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Explain the security challenges in the border areas of Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों की व्याख्या कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश की सीमाएँ बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और नेपाल से मिलती हैं। इन सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति और सामाजिक विविधता राज्य की सुरक्षा के लिए विशेष चुनौती प्रस्तुत करती है। सीमा प्रबंधन की कमजोरियाँ अक्सर अवैध गतिविधियों और अपराधों को बढ़ावा देती हैं।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) अंतर्राष्ट्रीय सीमा सुरक्षा: नेपाल से लगी खुली सीमा तस्करी, घुसपैठ और जालसाजी जैसी गतिविधियों के लिए संवेदनशील है।

(2) अवैध तस्करी: सीमावर्ती जिलों में मादक पदार्थ, हथियार, पशु व मानव तस्करी की घटनाएँ चिंता का विषय हैं।

(3) आतंकवाद और उग्रवाद: सीमाई क्षेत्रों का उपयोग असामाजिक तत्वों द्वारा आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

(4) सीमाई अपराध: अपहरण, तस्करी और अवैध व्यापार राज्य की कानून-व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।

(5) सामाजिक-आर्थिक असंतुलन: सीमावर्ती क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी सुरक्षा को कमजोर करती है।

(6) प्रशासनिक समन्वय की कमी: विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी से सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता घटती है।

(7) समाधान प्रयास: सीमा चौकियों का सुदृढ़ीकरण, तकनीकी निगरानी और सामुदायिक सहयोग से स्थिति सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई है।

समेकित नीति, आधुनिक तकनीक और स्थानीय भागीदारी से इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।

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Highlight the greater possibilities of tourism in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश में पर्यटन की वृहत्तर संभावनाओं पर प्रकाश डालिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश भारत का सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध राज्य है। यहाँ के विविध पर्यटन स्थलों में आध्यात्मिकता, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और वैश्विक पहचान को सशक्त बनाने की क्षमता रखता है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) धार्मिक पर्यटन: काशी, अयोध्या, मथुरा, वृंदावन और प्रयागराज जैसे तीर्थस्थल करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।

(2) ऐतिहासिक पर्यटन: आगरा का ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, झाँसी किला जैसे स्थलों से समृद्ध ऐतिहासिक विरासत झलकती है।

(3) सांस्कृतिक पर्यटन: वाराणसी के घाट, लोकनृत्य, संगीत और कुंभ जैसे आयोजन विश्व प्रसिद्ध हैं।

(4) पारिस्थितिक पर्यटन: दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और चंद्रप्रभा अभयारण्य प्राकृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित करते हैं।

(5) आध्यात्मिक सर्किट विकास: रामायण सर्किट, बुद्ध सर्किट जैसी परियोजनाएँ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं।

(6) आर्थिक योगदान: पर्यटन से राज्य के राजस्व और रोजगार सृजन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

(7) चुनौतियाँ: आधारभूत संरचना, स्वच्छता और सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

पर्यटन उत्तर प्रदेश की आर्थिक उन्नति और सांस्कृतिक प्रसार का प्रभावी माध्यम है। सुव्यवस्थित प्रबंधन और प्रचार के माध्यम से राज्य विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बन सकता है।

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Describe the major stages in the formulation of Gram Panchayat Development Plan (GPDP) in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत विकास योजना (जी.पी.डी.पी.) के निर्माण के प्रमुख चरणों का वर्णन कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan – GPDP) ग्रामीण विकास का एक सहभागी एवं विकेन्द्रीकृत मॉडल है। यह योजना संविधान के 73वें संशोधन और पंचायती राज व्यवस्था की भावना पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्राम स्तर पर लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों की योजना बनाना है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

(1) स्थिति विश्लेषण (Situation Analysis): ग्राम की सामाजिक, आर्थिक और भौतिक स्थिति का सर्वेक्षण किया जाता है।

(2) ग्राम सभा का आयोजन: ग्रामवासियों की भागीदारी से प्राथमिक आवश्यकताओं और समस्याओं की पहचान की जाती है।

(3) संसाधनों का आकलन: स्थानीय, राज्य और केंद्र स्तर पर उपलब्ध वित्तीय व भौतिक संसाधनों का निर्धारण किया जाता है।

(4) प्राथमिकता निर्धारण: ग्रामसभा द्वारा समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर क्रमबद्ध किया जाता है।

(5) योजना निर्माण: प्रत्येक क्षेत्र (शिक्षा, स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता, कृषि आदि) के लिए ठोस योजनाएँ बनाई जाती हैं।

(6) अनुमोदन और समन्वय: ग्राम पंचायत द्वारा तैयार योजना को ब्लॉक व जिला स्तर पर अनुमोदित किया जाता है।

(7) कार्यान्वयन एवं मूल्यांकन: स्वीकृत योजना के अनुसार कार्य संपन्न किए जाते हैं और समय-समय पर निगरानी की जाती है।

निष्कर्ष (Conclusion ):

जी.पी.डी.पी. ग्रामीण विकास को स्थानीय जरूरतों से जोड़कर सहभागी शासन को सशक्त बनाती है। यह योजना “गाँव की योजना, गाँव के लोग” की अवधारणा को साकार करती है।

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Discuss the nature of regional parties in Uttar Pradesh. Throw light on their importance in the politics of state. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय दलों की प्रकृति की विवेचना कीजिए । राज्य की राजनीति में उनके महत्व पर प्रकाश डालिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्षेत्रीय दलों (Regional Parties) की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है। इन दलों ने राज्य की सामाजिक, आर्थिक और जातीय विविधताओं को राजनीतिक स्वर प्रदान किया है। इनकी उपस्थिति ने राज्य में सत्ता संतुलन और लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को गहराई दी है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • क्षेत्रीय दल राज्य-विशिष्ट मुद्दों, जैसे—जाति, क्षेत्रीय असमानता और सामाजिक न्याय पर केंद्रित रहते हैं।
  • समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, अपना दल आदि प्रमुख क्षेत्रीय दल हैं।
  • इन दलों ने राष्ट्रीय दलों के एकाधिकार को चुनौती दी है।
  • सामाजिक न्याय, दलित सशक्तिकरण और पिछड़ों की भागीदारी को इन्होंने प्रमुखता दी।
  • गठबंधन राजनीति की परंपरा को बल प्रदान किया, जिससे बहुदलीय लोकतंत्र मजबूत हुआ।
  • इन दलों ने स्थानीय मुद्दों को राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का कार्य किया।
  • हालांकि, इनकी नीतियाँ कभी-कभी जातीय या वोट बैंक आधारित राजनीति तक सीमित रह जाती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

क्षेत्रीय दल उत्तर प्रदेश की राजनीति में लोकतांत्रिक विविधता और सामाजिक प्रतिनिधित्व के प्रतीक हैं। फिर भी, इनके दीर्घकालिक प्रभाव के लिए विकासोन्मुख और समावेशी राजनीति आवश्यक है।

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Critically examine the process of appointment of the Advocate General and his functions in Uttar Pradesh. [Marks-8] UPPCS Mains 2023 GS-5

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उत्तर प्रदेश में महाधिवक्ता के नियुक्ति की प्रक्रिया तथा उसके कार्यों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश में महाधिवक्ता (Advocate General) राज्य सरकार का सर्वोच्च विधिक अधिकारी होता है, जो राज्य की विधिक नीतियों और निर्णयों में परामर्श प्रदान करता है। इस पद की व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के अंतर्गत की गई है। यह पद राज्य शासन की विधिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने में सहायक है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है।
  • नियुक्त व्यक्ति उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता है।
  • वह राज्य सरकार को विधिक मामलों में परामर्श देता और न्यायालय में उसका प्रतिनिधित्व करता है।
  • कार्यकाल संविधान में निर्धारित नहीं है; वह राज्यपाल की इच्छा पर पदस्थ रहता है।
  • उसे वेतन व सुविधाएँ राज्य सरकार तय करती है।
  • वह विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकता है परंतु मतदान नहीं कर सकता।
  • आलोचनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो उसकी स्वतंत्रता सीमित है, क्योंकि उसका पद कार्यपालिका पर निर्भर है।

निष्कर्ष (Conclusion):

महाधिवक्ता राज्य की विधिक व्यवस्था का आधारस्तंभ है, जो शासन को संवैधानिक मर्यादाओं में रखता है।

फिर भी, उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए संवैधानिक सुरक्षा को और सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है।

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Write a note on ‘Failure and future of public schooling education’ in Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

उत्तर प्रदेश में ‘सार्वजनिक स्कूली शिक्षा की विफलता एवं भविष्य’ पर टिप्पणी लिखिए ।

Ans:   परिचय (Introduction):

सार्वजनिक स्कूली शिक्षा (Public School Education) किसी भी राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास की नींव होती है। उत्तर प्रदेश में यह प्रणाली व्यापक नेटवर्क के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई है। गुणवत्ताहीन शिक्षण, संसाधनों की कमी और जवाबदेही के अभाव ने इसकी प्रभावशीलता को कमजोर किया है।

मुख्य बिंदु:

• राज्य में 1.5 लाख से अधिक सरकारी विद्यालय हैं, परंतु छात्र उपस्थिति में लगातार गिरावट देखी गई है।

• शिक्षकों की अनुपस्थिति और गैर-शैक्षिक कार्यों में व्यस्तता शिक्षण गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

• आधारभूत सुविधाओं — बिजली, पानी, शौचालय, फर्नीचर — की कमी प्रमुख समस्या है।

• सीखने के स्तर (Learning Outcomes) में गिरावट ASER Report द्वारा बार-बार उजागर की गई है।

• अभिभावकों का झुकाव निजी विद्यालयों की ओर बढ़ा है।

• सरकारी विद्यालयों में English-medium और Digital Learning की कमी प्रतिस्पर्धा घटाती है।

• बजट आवंटन तो पर्याप्त है, पर उसका प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता।

• छात्र-शिक्षक अनुपात कई क्षेत्रों में निर्धारित मानक से अधिक है।

• Mission Prerna और Operation Kayakalp जैसी योजनाएँ सुधार की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं।

• शिक्षकों का प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रणाली अभी भी पारंपरिक है।

• ग्रामीण क्षेत्रों में छात्राओं की निरंतरता (Retention) एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

• शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी और तकनीकी हस्तक्षेप से सुधार की संभावनाएँ बढ़ रही हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली चुनौतियों से जूझ रही है, पर सुधार की दिशा में प्रयास जारी हैं। यदि गुणवत्ता, जवाबदेही और तकनीकी नवाचार पर ध्यान दिया जाए, तो इसका भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

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Examine the challenges of food security in Uttar Pradesh. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

खाद्य सुरक्षा (Food Security) का अर्थ है — प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त, पौष्टिक और सुरक्षित भोजन सुलभ कराना। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और जनसंख्या-बहुल राज्य में यह एक बड़ी नीतिगत चुनौती बनी हुई है। कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद यहाँ खाद्य वितरण, पोषण और भंडारण से जुड़ी कई समस्याएँ विद्यमान हैं।

मुख्य बिंदु:

• राज्य की बड़ी जनसंख्या (25 करोड़+) पर पर्याप्त खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है।

• ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी के कारण पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सीमित रहती है।

• सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में अनियमितता और भ्रष्टाचार प्रमुख समस्या है।

• खाद्यान्न भंडारण क्षमता की कमी से बड़ी मात्रा में अनाज नष्ट हो जाता है।

• कुपोषण (Malnutrition) की दर विशेषकर महिलाओं और बच्चों में अभी भी अधिक है।

• जलवायु परिवर्तन और सूखे की घटनाएँ कृषि उत्पादन को प्रभावित करती हैं।

• लघु और सीमांत किसानों की आय कम होने से उत्पादन क्षमता घटती है।

• सिंचाई सुविधाओं और कृषि तकनीक में असमानता से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होता है।

• खाद्यान्न के वितरण में डिजिटल कार्ड और बायोमेट्रिक प्रणाली का कार्यान्वयन अभी पूर्ण नहीं हुआ है।

• शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि और पलायन से खाद्य मांग असंतुलित होती है।

• पोषण योजनाएँ (जैसे आंगनवाड़ी, मिड-डे मील) कई बार गुणवत्ताहीन भोजन से ग्रसित हैं।

• कोविड-19 काल में खाद्य आपूर्ति शृंखला की कमजोरियाँ स्पष्ट रूप से सामने आईं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि सुधार, पारदर्शी वितरण प्रणाली और पोषण कार्यक्रमों की दक्षता आवश्यक है। यदि यह नीतिगत रूप से सुदृढ़ किया जाए, तो राज्य में “भोजन सबके लिए” का लक्ष्य साकार हो सकता है।

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Organised crime and terrorism are grave challenges to national security. What arrangements have been made in Uttar Pradesh to counter this? Explain. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

संगठित अपराध एवं आतंकवाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियाँ हैं । इनका प्रतिकार करने के लिए उत्तर प्रदेश में क्या प्रबंधन किया गया है ? स्पष्ट कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

संगठित अपराध (Organized Crime) और आतंकवाद (Terrorism) आज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे बन चुके हैं। उत्तर प्रदेश, अपनी भौगोलिक स्थिति और घनी आबादी के कारण, इन अपराधों से विशेष रूप से प्रभावित रहा है। राज्य सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए बहुआयामी सुरक्षा एवं कानूनी प्रबंधन विकसित किया है।

मुख्य बिंदु:

• राज्य में उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी सोशल एक्टिविटीज़ (UP Gangsters Act) के तहत अपराधियों पर कठोर कार्रवाई की जाती है।

• राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) का प्रयोग देश विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण हेतु किया जाता है।

• आतंकवाद-निरोधी बल (Anti-Terror Squad – ATS) को विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक से सशक्त किया गया है।

• साइबर अपराधों से निपटने हेतु Cyber Crime Police Stations सभी जोनों में स्थापित किए गए हैं।

• खुफिया विभाग (Intelligence Department) को आधुनिक सर्विलांस उपकरणों से लैस किया गया है।

• डायल 112 और आई-खोज पोर्टल जैसी पहलें त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करती हैं।

• सीमा और संवेदनशील जिलों में पुलिस चौकियाँ और चेकपोस्ट बढ़ाई गई हैं।

• अपराधियों की संपत्ति जब्ती और अवैध गिरोहों पर आर्थिक प्रहार की नीति अपनाई गई है।

• अंतरराज्यीय अपराध नियंत्रण के लिए पड़ोसी राज्यों से समन्वय बढ़ाया गया है।

• सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को सतर्कता अभियान में जोड़ा गया है।

• पुलिस बल में आधुनिक हथियार, ड्रोन और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम का प्रयोग बढ़ाया गया है।

• न्यायिक तंत्र में विशेष न्यायालयों की स्थापना से मामलों के शीघ्र निपटान पर बल दिया जा रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश सरकार ने संगठित अपराध और आतंकवाद से निपटने के लिए सशक्त कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक ढाँचा विकसित किया है। इन उपायों से राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और जनविश्वास दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

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Discuss the role of Uttar Pradesh Public Service Commission and explain the challenges before it for independent and impartial selection of public servants. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भूमिका और लोक सेवकों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चयन के लिए उसके समक्ष चुनौतियों पर चर्चा कीजिए ।

Ans:  परिचय (Introduction):

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC – Uttar Pradesh Public Service Commission) राज्य सरकार की एक संवैधानिक संस्था है। इसका मुख्य कार्य राज्य सेवाओं के लिए योग्य, निष्पक्ष और सक्षम अभ्यर्थियों का चयन करना है। आयोग राज्य प्रशासन की दक्षता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य बिंदु:

• UPPSC की स्थापना 1 अप्रैल 1937 को की गई थी।

• इसका उद्देश्य योग्यता आधारित (Merit-based) चयन प्रक्रिया के माध्यम से लोक सेवकों की भर्ती करना है।

• आयोग राज्य सिविल सेवा, पुलिस, शिक्षा, और अन्य विभागों की परीक्षाएँ आयोजित करता है।

• यह परीक्षाओं की योजना, प्रश्नपत्र निर्माण, मूल्यांकन और साक्षात्कार प्रक्रिया का संचालन करता है।

• पारदर्शिता और निष्पक्षता आयोग की कार्यप्रणाली के प्रमुख सिद्धांत हैं।

• आयोग के सुझावों के आधार पर सरकार भर्ती नीतियों में सुधार करती है।

• चुनौतियों में परीक्षा परिणामों में देरी और पारदर्शिता पर उठते सवाल शामिल हैं।

• पेपर लीक जैसी घटनाएँ आयोग की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।

• राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप इसकी स्वतंत्रता के लिए चुनौती हैं।

• आधुनिक तकनीक और ई-गवर्नेंस के अभाव में प्रक्रियाएँ कभी-कभी धीमी रहती हैं।

• अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या के कारण निष्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ा है।

• डिजिटल परीक्षा प्रणाली और पारदर्शी मूल्यांकन से आयोग की विश्वसनीयता पुनर्स्थापित हो रही है।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग राज्य प्रशासन की रीढ़ है, जो योग्य अधिकारियों के चयन में अहम भूमिका निभाता है। यदि इसे पूर्ण स्वतंत्रता और तकनीकी सुदृढ़ता दी जाए, तो यह और अधिक निष्पक्ष व प्रभावी बन सकता है।

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“Panchayati Raj System has long success stories in Uttar Pradesh.” Corroborate with suitable examples. (12 marks) UPPCS Mains 2024 GS-5

“उत्तर प्रदेश में पंचायती राज प्रणाली की सफलता की लंबी कहानियाँ हैं ।” उपयुक्त उदाहरणों से इसकी पुष्टि कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

पंचायती राज प्रणाली (Panchayati Raj System) भारत के ग्रामीण लोकतंत्र की आधारशिला है। उत्तर प्रदेश में यह प्रणाली स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम बनी है। इससे ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और जनसहभागिता को नई दिशा मिली है।

मुख्य बिंदु:

• 73वें संविधान संशोधन (1992) के बाद उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू की गई।

• ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तीनों स्तरों पर जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं।

• राज्य में लगभग 58,000 ग्राम पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ हैं।

• पंचायतों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क निर्माण जैसी जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।

• स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

• कई पंचायतों ने डिजिटल शासन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं — जैसे “ई-गवर्नेंस ग्राम” मॉडल।

• महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण ने स्थानीय नेतृत्व में बड़ा परिवर्तन लाया।

• शाहजहाँपुर, बहराइच और बाराबंकी जिलों की पंचायतों ने सामुदायिक स्वास्थ्य व जल संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य किए हैं।

• ग्राम निधि और जनसहयोग से पंचायतें आत्मनिर्भर बन रही हैं।

• पंचायत चुनावों ने ग्रामीण नागरिकों में राजनीतिक चेतना को प्रबल किया।

• सामाजिक न्याय और हाशिए के वर्गों की भागीदारी में वृद्धि हुई है।

• पंचायतें स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान करने में सफल रही हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):

उत्तर प्रदेश की पंचायती राज प्रणाली ने लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुँचाया है। यह जनसहभागिता, स्वावलंबन और ग्रामीण विकास का जीवंत उदाहरण बन चुकी है।

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