भारतीय ज्ञान परम्परा आधारित वैमानिकी शास्त्र की तुलना आधुनिक वैमानिकी शास्त्र से कीजिये । इस क्षेत्र में अनुसंधान हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की नीतियों का उल्लेख कीजिये ।
Ans: भूमिका (Introduction) –
भारतीय ज्ञान परम्परा में वैमानिकी शास्त्र (Aeronautics) का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों जैसे विमानिका शास्त्र और संहिताओं में मिलता है, जिनमें उड़ने वाले यंत्रों, उनकी संरचना और संचालन सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। आधुनिक वैमानिकी शास्त्र (Modern Aeronautics) वैज्ञानिक परीक्षणों, भौतिकी के सिद्धांतों और प्रौद्योगिकी के प्रयोग पर आधारित है। दोनों की तुलना परंपरा और विज्ञान के विकासक्रम को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु (Main Points):
- प्राचीन वैमानिकी शास्त्र में वायुयान के प्रकार, ईंधन, दिशा नियंत्रण एवं गति का वर्णन मिलता है।
- यह ज्यामिति, यांत्रिकी और धातु विज्ञान के प्रारंभिक स्वरूपों से जुड़ा था।
- आधुनिक वैमानिकी वायुगतिकी (Aerodynamics), प्रणोदन (Propulsion), सामग्री विज्ञान (Material Science) और इलेक्ट्रॉनिक्स पर आधारित है।
- भारतीय परम्परा में यह अवधारणा वैचारिक और सैद्धांतिक थी; आधुनिक विज्ञान ने इसे प्रयोगात्मक रूप दिया।
- आज वैमानिकी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और नैनो प्रौद्योगकी का प्रयोग बढ़ रहा है।
- प्राचीन ग्रंथों का पुनःअध्ययन भारतीय वैज्ञानिक सोच की ऐतिहासिक गहराई को उजागर करता है।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) इस क्षेत्र में Indigenous Knowledge Systems (IKS) पर अनुसंधान को प्रोत्साहित कर रहा है।
- DST ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र” (IKS Division) की स्थापना कर पारंपरिक विज्ञान के वैज्ञानिक विश्लेषण को बढ़ावा दिया है।
- एयरोस्पेस अनुसंधान हेतु DST-AR&DB (Aeronautics Research and Development Board) विभिन्न संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- यह नीतियाँ प्राचीन सिद्धांतों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
- ISRO और DRDO भी वैमानिकी के क्षेत्र में स्वदेशी नवाचारों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
- नीति का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर वैमानिकी प्रौद्योगिकी (Aatmanirbhar Aeronautics) के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।
निष्कर्ष (Conclusion) –
अतः कहा जा सकता है कि भारतीय वैमानिकी परम्परा ने वैचारिक आधार प्रदान किया, जबकि आधुनिक वैमानिकी ने उसे वैज्ञानिक रूप दिया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की नीतियाँ इन दोनों के समन्वय से भारत को प्राचीन ज्ञान और आधुनिक अनुसंधान के संगम पर अग्रसर कर रही हैं।
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