हाल के वर्षों में, भारत में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की रणनीति का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिये ।

Ans: भूमिका (Introduction) –

भारत में गरीबी उन्मूलन (Poverty Alleviation) स्वतंत्रता के बाद से सरकार की प्रमुख प्राथमिकता रही है। हाल के वर्षों में गरीबी घटाने की रणनीति में केवल आय वृद्धि नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और समावेशी विकास पर भी ध्यान दिया गया है। फिर भी, चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

मुख्य बिंदु (Main Points):

  • प्रारंभिक कार्यक्रम जैसे – गरीबी हटाओ योजना, IRDP, NREP आदि प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने पर केंद्रित थे।
  • हाल के वर्षों में दृष्टिकोण “कल्याण आधारित” से “सशक्तिकरण आधारित” (Empowerment-based) रणनीति की ओर बदला है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना, जन-धन योजना और उज्ज्वला योजना ने जीवन स्तर सुधारने में मदद की।
  • मनरेगा (MGNREGA) ने ग्रामीण रोजगार व आय सुरक्षा को मजबूत किया।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित किया।
  • Direct Benefit Transfer (DBT) प्रणाली ने भ्रष्टाचार और रिसाव को कम किया।
  • डिजिटल इंडिया और आधार ने पारदर्शिता व वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया।
  • हालांकि, कई योजनाओं में लक्षित लाभार्थियों की पहचान, निगरानी और स्थायित्व की समस्या बनी रही।
  • असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों व शहरी गरीबों तक योजनाओं की पहुँच सीमित है।
  • बहु-आयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) — शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण— पर अभी और ध्यान की आवश्यकता है।
  • नीतियों में क्षेत्रीय असमानता व सामाजिक विषमता को कम करने के लिए स्थानीय समाधान जरूरी हैं।
  • सरकार अब “गरीबी से समृद्धि” की दिशा में टिकाऊ आजीविका और कौशल विकास पर बल दे रही है।

निष्कर्ष (Conclusion) –

अतः हाल की रणनीतियाँ गरीबी घटाने में प्रभावी रही हैं, परंतु स्थायी परिणामों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और सामाजिक सुरक्षा पर निरंतर निवेश आवश्यक है। गरीबी उन्मूलन तभी सफल होगा जब विकास वास्तव में समावेशी और न्यायसंगत बने।

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