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Distinguish between the Consolidated Fund and the Contingency Fund of the State of Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश राज्य की संचित निधि एवं आकस्मिक निधि के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction) –

 उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेदों के अनुसार संचालित होती है। इसमें संचित निधि (Consolidated Fund) और आकस्मिक निधि (Contingency Fund) दो प्रमुख राज्य निधियाँ हैं। दोनों का उद्देश्य अलग-अलग परिस्थितियों में वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • संचित निधि राज्य की मुख्य निधि है, जिसमें सभी राजस्व, ऋण और प्राप्तियाँ जमा होती हैं।
  • इस निधि से सरकारी व्यय केवल विधानसभा की स्वीकृति से किया जा सकता है।
  • यह निधि राज्य की सामान्य बजटीय आवश्यकताओं के लिए उपयोग होती है।
  • आकस्मिक निधि आपातकालीन या तत्काल व्यय की स्थिति में प्रयोग की जाती है।
  • इसे राज्यपाल के अधीन रखा जाता है, जो तत्काल भुगतान की अनुमति दे सकते हैं।
  • बाद में यह राशि विधानसभा द्वारा अनुमोदित की जाती है।
  • संचित निधि स्थायी प्रकृति की होती है, जबकि आकस्मिक निधि अस्थायी पुनर्भरणीय निधि है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

इस प्रकार, संचित निधि राज्य की नियमित वित्तीय गतिविधियों की आधारशिला है, जबकि आकस्मिक निधि आपात स्थितियों में त्वरित राहत प्रदान करने का साधन है। दोनों मिलकर राज्य की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करती हैं।

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“Panchayati Raj System has long success stories in Uttar Pradesh.” Corroborate with suitable examples. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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“उत्तर प्रदेश में पंचायती राज प्रणाली की सफलता की लंबी कहानियाँ हैं ।” उपयुक्त उदाहरणों से इसकी पुष्टि कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

पंचायती राज प्रणाली (Panchayati Raj System) भारत के ग्रामीण लोकतंत्र की आधारशिला है। उत्तर प्रदेश में यह प्रणाली स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम बनी है। इससे ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और जनसहभागिता को नई दिशा मिली है।

मुख्य बिंदु:

• 73वें संविधान संशोधन (1992) के बाद उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू की गई।

• ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तीनों स्तरों पर जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं।

• राज्य में लगभग 58,000 ग्राम पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ हैं।

• पंचायतों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क निर्माण जैसी जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।

• स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

• कई पंचायतों ने डिजिटल शासन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं — जैसे “ई-गवर्नेंस ग्राम” मॉडल।

• महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण ने स्थानीय नेतृत्व में बड़ा परिवर्तन लाया।

• शाहजहाँपुर, बहराइच और बाराबंकी जिलों की पंचायतों ने सामुदायिक स्वास्थ्य व जल संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य किए हैं।

• ग्राम निधि और जनसहयोग से पंचायतें आत्मनिर्भर बन रही हैं।

• पंचायत चुनावों ने ग्रामीण नागरिकों में राजनीतिक चेतना को प्रबल किया।

• सामाजिक न्याय और हाशिए के वर्गों की भागीदारी में वृद्धि हुई है।

• पंचायतें स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान करने में सफल रही हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश की पंचायती राज प्रणाली ने लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुँचाया है। यह जनसहभागिता, स्वावलंबन और ग्रामीण विकास का जीवंत उदाहरण बन चुकी है।

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Discuss the role of Uttar Pradesh Public Service Commission and explain the challenges before it for independent and impartial selection of public servants. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भूमिका और लोक सेवकों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चयन के लिए उसके समक्ष चुनौतियों पर चर्चा कीजिए ।

Ans:  परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC – Uttar Pradesh Public Service Commission) राज्य सरकार की एक संवैधानिक संस्था है। इसका मुख्य कार्य राज्य सेवाओं के लिए योग्य, निष्पक्ष और सक्षम अभ्यर्थियों का चयन करना है। आयोग राज्य प्रशासन की दक्षता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य बिंदु:

• UPPSC की स्थापना 1 अप्रैल 1937 को की गई थी।

• इसका उद्देश्य योग्यता आधारित (Merit-based) चयन प्रक्रिया के माध्यम से लोक सेवकों की भर्ती करना है।

• आयोग राज्य सिविल सेवा, पुलिस, शिक्षा, और अन्य विभागों की परीक्षाएँ आयोजित करता है।

• यह परीक्षाओं की योजना, प्रश्नपत्र निर्माण, मूल्यांकन और साक्षात्कार प्रक्रिया का संचालन करता है।

• पारदर्शिता और निष्पक्षता आयोग की कार्यप्रणाली के प्रमुख सिद्धांत हैं।

• आयोग के सुझावों के आधार पर सरकार भर्ती नीतियों में सुधार करती है।

• चुनौतियों में परीक्षा परिणामों में देरी और पारदर्शिता पर उठते सवाल शामिल हैं।

• पेपर लीक जैसी घटनाएँ आयोग की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।

• राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप इसकी स्वतंत्रता के लिए चुनौती हैं।

• आधुनिक तकनीक और ई-गवर्नेंस के अभाव में प्रक्रियाएँ कभी-कभी धीमी रहती हैं।

• अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या के कारण निष्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ा है।

• डिजिटल परीक्षा प्रणाली और पारदर्शी मूल्यांकन से आयोग की विश्वसनीयता पुनर्स्थापित हो रही है।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग राज्य प्रशासन की रीढ़ है, जो योग्य अधिकारियों के चयन में अहम भूमिका निभाता है। यदि इसे पूर्ण स्वतंत्रता और तकनीकी सुदृढ़ता दी जाए, तो यह और अधिक निष्पक्ष व प्रभावी बन सकता है।

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Critically analyse the role of Uttar Pradesh in the Indian Freedom Movement. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उत्तर प्रदेश की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction – 3 lines):
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian Freedom Movement) में उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। यह प्रदेश न केवल कई प्रमुख आंदोलनों का केंद्र बना, बल्कि यहाँ से अनेक महान नेता भी उभरे। इसकी भूमि ने स्वतंत्रता संघर्ष को वैचारिक, राजनीतिक और जनांदोलन दोनों रूपों में दिशा दी।

मुख्य बिंदु (12 Bullet Points):
• 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मेरठ और कानपुर जैसे नगरों से प्रारंभ हुआ।
• मंगल पांडे और नाना साहब जैसे वीर सेनानियों ने विद्रोह का नेतृत्व किया।
• बनारस, लखनऊ और झाँसी इस संग्राम के प्रमुख केंद्र रहे।
• झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान महिला वीरता का प्रतीक बना।
• कांग्रेस की कई अधिवेशन (जैसे 1910, 1916 का लखनऊ अधिवेशन) यहीं आयोजित हुए।
• 1916 के लखनऊ समझौते ने हिंदू-मुस्लिम एकता को बल दिया।
• असहयोग आंदोलन (1920) में वाराणसी, इलाहाबाद और गोरखपुर सक्रिय केंद्र बने।
• चौरी-चौरा की घटना (1922) यहीं घटी, जिसने आंदोलन की दिशा बदली।
• सविनय अवज्ञा आंदोलन में उत्तर प्रदेश के किसानों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
• नेताजी सुभाषचंद्र बोस और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं का संबंध इस प्रदेश से था।
• क्रांतिकारी संगठनों — हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) — की गतिविधियाँ कानपुर और इलाहाबाद में केंद्रित थीं।
• ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (1942) में बलिया ने स्वतंत्र सरकार बनाकर उदाहरण प्रस्तुत किया।

निष्कर्ष (Conclusion – 2 lines):
उत्तर प्रदेश ने स्वतंत्रता संग्राम को जन-आंदोलन का रूप दिया। इसकी भूमिका न केवल नेतृत्वकारी रही, बल्कि इसने भारतीय राष्ट्रवाद को स्थायी आधार प्रदान किया।

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Discuss the role of ‘Smart City’ for better living conditions of the people of Uttar Pradesh. (Marks-8) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में लोगों के बेहतर जीवन स्तर के लिए ‘स्मार्ट सिटी’ की भूमिका की विवेचना कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction) –

 उत्तर प्रदेश में बढ़ती शहरी जनसंख्या के साथ बेहतर जीवन स्तर और सुविधाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। इस दिशा में स्मार्ट सिटी मिशन (Smart City Mission) ने आधुनिक तकनीक, सुशासन और सतत विकास को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया है। इसका उद्देश्य शहरों को अधिक रहने योग्य, स्वच्छ और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, आगरा जैसे प्रमुख शहर स्मार्ट सिटी योजना में शामिल हैं।
  • मिशन का लक्ष्य डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाना है।
  • स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और सर्विलांस सिस्टम से सुरक्षा और यातायात नियंत्रण में सुधार हुआ।
  • कचरा प्रबंधन, स्वच्छ जल और हरित क्षेत्र के विस्तार पर जोर दिया गया है।
  • स्मार्ट स्ट्रीट लाइट्स और सोलर एनर्जी से ऊर्जा दक्षता में वृद्धि हुई।
  • स्टार्टअप और आईटी हब को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
  • नागरिक सहभागिता को बढ़ाने के लिए सिटीजन फीडबैक पोर्टल और मोबाइल ऐप्स लागू किए गए हैं।

निष्कर्ष (Conclusion) –

 स्मार्ट सिटी मिशन ने उत्तर प्रदेश के शहरों में शहरी जीवन को आधुनिक दिशा दी है। यदि इन परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा, तो यह नागरिकों के जीवन स्तर को स्थायी रूप से बेहतर बना सकता है।

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Discuss the causes for the rise of the towns in ancient Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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प्राचीन उत्तर प्रदेश में नगरों के उदय के कारणों की चर्चा कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

प्राचीन उत्तर प्रदेश भारत की सभ्यता का प्रमुख केंद्र रहा है जहाँ नगरों (Cities) का विकास सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक कारणों से हुआ। गंगा–घाटी की उपजाऊ भूमि, व्यापारिक मार्गों और राजनीतिक स्थिरता ने नगरों के उत्थान में भूमिका निभाई। इन नगरों ने भारतीय संस्कृति, शासन और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।

मुख्य कारण:

• गंगा और यमुना जैसी नदियों के किनारे उपजाऊ भूमि ने कृषि उत्पादन को बढ़ाया।

• अधिशेष कृषि उत्पादन ने व्यापार और शिल्प के विकास को प्रेरित किया।

• व्यापारिक मार्गों और नदियों ने आंतरिक व बाहरी व्यापार को बढ़ावा दिया।

• लोहे के उपकरणों के प्रयोग से कृषि और निर्माण कार्य अधिक प्रभावी हुए।

• राजनीतिक स्थिरता और शक्तिशाली जनपदों का उदय हुआ, जैसे कोशल, काशी, मगध।

• धार्मिक केंद्रों (जैसे श्रावस्ती, सारनाथ) के कारण लोगों का आवागमन बढ़ा।

• शिल्पकारों और व्यापारियों के समूह (गिल्ड) नगरों में बसने लगे।

• मुद्रा प्रचलन ने व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाया।

• शिक्षा केंद्रों (जैसे तक्षशिला, वाराणसी) ने सांस्कृतिक प्रतिष्ठा बढ़ाई।

• सुरक्षा हेतु नगरों के चारों ओर दीवारें और द्वार बनाए गए।

• स्थानीय शासन प्रणाली (नगरपालिका रूप) ने प्रशासनिक सुविधा प्रदान की।

• सामाजिक विविधता और शहरी जीवन शैली का विकास हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion ):

प्राचीन उत्तर प्रदेश में नगरों का उदय आर्थिक, धार्मिक और भौगोलिक कारणों से हुआ। ये नगर आगे चलकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति के प्रमुख केंद्र बने।

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Organised crime and terrorism are grave challenges to national security. What arrangements have been made in Uttar Pradesh to counter this? Explain. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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संगठित अपराध एवं आतंकवाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियाँ हैं । इनका प्रतिकार करने के लिए उत्तर प्रदेश में क्या प्रबंधन किया गया है ? स्पष्ट कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

संगठित अपराध (Organized Crime) और आतंकवाद (Terrorism) आज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे बन चुके हैं। उत्तर प्रदेश, अपनी भौगोलिक स्थिति और घनी आबादी के कारण, इन अपराधों से विशेष रूप से प्रभावित रहा है। राज्य सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए बहुआयामी सुरक्षा एवं कानूनी प्रबंधन विकसित किया है।

मुख्य बिंदु:

• राज्य में उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी सोशल एक्टिविटीज़ (UP Gangsters Act) के तहत अपराधियों पर कठोर कार्रवाई की जाती है।

• राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) का प्रयोग देश विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण हेतु किया जाता है।

• आतंकवाद-निरोधी बल (Anti-Terror Squad – ATS) को विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक से सशक्त किया गया है।

• साइबर अपराधों से निपटने हेतु Cyber Crime Police Stations सभी जोनों में स्थापित किए गए हैं।

• खुफिया विभाग (Intelligence Department) को आधुनिक सर्विलांस उपकरणों से लैस किया गया है।

• डायल 112 और आई-खोज पोर्टल जैसी पहलें त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करती हैं।

• सीमा और संवेदनशील जिलों में पुलिस चौकियाँ और चेकपोस्ट बढ़ाई गई हैं।

• अपराधियों की संपत्ति जब्ती और अवैध गिरोहों पर आर्थिक प्रहार की नीति अपनाई गई है।

• अंतरराज्यीय अपराध नियंत्रण के लिए पड़ोसी राज्यों से समन्वय बढ़ाया गया है।

• सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को सतर्कता अभियान में जोड़ा गया है।

• पुलिस बल में आधुनिक हथियार, ड्रोन और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम का प्रयोग बढ़ाया गया है।

• न्यायिक तंत्र में विशेष न्यायालयों की स्थापना से मामलों के शीघ्र निपटान पर बल दिया जा रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश सरकार ने संगठित अपराध और आतंकवाद से निपटने के लिए सशक्त कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक ढाँचा विकसित किया है। इन उपायों से राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और जनविश्वास दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

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What are the salient features of the architecture of Uttar Pradesh? Describe its key elements and styles.(12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश की वास्तुकला की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ? इसके प्रमुख तत्त्वों और शैलियों का वर्णन कीजिए ।

Ans:  परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश की वास्तुकला (Architecture) भारतीय कला और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यहाँ की इमारतें विभिन्न कालों — मौर्य, गुप्त, मुगल और ब्रिटिश — की स्थापत्य शैली को दर्शाती हैं। यह क्षेत्र धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है।

मुख्य विशेषताएँ और तत्व:

• मौर्य काल में अशोक स्तंभ और स्तूप जैसे स्थापत्य का विकास हुआ (जैसे सारनाथ स्तूप)।

• गुप्त काल में मंदिर निर्माण की उत्कृष्ट परंपरा आरंभ हुई — सादगी और संतुलन इसका आधार था।

• मुगल काल में लाल पत्थर और संगमरमर का व्यापक उपयोग हुआ।

• गुम्बद, मेहराब और मीनारें इस काल की प्रमुख पहचान बनीं।

• लखनऊ की नवाबी वास्तुकला में फारसी, मुगल और यूरोपीय प्रभाव देखा जाता है।

• बड़ा इमामबाड़ा और रूमी दरवाज़ा इसके श्रेष्ठ उदाहरण हैं।

• काशी, अयोध्या और मथुरा में धार्मिक वास्तुकला का उत्कर्ष देखने को मिलता है।

• ब्रिटिश काल में औपनिवेशिक भवन जैसे इलाहाबाद हाईकोर्ट और कचहरी बने।

• मंदिर वास्तुकला में नागर शैली प्रमुख रही।

• राजसी इमारतों में नक्काशी, झरोखे और जालियों का प्रयोग हुआ।

• जल संरचनाएँ (घाट, कुएँ, बावड़ियाँ) स्थानीय जीवन का अभिन्न हिस्सा थीं।

• स्थापत्य में सौंदर्य, धर्म और उपयोगिता का समन्वय देखने को मिलता है।

निष्कर्ष (Conclusion ):

उत्तर प्रदेश की वास्तुकला भारतीय इतिहास का जीवंत प्रतिबिंब है। यह न केवल कला की परंपरा बल्कि सांस्कृतिक एकता और विविधता का प्रतीक भी है।

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What was the policy of the British Government towards the Talukdars of Awadh after the revolution of 1857? Marks-8 UPPCS Mains 2024 GS-5

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सन् 1857 की क्रांति के पश्चात् ब्रिटिश सरकार की अवध के तालुकादारों के प्रति क्या नीति थी ?      

Ans: परिचय (Introduction) –

सन् 1857 की क्रांति में अवध के तालुकादारों ने सक्रिय रूप से भाग लिया था, जिससे ब्रिटिश शासन को भारी चुनौती मिली। क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार ने अपने प्रशासनिक नियंत्रण को मज़बूत करने हेतु नई नीतियाँ अपनाईं। इन नीतियों का उद्देश्य तालुकादारों को शांत करना और उन्हें शासन का सहयोगी बनाना था।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • ब्रिटिशों ने आरंभिक दंडात्मक नीति छोड़कर समझौता नीति अपनाई।
  • कई तालुकादारों की जमींदारियाँ पुनः बहाल की गईं।
  • उन्हें राजस्व वसूली का अधिकार दिया गया ताकि वे शासन के प्रति निष्ठावान रहें।
  • भूमि सुधारों के माध्यम से किसानों पर नियंत्रण बनाए रखा गया।
  • तालुकादारों को स्थानीय प्रशासन में प्रमुख भूमिका दी गई।
  • अंग्रेजों ने उन्हें राजनीतिक रूप से आश्रित वर्ग बना दिया।
  • इस नीति से ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रिटिश प्रभुत्व सुदृढ़ हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion) –

 क्रांति के बाद की नीति ने तालुकादारों को ब्रिटिश शासन का सहयोगी बना दिया। इससे अंग्रेजों ने अवध में स्थिरता तो पाई, पर किसानों का शोषण बढ़ता गया।

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Analyse the problems related to Non-Governmental Organisations (NGOs) in Uttar Pradesh. (8 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

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उत्तर प्रदेश में गैर-सरकारी संगठनों से संबंधित समस्याओं का विश्लेषण कीजिए।

Ans: परिचय (Introduction)

 ग़ैर-सरकारी संगठन (NGOs) उत्तर प्रदेश में सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परंतु इनके संचालन में कई व्यावहारिक और नीतिगत चुनौतियाँ सामने आती हैं, जो इनके प्रभाव को सीमित करती हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points) –

  • पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से जनता का विश्वास कमजोर होता है।
  • कई एनजीओ केवल धन प्राप्ति के उद्देश्य से संचालित होते हैं।
  • सरकारी पंजीकरण और विनियमन प्रक्रिया जटिल और धीमी है।
  • वित्तीय संसाधनों की कमी और अनियमित फंडिंग से कार्य रुक जाते हैं।
  • राजनीतिक और नौकरशाही हस्तक्षेप इनकी स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी कार्यकुशलता घटाती है।
  • समान कार्य करने वाले संगठनों में समन्वय की कमी से दोहराव और अपव्यय होता है।

निष्कर्ष (Conclusion) – यदि पारदर्शिता, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग में सुधार किया जाए, तो एनजीओ राज्य के विकास में सशक्त भागीदार बन सकते हैं। प्रभावी निगरानी और समन्वय से इनकी कार्यक्षमता और सामाजिक योगदान बढ़ाया जा सकता है।

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