प्राचीन उत्तर प्रदेश में नगरों के उदय के कारणों की चर्चा कीजिए ।

Ans: परिचय (Introduction):

प्राचीन उत्तर प्रदेश भारत की सभ्यता का प्रमुख केंद्र रहा है जहाँ नगरों (Cities) का विकास सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक कारणों से हुआ। गंगा–घाटी की उपजाऊ भूमि, व्यापारिक मार्गों और राजनीतिक स्थिरता ने नगरों के उत्थान में भूमिका निभाई। इन नगरों ने भारतीय संस्कृति, शासन और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।

मुख्य कारण:

• गंगा और यमुना जैसी नदियों के किनारे उपजाऊ भूमि ने कृषि उत्पादन को बढ़ाया।

• अधिशेष कृषि उत्पादन ने व्यापार और शिल्प के विकास को प्रेरित किया।

• व्यापारिक मार्गों और नदियों ने आंतरिक व बाहरी व्यापार को बढ़ावा दिया।

• लोहे के उपकरणों के प्रयोग से कृषि और निर्माण कार्य अधिक प्रभावी हुए।

• राजनीतिक स्थिरता और शक्तिशाली जनपदों का उदय हुआ, जैसे कोशल, काशी, मगध।

• धार्मिक केंद्रों (जैसे श्रावस्ती, सारनाथ) के कारण लोगों का आवागमन बढ़ा।

• शिल्पकारों और व्यापारियों के समूह (गिल्ड) नगरों में बसने लगे।

• मुद्रा प्रचलन ने व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाया।

• शिक्षा केंद्रों (जैसे तक्षशिला, वाराणसी) ने सांस्कृतिक प्रतिष्ठा बढ़ाई।

• सुरक्षा हेतु नगरों के चारों ओर दीवारें और द्वार बनाए गए।

• स्थानीय शासन प्रणाली (नगरपालिका रूप) ने प्रशासनिक सुविधा प्रदान की।

• सामाजिक विविधता और शहरी जीवन शैली का विकास हुआ।

निष्कर्ष (Conclusion ):

प्राचीन उत्तर प्रदेश में नगरों का उदय आर्थिक, धार्मिक और भौगोलिक कारणों से हुआ। ये नगर आगे चलकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति के प्रमुख केंद्र बने।

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