिए चुनौती बने हैं।
  • न्यायिक प्रक्रियाओं में विलंब से अपराधियों में भय की कमी रहती है।
  • अपर्याप्त निगरानी प्रणाली और तकनीकी संसाधनों की कमी भी प्रमुख समस्या है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

कुशल कानून-व्यवस्था के लिए आधुनिक तकनीक, पारदर्शी प्रशासन और पुलिस-जन सहयोग आवश्यक है। इन सुधारों के माध्यम से ही उत्तर प्रदेश में सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना संभव है।

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Discuss the composition and jurisdiction of the State High Court of Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश के राज्य उच्च न्यायालय के गठन व क्षेत्राधिकार की विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction) –

उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय राज्य की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जो न्यायिक व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। इसका गठन ब्रिटिश काल में हुआ था, और आज यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा तथा न्याय प्रदान करने का प्रमुख केंद्र है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय की स्थापना 17 मार्च 1866 को इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुई।
  • प्रारंभ में यह नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंसेस हाईकोर्ट कहलाता था।
  • संविधान के अनुच्छेद 214 से 231 के तहत राज्य उच्च न्यायालय की संरचना और कार्य तय किए गए हैं।
  • इसका मुख्य पीठ प्रयागराज में तथा खण्डपीठ (Bench) लखनऊ में स्थित है।
  • इसका क्षेत्राधिकार पूरे उत्तर प्रदेश राज्य तक विस्तृत है।
  • न्यायालय को मूल, अपीलीय और लेखापरीक्षा (writ jurisdiction) प्राप्त है।
  • यह राज्य सरकार और उसके अधिकारियों के विरुद्ध न्यायिक पुनरावलोकन करने में सक्षम है।

निष्कर्ष (Conclusion) – उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय राज्य में न्याय, विधि और संविधान की रक्षा का प्रमुख स्तंभ है। इसका व्यापक क्षेत्राधिकार नागरिक अधिकारों और न्यायिक पारदर्शिता को सुदृढ़ बनाता है।

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