प्राचीन भारत में ‘प्रयागराज’ के सांस्कृतिक महत्त्व का वर्णन कीजिए।
Ans: परिचय (Introduction) –
प्रयागराज, जिसे प्राचीन काल में ‘प्रयाग’ कहा जाता था, भारतीय सभ्यता का एक अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र नगर है। यह गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित है। वैदिक काल से ही यह धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
मुख्य बिंदु (Important Points) –
- प्रयाग को तीर्थराज कहा गया है, अर्थात सभी तीर्थों का राजा।
- यहाँ गंगा–यमुना–सरस्वती संगम होने से इसका धार्मिक महत्व अत्यधिक है
- ऋग्वेद और पुराणों में प्रयाग का उल्लेख मिलता है।
- प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित कुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है।
- अशोक स्तंभ तथा अकबर का किला यहाँ की ऐतिहासिक धरोहरें हैं।
- गुप्तकाल में यह ज्ञान और विद्या का प्रमुख केंद्र था।
- अनेक संतों, कवियों और राजाओं ने यहाँ आध्यात्मिक साधना की।
निष्कर्ष (Conclusion) – प्रयागराज न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति की एक जीवंत धरोहर भी है। इसका महत्व आज भी उतना ही गहरा है जितना प्राचीन काल में था।
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