भारत में आन्तरिक मानव प्रवास के कारणों एवं परिणामों की व्याख्या कीजिए ।
Ans: प्रस्तावना (Introduction) –
आंतरिक मानव प्रवास (Internal Migration) का अर्थ है — लोगों का एक ही देश के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण। भारत में यह प्रवास सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक और पर्यावरणीय कारणों से प्रेरित है। यह प्रक्रिया विकास की आवश्यकता को दर्शाती है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम भी गहरे हैं।
मुख्य बिंदु (Main Points):
- रोज़गार के अवसर: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कमी लोगों को शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों की ओर आकर्षित करती है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पाने की इच्छा प्रवास का प्रमुख कारण है।
- कृषि संकट: कृषि में घटती आय, सूखा और भूमि की कमी ग्रामीणों को अन्यत्र जाने को विवश करती है।
- औद्योगिकीकरण और नगरीकरण: उद्योगों और महानगरों का विकास रोजगार की नई संभावनाएँ पैदा करता है।
- परिवारिक और सामाजिक कारण: विवाह, परिवार पुनर्मिलन या रिश्तेदारों के साथ रहने की चाह भी प्रवास को बढ़ाती है।
- प्राकृतिक आपदाएँ: बाढ़, सूखा, भूकंप आदि लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर करते हैं।
- राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा: असुरक्षा या जातीय हिंसा भी प्रवास का एक कारक बनती है।
- आर्थिक परिणाम: प्रवासी मजदूर देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देते हैं, परंतु असंगठित श्रम का शोषण भी बढ़ता है।
- सामाजिक परिणाम: ग्रामीण परिवारों में बुजुर्गों और महिलाओं पर कार्यभार बढ़ता है।
- सांस्कृतिक प्रभाव: प्रवास से विभिन्न संस्कृतियों का मेल होता है, जिससे सांस्कृतिक विविधता बढ़ती है।
- शहरी समस्याएँ: आवास संकट, भीड़भाड़, बेरोजगारी और झुग्गी-बस्तियों की समस्या बढ़ती है।
- ग्रामीण विकास पर प्रभाव: प्रवास के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी होती है, जिससे कृषि प्रभावित होती है।
निष्कर्ष (Conclusion) –
भारत में आंतरिक प्रवास विकास का एक स्वाभाविक परिणाम है, जो अवसर और चुनौती दोनों प्रदान करता है। यदि सरकार इसे योजनाबद्ध ढंग से प्रबंधित करे, तो यह राष्ट्रीय एकता और आर्थिक संतुलन का माध्यम बन सकता है।
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