उत्तर प्रदेश में महाधिवक्ता के नियुक्ति की प्रक्रिया तथा उसके कार्यों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए ।

Ans: प्रस्तावना (Introduction):

उत्तर प्रदेश में महाधिवक्ता (Advocate General) राज्य सरकार का सर्वोच्च विधिक अधिकारी होता है, जो राज्य की विधिक नीतियों और निर्णयों में परामर्श प्रदान करता है। इस पद की व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के अंतर्गत की गई है। यह पद राज्य शासन की विधिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने में सहायक है।

मुख्य बिंदु (Important Points):

  • महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है।
  • नियुक्त व्यक्ति उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता है।
  • वह राज्य सरकार को विधिक मामलों में परामर्श देता और न्यायालय में उसका प्रतिनिधित्व करता है।
  • कार्यकाल संविधान में निर्धारित नहीं है; वह राज्यपाल की इच्छा पर पदस्थ रहता है।
  • उसे वेतन व सुविधाएँ राज्य सरकार तय करती है।
  • वह विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकता है परंतु मतदान नहीं कर सकता।
  • आलोचनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो उसकी स्वतंत्रता सीमित है, क्योंकि उसका पद कार्यपालिका पर निर्भर है।

निष्कर्ष (Conclusion):

महाधिवक्ता राज्य की विधिक व्यवस्था का आधारस्तंभ है, जो शासन को संवैधानिक मर्यादाओं में रखता है।

फिर भी, उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए संवैधानिक सुरक्षा को और सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है।

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