उत्तर प्रदेश के वन्यजीव अभयारण्यों का वर्णन कीजिये । इनमें से कौन-सा अभयारण्य लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिये महत्त्वपूर्ण हैं?
Ans: परिचय (Introduction):
उत्तर प्रदेश का लगभग 6.88% भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। राज्य में अनेक वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य जैव विविधता तथा लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण करना है।
मुख्य बिंदु (Important Points):
- कतर्नियाघाट अभयारण्य (बहराइच): घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और दलदली मगरमच्छ के संरक्षण हेतु प्रसिद्ध।
- सोहागीबरवा अभयारण्य (महराजगंज): हाथी, बाघ और अनेक पक्षियों का प्राकृतिक आवास।
- चंद्रप्रभा अभयारण्य (चंदौली): तेंदुआ, सांभर और नीलगाय के लिए जाना जाता है।
- किशनपुर अभयारण्य (लखीमपुर-खीरी): दुधवा टाइगर रिज़र्व का हिस्सा, बाघ और बारहसिंगा के लिए महत्त्वपूर्ण।
- कैमूर अभयारण्य (मिर्जापुर-सोनभद्र): चीतल, तेंदुआ और विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं।
- समसपुर पक्षी अभयारण्य (रायबरेली): प्रवासी पक्षियों जैसे साइबेरियन हंस के लिए प्रसिद्ध।
- सुरहा ताल (बलिया): जलीय पक्षियों और मछलियों की विविधता का केंद्र।
- पिलीभीत अभयारण्य: अब पिलीभीत टाइगर रिज़र्व, बाघ संरक्षण के लिए प्रसिद्ध।
- दुधवा राष्ट्रीय उद्यान: बारहसिंगा, बाघ और हाथी जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण का प्रमुख केंद्र।
- महत्त्वपूर्ण अभयारण्य: दुधवा, किशनपुर, कतर्नियाघाट और पिलीभीत अभयारण्य लुप्तप्राय प्रजातियों जैसे बाघ, बारहसिंगा, घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन के संरक्षण में विशेष भूमिका निभाते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion): उत्तर प्रदेश के वन्यजीव अभयारण्य जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में राज्य की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
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