भारत की खनिज विकास नीति की व्याख्या कीजिए ।
Ans: प्रस्तावना (Introduction) –
खनिज संसाधन किसी भी देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास की आधारशिला होते हैं। भारत में खनिज क्षेत्र को संतुलित और सतत विकास की दिशा देने के लिए राष्ट्रीय खनिज नीति (National Mineral Policy) लागू की गई है। इस नीति का उद्देश्य खनिजों के कुशल दोहन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक हितों का समन्वय स्थापित करना है।
मुख्य बिंदु (Main Points):
- नीति का उद्देश्य: खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक, पारदर्शी और सतत उपयोग सुनिश्चित करना।
- पहली नीति: भारत की पहली राष्ट्रीय खनिज नीति वर्ष 1993 में लागू की गई।
- संशोधन: बदलते वैश्विक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए 2008 और 2019 में इसमें संशोधन किए गए।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी: खनन में निजी निवेश और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को प्रोत्साहित किया गया।
- सतत विकास: खनन के दौरान पर्यावरणीय संतुलन और पुनर्वास पर बल दिया गया।
- पारदर्शिता: खनन पट्टों के आवंटन में ई-नीलामी जैसी पारदर्शी प्रक्रियाएँ लागू की गईं।
- प्रौद्योगिकी नवाचार: खनन में आधुनिक तकनीक और स्वचालन (automation) के उपयोग को बढ़ावा दिया गया।
- राजस्व साझा करना: स्थानीय समुदायों को खनिज लाभ का हिस्सा देने हेतु DMF (District Mineral Foundation) की स्थापना की गई।
- पर्यावरणीय संरक्षण: खनन क्षेत्रों में वृक्षारोपण और भूमि पुनर्वास को अनिवार्य किया गया।
- सामाजिक दायित्व: खनन कंपनियों को स्थानीय लोगों के पुनर्वास, शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान हेतु बाध्य किया गया।
- खनिज सुरक्षा: दुर्लभ और सामरिक खनिजों की सुरक्षा व संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया।
- ‘आत्मनिर्भर भारत’ लक्ष्य: नीति का उद्देश्य भारत को खनिज उत्पादन और प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बनाना है।
निष्कर्ष (Conclusion) –
भारत की खनिज विकास नीति आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय दायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है। यह नीति न केवल संसाधनों के कुशल दोहन को प्रोत्साहित करती है, बल्कि स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी बनती है।
Attempt this question in your own words and language,
Use mobile to scan image and upload in comments section below.