“If a Second Chamber dissents from the first, it is mischievous; if it agrees, it is superfluous.” In the light of this famous statement, discuss the utility of Uttar Pradesh Legislative Council. (12 marks)
“यदि दूसरा सदन पहले सदन से असहमत हो तो वह शरारतपूर्ण है; यदि वह सहमत हो तो अनावश्यक है ।” इस प्रसिद्ध कथन के प्रकाश में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की उपयोगिता की चर्चा कीजिए ।
Ans: परिचय (Introduction ):
द्विसदनीय विधानमंडल (Bicameral Legislature) का उद्देश्य कानून निर्माण में संतुलन और विवेक सुनिश्चित करना है। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (Legislative Council) इस व्यवस्था का दूसरा सदन है। यद्यपि इसकी उपयोगिता पर अक्सर विवाद होता रहा है, परंतु इसका लोकतांत्रिक महत्व अभी भी बना हुआ है।
मुख्य बिंदु:
• विधान परिषद राज्य का उच्च सदन है, जो परोक्ष रूप से निर्वाचित सदस्यों से बनता है।
• इसका कार्य विधान सभा द्वारा पारित विधेयकों की समीक्षा करना होता है।
• यह शासन में जल्दबाज़ी से बने कानूनों पर अंकुश लगाने का कार्य करती है।
• अनुभवी शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को इसमें प्रतिनिधित्व मिलता है।
• यह प्रशासनिक नीतियों पर सार्थक बहस का मंच प्रदान करती है।
• विधान परिषद को वित्त विधेयकों पर सीमित अधिकार प्राप्त हैं।
• यह विधानसभा के निर्णयों पर पुनर्विचार का अवसर देती है, परंतु उन्हें रोक नहीं सकती।
• आलोचक कहते हैं कि इसकी शक्तियाँ सीमित हैं, इसलिए यह “अनावश्यक” है।
• वहीं समर्थक मानते हैं कि यह लोकतांत्रिक परिपक्वता और विचारशीलता का प्रतीक है।
• कई बार इसे राजनीतिक शरणस्थली के रूप में भी देखा गया है।
• इसकी समाप्ति या बनाए रखने पर समय-समय पर बहस होती रही है।
• उत्तर प्रदेश की विविध सामाजिक संरचना में यह प्रतिनिधित्व की पूरक भूमिका निभाती है।
निष्कर्ष (Conclusion):
यद्यपि विधान परिषद की शक्तियाँ सीमित हैं, फिर भी यह विधायी प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखने में सहायक है। इसे सुधार कर अधिक प्रभावी बनाया जाए तो यह लोकतंत्र की सशक्त संस्था बन सकती है।
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